NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
फिल्में
कला
भारत
राजनीति
कल इरफ़ान, आज ऋषि...दो दिन में डूब गए दो सितारे
ऋषि कपूर का मुम्बई के अस्पताल में आज, गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। ऋषि 2018 से ल्यूकेमिया (रक्त का कैंसर) से जंग लड़ रहे थे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Apr 2020
ऋषि कपूर

मुम्बई : कल इरफ़ान ख़ान और आज ऋषि कपूर, फ़िल्म इंडस्ट्री ने दो दिन में अपने दो सितारे खो दिए और हमने दो अच्छे अदाकार, कलाकार।

जाने-माने अभिनेता ऋषि कपूर का मुम्बई के एक अस्पताल में आज, गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। ऋषि 2018 से ल्यूकेमिया (रक्त का कैंसर) से जंग लड़ रहे थे। उनके भाई एवं अभिनेता रणधीर कपूर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ वह नहीं रहे। उनका निधन हो गया है।’’

कपूर खानदान की तीसरी पीढ़ी के मशहूर शख्स ऋषि के परिवार में पत्नी नीतू कपूर, बेटा रणबीर कपूर और बेटी रिद्धिमा कपूर हैं।

तबीयत बिगड़ने के बाद बुधवार को उन्हें एच. एन. रिलायंस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

फ़िल्म ‘डी-डे’ के उनके सह-कलाकार इरफ़ान ख़ान के निधन के एक दिन बाद ही उनके निधन की खबर आई। इरफ़ान का भी कल, बुधवार को मुम्बई के एक अस्पताल में निधन हो गया था, उन्हें भी कैंसर था।

करीब तीन महीने पहले ऋषि की बहन रितू नंदा का भी कैंसर के कारण निधन हो गया था।

परिवार ने ऋषि के निधन के बाद एक बयान जारी करते हुए कहा, ‘‘ दो साल तक ल्यूकेमिया से जंग लड़ने के बाद हमारे प्यारे ऋषि आज सुबह पौने नौ बजे इस दुनिया को अलविदा कह गए। डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मियों का कहना है कि उन्होंने आखिरी सांस तक जंग जारी रखी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ दो महाद्वीपों में दो साल तक इलाज के दौरान वह जीने के लिए दृढ़ और लगातार खुश रहे। उनका ध्यान हमेशा परिवार, दोस्त, भोजन और फिल्मों पर केन्द्रित रहा और इस दौरान जो भी उनसे मिला वह हैरान रहा कि कैसे इस बीमारी को उन्होंने खुद पर हावी नहीं होने दिया।’’

अमेरिका में करीब एक साल तक कैंसर का इलाज कराने के बाद वह पिछले साल सितम्बर में भारत लौटे थे।

फरवरी में भी तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहली बार दिल्ली में एक पारिवारिक समारोह में हिस्सा लेने गए ऋषि को संक्रमण के कारण वहां अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद मुम्बई लौटने के बाद उन्हें बुखार होने के बाद अस्पताल मे भर्ती कराया गया।

ऋषि ने अपने पिता राज कपूर की फ़िल्म ‘श्री 420’ से बतौर बाल कलाकर बड़े पर्दे पर अपनी फिल्मी पारी का आगाज़ किया था। इसके बाद वह फ़िल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में भी नज़र आए। बतौर मुख्य अभिनेता 1973 में आई ‘बॉबी’ उनकी पहली फ़िल्म थी, जो एक बड़ी हिट थी। इसके बाद करीब तीन दशक तक उन्होंने कई रोमांटिक फिल्में की।

‘लैला मजनू’, ‘रफू चक्कर’, ‘क़र्ज़’, ‘चांदनी’, ‘हिना’, ‘सागर’ जैसी कई फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया।

अभिनेता के तौर पर अपनी दूसरी पारी को लेकर वह काफी संतुष्ट थे। इस दौरान वह अपनी पत्नी के साथ ‘दो दूनी चार’ में नजर आए। वहीं ‘अग्निपथ’, ‘कपूर एंडा सन्स’, ‘102 नॉट आउट’ में अभिनय से उन्होंने एक बार फिर दिखा दिया कि बतौर कलाकार अभी वह सिनेमा जगत को और कितना योगदान दे सकते हैं।

उपराष्ट्रपति समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने ऋषि कपूर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके निधन से कला जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है।

नायडू ने अपने शोक संदेश में कहा, “हिंदी सिनेमा के प्रख्यात कलाकार और वरिष्ठ अभिनेता ऋषि कपूर के असामयिक निधन के दुखद समाचार से स्तब्ध हूं। उन्होंने अपनी बहुमुखी अभिनय प्रतिभा से भारतीय दर्शकों को दशकों तक मंत्रमुग्ध रखा और उन चरित्रों को हमारी स्मृति में अमर कर दिया।”

नायडू ने ट्वीट कर कहा “वे एक करिश्माई अभिनेता थे जिन्हें कई पीढ़ियों का स्नेह प्राप्त था। सच्चे कलाकार अपने कृतित्व के माध्यम से, अपने प्रशसंकों के मन मस्तिष्क में सदैव अमर रहते हैं।”

उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा, “ न सिर्फ सिने जगत ने बल्कि देश ने एक सपूत खो दिया है, यह क्षति अपूर्णीय है। दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों, सहयोगियों तथा उनके असंख्य प्रशंसकों के शोक में सम्मिलित हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को आशीर्वाद दें और उनके परिजनों तथा स्वजनों को इस शोक को सहन करने का धैर्य प्रदान करें।”

राहुल ने कहा- भारतीय सिनेमा के लिए दुखद सप्ताह

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अभिनेता ऋषि कपूर के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि वह हर पीढ़ी के लोगों के बीच लोकप्रिय थे और उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘ यह भारतीय सिनेमा के लिए दुखद सप्ताह रहा है। एक और बड़े अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हो गया। वह एक शानदार अभिनेता थे जिनकी हर पीढ़ी के लोगों में लोकप्रियता थी। उनकी कमी बहुत महसूस की जाएगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ दुख की इस घड़ी में उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के साथ मेरी संवेदना है।’’

केजरीवाल ने कहा- बड़ी क्षति

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘‘ ऋषि कपूर के इस तरह अचानक चले जाने से दुखी हूं। उन्होंने अपने पूरे करियर में भारत की कई पीढ़ियों का मनोरंजन किया। बहुत बड़ी क्षति है। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।’’

नीतीश ने भी शोक जताया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रख्यात अभिनेता ऋषि कपूर के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुये कहा कि उनके जाने से हिन्दी सिनेमा जगत को अपूरणीय क्षति हुयी है। नीतीश ने अपने शोक संदेश में कहा कि लम्बे समय तक वह फ़िल्म प्रेमियों के दिलों पर छाये रहे। वह उत्कृष्ट एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता थे। ऋषि कपूर फ़िल्म अभिनेता के साथ-साथ फ़िल्म निर्माता और निर्देशक भी थे। उन्होंने कहा कि वह बाल कलाकार के रूप में भी काम कर चुके थे। उन्हें उनकी पहली फ़िल्म में शानदार भूमिका के लिए 1971 में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मुख्यमंत्री नीतीश ने दिवंगत ऋषि कपूर की आत्मा की शान्ति तथा उनके परिजनों एवं प्रशंसकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Rishi Kapoor
Rishi Kapoor Died
Irrfan Khan
Actor Irrfan Khan died
bollywood
Rahul Gandhi
Arvind Kejriwal
M.Venkaiah Naidu
Nitish Kumar

Related Stories

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली

इरफ़ान ख़ान : अदाकारी की इब्तिदा और इंतिहा

फ़िल्म निर्माताओं की ज़िम्मेदारी इतिहास के प्रति है—द कश्मीर फ़ाइल्स पर जाने-माने निर्देशक श्याम बेनेगल

कलाकार: ‘आप, उत्पल दत्त के बारे में कम जानते हैं’

भाजपा सरकार के प्रचार का जरिया बना बॉलीवुड

तमिल फिल्म उद्योग की राजनीतिक चेतना, बॉलीवुड से अलग क्यों है?

भारतीय सिनेमा के महानायक की स्मृति में विशेष: समाज और संसद में दिलीप कुमार

भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत : नहीं रहे हमारे शहज़ादे सलीम, नहीं रहे दिलीप कुमार

फिल्म प्रमाणन न्यायाधिकरण को समाप्त करने पर फिल्मकारों ने की सरकार की आलोचना


बाकी खबरें

  • rakeh tikait
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार
    11 Feb 2022
    पहले चरण के मतदान की रपटों से साफ़ है कि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण वोटिंग पैटर्न का निर्धारक तत्व नहीं रहा, बल्कि किसान-आंदोलन और मोदी-योगी का दमन, कुशासन, बेरोजगारी, महंगाई ही गेम-चेंजर रहे।
  • BJP
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस
    11 Feb 2022
    “बीजेपी के घोषणा पत्र का मुख्य आकर्षण कथित लव जिहाद और लैंड जिहाद है। इसी पर उन्हें वोटों का ध्रुवीकरण करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में लव-लैड जिहाद को…
  • LIC
    वी. श्रीधर
    LIC आईपीओ: सोने की मुर्गी कौड़ी के भाव लगाना
    11 Feb 2022
    जैसा कि मोदी सरकार एलआईसी के आईपीओ को लांच करने की तैयारी में लगी है, जो कि भारत में निजीकरण की अब तक की सबसे बड़ी कवायद है। ऐसे में आशंका है कि इस बेशक़ीमती संस्थान की कीमत को इसके वास्तविक मूल्य से…
  • china olampic
    चार्ल्स जू
    कैसे चीन पश्चिम के लिए ओलंपिक दैत्य बना
    11 Feb 2022
    ओलंपिक का इतिहास, चीन और वैश्विक दक्षिण के संघर्ष को बताता है। यह संघर्ष अमेरिका और दूसरे साम्राज्यवादी देशों द्वारा उन्हें और उनके तंत्र को वैक्लपिक तंत्र की मान्यता देने के बारे में था। 
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : जंगली जानवरों से मुश्किल में किसान, सरकार से भारी नाराज़गी
    11 Feb 2022
    पूरे राज्य के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, मंडी, बढ़ती खेती लागत के साथ ही पहाड़ों में जंगली जानवरों का प्रकोप और लगातार बंजर होती खेती की ज़मीन जैसे तमाम मुद्दे लिए अहम हैं, जिन्हें इस सरकार ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License