NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आख़िर कितनी जानें लेंगे सीवर; दिल्ली जल बोर्ड में एक और मौत
डोमन की मौत दिल्ली जल बोर्ड पंप हाउस का टैंक साफ़ करते हुए हुई। सितंबर में भी दिल्ली जल बोर्ड के सीवर की सफाई के दौरान एक सफाईकर्मी की जान चली गई थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Oct 2018
sewage deaths

दिल्ली में रविवार, 21 अक्टूबर को एक और सफाई कर्मचारी की टैंक की सफाई के दौरान मौत हो गयी। मृतक की पहचान बिहार के कटिहार निवासी डोमन राय के तौर पर हुई है। उनकी उम्र 32 वर्ष थी। डोमन की मौत उत्तरी दिल्ली के जहाँगीरपुरी स्थित दिल्ली जल बोर्ड पंप हाउस का टैंक साफ़ करते हुए हुई। सितंबर में भी दिल्ली जल बोर्ड के सीवर की सफाई के दौरान एक सफाईकर्मी की जान चली गई थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड ने निजी कम्पनी केकेस्पन इंडिया लिमिट को साफ़ सफाई और मरम्मत का ज़िम्मा दे रखा है। उसी कम्पनी द्वारा सफाई कर्मचारियों को काम दिया गया होगा। 

कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस टैंक की सफाई तीन सफाई कर्मचारी कर रहे थे। डोमन रे टैंक में आधे घंटे तक रहे जिसके बाद उनके साथियों को यह एहसास हुआ कि वह हिल नहीं रहे हैं, तब उन्हें बाहर निकाला गया। जबकि दूसरी रिपोर्टों के हिसाब से रे ने टैंक के अंदर वाल्व खोला और उससे टैंक में पानी भर गया जिससे उनकी डूबने से मौत हो गयी। 

पुलिस का कहना है कि इसके बाद उन्हें मैक्स हॉस्पिटल से कॉल आया कि एक व्यक्ति की सीवेज टैंक साफ़ करते हुए मौत हो गयी। पुलिस ने इस मामले में धारा 304 ए और प्रोहिबिशन ऑफ़ एम्प्लॉयमेंट एंड रिहैबिलिटेशन एक्ट की कुछ धाराओं के अंतर्गत केस दर्ज़ किया है। इसके आलावा सफाई कर्मचारियों के सुपरवाइज़र को भी गिरफ्तार किया गया है। 

वहीं दिल्ली जल बोर्ड जो कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आता है, ने इस घटना पर एक बयान जारी किया है। बोर्ड ने कहा है कि इस घटना के बारे में सुनकर बहुत अफ़सोस हुआ इस मामले में जाँच हो रही है और उस हिसाब से कार्रवाई भी की जाएगी। 

देश भर में मैला ढोने के कार्य के गैरकानूनी होने के बावजूद गरीबी और जातिवाद के चलते यह काम सफाई कर्मचारियों से कराया जाता है। हाल में हुई मौत तो खुद सरकारी विभाग में हुई। रिपोर्टों के अनुसार पिछले साल राजधानी दिल्ली में ही मैला ढोने के दौरान 32 मौतें हुई थी। सितम्बर महीने  में एक हफ्ते में  देश भर में सफाई के दौरान 11 सफाई कर्मचारियों की मौतें हुई थी। इनमें दिल्ली में सबसे ज्यादा मौतें हुई थीं।

अनिल नाम के एक सफाईकर्मी की मौत तो दिल्ली जल बोर्ड के सीवर की सफाई के दौरान पश्चिमी दिल्ली के डाबरी इलाके में हो गई थी।इस सबके खिलाफ सफाई कर्मचारी आंदोलन और वामपंथी पार्टियों ने मिलकर 25 सितम्बर को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन में सफाई करने के दौरान मारे गए बहुत से सफाई कर्मचारियों के घर वाले भी आये थे।

मैला उठाने के खिलाफ कानून प्रोहिबिशन ऑफ़ एम्प्लॉयमेंट एंड रिहैबिलिटेशन एक्ट में 2003 में सैप्टिक टैंक और नालों की सफाई के काम को भी शामिल किया था। कानून के अनुभाग सात के अनुसार कोई भी अधिकारी या एजेंसी कोई सीवर या सेप्टिक टैंक साफ़ करने के लिए किसी भी व्यक्ति को नहीं रख सकती। लेकिन इसके बावजूद ज़मीनी हकीकत बहुत अलग है। यह काम लगातार कराया जा रहा है और मौतें भी लगातार हो रही हैं। 

दिल्ली सरकार की अगस्त में आये सर्वे के हिसाब से दिल्ली में सिर्फ 32 सफाई कर्मचारी हैं, जो मैले ढोने के काम में हैं। जानकारों की माने तो यह आँकड़े सच्चाई से बहुत दूर हैं। दरअसल  मैला ढोने वालों की गणना के लिए हर ज़िले में कैंप लगाये जाते हैं। बहुत बार ज़िला अधिकारी जानबूझकर अपने ज़िले को आगे दिखाने के लिए सफाई कर्मचारियों की संख्या कम करके दिखाते हैं। कई बार पैसों की कमी की वजह से लोग इन कैम्पों में जा ही नहीं पाते और कई बार जातिगत उत्पीड़न के चलते भी सफाई कर्मचारी खुद को पंजीकृत नहीं कराते। इसके आलावा सफाई कर्मचारीयों में 90 % महिलायें हैं। कॉन्ट्रैक्टरों के दौरा उत्पीड़न और सामाजिक दबाव की वजह से भी वह अपने आप को पंजीकृत नहीं करा पातीं हैं। 

हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने इन मौतों का एक डेटा अपनी रिपोर्ट में निकाला है, हालांकि आँकड़े असली आँकड़ों से बेहद कम हैं लेकिन फिर भी ये भयावह तस्वीर दिखाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हर पाँच दिनों में एक व्यक्ति की मौत मैला उठाने के काम में होती है।

आँकड़े बताते हैं कि इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों का रवैया एक सा है। सेप्टिक टैंकों और नालों की सफाई के दौरान होती यह मौतें एक अंतहीन त्रासदी की ओर इशारा करती है , जिसका अंत दिखाई नहीं पड़ता।  

manual scavenger
Delhi
sewage deaths
delhi jal board

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

सीवर कर्मचारियों के जीवन में सुधार के लिए ज़रूरी है ठेकेदारी प्रथा का ख़ात्मा

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में तेज़ी पर बीजेपी का साम्प्रदायिक खेल
    26 Nov 2021
    बोल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा, उत्तर प्रदेश चुनाव के आने पर बीजेपी नेताओं के साम्प्रदायिक भाषणों पर चर्चा कर रहे हैं.
  • niti ayog
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में सबसे ज़्यादा ग़रीबः नीति आयोग
    26 Nov 2021
    सात सूचकांकों में बिहार की स्थिति सबसे ज़्यादा ख़राब है। पोवर्टी, न्यूट्रिशन, मैटरनल हेल्थ, स्कूल अटेंडेस, कुकिंग फ्यूल व इलेक्ट्रिसिटी के मामले में सबसे ज़्यादा बदतर है।
  • kisan andolan
    सुहित के सेन
    यह किसानों का प्रदर्शन-स्थलों से घर लौटने का उचित समय क्यों नहीं है
    26 Nov 2021
    इसकी बजाय, संयुक्त किसान मोर्चा के लिए यह समय भाजपा के खिलाफ अपने चुनाव अभियान को उन राज्यों में जिंदा रखने का है, जहां चुनाव जल्द होने वाले हैं-खासकर पंजाब और उत्तर प्रदेश में।
  • MSRTC strike
    भाषा
    एमएसआरटीसी हड़ताल : मंत्री के अल्टीमेटम के बावजूद कुछ ही कर्मचारी ड्यूटी पर लौटे
    26 Nov 2021
    एमएसआरटीसी के कर्मचारी विलय की मांग पर 20 दिन से ज़्यादा से हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
  • Same Sex Marriages
    सौरभ शर्मा
    समलैंगिक शादी की बात करते हुए किन चीज़ों पर नहीं करते बात
    26 Nov 2021
    विवाह सहित समलैंगिक संबंधों की मान्यता की बहस ध्रुवीकृत है लेकिन भारतीय समाज के लिए आवश्यक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License