NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आधार मामलाः अदालत में केंद्र सरकार के फ़र्ज़ी दावे की खुली पोल
'आधार' के तहत बचत का दावा करने के लिए 2015 के दस्तावेज़ को ग़लत तरीक़े से विश्व बैंक ने उद्धृत कियाI
विवान एबन
03 Feb 2018
आधार
Newsclick Image by Nitesh Kumar

आधार डाटा के दुरूपयोग को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समाज सेवकों की चिंता बरक़रार है। मामला अदालत में है।30 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में पांचवें दिन की सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को डाटा एकत्रीकरण की प्रक्रिया के बारे में बताया और कहा कि किस तरह आधार के तहत यह अनिवार्य है। केंद्र ने अदालत को हलफ़नामा सौंपा जिसमें कई दावे किए गए। सुनवाई के छठे दिन यानी 1 फरवरी को याचिकाकर्ता ने आरटीआई से मिली जानकारी के ज़रिए सरकार के हर एक दावे को बाक़ायदा ख़ारिज कर दिया।

क़ानूनी मामलों से संबंधित ख़बर प्रकाशित करने वाली वेबसाइट लाइव लॉ पर उपलब्ध लिखित प्रस्तुतियों के अनुसार आधार परियोजनाओं को न्यायसंगत बनाने के लिए इस मामले में उत्तरदाताओं के पास दो मुख्य कारण थें। पहला कारण यह बताया गया कि लाखों भारतीयों की कोई स्वीकार्य पहचान नहीं थी और आधार इसका निवारण करेगा। दूसरा कारण यह था कि डी-डुप्लीकेशन प्रोसेस कल्याण कार्यक्रमों में लीकेज को ख़त्म करने में भारी वित्तीय बचत सुनिश्चित करता है।

पहले तर्क का जवाब देते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील ने वैध पहचान के बिना 'लाखों' लोगों के दावे को ख़ारिज करने के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़े प्रस्तुत किए। पहला मुद्दा यह था कि पहचान के लिए दस्तावेजों के बिना लोगों के लिए आधार प्राप्त करने के लिए वर्तमान में मौजूदा प्रणाली एक 'परिचयकर्ता प्रणाली' (introducer system)है। परिचयकर्ता प्रणाली उस व्यक्ति पर निर्भर करती है जो बिना पहचान दस्तावेजों के किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा 'परिचय' कराई जाती है जिनके पास ऐसे दस्तावेज़ हैं। परिचयकर्ता के बयान के आधार पर वे दस्तावेज प्राप्त करेंगे।

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि परिचयकर्ता प्रणाली के ज़रिए ऐसे कई लोगों के नाम आधार परियोजना से जुड़े जो इस बात के प्रबल संकेतक है कि कितने लोग बिना दस्तावेज़ के जोड़े गए। यूआईडीएआई के निदेशक घनराज सिंह शेखावत द्वारा 2015 में हलफ़नामे के माध्यम से पुष्टि की गई कि परिचयकर्ता प्रणाली के ज़रिए 2,13,000 लोगों का नामांकन किया गया था। इस समय तक कुल नामांकन 80.46 करोड़ था। इसका मतलब यह हुआ कि इस तरह आवेदन करने वाले लोगों में क़रीब 0.03% परिचयकर्ता प्रणाली के माध्यम से सूची में शामिल किए गए। वर्ष 2016 में एक आरटीआई के जवाब में यूआईडीएआई ने कहा था कि परिचयकर्ता प्रणाली के माध्यम से 8,47,366 आधार संख्या जारी किया गया जिनमें से ऐसे लोग 0.08% थे जिन्होंने पंजीकरण कराया था। इस संबंध में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि ऐसे लोगों का इतना कम प्रतिशत था जिनके पास दस्तावेज़ नहीं थे तो बड़ी संख्या में लोगों की गोपनीयता में दख़ल का आधार नहीं हो सकते हैं।

उत्तरदाताओं के हलफ़नामे के दूसरे कारण के जवाब में याचिकाकर्ताओं ने लीकेज के तीन कारणों को सूचीबद्ध किया। इनमें लाभार्थी की अयोग्यता,वितरित राशि में धोखाधड़ी चाहे वह कमीशन के रूप में हो या नहीं और पहचान की धोखाधड़ी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आधार केवल तीसरे श्रेणी के लीकेज अर्थात पहचान की धोखाधड़ी में मदद कर सकता है। विश्व बैंक रिपोर्ट के दावे को उत्तरदाताओं द्वारा उद्धृत किया गया जिसे याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी। रिपोर्ट में ये दावा किया गया था कि आधार ने प्रतिवर्ष 11 बिलियन अमरीकी डॉलर सरकार का बचाया। हालांकि रिपोर्ट में 2015 के एक दस्तावेज़ का हवाला दिया गया था जिसमें कहा गया था कि उस समय पांच योजनाओं के तहत स्थानांतरण लगभग 70,000 करोड़ या 11.3 बिलियन अमरीकी डॉलर थे। लेखक ने इसमें कहीं नहीं आधार से होने वाली किसी तरह की बचत का उल्लेख किया था।

सरकार ने वर्ष 2014-15 में एमजीएनआरईजीएस में 3,000 करोड़ रुपए की बचत का दावा किया था। यूआईडीएआई के आंकड़ों से पता चला है कि वर्ष2014 में 67,637 जॉब कार्ड फ़र्ज़ी पाए गए। हालांकि ये सभी फ़र्ज़ी कार्ड एक ही राज्य त्रिपुरा में पाए गए। वर्ष 2015 में एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में लोकसभा में ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा था कि 63,943 जॉब कार्ड डुप्लीकेट पाए गए और इसे रद्द कर दिया गया। अगर इसका हिसाब किया जाए तो 200 x 100 दिन x 63, 943 फ़र्ज़ी जॉब कार्ड की राशि होगी 127.89 करोड़ रूपए। बचत का एक हिस्सा जिसका सरकार ने दावा किया है।

एलपीजी सब्सिडी में बचत के मुद्दे पर सरकार ने वर्ष 2014-15 में 14,672 करोड़ रुपए की बचत का दावा किया, वहीं 2015-16 में 6,912 करोड़ और 2016-17 में 4,824 करोड़ रुपए की बचत का दावा किया था। 2015 में कैबिनेट सचिवालय की बैठक के विवरणों में शामिल 91 करोड़ रूपए बचत के दावे को याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी। वर्ष 2012 में नेशनल इनफॉर्मेटिक्स कमिशन के साथ तेल विपणन कंपनियों द्वारा डी-डुप्लीकेशन कार्य किया गया जिसका हवाला भी याचिकाकर्ताओं ने दिया। उन्होंने वर्ष 2016 के कैग की रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि पीएचएएल (डीबीटीएल) योजना के तहत डी-डुप्लेशन को केवल आधार के लिए ज़िम्मेदार नहीं माना जा सकता है।

पीडीएस प्रणाली में बचत के संबंध में सरकार ने दावा किया कि 2016-17 के दौरान आधार के ज़रिए डीबीटी के परिणाम स्वरूप 14,000 करोड़ रूपए बचाए गए। हालांकि वर्ष 2016 में एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में उपभोक्ता मामले तथा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि फ़र्ज़ी, धोखाधड़ी और डुप्लीकेट राशन कार्डों को ख़त्म करने के बाद पीडीएस के ज़रीए आवंटित निधियों के वितरण में कोई कमी नहीं हुई। इसलिए इस संबंध में बचत का सवाल ही नहीं होता है।

आधार
UIDAI
मोदी सरकार
आधार देता दुरूपयोग

Related Stories

किसान आंदोलन के नौ महीने: भाजपा के दुष्प्रचार पर भारी पड़े नौजवान लड़के-लड़कियां

ईकेवाईसी सत्यापन के ज़रिये यूआईडीएआई ने 21 महीनों में कमाये 240 करोड़ रुपये: आरटीआई

आधार डेटा की चोरीः यूआईडीएआई ने डेटा सुरक्षा के अपने ही दावों की पोल खोली

सत्ता का मन्त्र: बाँटो और नफ़रत फैलाओ!

जी.डी.पी. बढ़ोतरी दर: एक काँटों का ताज

5 सितम्बर मज़दूर-किसान रैली: सबको काम दो!

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

लातेहार लिंचिंगः राजनीतिक संबंध, पुलिसिया लापरवाही और तथ्य छिपाने की एक दुखद दास्तां

माब लिंचिंगः पूरे समाज को अमानवीय और बर्बर बनाती है

अविश्वास प्रस्ताव: दो बड़े सवालों पर फँसी सरकार!


बाकी खबरें

  • election
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    चुनाव 2022: गोवा में दिखा उत्साह, यूपी और उत्तराखंड में सामान्य मतदान
    14 Feb 2022
    आज हुए चुनाव में गोवा में 40 सीटों के लिए हालांकि सबसे ज़्यादा 78.94 प्रतिशत मतदान हुआ लेकिन यह भी 2017 का आंकड़ा नहीं छू पाया। 2017 में यहां 83 फ़ीसदी मतदान हुआ था। इसी तरह उत्तराखंड में 2017 के 65.…
  •  maniksha mahant
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब चुनाव: थर्ड जेंडर की मनीक्षा भी हैं मैदान में
    14 Feb 2022
    26 वर्षीय मनीक्षा महंत, थर्ड जेंडर से आने वाली उम्मीदवार हैं मोहाली विधानसभा के लिए। इस ख़ास बातचीत में उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि वे क्यों चुनाव मैदान में हैं और उनके मुद्दें क्या हैं ?
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    23000 करोड़ का घोटाला! भाजपा सरकार और मीडिया चुप?
    14 Feb 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार बात कर रहे हैं ABG शिपयार्ड द्वारा किए गए घोटाले और उसपर छायी हुई शांति के बारे में। जबसे यह घोटाला सामने आया है न ही मीडिया और न ही सरकार ने इसपर कुछ बोला है।
  • china
    चार्ल्स जू
    कैसे चीन में हो रहा ओलंपिक पश्चिम के लिए हौआ बन गया है 
    14 Feb 2022
    ओलंपिक खेलों का इतिहास इस बात को दर्शाता है कि कैसे अमेरिका एवं अन्य साम्राज्यवादी देशों को चीन और वैश्विक दक्षिण के संघर्ष के साथ-साथ अंततः इसके वैकल्पिक मॉडलों, दोनों को ही स्वीकारने के लिए मजबूर…
  • elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: फ्री राशन नहीं सरकार रोज़गार दे
    14 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ग्रामीण विधानसभा इलाक़े “बख़्शी के तालाब” (बीकेटी) के नागरिकों का कहना है कि उनको सरकार का “फ़्री राशन” नहीं बल्कि सम्मानजनक रोज़गार चाहिए है। बीकेटी के महिलाओं ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License