NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
चुनावों के बीच 'बेरोज़गारी संकट गहराया’
सीएमआईई के ताज़े आंकड़े से पता चलता है कि बेरोज़गारी दर लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद मोदी एंड कंपनी इस बड़े संकट से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए हवाई हमले और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भुनाने में लगी है।

सुबोध वर्मा
24 Apr 2019
चुनावों के बीच 'बेरोज़गारी संकट गहराया’

संकट के समय अगर ग़ैर ज़िम्मेदाराना निर्णय की बात की जाए तो वर्तमान समय में भारत सबसे अच्छा उदाहरण है। द्वेषपूर्ण चुनाव प्रचारों के बीच देश नौकरियों के संकट के अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। कई सर्वेक्षणों में इकट्ठा किए गए दस्तावेज़ और देश भर से आ रही रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) का नवीनतम डेटा भी फिर से इस बात की पुष्टि करता है। इसके अनुसार 22 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में बेरोज़गारी दर 7.4% रही जो दो साल में सबसे अधिक है।

इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) और सभी साध्वी, योगी और प्रचारक बेरोजगारी के प्रति उदासीन बने एक चुनावी बैठक से दूसरी बैठक कर रहे हैं। वे 'देश की रक्षा करने’ और ’दुश्मनों से बदला लेने’ और बालाकोट हवाई हमलों की बात करते हैं। लेकिन इस बड़े संकट का कोई ज़िक्र नहीं है जिसका असर उन परिवारों पर रहा है जिनके बेटे और बेटियां वर्षों शिक्षा के हासिल करने के बाद भी नौकरी नहीं पा रहे हैं।

सर्वेक्षण से इकट्ठा किए गए सीएमआईई का डेटा देश में नियमित रूप से अपडेट किए गए रोज़गार आंकड़े का एकमात्र स्रोत बनकर सामने आया है। इस सरकार ने विभिन्न श्रम ब्यूरो सर्वेक्षणों के प्रतिस्थापन के रूप में पिछले साल पहली बार राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) द्वारा किए गए पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) को छिपा दिया है।

इस डेटा से पता चलता है कि मई 2017 में बेरोज़गारी 4% थी जो मई 2018 में बढ़कर 5.1% हो गई और इस साल अप्रैल के तीसरे सप्ताह में रिकॉर्ड 7.41% हो गई है।

jobs.jpg

हाल ही में बेहतर प्रशासन और चुनावी सुधारों के लिए काम करने वाला समूह एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने मतदाताओं के लिए शासन विधि के मुद्दों पर राज्यवार रिपोर्ट जारी की। अपनी सभी 36 रिपोर्टों में बेहतर रोज़गार के अवसरों को सबसे बड़ी चिंताओं की श्रेणी में रखा था।

इससे पहले एक अन्य सीएमआईई विश्लेषण ने बताया था कि 2013-14 के बाद से कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को भुगतान किए गए मुआवजे की वृद्धि दर में लगातार गिरावट आई।

सीएमआईई के विश्लेषण के अनुसार, “2013-14 में कर्मचारियों को मुआवजा 25 प्रतिशत तक बढ़ा। 2014-15 में वृद्धि दर आधा होकर 12 प्रतिशत हो गई और फिर 2016-17 में यह गिरकर 11 प्रतिशत हो गई। 2017-18 में विकास दर गिरकर 8.4 फीसदी पर आ गई। इससे यह अनुमान लगाना पूरी तरह से ग़लत नहीं होगा कि नई भर्ती के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्र की रुचि में काफी तेज़ी से गिरावट आई है।”

इससे मोदी और उनके समर्थकों द्वारा प्रचारित औपचारिक क्षेत्र की नौकरियों में वृद्धि की मिथक धराशायी हो गई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा नियमित रूप से सामने लाए गए भविष्य निधि नामांकन के आंकड़ों पर भरोसा करते हुए गलत तरीके से वे ऐसा कर रहे हैं। इन आंकडों में पहली बार रोज़गार पाए लोग शामिल नहीं हैं और वास्तव में इस योजना को हर महीने छोड़ने वाले लाखों लोगों की तरफ संकेत देता है जबकि लाखों अन्य लोगों को इससे जुड़ने के रूप में भी दिखाया जाता है।

हो रहे लोकसभा चुनावों में यह संभावना है कि गंभीर बेरोज़गारी संकट विशेष रूप से हर साल एक करोड़ नौकरियां देने के अपने वादे के कारण मोदी सरकार से मतदाताओं के गुस्से के रुप में सामने आएगा। इस बीच मोदी एंड कंपनी वास्तविक जीवन की कड़वी सच्चाईयों को नज़रअंदाज़ करते हुए संवेदनहीन हो जाते हैं।

unemployment rate
Jobs Crisis
CMIE data
nsso
Labour Bureau
Narendra modi
BJP government
balakot
EPFO

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • LAW AND LIFE
    सत्यम श्रीवास्तव
    मानवाधिकारों और न्याय-व्यवस्था का मखौल उड़ाता उत्तर प्रदेश : मानवाधिकार समूहों की संयुक्त रिपोर्ट
    30 Oct 2021
    29 अक्तूबर को जारी हुई एक रिपोर्ट ‘कानून और ज़िंदगियों की संस्थागत मौत: उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा हत्याएं और उन्हें छिपाने की साजिशें’ हमें उत्तर प्रदेश में मौजूदा कानून व्यवस्था के हालात को बेहद…
  • migrant
    सोनिया यादव
    महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या
    30 Oct 2021
    एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं
    30 Oct 2021
    पिछले 3 चुनावों का अनुभव गवाह है कि महज जातियों के जोड़ गणित से भाजपा का बाल भी बांका नहीं हुआ, इतिहास साक्षी है कि जोड़-तोड़ से सरकार बदल भी जाय तो जनता के जीवन में तो कोई बड़ी तब्दीली नहीं ही आती, संकट…
  • Children playing in front of the Dhepagudi UP school in their village in Muniguda
    राखी घोष
    ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट इस तथ्य का खुलासा करती है कि जब अगस्त 2021 में सर्वेक्षण किया गया था तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28% बच्चे ही नियमित तौर पर पठन-पाठन कर रहे थे, जबकि 37% बच्चों ने अध्ययन बंद कर दिया था।…
  • climate change
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भारी हथियारों से लैस एजेंटों को तैनात करके, परिष्कृत और महंगी निगरानी प्रणाली, मानव रहित हवाई प्रणाली आदि विकसित करके पलायन को रोकने के लिए एक ''जलवायु दीवार'' का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License