NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारत बंद के बाद राजस्थान में दलितों पर हुए हमले
राजस्थान के करौली ज़िले के हिंडोन में दो दलितों के घरों पर हमले किये गए I ये घटना दलित संगठनों द्वारा किये गए भारत बंद के आन्दोलन के एक दिन बाद हुई I
ऋतांश आज़ाद
04 Apr 2018
dalit houses burnt

राजस्थान के करौली ज़िले के हिंडोन में दो दलितों के घरों पर हमले किये गए, इनमें से एक बीजेपी सरकार में विधायक हैं और दूसरे कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं I ये घटना दलित संगठनों द्वारा किये गए भारत बंद के आन्दोलन के एक दिन बाद हुई I

पुलिस का कहना है कि सवाई माधोपुर और करौली के इलाकों में 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान 15,000 से 20,000 हज़ार प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था I इसके बाद 3 अप्रैल को उच्च जातियों और गैर-दलितों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया और इसी दौरन ये हमले किये गए I

बताया जा रहा है कि 3 अप्रैल को 3000 से 4000 लोगों की इस भीड़ ने दलितों की बस्ती में दाखिल होने की कोशिश की पर वो कामयाब नहीं हो पाए I इसके बाद उन्होंने दोनों दलित राजनेताओं राजकुमारी जाटव जो अभी बीजेपी की विधायक हैं और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे और पूर्व वधायक भरोसीलाल जाटव के घरों पर हमला किया I

भरोसीलाल जाटव का कहना है कि सोमवार को भीड़ ने उनकी गाड़ी जला दी थी और कल यानी 3 अप्रैल को उनके घर पर हमला हुआ जिसमें उनका घर जला दिया गया I उनका ये भी आरोप है कि पुलिस इस दौरान मूक दर्शक बनकर देखती रही I

पुलिस के मुताबिक राजस्थान भर में 2 और 3 अप्रैल को हुई हिंसा की घटनाओं के सिलसिले  में अब तक 1,000 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है I इसके आलावा करौली ज़िले में कर्फ्यू लगा दिया गया है और वहाँ इन्टरनेट को भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है I

बता दें कि 2 अप्रैल को देश भर में दलित संगठनों द्वारा भारत बंद का आह्वान किया गया थाI ये बंद 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा SC/ST एक्ट में बदलाव करने के निर्णय के खिलाफ थाI दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में SC/ST एक्ट की तीन मुख्य बिन्दुओं को बदलने का आदेश दिया था I सुप्रीम कोर्ट ने कहा SC/ST एक्ट के अंतर्गत मामलों में अग्रिम ज़मानत के प्रावधान होना चाहिए, किसी भी सरकारी कर्मचारी को इस एक्ट के अंतर्गत गिरफ्तार करने से लिए पहले उच्च अधिकारियों से अनुमति ज़रूरी होगी और पहले पुलिस अधिकारी ये तय कर लें कि अपराध हुआ है या नहीं उसके बाद ही FIR की जाए I

SC/ST एक्ट में इन बदलावों के और सरकार के इस मामले में लचर रवैये के खिलाफ कल देश भर में दलित सड़कों पर उतरे I दलित नेताओं का कहना है कि इन तीनों ही बदलावों से SC/ST एक्ट एक लचर कानून बन जायेगा I

इसमें समझने की बात ये है कि इस कानून की ज़रूरत क्यों है ? और क्यों यह निर्णय इतने गुस्से का कारण बना ? दरअसल, दलित और आदिवासी समाज देश भर में सबसे गरीब और सामाजिक तौर पर बहिष्कृत तबका रहा है I जातिव्यवस्था के अंतर्गत ज़ोर ज़ुल्म हमेशा से दलितों और पिछड़ों के हिस्से में सबसे ज़्यादा आये हैं I भारत का पूरा इतिहास और हाल के समय में हुई ऊना की घटना, मूछ रखने के लिए पीटा जाना, घोड़े पर चड़ने के लिए और गरबा देखने के लिए क़त्ल किया जाना इस बात की गवाही देते हैं I

इसके आलावा अगर NCRB (National crime record beureau) के डेटा पर नज़र डाली जाए तो पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में दलितों पर लगातार हिंसा बढ़ी है I 3 अप्रैल में लोक सभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए यूनियन मिनिस्टर हंसराज गंगाराम ने कहा कि NCRB के ही डेटा के अनुसार 2016 में   SC/ST समुदाय के खिलाफ 47,000 मामले दर्ज़ हुए थे और 40,774 मामलों में SC/ST एक्ट लगाया गया था I उन्हीं के मुताबिक इन मामलों में सज़ा की दर सिर्फ 25.8% है I

यही वजह है कि 2 अप्रैल को इतनी बड़ी मात्रा में दलित सडकों पर नज़र आये I उनका ये आरोप भी है कि ज़्यादातार मामलों में ये एक्ट लागू नहीं किया जाता और दलितों और आदिवासियों की सामाजिक स्थिति की वजह से वह बहुत मामलों में कुछ कर नहीं पाते I दलित नेताओं का कहना है कि इस कानून के लचर हो जाने से उनका पहले से ही कमज़ोर पक्ष और भी कमज़ोर हो जायेगा I

2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान देश भर में हुई हिंसा में 10 लोगों की मौत होने की बात सामने आ रही है I ये घटनाएँ बेहद निंदनीय हैं I लेकिन हमें ये भी समझना होगा कि इसमें से बहुत सी मौतें उच्च जातियों से दलितों के टकराव के कारण हुईं I मरने वाले ज्यादतार लोग भी दलित समुदाय के ही हैं उदहारण के तौर पर इन घटनाओं में सबसे ज़्यादा मौतें मध्य प्रदेश में हुईं, जहाँ 8 लोगों की मौत हुई जिनमें से 6 दलित थे I  न्यूज़क्लिक की जाँच के मुताबिक इनमें से 5 दलितों की मौत उच्च जातियों द्वारा की गयी गोलीबारी से हुई और 1 की पुलिस की गोलियों से I इनके आलावा 2 उच्च जातियों के लोगों में से 1 की मौत पुलिस की गोली से हुई I

इसके साथ ही राजस्थान में भी जहाँ जहाँ हिंसा हुई वहाँ से ये रिपोर्ट आ रही है कि भीड़ में कई असामाजिक तत्व मौजूद थे जिन्होंने हिंसा भड़काई I वहाँ भी पुलिस की गोली से मरने वाला अलवर ज़िले का एक शक्स है I

दलित शोषण मुक्ति मंच, राजस्थान सचिव किशन मेधवाल ने कहा “दक्षिणपंथी संगठनों जैसे बजरंग दल ,VHP, करणी सेना ने भारत बंद के विरोध में फेसबुक पर दलित विरोधी प्रचार किया और गैरदलितों से हथियार रखने की अपील की I इसके बाद जहाँ जहाँ बंद के लिए दलित शांतिपूर्वक बंद करा रहे थे वहाँ हमले हुए और उसके आलावा दलितों की भीड़ में इस तरह के लोग घुस गए और पुलिस पर पत्थरबाज़ी और आग ज़नी की I फलौदी में 3000 दलितों की शांतिपूर्वक भीड़ पर दक्षिणपंथी संगठनों(VHP और करणी सेना) ने हमला किया और पुलिस वहाँ मूक दर्शक बनी रही I उन्होंने वहाँ मौजूद बाबा साहब अम्बेडकर की मूर्ति भी तोड़ी और वहाँ से जाने वाले लोगों पर 20 जगहों पर भी हमला किया I प्रदेश भर में पुलिस ने निर्दोष लोगों पर फ़र्ज़ी मुकदमें किये हैं और उन्होंने जेल में डाला है I फलौदी में मेरे अपने भाई के घर हमला किया गया था जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज़ की है I”

दलित उत्पीड़न
दलित प्रतिरोध
भारत बंद
राजस्थान
बीजेपी

Related Stories

भारत बंद की बंगाल में ज़ोरदार तैयारी, क्या बदलेगा ममता का रवैया?

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

बिहार के ग्रामीण खेत मज़दूरों का ऐलान : 8 जनवरी 2020 को भारत बंद सफल करेंगे!

राजस्थान : जन आंदोलनों के साथ उभरता वामपंथी विकल्प

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

आठ साल से जारी है किसानों का बांगड़-बिरला सीमेंट प्लांट के खिलाफ संघर्ष

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है

भाजपा शासित राज्य: सार्वजनिक परिवहन का निजीकरण

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष


बाकी खबरें

  • spain
    डीडब्ल्यू
    स्पेन : 'कंप्यूटर एरर' की वजह से पास हुआ श्रम सुधार बिल
    08 Feb 2022
    स्पेन की संसद ने सरकार के श्रम सुधार बिल को सिर्फ़ 1 वोट के फ़ासले से पारित कर दिया- विपक्ष ने कहा कि यह एक वोट उनके सदस्य ने ग़लती से दे दिया था।
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव 2022 : बदहाल अस्पताल, इलाज के लिए भटकते मरीज़!
    08 Feb 2022
    भारतीय रिजर्व बैंक की स्टेट फाइनेंस एंड स्टडी ऑफ़ बजट 2020-21 रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड सरकार के द्वारा जन स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च किया गया है।
  • uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    चमोली जिले का थराली विधानसभा: आखिर क्या चाहती है जनता?
    07 Feb 2022
    उत्तराखंड चुनाव से पहले न्यूज़क्लिक की टीम ने चमोली जिले के थराली विधानसभा का दौरा किया और लोगों से बातचीत करके समझने का प्रयास किया की क्या है उनके मुद्दे ? देखिए हमारी ग्राउंड रिपोर्ट
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म का कार्ड नाजी दौर में ढकेलेगा देश को, बस आंदोलन देते हैं राहत : इरफ़ान हबीब
    07 Feb 2022
    Exclusive इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने देश के Living Legend, विश्व विख्यात इतिहासकार इरफ़ान हबीब से उनके घर अलीगढ़ में बातचीत की और जानना चाहा कि चुनावी समर में वह कैसे देख रहे हैं…
  • Punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाबः बदहाल विश्वविद्यालयों पर क्यों नहीं बात करती राजनैतिक पार्टियाँ !
    07 Feb 2022
    पंजाब में सभी राजनैतिक पार्टियाँ राज्य पर 3 लाख करोड़ के कर्ज़े की दुहाई दे रही है. इस वित्तीय संकट का एक असर इसके विश्वविद्यालयों पर भी पड़ रहा है. अच्छे रीसर्च के बावजूद विश्वविद्यालय पैसे की भारी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License