NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भाजपा बनाम वाममोर्चा #1 : आंगनवाडी श्रमिकों के बारे में रिकॉर्ड क्या कहते हैं?
विभिन्न राज्यों में भाजपा के शासन के रिकॉर्ड से त्रिपुरा में वाम मोर्चे के रिकॉर्ड के साथ जांच करने की जरूरत है।
सुबोध वर्मा
06 Feb 2018
Translated by महेश कुमार
आंगनवाडी

अपनी तरह की यह पहली चुनावी लड़ाई है, जिसमें  भाजपा ने त्रिपुरा में वाम मोर्चा के खिलाफ अपने आपको मुख्या प्रतिद्विंदी के रूप खड़ा किया है। जबकि पूर्वोत्तर के इस छोटे से राज्य में वाम मोर्चे का इतिहास स्वतंत्रता आन्दोलन से भी पहले का है, यहाँ भाजपा पहली बार चुनौती के तौर पर उभरी है क्योंकि कई कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेता पिछले साल भाजपा में शामिल हो गए, और साथ ही उसने वहां के जनजातीय संगठन देशज पीपुल्स फ्रन्ट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) नामक अलगाववादी संस्था के साथ गठबंधन कर लिया है। भाजपा दावा कर रही है कि वह राज्य को बेहतर प्रशासन देगी, जबकि 25 साल पहले त्रिपुरा में सत्ता में रहने के अपने रिकॉर्ड के आधार पर वाम मोर्चा जीत की उम्मीद कर रहा है।

दावों और काउंटर दावों की जांच का सबसे अच्छा तरीका है कि वाम मोर्चा सरकार के रिकॉर्ड की और बीजेपी की विभिन्न राज्यों की सरकारों से तुलना करना।

यहां कई राज्यों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को दी जा रही मज़दूरी पर एक नजर। आंगनवाड़ी ऐसे केंद्र हैं जहां छह साल की उम्र के बच्चे और गर्भवती और दूध पिलाने वाली मां को दुनिया के सबसे बड़े आईसीडीएस कार्यक्रम के तहत पोषण पूरक दिया जाता है।

anganwaaADI

त्रिपुरा की वाम मोर्चा सरकार, अन्य राज्य सरकारों की तरह, इन श्रमिकों और सहायकों को अतिरिक्त सम्मान प्रदान करता है क्योंकि वे संभवतः केंद्रीय सरकार द्वारा दी गई छोटी राशि पर जीवित नहीं रह सकते हैं। बीजेपी शासित राज्यों की तुलना में, त्रिपुरा के मजदूरों और आँगनवाड़ी के सहायक के लिए मासिक मज़दूरी क्रमशः 5265 और 3524 रूपए उच्चतम है।

केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर 'कर्मचारियों' के लिए 3000 रुपये प्रति माह और 'हेल्पर्स' के लिए 1500 रुपये का वेतन प्रदान करता है। ये श्रमिक कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं उन्हें भी बेहतर मज़दूरी और लाभ वाले नियमित श्रमिकों के रूप में पहचाना जाये लेकिन केंद्रीय सरकार उनकी मांगों को स्वीकार करने से इनकार कर रही हैं और उन्हें 'स्वैच्छिक श्रमिक' के रूप में वर्गीकृत करना जारी रखा हुआ है ताकि वे केवल 'मानदेय' का भुगतान कर सकें। मोदी सरकार ने उनकी मांगों को सहानुभूतिपूर्वक देखने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में चार साल रहने के बाद भी वह पिछली कांग्रेस सरकार के ही कदमों पर चल रही है।

गुजरात में लगभग दो दशकों से बीजेपी का शासन हैं, आंगनवाडी मजदूरों को यहाँ 4750 रुपये मिलते हैं जबकि सहायकों को प्रति माह 2400 रुपये मिलते हैं। और  लगभग 15 वर्षों के निरंतर बीजेपी शासन के बाद मध्यप्रदेश को लें तो यहाँ : श्रमिकों को 5000 रुपये और सहायक प्रति माह 2500 रुपये मिलते हैं।

छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे बड़े जनजातीय आबादी वाले राज्यों में, बीजेपी राज्य सरकारें त्रिपुरा की तुलना में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को लगभग 20-30% कम का भुगतान करती है।

यह आंगनवाड़ी श्रमिकों/सहायकों की लड़ाई सिर्फ मजदूरी का मुद्दा नहीं है। ये कर्मचारी विशेषकर दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में लोगों को एक महत्वपूर्ण सेवा प्रदान कर रहे हैं। शिशुओं और माताओं के लिए बेहतर पोषण उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करते है। यह एक महत्वपूर्ण कार्य है और इसलिए ऐसे कर्मियों, जो इन सेवाओं को प्रदान करते हैं, उन्हें इस प्रयास में अपना पूरा समय समर्पित करने के लिए पर्याप्त रूप से सरकार भुगतान करना होगा। इन लोगों की यह सेवा के लिए त्रिपुरा सरकार को अच्छी तरह से भुगतान करने की नीति को प्रेरित करती है।

और यह दृष्टि की ही कमी है – कि लोगों के प्रति उदासीनता, विशेष रूप से आदिवासी समुदायों के प्रति - जो लगता है बीजेपी की राज्य की सरकारों अपांग बना रहा है।

आंगनवाडी
त्रिपुरा सरकार
मोदी सरकार
बीजेपी
न्यूनतम मजदूरी
आंगनवाड़ी महिलाएं
गुजरात मॉडल

Related Stories

किसान आंदोलन के नौ महीने: भाजपा के दुष्प्रचार पर भारी पड़े नौजवान लड़के-लड़कियां

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

सत्ता का मन्त्र: बाँटो और नफ़रत फैलाओ!

जी.डी.पी. बढ़ोतरी दर: एक काँटों का ताज

5 सितम्बर मज़दूर-किसान रैली: सबको काम दो!

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

लातेहार लिंचिंगः राजनीतिक संबंध, पुलिसिया लापरवाही और तथ्य छिपाने की एक दुखद दास्तां

माब लिंचिंगः पूरे समाज को अमानवीय और बर्बर बनाती है

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है


बाकी खबरें

  • Ramdev
    न्यूज़क्लिक टीम
    पेट्रोल डीजल के दाम याद दिलाया तो धमकाने लगे रामदेव!
    31 Mar 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं पेट्रोल डीजल के दिन प्रतिदिन बढ़ते दामों की । उसके साथ ही उन्होनें रामदेव द्वारा पत्रकार के पेट्रोल के सवाल पर किये गए…
  • सबरंग इंडिया
    बाघ अभयारण्य की आड़ में आदिवासियों को उजाड़ने की साज़िश मंजूर नहीं: कैमूर मुक्ति मोर्चा
    31 Mar 2022
    ‘‘जल-जंगल-जमीन हमारा आपका, नहीं किसी के बाप का’’, ’‘ये धरती सारी हमारी, जंगल-पहाड़ हमारे’’, वन विभाग की जागीर नहीं’’, ‘‘लोकसभा न विधानसभा, सबसे बड़ी ग्रामसभा’’, ‘‘बाघ अभ्यारण्य हटाना है, जल-जंगल जमीन…
  • विक्रम सिंह
    किसान आंदोलन: मुस्तैदी से करनी होगी अपनी 'जीत' की रक्षा
    31 Mar 2022
    देश के किसानों की ज़मीन पर सरकार की मदद से कॉर्पोरेट चोरी की एक बड़ी कोशिश को, देश के किसानों ने एक साझे ऐतिहासिक आंदोलन से असफल कर दिया। परंतु मोदी सरकार अभी भी पूरा प्रयास कर रही है कि हेरा फेरी के…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिन दहाड़े सुरक्षा बलों के सामने केजरीवाल के घर पर हमला, सिसोदिया बोले - भाजपा के गुंडों ने किया हमला
    31 Mar 2022
    आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि यह हमला केजरीवाल की हत्या की साजिश थी। इसको लेकर सभी विपक्षी दलों ने भी बीजेपी की निंदा की है।  
  • एम. के. भद्रकुमार
    काबुल में आगे बढ़ने को लेकर चीन की कूटनीति
    31 Mar 2022
    इतना तो तय है कि बदले हुए हालात में अफ़ग़ानिस्तान में बीआरआई परियोजनाओं की राह में कोई रोड़ा नहीं अटकने जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License