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अफ़ग़ानिस्तान पर 'बिग' मीडिया का सवाल ग़लत और ख़तरनाक है
बुश और डिक चेनी हमें अफ़ग़ान युद्ध और अफ़ग़ानिस्तान में 20 साल के क़ब्ज़े के बारे में कैसे झूठ बोलकर चुप बैठ सकते हैं - जबकि जिन्होंने लगभग उतने ही लंबे अरसे तक इराक़ में बिना किसी राजनीतिक या ऐतिहासिक परिणामों के युद्ध को जारी रखा था?
थॉम हार्टमैन
30 Aug 2021
Translated by महेश कुमार
अफ़ग़ानिस्तान पर 'बिग' मीडिया का सवाल ग़लत और ख़तरनाक है
Image Courtesy: AP

आज मीडिया में बड़ा सवाल यह है, "क्या अफ़ग़ानिस्तान फिर से अमेरिका पर हमला करने वाले आतंकवादियों को 'जन्म देने वाला स्थान' बन जाएगा?" दरअसल यह सवाल ही गलत है।

हम सभी ने इस सवाल को मीडिया में पिछले कुछ महीनों से करीब दर्जन विविधताओं में, शायद सौ बार पूछे गए सवालों के जरिए सुना है। और यह सिर्फ गलत सवाल ही नहीं है: बल्कि यह उस जीओपी फ्रेम को मजबूत करता है जो जॉर्ज डब्लू॰ बुश को उनकी अनगिनत सबसे खराब विफलताओं और अपराधों से मुक्त कर देता है।

अफ़ग़ानिस्तान का 9/11 से कोई लेना-देना नहीं था।

आज इस थकी और भ्रामक अफवाह पर विराम लगाने का वक़्त आ गया है। 9/11 के हमले की न तो अफ़ग़ानिस्तान में योजना बनी थी, न ही इसे यहाँ रचा गया था, न ही इसे विकसित, वित्त पोषित, अभ्यास, विस्तार, या अंजाम दिया गया था। वास्तव में देखा जाए तो 2001 में उस देश और उसके नेतृत्व का 9/11 के हमले से कोई लेना-देना नहीं था।

लेकिन क्या लादेन अफ़ग़ानिस्तान में "आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर" नहीं चला रहा था? हां, वह चला रहा था, लेकिन, फिर से कहा जा सकता है कि बावजूद इसके इसका विशेष रूप से 9/11 हमलों से कोई लेना-देना नहीं था। यह बैकवुड्स प्रशिक्षण शिविरों की तरह था, जिसे विभिन्न अमेरिकी दक्षिणपंथी मिलिशिया चलाते रहे हैं, जो निम्न-स्तरीय सैनिक बनने वाले व्यक्तियों (पैसे के भुगतान के साथ) को प्रशिक्षित करते थे कि हथियारों का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे भौतिक आकार कैसे देना है। 

लेकिन 9/11 जैसे विस्तृत, अच्छी तरह से वित्त पोषित और परिष्कृत ऑपरेशन का उन हिंसक लोगों से कोई लेना-देना नहीं था। बिन लादेन, जिसे अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत को बेदखल करने में मदद करने के लिए रीगन प्रशासन ने उदारता से वित्त-पोषित किया था, उस समय वह अल क़ायदा चला रहा था, और जब उसने 9/11 के हमले के लिए धन मुहैया कराया, तो उसके जरिए ऑपरेशन की वास्तविक योजना और उसका प्रबंधन किया गया था जिसे खालिद शेख मोहम्मद द्वारा पाकिस्तान और जर्मनी से बाहर योजनबद्ध किया गया था।

यहां तक कि 9/11 हमले पर बने आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि जर्मन साजिशकर्ताओं में से एक, जकारिया एस्साबार, बिन लादेन को अपडेट करने के लिए कूरियर का काम कर रहा था और तसदीक किया था हमला होना ही है। "9/11 के हमलों से कुछ समय पहले, वह अल क़ायदा नेतृत्व को हमलों की तारीखों के बारे में बताने के लिए [जर्मनी से] अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा पर गया था" उक्त बातें आयोग की रपट के पृष्ठ 165 पर नोट की गई हैं। 

जर्मनी से, साजिशकर्ता फ्लोरिडा गए, जहां उन्होंने योजनाओं को अंतिम रूप दिया और मोहम्मद अता और अन्य ने प्रशिक्षण लिया और पायलट बनने के लाइसेंस हासिल किए। 19 विमान अपहर्ताओं में से, 15 सऊदी नागरिक थे, 2 यूएई के नागरिक थे (जिसने जेरेड कुशनर को वित्त पोषित किया था), और एक व्यक्ति मिस्र और एक लेबनान से था। इनमें एक भी हमलावर अफ़ग़ान नहीं था।

इसके अलावा, इस हमले के लिए एक भी पैसा अफ़ग़ानिस्तान सरकार या अफ़ग़ान नागरिकों से नहीं आया था; बिन लादेन के पास पर्याप्त पारिवारिक संपत्ति थी, और रीगन प्रशासन ने उसे अतिरिक्त लाखों डॉलर दिए थे। और, ऐसा भी लगता है कि कुछ धन लादेन के मूल स्थान, सऊदी अरब से भी आया हो सकता है। कुल मिलाकर अफ़ग़ानिस्तान का इससे कोई लेना-देना नहीं था।

लेकिन क्या अफ़ग़ानिस्तान अमेरिका से नफ़रत नहीं करता है?

लेकिन, "अफ़ग़ान कनेक्शन" के मामले में प्रेस पूछता है, क्या "उन्होंने" हमें 9/11 के हमलों में इसलिए नहीं मारा कि तालिबान अमेरिकी "मूल्यों" से नफ़रत करते थे?

सबसे पहले, तालिबान का अपने देश में बिन लादेन की उपस्थिति को सहन करने के अलावा 9/11 से उसका कोई लेना-देना नहीं था, क्योंकि लादेन की अफ़ग़ानिस्तान में उपस्थिती को तय करने के लिए स्पष्ट रूप से भ्रष्ट अफसरों को अच्छा-खासा मुआवजा दिया गया था। वे वास्तव में "अमेरिकी मूल्यों" के बारे में बहुत अधिक परवाह नहीं करते थे, जब तक कि अमरीका उनके देश से दूरी बना कर नहीं रखता था। 

उन्होंने सोवियत संघ को खदेड़ दिया था, और इससे पहले की सदियों में भी उन्होने ब्रिटिश, यूनानियों, मंगोलों और फारसियों के साथ ऐसा भी ऐसा ही कुछ किया था। वे बस अकेले रहना चाहते थे। (आज की तारीख में तालिबान और आईएसआईएस-के (ISIS-K) के बीच यह एक बड़ी लड़ाई है: तालिबन अफ़ग़ानिस्तान को चलाना चाहता है जबकि दूसरा एक क्षेत्रीय/अंतर्राष्ट्रीय इस्लामिक खलीफ़ा बनना चाहता है।)

यह पूरा घमासान सऊदी की पाक धरती के बारे में था!

हालांकि, बिन लादेन सितंबर 2001 में संयुक्त राज्य अमेरिका से नाराज था; ऐसा इसलिए था क्योंकि हम यानि अमरीका इराक़ में बुश के "छोटे युद्ध" के लिए सऊदी अरब की पाक़ भूमि का इस्तेमाल कर उसे नापाक़ बना रहा था। 

जॉर्ज डब्लू बुश ने इराक़ पर आक्रमण करने के लिए कई पीढ़ियों बाद पहली बार अमेरिकी सैनिकों को सऊदी अरब की ज़मीन पर उतारा था, ऐलान तीन दिवसीय युद्ध का था लेकिन वे  लंबे समय तक वहीं रुके थे।

वे उन्हे यानि अमेरिकी सैनिकों को काफ़िर मानते थे जो ईसाई या यहूदी थे, जो पाक़ सऊदी धरती पर पॉर्न फिल्में देखते थे और शराब पीते थे, इस तरह की हरकत बिन लादेन और उसके कट्टरपंथियों साथियों को बर्दाश्त नहीं थी। और एक तथ्य कि वहाँ "लंपट" अमेरिकी महिलाएं भी थीं, जो सऊदी कानून और रीति-रिवाजों की धज्जियां उड़ा रही थी जो अपनी कोहनी दिखाते हुए कार चलाती थी और उन्हे दोगुना क्रोधित करती थी। 

1998 की शुरुआत में ही, बिन लादेन ने अमेरिका पर हमला करने की धमकी दे दी थी, और कहा था कि अगर हमने बुश प्रशासन ने अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाया और बिन लादेन की जन्मभूमि सऊदी अरब को "नापाक़" करना बंद नहीं किया तो अंजाम बुरा होगा। 2 सितंबर, 1996 को, उन्होंने सार्वजनिक रूप से "अमेरिकी सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध शुरू करने और काफिरों को अरब प्रायद्वीप से बाहर निकालने" की धमकी दी थी।

जैसा कि उन्होंने 1998 में द गार्जियन के एक रिपोर्टर से कहा था: "हम ऐसा मानते हैं कि हम पुरुष हैं, मुस्लिम पुरुष हैं, जो कायनात के सबसे विशाल/भव्य घर की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पाक़ [सऊदी] काबा [भूमि] के लिए मरना-मारना और उसकी रक्षा करना एक सम्मान की बात मानते है। तो हमारा उद्देश्य साफ़ है – कि हमें इस्लाम की भूमि को पापियों से मुक्त कराना है।"

लादेन ने "अमेरिका को लिखे पत्र" में लिखा: "आपकी सेना हमारे देशों पर कब्जा कर रही है; आपने अपने सैन्य अड्डे वहाँ जमा दिए हैं; आप हमारी भूमि को भ्रष्ट कर रहे हैं, और यहूदियों की सुरक्षा के लिए और हमारे खजाने की निरंतर लूट को सुनिश्चित करने के लिए हमारी पाक़ ज़मीन को घेर रहे हैं।”

यही कारण है कि उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया, और कहा कि यही कारण है कि उसने अमेरिका पर उस हमले का आदेश दिया था जिसे अब हम 9/11 के हमलों के रूप में संदर्भित किया जाता है। वे चाहते थे कि हम सऊदी अरब में बिन सुल्तान एयर फ़ोर्स बेस से डैडी बुश के सैनिकों को हटा दें।

जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने लादेन को वह दिया जो वह चाहता था।

नतीजतन, बुश जूनियर ने 9/11 के तुरंत बाद अमेरिका के उन सैनिकों को वापस बुला लिया था: वह कोई डमी नहीं था। फिर से, इसका अफ़ग़ानिस्तान से कोई लेना-देना नहीं था।

जॉर्ज डब्ल्यू बुश को कई बार चेतावनी दी गई थी कि 9/11 हमला होने वाला है। लाइव ऑन द एयर पर रिचर्ड क्लार्क ने मुझसे कहा था कि उन्होंने कोंडी राइस को यह सब बताया था; उसने यह भी कहा कि वह जानता है कि अल गोर ने भी डिक चेनी को बताया था और बिल क्लिंटन ने बुश से कहा था कि अगर हम सऊदी अरब से बाहर नहीं निकले तो बिन लादेन हमारे पीछे आ रहा है।

बुश ने चेनी को चेतावनियों का संज्ञान लेने के लिए एक टास्क फोर्स का प्रभारी नियुक्त किया था, लेकिन चेनी इराक़ पर अपने हमले की योजना बनाने और 2003 के आक्रमण और तेल की चोरी की प्रत्याशा में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच अपने तेल क्षेत्रों को विभाजित करने में इतना व्यस्त था कि वह अल कायदा की टास्क फोर्स पर अगस्त 2001 के अंत कोई ध्यान ही नहीं दे पाया – नतीजतन सारी खुफिया जानकारी होने के बावजूद उसने कुछ नहीं किया।

लेकिन 9/11 के बाद बुश और चेनी को कुछ करना था!

अमेरिका को एक बड़े खूनी खेल का सामना करना पड़ा था, जो कि पर्ल हार्बर से भी अधिक दुस्साहसी हमले थे, और अंतत यह स्वीकार किया कि उन्होंने खुफिया चेतावनियों को नजरअंदाज किया था - विशेष रूप से ऐसे समय में जब अधिकांश अमेरिकियों को बुश को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त राष्ट्रपति पद की वैधता के बारे में संदेह था – ऐसा संदेह जोकि राजनीतिक रूप से विनाशकारी होता। 

और बुश और चेनी 2004 में फिर से निर्वाचित होने में गंभीरता से रुचि रखते थे, और बुश ने 1999 में अपने जीवनी लेखक मिकी हर्सकोविट्ज़ से लिखा था कि उस समय वापस निर्वाचित होने के लिए एक सक्रिय युद्ध में एक युद्धकालीन राष्ट्रपति होना सबसे अच्छा तरीका था। 

अफ़ग़ानिस्तान युद्ध के समय दुनिया का दूसरा सबसे गरीब देश था, जिसकी औसत प्रति व्यक्ति आय लगभग 2 डॉलर प्रति दिन थी। उनकी पूरी जीडीपी सालाना 2 अरब डॉलर से भी कम थी। उनकी सेना एक मजाक थी, उनकी वायु सेना लगभग न के बराबर थी, और उनके गठबंधन को चकनाचूर कर दिया गया था; संक्षेप में, वे एक अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए बैठी हुई बतख थे जिनके ज़रीए अमरीकी राष्ट्रपति अपना नाम कमाना चाहते थे।

ठीक ऐसा ही कुछ बुश ने किया था। उसने हमें एक काल्पनिक कहानी बेची कि 9/11 की योजना अफ़ग़ानिस्तान में बनाई गई थी और उसे अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निष्पादित किया गया था (यह हैम्बर्ग, जर्मनी या वेनिस, फ्लोरिडा पर हमला करने से कहीं ज्यादा आसान था), एक बड़ा झूठ बोला गया था कि हमले को अफ़ग़ानों ने वित्त-पोषित किया था (जोकि बुश परिवार को खिलाने वाले सऊदी हाथ और अल कायदा को काटने से कहीं ज्यादा आसान था), और कहा कि दुनिया के सबसे बड़े सैन्य बल ने बदला लेने के लिए हमले किए हैं जिसे अमेरिका "बंद करने" की आवश्यकता को पूरा करेगा। 

बुश और चेनी ने अमेरिका को दी गई बिन लादेन की धमकी को नजरअंदाज कर दिया था (वास्तव में देखा जाए तो उन्होंने लादेन का मज़ाक़ उड़ाया था); और फिर जब 9/11 हुआ उसके बाद, उन्होंने सऊदी अरब के अपने दोस्तों से दोष हटाकर अफ़ग़ानिस्तान की निष्क्रिय तालिबान सरकार के सर मढ़ दिया था। 

उस वक़्त की अफ़ग़ान तालिबान सरकार ने, अमरीका की शुरुआती बमबारी को कड़ी टक्कर दी थी, फिर तालिबान ने बिन लादेन को गिरफ्तार करने और उस पर किसी तीसरे देश में मुक़दमा चलाने की पेशकश की, लेकिन जैसा कि वाशिंगटन पोस्ट के 9/15 शीर्षक में कहा गया है, "बुश ने बिन लादेन पर तालिबान की पेशकश को ठुकरा दिया था।"

जॉर्ज डब्ल्यू बुश और डिक चेनी एक युद्ध चाहते थे और जो उन्हें मिल गया।

बुश के लिए इसने बेहतर काम किया और व्हाइट हाउस में उनके दफ्तर की वैधता ठहराने के सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेने के नाजायज दावे की अटकलों को ख़ारिज़ कर दिया था। डिक चेनी के लिए इसका मतलब उनकी असफल हेलिबर्टन कंपनी को बिना किसी बोली के सैकड़ों अरबों डोलार का ठेका मिलना था, जिसका उन्होंने पहले नेतृत्व किया था और इसमें भारी निवेश भी किया था।

उस वक़्त युद्ध तीन सप्ताह से भी कम समय में समाप्त हो गया था क्योंकि काबुल सरकार गिर गई थी, और उसके बाद 20 से अधिक वर्षों के कब्ज़े की शुरूवात होती है जो आज तालिबान की वापसी के साथ समाप्त हो रहा है, जो एक महत्वपूर्ण बात है जिसका मीडिया में लगभग कहीं भी जिक्र नहीं किया जा रहा है। 

यह कहानी का अंत करने का समय है कि गरीबी से ग्रस्त असफल राष्ट्र जिसे आधुनिक धर्म के जरिए कांस्य युग के संस्करणों द्वारा चलाया जा रहा था क्या वह संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे पूर्ण विकसित देशों पर, अच्छी तरह से वित्त पोषित और योजनाबद्ध हमलों का स्रोत बन सकता था। 

यह सब घूम कर डैडी बुश के "खाड़ी युद्ध" पर वापस जाता है। 

अगर जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश ने 1992 के फिर से चुनाव में असफल स्टंट के रूप में पहले खाड़ी युद्ध में हमसे झूठ नहीं बोला होता (इनक्यूबेटरों से कोई बच्चे नहीं फेंके जा रहे थे: यह एक झूठ था जिसे कुवैती शाही परिवार की एक बेटी ने यूएस पीआर फर्म के सुझाव पर सीनेट के सामने झूठ बोला था।) और सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिकों को उनके "छोटे युद्ध" (ग्रेनाडा में रीगन के "छोटे युद्ध" की तरह) को लड़ने के लिए तैनात किया गया था, इसके लिए बिन लादेन को कभी भी हमारे साथ कम से कम चिंता नहीं होती। 

ऐसा कहा जाता है कि जो राष्ट्र इतिहास से नहीं सीखते हैं वे उसे दोहराने का काम करते हैं।

हमें एलबीजे द्वारा वियतनाम में बोले गए झूठ से सीखना चाहिए था कि झूठे युद्ध और लंबे कब्ज़े कभी भी अच्छी तरह से काम नहीं करते हैं। अफसोस, हमें यह सब मैक्सिकन अमेरिकी युद्ध और स्पेनिश अमेरिकी युद्ध से सीखना चाहिए था, क्योंकि इन दोनों के लिए भी अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने हमें झूठ बोला था।

लेकिन हमने 9/11 के हमलों तक भी इनमें से कुछ नहीं सीखा था, और आज के समाचार कवरेज से पता चलता है कि हमने अभी भी अपने इतिहास के स्पष्ट सबक नहीं सीखे हैं।

नतीजतन, जॉर्ज डब्लू. बुश और डिक चेनी की प्रतिष्ठा दोबारा बढ़ रही है और वे दोनों और उनके रक्षा ठेकेदार मित्र बैंक की हंसी उड़ा रहे हैं।

हमारे मीडिया को सही सवाल पूछना शुरू करने की जरूरत है:

  • बुश और डिक चेनी युद्ध और अफ़ग़ानिस्तान पर 20 साल के कब्जे के बारे में झूठ बोलकर कैसे छुट सकते हैं – और बिना किसी राजनीतिक या ऐतिहासिक परिणामों के लगभग इतने लंबे समय तक इराक में युद्ध और कब्ज़ा...क्यों?
  • बुश, ओबामा और ट्रम्प प्रशासन, जो जानते थे कि ये कब्ज़े खोई हुई बिसात है और इससे अमेरिकी जान-माल का नुकसान भी है फिर भी वे हमें इस दावानल से बाहर क्यों नहीं निकाल पाए?
  • हम मध्य पूर्व और दुनिया भर में कहीं भी क्या कर सकते हैं और यदि हमारा मक़सद शांति, आधुनिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने का है तो इसके लिए युद्धक विमान, ड्रोन, सैनिकों और बमों का इस्तेमाल क्यों करना चाहिए?

थॉम हार्टमैन एक टॉक-शो होस्ट हैं और द हिडन हिस्ट्री ऑफ़ अमेरिकन हेल्थकेयर के लेखक हैं और प्रिंट में उनकी 30 से अधिक अन्य पुस्तकें हैं। वे इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट में राइटिंग फेलो हैं और उनके लेखों को  hartmannreport.comपर पढ़ा जा सकता है।

इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:-

Afghanistan: The ‘Big’ Media's Question Today Is Wrong & Dangerous

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