NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
अरुंधति, लोकपाल और रिलायंस : पूर्व सचिव ने उठाए गंभीर सवाल लेकिन सरकार खामोश
भारत सरकार के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा ने अरुधंति भट्टाचार्य के लोकपाल सर्च कमेटी का सदस्य बनने पर 10 अक्टूबर 2018 को भारत सरकार को एक लंबा पत्र लिखा है। इसमें तमाम सवाल उठाए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी का जवाब नहीं मिला है।
अजय कुमार
22 Oct 2018
ARUNDHATI BHATTACHARYA अंधरुति भट्टाचार्य
Image Courtesy: Business Today

सबसे अधिक जरूरी है कि सवाल पूछे जाएं।

तब तक पूछे जाएं जब तक जवाब न मिल जाए।

जवाब भी ऐसा हो जो सवाल के हर पहलू का हल हो।

जब से अरुंधति भट्टाचार्य को रिलायंस इंडस्ट्रीज में पांच साल के लिए स्वतंत्र निदेशक के तौर पर नियुक्त करने की खबर फैली है तब से उनकी नियुक्ति पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों के लिए अब तक कोई जवाब नहीं आया है।

भारत सरकार के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा ने अरुधंति भट्टाचार्य के लोकपाल सर्च कमेटी का सदस्य बनने पर 10 अक्टूबर 2018 को भारत सरकार को पत्र लिखा। इस पत्र का विषय था कि अरुंधति भट्टाचार्य को लोकपाल सर्च कमेटी का सदस्य बनाने से पहले सरकार ने पद की योग्यता से जुड़ी जरूरी प्रक्रियागत छानबीन नहीं की। अंग्रेजी में लिखे अपने पत्र में शर्मा में कहते हैं –

“एसबीआई की पूर्व चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य का जुड़ाव फाइनेंसियल सर्विस प्रदान करने वाली कम्पनी क्रिस कैपिटल को सलाह देने वाले पद से है। इस फाइनेंसियल कम्पनी का नाम भी कर चोरी से जुड़े पनामा पेपर्स में शामिल है। अगर इस तरह की कम्पनी के साथ अरुंधति भट्टाचार्य का नाम जुड़ा है तो इसका मतलब है कि सरकार को सलाह देने वाले लोगों ने लोकपाल सर्च कमेटी के सदस्य का चुनाव करने में यथोचित प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया है। इस तरह की नियुक्तियां लोकपाल जैसी ऊँची संस्था की साख पर बहुत गंभीर चिंता उठाती हैं। लोकपाल को प्रधानमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री जैसे ऊँचे सरकारी पदों पर बैठे लोगों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले की छानबीन करने की अधिकारिता हासिल है। ऐसे में अरुंधति की नियुक्ति लोकपाल के साख पर बट्टा लगाती है। इसके साथ लोकपाल सर्च कमेटी का सदस्य बना दिए जाने के बाद अरुंधती का रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्वतंत्र निदेशक बनाया जाना परेशान करने वाली बात हो जाती है। साल 2011-12 की एसबीआई रिपोर्ट की तहत यह बात ध्यान देने वाली हो जाती है कि बैंक ने आरबीआई द्वारा कम्पनियों को दिए जाने वाले कर्ज की सीमा से अधिक रिलायंस इंडस्ट्री को कर्ज दिया। इस समय एसबीआई के प्रबंधन बोर्ड में आरबीआई और कांग्रेस के वित्त मंत्रालय के लोग भी शामिल थे।

इसी साल के अप्रैल महीने में एसबीआई रिलायंस की जियो डिजिटल पेमेंट बैंक के 30 फीसदी शेयरहोल्डर का मालिक बन चुका है, जबकि इसकी शुरुआत अरुंधति भट्टाचार्य के दौर पर में ही हो चुकी थी। जब एसबीआई ने अपना खुद का डिजिटल प्लेटफोर्म बनाने के बजाय रिलायंस के माय जियो एप के साथ जुड़ने का समझौता किया था।                     

रिलायंस इंडस्ट्री अनिल अम्बानी के रिलायंस कम्युनिकेशन की डूबती हुई हालत को बचाने कोशिश कर रही है। एसबीआई भी इसके साथ हो चली है। 26 अगस्त 2018 के अखबारों के बिजनेस पेज की खबर है कि एसबीआई ने अनिल अम्बानी के कर्ज को राहत देने के लिए दूरसंचार विभाग को पत्र लिखा है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो एसबीआई का सीनियर प्रबंधन रिलायंस इंडस्ट्री और रिलायंस कम्युनिकेशन को बहुत बड़े कर्ज से बाहर निकालने में लग गया है। जिसकी वजह से एसबीआई के वित्तीय हालत को बहुत अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इस पृष्ठभूमि में एसबीआई की पूर्व चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य का लोकपाल कमेटी का सदस्य बनाया जाना और रिलायंस इंडस्ट्री का स्वतंत्र निदेशक बनना सरकार की तरफ कई तरह के सवाल खड़ा करता है।”

अपने पत्र में वे लिखते हैं कि लोकपाल चुनने के लिए बनी सर्च कमेटी के सदस्य में केवल अरुंधति भट्टाचार्य के नाम पर ही सवाल नहीं उठते बल्कि दूसरे नाम भी सवालों के घेरे में नजर आते हैं। इस कमेटी में प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष, एसबीआई की पूर्व चेयरमैन से लेकर गुजरात के पूर्व पुलिस अफसर और राजस्थान सरकार के रिटायर्ड आईएस अफसर तक शामिल हैं, जबकि इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज द्वारा की जा रही है, लेकिन लोकपाल सर्च कमेटी के अन्य सदस्य कमेटी में बने रहने के लिए जरूरी योग्यताओं को पूरा नहीं करते।

ईएएस शर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्व नौकरशाहों और पूर्व बैंकरों को शामिल कर केंद्र सरकार ने लोकपाल सर्च कमेटी का मजाक बनाया है। सरकार और व्यापार से जुड़े लोग ही सरकार और व्यापार पर नकेल कस पायेंगे, यह नामुमकिन लगता है। इस मामले से अरुंधति भट्टाचार्य का उजागर हुआ नाम सरकार द्वारा गुड गवर्नेंस के लिए गवर्नमेंट रिफार्म के काम पर कई तरह के सवाल खड़ा करता है।

सरकार फिलहाल किसी भी सवाल और आरोप का जवाब देने के मूड में नहीं दिख रही है। ईएएस शर्मा के सवालों और अन्य आरोपों का जवाब तभी मिल सकता है, जब जमकर सवाल खड़े किये जाए और तब तक सवाल खड़े किये जाए जब तक जवाब न मिल जाए।  

इसे भी पढ़ें:- अरुंधति भट्टाचार्य और रिलायंस : सवाल नैतिकता का है

arundhati bhattacharya
ex-sbi chief
sbi-jio digital banking
reliance industry
mukesh ambani
Anil Ambani
my jio app
independent director
Congress

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 10 लाख से नीचे आए 
    08 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 67,597 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 9 लाख 94 हज़ार 891 हो गयी है।
  • Education Instructors
    सत्येन्द्र सार्थक
    शिक्षा अनुदेशक लड़ रहे संस्थागत उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हक़ की लड़ाई
    08 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त किया था कि 2019 तक उन्हें नियमित कर दिया जायेगा। लेकिन इस वादे से भाजपा पूरी तरह से पलट गई है।
  • Chitaura Gathering
    प्रज्ञा सिंह
    यूपी चुनाव: मुसलमान भी विकास चाहते हैं, लेकिन इससे पहले भाईचारा चाहते हैं
    08 Feb 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गांव के मुआयने से नफ़रत की राजनीति की सीमा, इस इलाक़े के मुसलमानों की राजनीतिक समझ उजागर होती है और यह बात भी सामने आ जाती है कि आख़िर भाजपा सरकारों की ओर से पहुंचायी जा…
  • Rajju's parents
    तारिक़ अनवर, अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : गांवों के प्रवासी मज़दूरों की आत्महत्या की कहानी
    08 Feb 2022
    महामारी की शुरूआत होने के बाद अपने पैतृक गांवों में लौटने पर प्रवासी मज़दूरों ने ख़ुद को बेहद कमज़ोर स्थिति में पाया। कई प्रवासी मज़दूर ऐसी स्थिति में अपने परिवार का भरण पोषण करने में पूरी तरह से असहाय…
  • Rakesh Tikait
    प्रज्ञा सिंह
    सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत
    08 Feb 2022
    'वो जाटों को बदनाम करते हैं क्योंकि उन्हें कोई भी ताक़तवर पसंद नहीं है' - राकेश टिकैत
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License