NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली के दरवाज़े पर साम्प्रदायिकता की दस्तक
महेश कुमार
15 Jul 2015

 ‘अब हमारा हिन्दुस्तान, भागो मुल्ला पाकिस्तान’, संघ के कार्यकर्ता यह नारा श्रीराम कॉलोनी में बहुमत मुस्लिम आबादी के बीच बने एक पार्क में लगा रहे हैं। यह शाखा वहां रहे लोगो के विरोध के बावजूद जबरदस्ती लगाई जा रही है। शाखा के दौरान उकसाव भरे नारे लगाने के अलावा वे कार्यकर्ताओं को अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले करने का प्रशिक्षण भी देते हैं। सुबह के वक्त राजीव पार्क में जब शाखा लगती है तो वहां की आबो-हवा में ही सांप्रदायिक तनाव की बू आने लगती है। इस पार्क के इर्द-गिर्द मुस्लिम आबादी बहुमत में है और जब वे लोग शाखा में लगाए जाने वाले साम्प्रदायिक और मुस्लिम विरोधी नारों को सुनते हैं तो एक अजीब सी बेचैनी पैदा होने लगती है। शाखा किसी शारीरिक कसरत या सांस्कृतिक कार्यकर्म के लिए नहीं बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए लगाई जा रही थी। उनकी गतिविधियों से यह स्पष्ट था कि उनका एकमात्र निशाना इलाके में रह रहे मुसलमान समुदाय के लोग हैं।

                                                                 

हमने स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां कुछ महिलाओं से बात की जिनके घर पार्क के सामने हैं। मीना बेगम जिनकी उम्र करीब 45 वर्ष है, कहती हैं कि यह पार्क हमेशा से ही आम पहलकदमी और घूमने फिरने का स्थान रहा है। यहाँ सुबह और शाम को अक्सर महिलायें और बच्चे घूमने व खेलने के लिए एकत्रित होते थे। इनमे सभी धर्मों के लोग शामिल होते थे। मीना बेगम ने यह भी बताया कि साल में एक बार ईद की नामाज़ा जरूर अदा की जाती थी वह भी इसलिए क्योंकि यहाँ की बहुमत आबादी मुस्लिम है और ईद की नमाज़ यहाँ अदा करना इलाके की एक रवायत बन गयी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इसी पार्क में दशहरा का भी आयोजन होता था. मीना आगे कहती हैं कि जब से संघ ने यहाँ शाखा खोली है और रामलीला खेलनी शुरू की है तब से इलाके में साम्प्रदायिक तनाव का खौफ बनने लगा है। वे कहती हैं कि शाखा की कार्यवाही और उनके मुस्लिम विरोधी नारों से कईं बार तो माहौल इतना खौफज़दा हो जाता है कि लगता है कि अब स्थिति काबू से बाहर हो जायेगी। उन्हें लगता है कि इस तनाव भरे माहौल में अगर किसी शरारती तत्व ने कुछ कर दिया तो पूरा मौहल्ला साम्प्रदायिकता की चपेट में आ जाएगा और त्रिलोकपुरी जैसे हालात बन जायेंगे। वे यह भी कहती हैं हैं कि अगर उन्हें नमाज़ से परेशानी है तो हम नमाज अदा नहीं करेंगे लेकिन फिर इस पार्क को आम खेलने और टहलने के लिए सुरक्षित किया जाए ताकि साम्प्रदायिक उन्माद पैदा होने की कोई भी गुंजाईश बाकी न रहे। उन्होंने यह भी बताया कि संघ ने गैर-कानूनी ढंग से पार्क में एक चबूतरा बना लिया है और उस चबूतरे पर वे शाखा करते हैं। इस गैर-कानूनी कार्यवाही पर प्रशासन ने कोई भी कार्यवाही नहीं की है। वे चेतावनी देती हैं कि अगर प्रशासन ने समय रहते कोई कार्यवाही नहीं की तो हालात काबू से बाहर जा सकते हैं और इसका शिकार सबसे ज्यादा बच्चे और महिलायें बनेंगी।

                                                            

श्रीराम कॉलोनी में मुस्लिम आबादी 85 से 90 प्रतिशत और हिन्दू व अन्य समुदायों से जुड़े लोगों की आबादी 10 से 15 प्रतिशत है। यह दिल्ली की अन्य बस्तियों की तरह एक अनाध्रिकृत कॉलोनी है जिसमें गरीब-मजदूर तबका जीवन बसर करता है। यह बस्ती उत्तर प्रदेश के लोनी से सटी हुयी है। इसके आस-पास की कोलोनियाँ खजूरी, सोनिया विहार और गंगा विहार भी अनधिकृत हैं। ये बस्तियां शासक पार्टियों के लिए बहुत बड़ा वोट-बैंक है और सभी शासक पार्टियां इन कोलोनियों को अधिकृत करवाने का नारा लगाती रही हैं। यहाँ आम जन-सुविधाओं में बुनियादी कमी है। गलियों में खडंजे नहीं हैं, पार्क कच्चे हैं, बारिश के दिनों में पानी भर जाता है। बेहतर स्कूलों का नितांत अभाव है। बावजूद इसके यहाँ के लोग बड़े मेल-मिलाप के साथ रहते हैं। आज तक इस क्षेत्र में कोई सांप्रदायिक घटना नहीं घटी है।

 

तरन्नुम, उम्र 29 वर्ष तो इस माहौल को देखकर कईं बार अवसाद (डीपरेशन) की शिकार हो चुकी हैं। इलाके के लोगो और जनवादी महिला समिति की कार्यकर्ताओं ने उन्हें समझा कर उनकी हिम्मत को बढ़ाया है। तरन्नुम कहती है कि हालात बहुत खराब हैं। शाखा वाले हमारे घरों की तरफ मुहं करके पेशाब करते हैं। जोर-जोर से नारे लगाते हैं और जब शाखा छूटती है तो लाठियां पटकते हुए गलियों से निकलते हैं, इसके चलते कईं परिवारों ने खासकर लड़कियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है क्योंकि जब शाखा छूटती है तभी बच्चियों का स्कूल जाने का समय होता है। तरन्नुम कहती हैं कि यहाँ के निवासी प्यार-मोहब्बत से रहना चाहते हैं लेकिन बाहर से आकर संघ के लोग जब यहाँ शाखा लगाते हैं तो माहौल खराब होने लगता है और भय का वातावरण बन जाता है।

नर्गिस उम्र ३५ वर्ष, जनवादी महिला समिति की कार्यकर्ता है। वे कहती हैं कि बार-बार पुलिस को इस बाबत खबर देने के बावजूद शाखा को बंद नहीं करवाया गया है। पुलिस भी जानती है कि ये लोग यहाँ पर साम्प्रदायिक नारे लगा कर उन्माद पैदा करना चाहते हैं लेकिन वे कोई भी शख्त कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि केंद्र में संघ समर्थित भाजपा सरकार बैठी है और पुलिस सीधे केंद्र के इशारे पर काम करती है। पूछने पर उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र करावल नगर विधान सभा का हिस्सा है और यहाँ की गरीब जनता खासकर मुसलामानों ने आम आदमी पार्टी के विधायक कपिल मिश्रा जोकि भाजपा नेता का बेटा है और दिल्ली सरकार में कानून मंत्री है, भी इस मामले कोई सहायता नहीं कर रहा है। कई दफा गुहार लगाने के बाद भी कपिल मिश्रा ने कोई कार्यवाही नहीं की और न ही जनता के साथ आकर खड़ा हुआ. यहाँ के लोगो ने सी.पी.आई.एम. की नेता बृंदा करात के न्रेतत्व में पुलिस आयुक्त से मुलाक़ात कर एक ज्ञापन दिया है और कार्यवाही का इंतज़ार कर रहे हैं। साथ ही इलाके में नौज़वान भारत सभा के कार्यकर्ता लोगो के बीच सांप्रदायिक सदभाव बरकरार रखने के लिए अनेक प्रयास कर रहे हैं। नौज़वान भारत सभा के योगेष ने बताया कि उनका संगठन दोनों समुदाय के लोगो के साथ बैठ कर इस मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उन्होंने पर्चे निकाल कर सांप्रदायिक ताकतों को दूर भगाने की अपील भी की है।

 

याकूब अली उम्र 44 वर्ष कहते हैं कि यहाँ की शाखा में स्थानीय लोग बहुत कम हैं जिनकी संख्या 4-5 है और कुछ छोटे-छोटे बच्चे हैं जिन्हें संघ के बारे में खुछ नहीं पता है और मासूम हैं। ज्यादातर संघ के कार्यकर्ता बाहर से आते हैं और यहाँ आकर साम्प्रदायिक उन्माद भरे नारे लगाते हैं। उन्होंने बताया कि यह शाखा पहले दुसरे पार्क में लगती थी जहाँ हिन्दू आबादी की बहुतायत है, लेकिन संघ के कार्यकर्ताओं ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने के लिए यहाँ शाखा का आयोजन किया है. याकूब के अनुसार वे खुले-आम कहते हैं कि मुल्ला मुलायम ने कहा था कि बाबरी मस्जिद पर कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता है आप सब जानते हैं कि उसका क्या परिणाम हुआ। वे गलियों से जब निकलते हैं तो लाठियां पटकाते हुए जैसे सीधी चुनौती देते हैं कि हम तो यहाँ ऐसे ही करेंगे जो तुम से हो सकता है कर लो।

पिछले कुछ वर्षों से श्रीराम कॉलोनी में संघ ने अपनी गतिविधियों के जरिए तनाव का माहौल पैदा किया हुआ है। इलाके के नागरिक इस बाबत दिल्ली सरकार व पुलिस के महकमों को निरंतर जानकारी देते रहें हैं और उनसे गुजारिश करते रहे हैं कि संघ द्वारा यहाँ की जनता को उकसाने के लिए की जा रही गतिविधियों से सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिस कार्यवाही की वजह से स्थिति पर नियंतरण बना हुआ था लेकिन केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद संघ ने इस इलाके में फिर से अपनी गतिविधियों को तेज़ कर दिया है और प्रशासन ने मौजूदा हालात का संज्ञान लेने से जैसे इन्कार ही कर दिया। संघ के नेता यहाँ खुले तौर पर अपने भाषणों में कहते हैं कि केंद्र में उनकी सरकार है और उन्हें किसी का डर नहीं है अगर उनके खिलाफ किसी ने कार्यवाही की तो अंजाम अच्छे नहीं होंगे।

श्रीराम कॉलोनी को त्रिलोकपुरी जैसे माहौल में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है। मुस्लिम समुदाय के खिलाफ संघ की यह नफ़रत साम्प्रदायिक सदभाव को सीधी चुनौती है। जरूरत इस बात की है समाज के जागरूक तबके और मुख्य धारा के मीडिया को इसका संज्ञान लेकर तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए ताकि प्रशासन कड़े कदम उठा कर श्रीराम कॉलोनी को एक और त्रिलोपुरी या अटाली बनने से रोक सके।

श्रीराम कॉलोनी
त्रिलोकपुरी
आरएसएस
भाजपा
नरेन्द्र मोदी
मोहन भागवत
सांप्रदायिक ताकतें
सीपीआई(एम)
नौज़वान भारत सभा

Related Stories

“हवा में रहेगी मेरे ख़्याल की बिजली...”

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

बढ़ते हुए वैश्विक संप्रदायवाद का मुकाबला ज़रुरी

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा भी बोगस निकला, आप फिर उल्लू बने

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

एमरजेंसी काल: लामबंदी की जगह हथियार डाल दिये आरएसएस ने


बाकी खबरें

  • AAKAR
    आकार पटेल
    क्यों मोदी का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में सबसे शर्मनाक दौर है
    09 Dec 2021
    जब कोरोना की दूसरी लहर में उच्च न्यायालयों ने बिल्कुल सही ढंग से सरकार को जवाबदेह बनाने की कोशिश की, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस सक्रियता को दबाने की कोशिश की।
  • Sudha Bharadwaj
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    एल्गार परिषद मामला: तीन साल बाद जेल से रिहा हुईं अधिवक्ता-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज
    09 Dec 2021
    भारद्वाज को 1 दिसंबर को बंबई उच्च न्यायालय ने जमानत दी थी और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत को उन पर लगाई जाने वाली पाबंदियां तय करने का निर्देश दिया था।
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसानों की ऐतिहासिक जीत: सरकार ने सभी मांगें मानी, 11 दिसंबर से ख़ाली करेंगे मोर्चा!
    09 Dec 2021
    अंततः सरकार अपने हठ से पीछे हटकर किसानों की सभी माँगे मानने को मजबूर हो गई है। सरकार ने किसानों की लगभग सभी माँगें मान ली हैं। इस बाबत कृषि मंत्रालय की तरफ़ से एक पत्र भी जारी कर दिया गया है। किसानों…
  • Sikhs
    जसविंदर सिद्धू
    सिख नेतृत्व को मुसलमानों के ख़िलाफ़ अत्याचार का विरोध करना चाहिए: विशेषज्ञ
    09 Dec 2021
    पंजाब का नागरिक समाज और विभिन्न संगठन मुसलमानों के उत्पीड़न के खिलाफ बेहद मुखर हैं, लेकिन सिख राजनीतिक और धार्मिक नेता चाहें तो और भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
  • Solidarity march
    पीपल्स डिस्पैच
    एकजुट प्रदर्शन ने पाकिस्तान में छात्रों की बढ़ती ताक़त का अहसास दिलाया है
    09 Dec 2021
    एकजुटता प्रदर्शन के लिए वार्षिक स्तर पर निकले जाने वाले जुलूस का आयोजन इस बार 26 नवंबर को किया गया। इसमें छात्र संगठनों पर विश्विद्यालयों में लगे प्रतिबंधों के ख़ात्मे, फ़ीस बढ़ोत्तरी को वापस लेने और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License