NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
भारतीय डाक विभाग को घाटा क्यों?
यदि मोदी जी चाहते तो एक झटके में इसे फायदे में ला सकते थे यदि वह डिजिटल पेमेंट की कमान इस विभाग के हाथों में दे देते तो!, ...लेकिन उन्हें तो पेटीएम का फायदा करवाना था...! उन्हें जियो मनी के साथ स्टेट बैंक की पार्टनरशिप करवानी थी...!
गिरीश मालवीय
17 Apr 2019
भारतीय डाक
Image Courtesy: Panchdoot

थोड़े दिनों बाद आप एक ब्रेकिंग हेडलाइन देखेंगे कि.... 'इंडियन गवर्नमेंट कंपनी' लाखो करोड़ के घाटे में'

अंदर छोटे शब्दो मे लिखा आएगा 'क्या इसे अम्बानी को बेच दिया जाना चाहिए?'

आप हंस रहे है! लेकिन यह सच है ऐसी खबरों की शुरुआत हो चुकी है!

मंगलवार को आयी एक खबर ने सबका ध्यान खींचा उस ख़बर का शीर्षक कुछ यूं था 'सरकारी कम्पनी इंडिया पोस्ट घाटे में'

अंदर खबर यह थी कि 'बीसीएनएल और एयर इंडिया के बाद अब सरकार की एक और कंपनी इंडिया पोस्ट घाटे में चल रही है। बल्कि इस इंडिया पोस्ट घाटे में बाकी दोनों कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। बीते तीन वित्त वर्ष में इंडिया पोस्ट का घाटा 150% बढ़ गया है। यानी 2018-19 में यह घाटा बढ़कर 15000 करोड़ पहुंच गया है। अब यह सबसे ज्यादा घाटे वाली सरकारी कंपनी हो गई है।'

आज से पहले आपने किसी कम्पनी इंडिया पोस्ट का नाम सुना है? असलियत में यह कोई कम्पनी नहीं है यह भारतीय डाक विभाग का ब्रांड नेम है और जिसे कम्पनी का घाटा बताया जा रहा है वह दरअसल भारतीय डाक विभाग का घाटा है अब सरकार के बहुत से विभाग घाटे में चल रहे हैं... तो आप बताइये क्या किया जाना चाहिए?

सवाल यह है कि भारतीय डाक विभाग को घाटा क्यों हो रहा है। 2015-16 में डाक विभाग का घाटा 6,007.18 करोड़ रुपये का रहा था तब भी यह कंट्रोल में था लेकिन जैसे ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की गई घाटा तिगुना हो गया। कायदे से पत्रकारों को यह हेडलाइन बनानी थी कि 'इंडिया पोस्ट कम्पनी के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ क्यों?'

भारतीय डाक विभाग के पास 1,54,802 पोस्ट ऑफिस हैं जिसमें से 812 हेड ऑफिस हैं, 24,566 सब पोस्ट ऑफिस और 1,29,424 ब्रांच पोस्ट ऑफिस हैं। लाखों करोड़ की संपत्ति होगी, लाखों कर्मचारी काम करते हैं.....सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होगी तो खर्चा तो बेतहाशा बढ़ेगा ही ओर अर्निंग के नाम पर कुछ नहीं है!

यदि मोदी जी चाहते तो एक झटके में इसे फायदे में ला सकते थे यदि वह डिजिटल पेमेंट की कमान इस विभाग के हाथों में दे देते तो!, ...लेकिन उन्हें तो पेटीएम का फायदा करवाना था... उन्हें जियो मनी के साथ स्टेट बैंक की पार्टनरशिप करवानी थी... यही पार्टनरशिप यदि वह डाक विभाग के पोस्ट पेमेंट बैंक के साथ करवा देते तो इस नए पेमेंट बैंक को लाखों कस्टमर एक साथ मिल जाते। कर्मचारियों को काम भी मिलता। लोगों को गाँव गाँव मे फैले पोस्ट ऑफिस के नेटवर्क का फायदा भी मिलता।

लेकिन कर्मचारी तो चन्दा देता नहीं है, चन्दा तो जियो देता है इसलिए ऐसी खबरें आपको दिखाई जाती है ताकि आप ऐसे विभागों के कर्मचारियों की खूब लानत मलामत करो ओर प्राइवेटाइजेशन के समर्थक बन जाओ...

यह खबर भी इसी उद्देश्य को पूरा करने के हिसाब से डिजाइन की गयी है......हमारा काम आपको सच्चाई बताना था तो वो बता दी।

इस पोस्ट पर एक कर्मचारी का कमेंट आया है, पढ़िए:-

...इसी विभाग से जुड़ा हूँ। विभाग के कर्मचारी बड़ी विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। प्रतिदिन निर्धारित समय से 2-3 घंटे देर तक बैठते हैं। विभाग आधुनिकीकरण और तकनीक पर अच्छी खासी रकम खर्च करता है लेकिन कई जगह काम करने के लिए ढंग की कुर्सी मेज़ भी नहीं हैं। सिंगल हैंड सब ऑफिस किराये की इमारतों में हैं जो जर्जर हालत में हैं। बरसात में पानी टपकता है। एक बार ऐसे ही एक डाकघर में अधिकारी की विजिट हुई, अधिकारी ने देखा कि डाकघर में जो कंप्यूटर लगा है उस पर छत से पानी टपक रहा है। चूंकि एकल पदीय डाकघर में जैसे तैसे एक टेबल कुर्सी और कुछ रिकॉर्ड रखने भर की ही जगह होती है, अधिकारी ने पोस्टमास्टर को बाकायदा हिदायत दी कि वह कंप्यूटर को अपनी चेयर की जगह रखे और खुद कंप्यूटर वाली जगह पर बैठा करे जहाँ पानी टपक रहा था ताकि विभागीय कंप्यूटर को नुकसान न पहुँचे। यह उदाहरण ही कर्मचारियों के हालात बयान कर देता है। फिर भी काम होता है। कोई खाली बैठा शायद ही दिखे। जब भी किसी विभाग के घाटे पर होने की बात चलती है लोग घाटे का ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ देते हैं। कर्मचारियों को अगर अपनी ज़रूरत के हिसाब से खर्च करने भर को पैसे मिल जाते हैं तो इन पत्रकारों के पेट में बल पड़ने लगते हैं जबकि ये खुद तृतीय श्रेणी कर्मचारी से कम मेहनत करके भी उससे 3 गुना कमा लेते हैं।
असली कारण न तो कर्मचारियों की मक्कारी है और न ही उन्हें मिलने वाली तनख्वाह। बात यह है कि डाक विभाग के पारंपरिक काम चिट्ठी, मनीऑर्डर, वी.पी. वगैरा तकनीक के विकास के साथ घटते चले गए हैं। रेवेन्यू के लिए विभाग अपने स्तर पर छोटे मोटे एजेंसी वर्क बाहर से ले रहा है लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण ये छिटपुट काम ऊंट के मुँह में जीरा भर हैं। इसके अलावा एक बात और है, डाक विभाग अल्प बचत योजनाओं के तहत डाकघर बचत बैंक का काम करता है। कर्मचारियों के श्रम का लगभग 75 प्रतिशत इसी में खर्च होता है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये बैंकिंग सेवाएं मूलतः वित्तमंत्रालय की हैं जिन्हें डाक विभाग एजेंसी के रूप करता है। इससे जो भी धन प्राप्त होता है वो पूरा डाक विभाग को न मिलकर महज़ लेनदेन की संख्या के आधार पर देय comission इस विभाग को मिलता है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। यह टिप्पणी उनके फेसबुक पेज से साभार ली गई है।)

INDIA POST
भारतीय डाक
डाक विभाग
Indian Postal Department
economic crises
Narendra modi
Modi government
PTM
Jio
General elections2019

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़

कार्टून क्लिक: चुनाव ख़तम-खेल शुरू...

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक


बाकी खबरें

  • covid
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटो में क़रीब ढाई लाख नए मामले, एक्टिव मामले 11 लाख के पार 
    13 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,47,518 नए मामले सामने आए हैं। और एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 11 लाख 17 हज़ार 531 हो गयी है।
  • election
    अजय कुमार
    चंद रुपए खाते में डालकर वोट हड़पने की रणनीति आम क्यों हो गई है?
    13 Jan 2022
    चंद रुपए खाते में डालने और चंद राहतें पहुंचाने वाली भाजपा, आम आदमी पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी की रणनीति का क्या मतलब है?
  •  Catholic Association of Goa
    सबरंग इंडिया
    कैथोलिक एसोसिएशन ऑफ गोवा ने अधिकारियों से सेंट जोसेफ वाजो पर्व के दौरान शांति सुनिश्चित करने को कहा
    13 Jan 2022
    पारंपरिक उत्सव 16 जनवरी को आयोजित होने वाला है, हालांकि, ऐसी आशंकाएं हैं कि कुछ "दक्षिणपंथी संगठन शरारत कर सकते हैं"
  • KHOJ KHABER
    खोज ख़बर: स्वामी प्रसाद मौर्य तो झांकी है, पिक्चर अभी बाक़ी है, मोदी जी?
    12 Jan 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने भाजपा नेता, योगी सरकार में मंत्री ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफ़े को पिछले कुछ समय से भाजपा का साथ छोड़ रहे नेताओं की घटना के साथ जोड़ते हुए बताया…
  • कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन
    एम.ओबैद
    कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन
    12 Jan 2022
    कोरोना काल में अपनी जान की बाज़ी लगा देने वाले डॉक्टरों को वेतन भुगतान में देरी को लेकर जूझना पड़ा है। यह सिलसिला अब भी जारी है। चेन्नई के डॉक्टरों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला जिसकी वजह से उन्हें…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License