NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली में उमड़ा देश का जुझारू जीवन
राजधानी सबसे खूबसूरत तब लगती है जब सरकार के जनविरोधी रवैये के खिलाफ भारत के हर कोने से जनता सड़कों पर उतरती है और सरकार को उसकी बदसूरती याद दिलाती है।
अजय कुमार
07 Sep 2018

दिल्ली भारत की राजधानी है। इसकी खूबसूरती और बदसूरती मायने रखती है। राजधानी सबसे खूबसूरत तब लगती है जब सरकार के जनविरोधी रवैये के खिलाफ भारत के हर कोने से जनता सड़कों पर उतरती है और सरकार को उसकी बदसूरती याद दिलाती है। पिछले 2 दिनों से दिल्ली में बारिश हो रही थी और बारिश की बौछारें किसानों,मजदूरों और इनके हकों के लिए लड़ने वाले लोगों के हुजूम के हौसलों को बुलंद कर रही थी। जिन्होंने इस बुलंदगी को पूरे भारत तक पहुँचाने की कोशिश की,उन्होंने लोकतंत्र में मीडिया होने के कर्तव्य को आबाद किया और जिन्होंने इस मौजूदगी को पूरे भारत तक पहुँचाने में रत्ती भर भी सहयोग नहीं किया उन्होंने मीडिया में लोकतंत्र होने के कर्तव्य को बर्बाद किया। लोकतंत्र में सृजन के इस खूबसूरत मौके पर उन लोगों की कहानियों को कलमबद्ध करने का अवसर मिला जिनकी जुझारू जिंदगी भारत की जमीनी हकीकत बताती है। 

Bihar Mid Day Meal workers.jpg

सबसे पहली मुलाकत भीड़ में अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर कर रही बिहार की दो महिला साथी कौशल्य देवी और बिमला देवी से हुई। यह दोनों महिला साथी बिहार के मधुबनी जिले से आयी थी। बिमला देवी कहती हैं '' हम बच्चा सब के स्कूल में खाना बनाती हूँ। सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर के 12 बजे तक काम करना पड़ता है। दिन भर हड़िया बर्तन में गुजर जाता है। पूरा दिन साड़ी ऊपर उठाये और कमर नीचे झुकाये गुजरता है। पिछले 5 साल से हम सब यही जिंदगी गुजार रही हैं। इस जिंदगी के लिए महीनें में केवल 1200 रुपय्या मिलता है।" अब बिमला देवी को रोककर कौशल्य देवी कहती हैं कि "यह 1200 रुपय्या भी हर महीने नहीं मिलता। कई महीने के इन्तजार के बाद सरकार पैसे खाते में डालती है। साल भर में केवल दस महीनें का मेहनताना मिलता है, दो महीने का पैसा कहाँ चला जाता है,यह पता नहीं। जब हम पैसा बढ़ाने के लिए कहती हैं तो मास्टर सब कहता है कि बड़का अफसर से शिकायत कर तुम सब को बाहर निकाल देंगे। अब आप ही बताइये बाबू, यह कहाँ का इन्साफ है कि दिनभर कुर्सी पर बैठकर कलम चलाने का मोटा तनख्वाह मिले, साथ में मास्टर सब बच्चों के लिए मिला अनाज भी लुटे और दिनभर कमर झुकाकर बर्तन हड़िया करने के लिए हम जैसों को केवल 1200 रूपये का तनख्वाह मिले। इतने में कैसे गुज़ारा होगा। हम सब सुबह से भीग रही हैं, कल शाम से खाना नहीं खाया है, गाँव के पंच से लेकर नेता तक हमारी बात नहीं सुनता है, इसलिए हम दिल्ली आयी हैं।''

himachal aanganwadi workers.jpg

बिहार की जुझारू महिला साथियों के बाद हिमाचल की महिला साथियों से मुलाकत हुई। यह महिला साथी जिला सिरमौर के रेणुका जी शहर से आयीं थी सवाल और जवाब का सिलसिला जब इनके साथ शुरू हुआ तो बात स्थानीय से प्रादेशिक बनती चली गयी। हिमाचल के रेणुका जी से अाई यह महिलाएँ बताती हैं रेणुका जी का इलाका नशे का गढ़ बन चुका है। शराब के ठेके खोलने के लिए पहले यह नियम था कि पंचायतें और महिला समूह से noc हासिल करनी होती थी। अब इस प्रक्रिया को बन्द कर दिया गया है,जिसकी वजह से धड़ल्ले से ठेके खुल रहे हैं। पूरी नौजवान नस्ल नशे में बरबाद में हो रही है। अब बादाम के नाम पर रेणुका जी में बादाम नहीं मिलता बल्कि नशे की गोलियां मिलती हैं। पहले स्कूलों से 500 मीटर दूर शराब के ठेके खोलने का नियम था, अब यह 50 मीटर हो चुका है। जिसकी वजह से कई जगहों पर तो स्कूल और ठेके साथ साथ चलते हैं। जिस उम्र को किताबों और खेलकूद से तालमेल बिठाना चाहिए वह नशे और गुस्से से तालमेल बिठा रही है। रेणुका जी में घरेलू हिंसा की वारदातें आए दिन होती रहती हैं। इन वारदातों को कम करने के लिए नागरिकों के बीच में कुछेक के पास लीगल एडवाइजर का पद भी है। लेकिन इन सलाहकारों की बात कोई भी नहीं सुनता। पुलिस तो इन्हें तवज्जो तक नहीं देती । शेल्टर होम्स के नाम पर कुछ भी नहीं है। एकीकृत बाल विकास योजना के तहत केवल 1 कर्मचारी के नियुक्ति से यहां के शेल्टर होम्स चलाए जा रहे हैं। जिनकी स्थिति भयावह है। इस इलाके के दवा कारखाने में श्रम कानूनों का बेशर्मी से उल्लंघन किया जाता है। अचानक से किसी किसी फैक्ट्री में काम कर रहे कामगार को यह नोटिस मिलती है कि वह कुछ पैसे ले ले और नौकरी छोड़ दे। उसकी 10 साल की नौकरी अचानक से उससे छीन ली जाती है और विरोध करने पर उसे पैसे भी नहीं मिलते और बाहर निकाल दिया जाता है। बाकी आप नेताओं, पुलिस अधिकारियों, नौकरशाहों का गठजोड़ समझते ही हैं, जो इस जाल में फँसने की औकात रखता है, उसकी जिंदगी में चांदी है, जिसके पास इतनी औकात नहीं है उसकी जिंदगी माटी है। कोई भी आए और पेट पर लात मारकर चला जाए।अंतड़ियों की की राह केवल गरीब ही समझ सकते हैं, दूसरे नहीं। जैसे ही यह नारा सुनाई देता है कि जीना है तो मरना होगा तब सारी महिलाएं उस नारें में अपने  जुझारू जीवन का जुनून  झोंक देती है। 

इसके बाद दिल्ली से हजारों मील दूर दार्जिलिंग से आये साथी केबी वत्ता से मुलाकात हुई। केबी वत्ता बताते हैं कि दार्जिलिंग बड़ा इलायची के उत्पादन के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध में हैं। एक किलो बड़ी इलायची की लागत तकरीबन 700 रूपये होती है लेकिन बाजार में इसे बेचने पर केवल 300 से 400 रुपए मिलते हैं। दार्जिलिंग में गोल्डेन दार्जिलिंग ऑरेंज नाम के एक पौधे की प्रजाति उगती थी। जिसके छिलके से दार्जिलिंग में सेंट का उत्पादन होता था। अब संतरे का यह का यह पौधा गलत किस्म के कीटनाशक की वजह से बरबाद हो गया है। अब भी  इसके पौधे लगाए जाते हैं लेकिन उस तरह से नहीं उगते जैसे पहले उगते थे । इस एक पौधे के मरने की वजह से  दार्जिलिंग का एग्रीकल्चर पैटर्न पूरी तरह से बदल गया है। जिन खेतों में सब्जियां उगती थी अब उन खेतों में घास उग रहे हैं। दार्जिलिंग में दुग्ध उत्पादन भी अच्छा खासा हो जाता है लेकिन दुग्ध प्रसंस्करण से संबंधित उद्योगों की कमी है इसलिए दार्जिलिंग के  दुग्ध उत्पादन का अधिकांश फायदा  पड़ोसी राज्य सिक्किम को चला जाता है। दार्जिलिंग चाय के बागान का नजारा आप आए दिन टीवी विज्ञापन में देखते होंगे लेकिन इसमें काम करने वाले मजदूरों के साथ हो रहे  शोषण से आपसभी अपरिचित रह जाते हैं। वत्ता साहेब बताते हैं कि दिनभर काम करने पर चाय बगान के मजदूरों को 4 साल  पहले तकरीबन 67 रुपए मिलता था, बाद  में 95 रुपए मिलने लगा,  बहुत सारे नागरिक संगठनों के दबाव की वजह से अब दिनभर के काम का 169 रुपए मिलता है। एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन 40 हजार खर्च पर एक बागान मालिक को रुपए 1 लाख का फायदा हो जाता है। इसलिए वे मजदूरों के  शोषण बारे में बहुत अधिक नहीं सोचते। मजदूरों के विरोध पर चाय बगान में ही ताला लगा देते हैं। 

दार्जलिंग के साथियों को पार करते हुए पंजाब और हरियाणा के किसान साथियों से मुलाकात हुई। इन दोनों की परेशानी थी कि इनकी वर्तमान पीढ़ी नशें में बर्बाद है। रोजगार के तलाश में दोनों जगह के लोग दूसरे देश और राज्यों में पलायन कर रहे हैं। पंजाब का बच्चा बचपन से ही  ऑस्ट्रेलिया और कानाडा जाने के ख्वाब देखने लगता है। यहां आए किसान साथी उधम सिंह का डर है कि पंजाब बूढ़ों लोगों के देश में बदलता जा रहा है और आगे भी बदलता जाएगा। उधम सिंह आगे बताते है कि पंजाब में भूजल का स्तर बहुत नीचे चला गया है। जहां जमीन से पानी निकालने के लिए पहले 20 बैक हॉर्स पावर मोटर की जरूरत होती थी बाद में यह जरूरत 36 बैक हॉर्स पावर हुई अब यह चालीस हॉर्स पावर हो गई है , जिसका परिणाम यह हुआ है कि सिंचाई की लागत भी बढ़ गई है और अधिक नीचे से पानी निकलने की वजह से पानी में नमक की मात्रा भी बढ़ गई है। अंततः जमीन बंजर हो रही  हैं और उत्पादन क्षमता कम हो रही है। बिल्कुल ऐसा ही हाल हरियाणा के किसानों का है। सुशील नांगल कहते है कि हरियाणा में सिंचाई के लिए नहरें हैं लेकिन पानी नहीं है। नहरों में आने वाले पानी को बीच में ही रोककर बेचा भी जाता है।

5 September rally
Mazdoor Kisan Sangharsh Rally
Workers' Protest
Anganwadi Workers
mid day meal workers

Related Stories

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 

हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने

दिल्ली: सीटू के नेतृत्व वाली आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन ने आप सरकार पर बातचीत के लिए दबाव बनाया

हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी

आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License