NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
शिक्षा
भारत
राजनीति
बिहार : राष्ट्रभक्ति का नया आदर्श हिटलर!
एबीवीपी नेता ने छात्र संघ कार्यालय में हिटलर की तस्वीर लगाकर आदर्श घोषित किया। इसके खिलाफ एबीवीपी को छोड़ सभी छात्र संगठनों ने प्रतिरोध मार्च निकाला और विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित ज्ञापन दिया।
अनिल अंशुमन
10 Jul 2019
छात्र संघ कार्यालय में हिटलर की तस्वीर
फोटो : साभार

महात्मा गांधी के जन्मदिन पर अपने सभी सांसदों को पदयात्रा करने का निर्देश देनेवाली देश की वर्तमान सरकार के पिछले शासन में तो गोडसे जयंती मनाने और उसकी मूर्ति स्थापना-पूजन जैसे कृत्यों को ही देखा-सुना गया था। लेकिन अबकी बार अपने राष्ट्रवाद के एजेंडे के लिए किस तरह से हिटलर को आदर्श प्रतीक बनाने की कवायद शुरू की जा रही है इसकी बानगी दिखी बिहार के सर्वोत्तम शिक्षा संस्थान पटना विश्वविद्यालय में।

खबरों के अनुसार इस विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव व एबीवीपी के नेता ने हिटलर को राष्ट्रवाद के प्रेरणा प्रतीक के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर स्थित छात्र संघ कार्यालय में महात्मा गांधी की जगह हिटलर की तस्वीर लगाई।

यह वह जगह है जहां छात्रों की प्रेरणा के लिए सुभाषचंद्र बोस, विवेकानंद, नेहरू और जयप्रकाश नारायण इत्यादि व्यक्तित्वों और पीयूएसयू के पूर्ववर्ती नेताओं की तस्वीरें लगी हुई हैं।

इसकी वायरल हुई खबर में 25 जून को वहाँ मनाए गए आपातकाल की तानाशाही विरोधी दिवस का बैनर भी दिखाया गया है। एबीवीपी नेता के अनुसार महात्मा गांधी के विचारों से सहमत नहीं होने के कारण उनकी तस्वीर हटाकर हिटलर की तस्वीर लगायी है। चूंकि हम राष्ट्रवादी हैं और जब हिटलर को पढ़े तो उनका राष्ट्रवाद अच्छा लगा। जिससे यह प्रेरणा मिलती है कि हर व्यक्ति को हिटलर की तरह ही अपने देश के प्रति वफादार होना चाहिए।   

गोदी मीडिया के अधिकांश अखबारों द्वारा इस खबर को दबाये रखने के बावजूद सोशल मीडिया में तस्वीर के साथ इस खबर के वायरल होते ही कैंपस समेत अन्य छात्रों में भी काफी रोष फैल गया। पटना विश्वविद्यालय के सभी वाम और अन्य छात्र संगठनों ने तत्काल एकजुट होकर एबीवीपी नेता के इस कृत्य की तीखी भर्त्सना की। फलतः इस विरोध का नेतृत्व कर रहे 2 छात्रों पर फर्जी मुकदमा भी हो गया।

Adolf Hitler VIRODH2.jpg

29 जून को इस पूरे प्रकरण के खिलाफ एबीवीपी को छोड़ सभी छात्र संगठनों ने प्रतिरोध मार्च निकाला और विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित ज्ञापन दिया। जिसमें विश्व के तानाशाह हिटलर की तस्वीर लगाए जाने को इस विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा के लिए शर्मनाक बताते हुए इस घटना पर तुरत संज्ञान लेने की मांग की गयी। अंधराष्ट्रवाद व नस्लीय श्रेष्ठता के नाम पर लाखों लोगों का कत्लेआम करानेवाले तानाशाही के प्रतीक हिटलर को ‘आदर्श’ बनाए जाने का कड़ा विरोध किया गया ।

छात्र संगठनों ने मांग की-

  • विश्वविद्यालय प्रशासन मामले की जांच कर दोषियों को विश्वविद्यालय से बाहर करे।
  • पीयूएसयू के सभी छात्र अधिकारी से कुकृत्य की नैतिक ज़िम्मेवारी लेते हुए इस्तीफा दें।
  • विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में हिटलर–मुसोलोनी जैसे मानवद्रोही प्रतीकों के इस्तेमाल नहीं होने देने के लिए आवश्यक कदम उठाए तथा इस प्रकरण का विरोध कर रहे दो छात्रों पर लगाए गए फर्जी मुकदमे को वापस लेकर कैंपस में लोकतान्त्रिक वातावरण की गारंटी करे।

मामले को तूल पकड़ता देख विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र संघ कार्यालय को सील करके इस मामले में जल्द समुचित कारवाई करने का आश्वासन देने को मजबूर होना पड़ा। डीएसडब्ल्यू को यह भी स्पष्टीकरण देना पड़ा कि हिटलर की तस्वीर लगाने की कोई अनुमति नहीं ली गयी है।

छात्र संघ के अध्यक्ष व छात्र जदयू नेता को भी सफाई देनी पड़ी कि उनसे पूछे बगैर और उनकी अनुपस्थिती में यह सब हुआ है। लेकिन एबीवीपी नेता और छात्र संघ महासचिव ने हिटलर की तस्वीर लगाने को सही ठहराते हुए साफ तौर पर कह दिया कि इस फोटो को लगाने के लिए प्रस्ताव पास किया गया है।

इस पूरे मामले में राजधानी में ही रह रहे कुलाधिपति महोदय की चुप्पी हैरान करनेवाली है। विश्वविद्यालयों को शिक्षा के साथ साथ देश के भावी संचालक लोकतान्त्रिक नागरिकों के निर्माण का केंद्र माना जाता है। जब वहाँ एक तानाशाह को आदर्श प्रतीक बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा हो और कुलाधिपति महोदय अनभिज्ञ बनकर खामोश रहें तो यकीनन सवाल बनता है। जबकि सर्वविदित है कि छात्रों के लोकतान्त्रिक केंद्र के रूप में पटना विश्वविद्यालय की कितनी गौरवशाली परंपरा रही है। देश की आज़ादी के चल रहे संग्राम में इस विश्वविद्यालय के छात्रों की ज़बरदस्त भागीदारी रही है । सन् 1942 के चर्चित रहे ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन के समय पटना स्थित सचिवालय पर तिरंगा लहराने के क्रम में शहीद हुए सात छात्रों का स्मारक युवाओं के लिए प्रेरणा प्रतीक स्थल बना हुआ है। ‘74 के आपातकाल की तानाशाही के विरोध में हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन का मुख्य केंद्र पटना विश्वविद्यालय ही रहा। विडम्बना है कि उसी आंदोलन के छात्र नेता रहे प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री महोदयों में से किसी ने भी तानाशाही के प्रतीक हिटलर के महिमामंडन पर कुछ नहीं कहा है।

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ पर इन दिनों एबीवीपी व छात्र जदयू यानी एनडीए गठबंधन राजनीति का कब्जा है। आज़ाद मुल्क में संभवतः ये पहली घटना है कि जब किसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में तानाशाह हिटलर को राष्ट्रभक्ति के प्रेरणा प्रतीक बनाकर खुले रूप से महिमामंडित किया गया हो। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फिलहाल हिटलर की तस्वीर हटाकर वहाँ महात्मा गांधी की तस्वीर लगा दी गयी है। लेकिन प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा-जदयू गठबंधन की एनडीए सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया का नहीं आना दर्शाता है कि हिटलर को राष्ट्रभक्ति का प्रतीक आदर्श बनाया जाना महज एबीवीपी छात्र नेता के निजी सोच से ही नहीं हुआ है, बल्कि शासन कर रही वर्तमान सत्ता-राजनीति द्वारा देश पर थोपे जा रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी व सावरकर मार्का राष्ट्रभक्ति के दर्शन को स्थापित करने की ही सुनियोजित साजिश की एक बानगी है। हालांकि यह भी उतना ही स्थापित सत्य है कि बिहार की मिट्टी हमेशा से तानाशाही के खिलाफ लोकतान्त्रिक संघर्षों की धरती रही है। ऐसे में हिटलर को ‘आदर्श राष्ट्रभक्त’ के रूप में स्थापित करने की वर्तमान सत्ता प्रायोजित हरचंद कवायदों के बावजूद बिहार समेत बहुसंख्य लोग हिटलर को मानवद्रोही तानाशाह ही मानते हैं और मानते रहेंगे।

Bihar
PATNA
patna university
ABVP
Adolf Hitler
bjp-jdu
Nitish Kumar
sushil modi

Related Stories

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक

विचार-विश्लेषण: विपक्ष शासित राज्यों में समानांतर सरकार चला रहे हैं राज्यपाल

क्या बिहार उपचुनाव के बाद फिर जाग सकती है नीतीश कुमार की 'अंतरात्मा'!

परीक्षकों पर सवाल उठाने की परंपरा सही नहीं है नीतीश जी!

खोज़ ख़बर: गंगा मइया भी पटी लाशों से, अब तो मुंह खोलो PM

बिहार में सुशासन नहीं, गड़बड़ियों की है बहार!

बिहार में क्रिकेट टूर्नामेंट की संस्कृति अगर पनप सकती है तो पुस्तकालयों की क्यों नहीं?

स्मृतिशेष: गणेश शंकर विद्यार्थी एक प्रतिबद्ध कम्युनिस्ट


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License