NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अखिल भारतीय किसान सभा की अगुवाई में अब हिमाचल के किसान भी करेंगे आंदोलन !
राजस्थान ,महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद अब हिमाचल के किसान भी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं | इनकी माँग है कि “सरकार हर एक लघु और सीमान्त किसान को 5 बीघा ज़मीन दे”|
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Mar 2018
किसान सभा हिमाचल

ऐसा मालूम होता है कि किसान आन्दोलन अब धीरे धीरे देश के विभिन्न इलकों में फैलता जा रहा है | राजस्थान के बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और अब हिमाचल के किसान भी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं | यहाँ भी अखिल भारतीय किसान सभा किसानों का नेतृत्व कर रही है, और किसान 3 अप्रैल को शिमला में विधान सभा का घेराव करेंगे |इस विरोध प्रदर्शन में करीब 5000 किसानों के हिस्सा लेने की उम्मीद है |

ये ताजुज्ब की बात नहीं है कि कृषि संकट के दौर में किसान विभिन्न राज्यों में अपनी माँगों  को लेकर सडकों पर उतर रहे हैं ,दरअसल निजीकरण के इस दौर में जहां लगातार खाद,पानी,बिजली और बीज के दाम बढ़ रहे हैं |वहीँ,किसानों की आय नहीं बढ़ रही क्योंकि सरकार फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दे रही है | इस वजह से किसानों की आय कम होती जा रही है और फसल की लागत बढती जा रही है , जिससे किसान कर्ज़ों के बोझ तले दबते जा रहे हैं , और मजबूरान आत्महत्या करने के लिए विवश हैं I लेकिन  हाल में हुए राजस्थान , महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में किसानों ने ये नारा दिया है कि “वह आत्म हत्या नहीं करेंगे और जुल्म के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे” | इसी कड़ी में अब हिमाचल प्रदेश के किसान भी जुड़ने जा रहे हैं |

हिमाचल प्रदेश में 65% लोग किसानी करते हैं पर वहाँ खेती के लिए सिर्फ 11% ज़मीन है यही वजह है कि बहुत से छोटे और सीमान्त किसान जंगल की ज़मीन पर सेब की खेती करने लगे | जिसके बाद सरकार और विभाग उनके घरों को वहाँ से तोड़ने लगी और सेब के पेड़ काटने लगी | किसान ये माँग कर रहे हैं कि उन्हें खेती की ज़मीन दी जाए, किसान नेता ये कह रहे हैं कि, बीजेपी सरकार खुद बहुत लम्बे समय से इस बात का आश्वासन दे रही है |I

AIKS हिमाचल के पूर्व राज्य सचिव ओंकार शाद का कहना है कि “इस तरह पेड़ काटने से न सिर्फ अर्थव्यवस्था को बड़ा नुक्सान होता है बल्कि पर्यावरण को भी हानि पहुँचती है | हमारी माँग है कि सरकार हर एक लघु और सीमान्त किसान को 5 बीधा ज़मीन दे”|

इसके आलावा हिमाचल प्रदेश में बंदरों की बहुत बड़ी समस्या है|ये बन्दर वहाँ फसल ख़राब कर रहे हैं , किसान नेताओं की ये माँग है कि इन बंदरों को निर्यात किया जाए | 

AIKS हिमाचल प्रदेश अधक्ष कुलदीप सिंह तंवर का कहना है कि “सरकार ने इससे पहले बंदरों की नसबंदी करने का निर्णय लिया था ,पर वह कारगर नहीं रहा और उसमें करोड़ों रुपये भी बर्बाद हुए| बंदरों के निर्यात करने ने देश को आर्थिक फायदा भी होगा और किसान बर्बाद भी नहीं होंगे”|

इन दोनों माँगों के आलावा हिमाचल के किसान दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की माँग कर रहे हैं ,और MANREGA को ठीक तरीके से लागू किये जाने की माँग कर रहे हैं |

ओंकार शाद समझाते हैं कि “MANREGA में 100 दिन की जगह हिमाचल में सिर्फ 36 दिन का काम मिलता है, जहाँ पूरा काम दिया जाता भी है वहाँ पूरा वेतन नहीं मिलता | दूध पर सिर्फ 15 रुपये लीटर मिलता है जबकी कम्पनी का दूध इससे काफी ज़्यादा में बिकता है,हमारी माँग है कि दूध पर कम से कम 30 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए”|

सारे देश की तरह यहाँ भी किसान ये माँग कर रहे हैं कि आवारा पशुओं का कोई इंतज़ाम किया जाए ,क्योंकि वह फसल ख़राब कर रहे हैं | ये समस्या हाल में इतनी बड़ी इसीलिए हो गयी है क्योंकि मौजूदा सरकार ने पशुओं के बेचने और खरीदने पर रोक लगा दी है |

इन माँगों के आलावा कर्ज़ माफ़ी , लागत के डेढ़ गुना समर्थन मूल्य और स्वामीनाथन कमीशन की बाकि सिफारियों को लागू करने की माँग भी कर रहे हैं | किसान नेताओं को उम्मीद है कि महाराष्ट्र और राजस्थान की तरह यहाँ भी किसानों के सामने सरकार को झुकना पड़ेगा| I

अखिल भारतीय किसान सभा
Himachal Pradesh
कर्जमाफी
किसान आन्दोलन

Related Stories

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

हिमाचल सरकार ने कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन, घेराव और हड़ताल पर लगाई रोक, विपक्ष ने बताया तानाशाही फ़ैसला

हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी

हिमाचल प्रदेश: फैक्ट्री में ब्लास्ट से 6 महिला मज़दूरों की मौत, दोषियों पर हत्या का मुक़दमा दर्ज करने की मांग

बुमला : हिमाचल के ऊंचे इलाकों में भारत-चीन आमने-सामने

हिमाचल: जलशक्ति विभाग के मज़दूरों ने किया प्रदर्शन, कहा अगर मांगे नहीं मानी तो करेंगे आंदोलन तेज़

हिमाचल: सेब के उचित दाम न मिलने से गुस्साए किसानों का प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन

हिमाचल: आईजीएमसी वर्कर्स यूनियन का आउटसोर्स व ठेका मज़दूरों की मांगों को लेकर प्रदर्शन  

सवर्ण आयोग: शोषणकारी व्यवस्था को ठोस रूप से संस्थागत बनाने का नया शिगूफ़ा


बाकी खबरें

  • sedition
    भाषा
    सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश
    11 May 2022
    पीठ ने कहा कि राजद्रोह के आरोप से संबंधित सभी लंबित मामले, अपील और कार्यवाही को स्थगित रखा जाना चाहिए। अदालतों द्वारा आरोपियों को दी गई राहत जारी रहेगी। उसने आगे कहा कि प्रावधान की वैधता को चुनौती…
  • बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    एम.ओबैद
    बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    11 May 2022
    "ख़ासकर बिहार में बड़ी संख्या में वैसे बच्चे जाते हैं जिनके घरों में खाना उपलब्ध नहीं होता है। उनके लिए कम से कम एक वक्त के खाने का स्कूल ही आसरा है। लेकिन उन्हें ये भी न मिलना बिहार सरकार की विफलता…
  • मार्को फ़र्नांडीज़
    लैटिन अमेरिका को क्यों एक नई विश्व व्यवस्था की ज़रूरत है?
    11 May 2022
    दुनिया यूक्रेन में युद्ध का अंत देखना चाहती है। हालाँकि, नाटो देश यूक्रेन को हथियारों की खेप बढ़ाकर युद्ध को लम्बा खींचना चाहते हैं और इस घोषणा के साथ कि वे "रूस को कमजोर" बनाना चाहते हैं। यूक्रेन
  • assad
    एम. के. भद्रकुमार
    असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की
    11 May 2022
    राष्ट्रपति बशर अल-असद का यह तेहरान दौरा इस बात का संकेत है कि ईरान, सीरिया की भविष्य की रणनीति का मुख्य आधार बना हुआ है।
  • रवि शंकर दुबे
    इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी
    11 May 2022
    इप्टा की ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में गीतों, नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License