NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
पीएम के 'मन की बात' में शामिल जैविक ग्राम में खाद की कमी से गेहूं की बुआई न के बराबर
बिहार के जिस जैविक ग्राम को पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम में 29 अगस्त को शामिल किया गया था वहां जैविक खाद तो दूर डीएपी की भी भारी किल्लत है जिसके चलते अब तक यहां 80% क्षेत्रों में गेहूं की बुआई नहीं हो सकी है।
राहुल कुमार गौरव
27 Dec 2021
bihar
डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा शुरू हुई गांव में गोबर और कचरे से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की परियोजना

बिहार के मधुबनी जिला के झंझारपुर अनुमंडल में स्थित सुखैत पंचायत में भी बिहार के अन्य पंचायत की तरह डीएपी की भारी किल्लत है। गांव में डीएपी की कमी की वजह से 80% क्षेत्रों में गेहूं की बुआई नहीं हुई है। सुखैत एक जैविक मॉडल पंचायत है जिसकी तारीफ पीएम मोदी ने 29 अगस्त को 'मन की बात' कार्यक्रम में की थी। इस गांव में डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गोबर और कचरे से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की परियोजना की शुरुआत की गई थी।

गांव के एक वृद्ध किसान लाल राय (69 वर्ष) न्यूज़क्लिक को बताते है कि "गांव के छोटे दुकानदारों के पास डीएपी की भारी किल्लत है। गांव के पैक्स में सिर्फ एक बार 300 बोरी डीएपी आई थी उसके बाद नहीं आई है। क्षेत्र में डीएपी 1500 से 1600 रुपये ब्लैक में मिल रहा है। वह भी उपलब्ध नहीं है। लगभग गांव के 70 से 75% किसान गेहूं की बुआई नहीं कर पाए हैं।"

आपलोग जैविक खाद से खेती क्यों नहीं कर रहे हैं? जबकि आपके गांव का नाम जैविक मॉडल के रूप में लिया जा रहा है।

इस सवाल के जवाब में गांव के ही हरिहर यादव बताते है कि "सुखैत मॉडल के मचछधी गांव में इस साल फरवरी में इस खाद से खेती शुरू ही हुई थी फिर जून 2021 में खाद कम मात्रा में उपलब्ध होने की वजह से धान की खेती के वक्त उपयोग नहीं हो सका। गांव के 10-12 किसान पहली बार गेहूं की बुआई के वक्त पूर्ण रुप से जैविक खाद की मदद से खेती कर रहे हैं। जबकि गांव में 400 से ज्यादा किसान हैं। अगर इस पंचायत की बात करें तो किसानों की संख्या 1200 हो जाएगी। इसकी पहली वजह है कि जैविक खाद भरपूर मात्रा में उपलब्ध नहीं है। साथ ही गांव के किसान का जैविक खाद पर भरोसा भी नहीं है। अगर पैदावार बढ़िया रहा और जैविक खाद अच्छी मात्रा में उपलब्ध रही तो अगली बार हम लोग जरूर जैविक खाद से खेती करेंगे।"

सुपौल जिला के वीरपुर अनुमंडल के बसंतपुर प्रखंड के पिपरानी नाग गांव में ध्वस्त पड़ा जैविक खाद पिट। इस गांव का चयन 2019 में 'जैविक खाद प्रोत्साहन योजना' के तहत किया गया था।

सुखैत गांव की तरह ही सुपौल जिला के वीरपुर अनुमंडल के बसंतपुर प्रखंड के पिपरानी नाग गांव का चयन
जैविक खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार के 'जैविक खाद प्रोत्साहन योजना' के तहत किया गया था। साथ ही गांव में 200 यूनिट पिट बनवाकर वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन शुरू कराया गया। जहां पिछले साल तक 75 घन फीट वाले एक पिट से एक साल में 45 क्विंटल जैविक खाद का उत्पादन होता था। हर तीन महीने पर 15 क्विंटल जैविक खाद तैयार होता था।

जैविक खाद प्रोत्साहन योजना क्यों असफल है?

पिपरानी नाग गांव के मदन सेठ बताते हैं कि, "पहली बात तो जैविक खेती करने में रसायन खेती की तुलना में ज्यादा रुपया लगता है। साथ ही जैविक खेती का बाजार भी नहीं बना हुआ है ताकि लोग विश्वास कर सकें। हमारे गांव में भी अधिकतर किसान सब्जी और थोड़ी बहुत मात्रा में रबी और खरीफ फसल के लिए इस खाद का उपयोग करते हैं। पिछले साल तो कुछ लोग जैविक खाद से खेती भी किए लेकिन अब लगभग सभी जगह जैविक खाद का उत्पादन बंद हो गया है।"

किसान सम्मान पुरस्कार से सम्मानित प्रगतिशील किसान भिखारी मेहता बताते है कि, "गांव में जैविक खाद बनाने के लिए सरकार ने जैविक खाद प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। किसानों को प्रोत्साहित कर पिट के लिए अनुदान भी दिया गया था। इस सबके बावजूद किसान जागरूक नहीं हो सके। अगर सरकार की ओर से खाद आसानी से उपलब्ध होने के साथ ही शुरूआत में किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए और साथ ही इस बात का वादा किसान से किया जाए कि अगर जैविक कृषि से किसानों को जो नुकसान होगा वह सरकार की तरफ से मदद के रूप में मिलेगा तो किसान जरूर जैविक कृषि करेंगे।"

सरकारी महकमों का क्या है कहना

सुपौल जिला कृषि पदाधिकारी समीर कुमार का कहना है कि, "शुरुआत में जब पिपराही नाग को जैविक ग्राम घोषित किया गया था तो किसानों ने दिलचस्पी ली थी। उम्मीद थी कि यह जिले के और गांव तक पहुंचेगा। कई जगह सेमिनार और जागरूकता अभियान भी चलाया गया। उस समय कृषि विभाग के अधिकारी अक्सर पिपराही नाग का दौरा करते दिखते थे। इस बीच सरकार ने 2019 में जैविक खाद प्रोत्साहन योजना बंद कर दी। इसके बाद विभाग के साथ-साथ किसान भी सुस्त पड़ गया।"

वहीं सुखैत परियोजना को शुरू करने वालों में से एक वैज्ञानिक डॉ. शंकर झा का कहना है कि "130 करोड़ की आबादी वाले देश भारत में जैविक खेती किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि ऐसी खेती में उत्पादन घटने की बड़ी संभावना रहती है। इसके बावजूद सुखैत परियोजना के तहत अभी तक 700 क्विंटल खाद बन चुका है और 250 क्विंटल खाद बनने की प्रक्रिया में हैं। उम्मीद है सुखैत मॉडल वाकई एक मॉडल बन कर उभरेगा।"

क्या है सुखेत मॉडल

डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ रमेश चंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि, "बीते फरवरी माह की 14 तारीख को डॉ राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा और कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से मधुबनी जिला स्थित सुखैत गांव में कचरा प्रबंधन से जुड़ी एक योजना की शुरुआत की गई। इसको 'कचरे से कमाई' नाम दिया गया था।

कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक व प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. शंकर झा विस्तार से इस परियोजना के बारे में बताते हैं कि, "इस परियोजना के अंतर्गत गांव के किसानों से 1200 किलो गोबर और खेखाद की किल्लत के बिच सुपौल मार्केट में पुलिस को कुछ रूपया दे कर खाद लेते किसान।तों-घरों से निकलने वाले कचरे के बदले उन्हें रसोई गैस सिलेंडर दिया जाता है। कचरा जमा होने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा उससे वर्मी कम्पोस्ट बनाकर उसकी बिक्री की जा रही है।"

खाद की किल्लत के बिच सुपौल मार्केट में पुलिस को कुछ रूपया दे कर खाद लेते किसान।

मोदी ने मन की बात में क्या कहा था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि "सुखैत मॉडल आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन का मॉडल है। इसके कई लाभ भी हैं। गांव के गंदगी मुक्त रहने से ग्रामीणों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। साथ गृहणियों को फ्री घरेलू गैस सिलेंडर भी मिलेगा। वहीं किसानों को उत्तम खेती हेतु जैविक खाद मिलेगा। इस वजह से देशभर की प्रत्येक पंचायत में इस सुखैत मॉडल को अपनाया जाना चाहिए।"

आंकड़े बताते हैं खाद संकट की कहानी

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 1 अक्टूबर 2021 से 25 दिसंबर 2021 के बीच की अवधि में बिहार में डीएपी की आवश्यकता 310.645 मीट्रिक टन थी। जबकि डीएपी 296.420 मीट्रिक टन ही उपलब्ध हैं। आंकड़े में इस तरह मांग और आपूर्ति में भारी अंतर दिख रहा है। जमीनी हालात उससे भी खराब है। इसकी वजह केंद्र सरकार भी है क्योंकि केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से मिले एक आंकड़े के मुताबिक केंद्र सरकार ने 2018-19 के मुकाबले 2020-21 में डीएपी का 17.38 लाख मिट्रिक टन कम इंपोर्ट किया है।

बिहार में (1 अक्टूबर 2021 से 25 दिसंबर 2021) तक खाद की आवश्यकता और उपलब्धता के आंकड़े मीट्रिक टन मेंः-

(रिपोर्टर स्वतंत्र पत्रकार हैं)

Bihar
Wheat
Wheat Farmers
fertilizers
Fertilizer shortage
Bihar Farmers
Narendra modi
mann ki baat

Related Stories

भारत में गेहूं की बढ़ती क़ीमतों से किसे फ़ायदा?

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

ग्राउंड रिपोर्ट: कम हो रहे पैदावार के बावजूद कैसे बढ़ रही है कतरनी चावल का बिक्री?

यूक्रेन-रूस युद्ध से मध्य पूर्व को गंभीर गेहूं संकट का सामना करना पड़ सकता है


बाकी खबरें

  • omicron
    भाषा
    दिल्ली में कोविड-19 की तीसरी लहर आ गई है : स्वास्थ्य मंत्री
    05 Jan 2022
    ‘‘ दिल्ली में 10 हजार के करीब नए मामले आ सकते हैं और संक्रमण दर 10 प्रतिशत पर पहुंच सकती है.... शहर में तीसरी लहर शुरू हो चुकी है।’’
  • mob lynching
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: बेसराजारा कांड के बहाने मीडिया ने साधा आदिवासी समुदाय के ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर निशाना
    05 Jan 2022
    निस्संदेह यह घटना हर लिहाज से अमानवीय और निंदनीय है, जिसके दोषियों को सज़ा दी जानी चाहिए। लेकिन इस प्रकरण में आदिवासियों के अपने परम्परागत ‘स्वशासन व्यवस्था’ को खलनायक बनाकर घसीटा जाना कहीं से भी…
  • TMC
    राज कुमार
    गोवा चुनावः क्या तृणमूल के लिये धर्मनिरपेक्षता मात्र एक दिखावा है?
    05 Jan 2022
    ममता बनर्जी धार्मिक उन्माद के खिलाफ भाजपा और नरेंद्र मोदी को घेरती रही हैं। लेकिन गोवा में महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के साथ गठबंधन करती हैं। जिससे उनकी धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर सवाल खड़े हो…
  • सोनिया यादव
    यूपी: चुनावी समर में प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री का महिला सुरक्षा का दावा कितना सही?
    05 Jan 2022
    सीएम योगी के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी भी आए दिन अपनी रैलियों में महिला सुरक्षा के कसीदे पढ़ते नज़र आ रहे हैं। हालांकि ज़मीनी हक़ीक़त की बात करें तो आज भी महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर…
  • मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    05 Jan 2022
    “बीएमसी के अधिकारियों ने उन्हें परेशान किया, उनके साथ बुरा व्यवहार किया। वेतन मांगने पर भी वे उस पर चिल्लाते थे।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License