NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
डीयूः पिछले 70 वर्षों से दलित प्रोफेसर को एचओडी नहीं बनाया गया
प्रोफेसर श्योराज सिंह बैचेन विभाग के वरिष्ठतम संकाय (फैकल्टी) सदस्य हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में गिनती के दलित प्रोफेसरों में से एक हैं। जाति-विरोधी और दलित साहित्य में भी उनका एक प्रसिद्ध नाम है। प्रोफेसर बैचेन हिंदी अकादमी मध्य प्रदेश और दिल्ली सरकारों द्वारा भी सम्मानित हो चुके है। पिछले 70 वर्षों में एक भी दलित संकाय सदस्य को विभागाध्यक्ष के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Oct 2019
du

दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने सोमवार को विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग प्रमुख की नियुक्ति नहीं किए जाने को लेकर प्रदर्शन किया। हिंदी विभाग के पूर्व प्रमुख का कार्यकाल 12 सितंबर को समाप्त हो गया है जिसके बाद विभाग के प्रमुख का पद खाली है।

हालांकि, शिक्षकों और छात्रों का दावा है कि विश्वविद्यालय के कुलपति, अगले एचओडी को लेकर निवर्तमान एचओडी से परामर्श करने की औपचारिकता पूरी कर चुके हैं। हालांकि, विभाग को एचओडी की नियुक्ति के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई है ।

प्रदर्शनकारी छात्रों और शिक्षकों ने यह भी कहा कि एचओडी की तत्काल नियुक्ति के लिए कुलपति के कार्यालय को एक ज्ञापन और एक पत्र सौंपा लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों और छात्रों ने यह सवाल उठाया है कि प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन को नियुक्त करने की सभी औपचारिकताओं के बावजूद नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है?

प्रोफेसर श्योराज सिंह बैचेन विभाग के वरिष्ठतम संकाय (फैकल्टी) सदस्य हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में गिनती के दलित प्रोफेसरों में से एक हैं। जाति-विरोधी और दलित साहित्य में भी उनका एक प्रसिद्ध नाम है। प्रोफेसर बैचेन हिंदी अकादमी मध्य प्रदेश और दिल्ली सरकारों द्वारा भी सम्मानित हो चुके है। पिछले 70 वर्षों में एक भी दलित संकाय सदस्य को विभागाध्यक्ष के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने आर्ट्स फैकल्टी से कुलपति कार्यालय तक मार्च निकालकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किए जा रहे भेदभाव के खिलाफ विरोध किया और वरिष्ठता खंड के अनुसार प्रोफेसर बैचन की नियुक्ति की मांग की।


 

प्रशासन की ओर से इस भेदभाव का विरोध करने के लिए एसएफआई और आइसा जैसे प्रगतिशील छात्र संगठन और शिक्षकों ने मार्च निकाला। ये मार्च कला संकाय से वीसी कार्यालय तक 'मार्च फॉर जस्टिस' के नाम से निकाला गया। इस दौरान वरिष्ठता खंड के अनुसार प्रोफेसर बैचन को नियुक्त करने की मांग की गई। साथ इन्होंने कुलपति को सरकार की कठपुतली कहा और संघ के इशारे पर काम करने का आरोप लगया।

इस पूरे मामले पर लक्ष्मण यादव जो खुद डीयू में हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर है उन्होंने टप्पणी करते हुए अपने फेसबुक पर लिखा और इस घटना को सामाजिक न्याय की सांस्थानिक हत्या का संकेत कहा। आगे वो लिखते है...अब ये लड़ाई किसी एक एचओ़डी की नहीं रही। ये लड़ाई संविधान व सामाजिक न्याय की बन चुकी है। अगर एक प्रोफ़ेसर के साथ हक़मारी का अन्याय हो सकता है, तो कौन कब तक सुरक्षित बचेगा। इसके खिलाफ़ दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी व छात्रों ने मिलकर प्रतिरोध की ठानी है। संविधान जीते, इसलिए लड़ना होगा।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम तब तक विरोध करते रहेंगे जब तक कि प्रोफ़ेसर बैचेन को एचओडी के रूप में नियुक्त नहीं किया जाता और दिल्ली विश्वविद्यालय में सामाजिक न्याय को लागू न किया जाता।

 

DUTA
SFI
AISA
teachers protest
Student Protests
Delhi

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

दिल्ली : पांच महीने से वेतन न मिलने से नाराज़ EDMC के शिक्षकों का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर : मस्जिद दर मस्जिद भगवान की खोज नहीं, नफ़रत है एजेंडा, हैदराबाद फ़र्ज़ी एनकाउंटर के बड़े सवाल
    24 May 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने एक के बाद एक मस्जिद में भगवान की खोज के नफ़रती एजेंडे को बेनक़ाब करते हुए सरकारों से पूछा कि क्या उपलब्धियों के नाम पर मुसलमानों के ख़िलाफ उठाए गये कदमों को…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज्ञानव्यापी- क़ुतुब में उलझा भारत कब राह पर आएगा ?
    24 May 2022
    न्यूज़चक्र में आज वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं कि सत्ता पक्ष आखिर क्यों देश को उलझा रहा है ज्ञानवापी, क़ुतब मीनार, ताज महल जैसे मुद्दों में। महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों की बात कब होगी…
  • अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: भारी नाराज़गी के बाद सरकार का कहना है कि राशन कार्ड सरेंडर करने का ‘कोई आदेश नहीं’ दिया गया
    24 May 2022
    विपक्ष का कहना है कि ऐसे समय में सत्यापन के नाम पर राशन कार्ड रद्द किये जा रहे हैं जब महामारी का समय अधिकांश लोगों के लिए काफी मुश्किलों भरे रहे हैं।
  • सोनिया यादव
    देश में लापता होते हज़ारों बच्चे, लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में 5 गुना तक अधिक: रिपोर्ट
    24 May 2022
    ये उन लापता बच्चों की जानकारी है जो रिपोर्ट हो पाई हैं। ज़्यादातर मामलों को तो पुलिस मानती ही नहीं, उनके मामले दर्ज करना और उनकी जाँच करना तो दूर की बात है। कुल मिलाकर देखें तो जिन परिवारों के बच्चे…
  • भाषा
    ज्ञानवापी मामला : मुकदमे की पोषणीयता पर सुनवाई के लिए 26 मई की तारीख नियत
    24 May 2022
    मुकदमा चलाने लायक है या नहीं, इस पर अदालत 26 मई को सुनवाई करेगी। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License