NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
कोविड-19
नज़रिया
समाज
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
गोल्ड लोन की ज़्यादा मांग कम आय वाले परिवारों की आर्थिक बदहाली का संकेत
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक सोना को गिरवी रख कर बैंकों द्वारा दिये जाने वाले कर्ज में 82 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह कर्ज मार्च 2020 के 33,303 करोड़ रुपये की तुलना में मार्च 2021 में 60,464 करोड़ रुपये हो गया है।
पृथ्वीराज रूपावत
19 May 2021
Gold
प्रतीकात्मक चित्र: पेक्सल्स

गोल्ड लोन की मांग में बढोतरी और इसके बाद वित्तीय संस्थाओं द्वारा उन गिरवी रखे गये सोने के आभूषणों की नीलामी देश में लोगों की खस्ता वित्तीय हालत का संकेत है-खास कर निम्न आय वाले घर-परिवारों के दयनीय हालात के। भारत के रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डेटा के मुताबिक सोने के आभूषणों को गिरवी रखने की एवज में बैंकों द्वारा दिये जाने वाले कर्जों में पिछले एक साल की अवधि में 82 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह मार्च 2020 के 33,303 करोड़ रुपये के कर्ज के मुकाबले मार्च 2021 में बढ़कर 60,464 करोड़ रुपये हो गया है। 

इसी तरह, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसीएस) की तरफ से दिया जाने वाले गोल्ड लोन में भी वित्तीय वर्ष 2020-21 में लगभग 15 फीसदी की वृद्धि हुई है, जैसा कि  उद्योग का अनुमान है। 

वैश्विक महामारी के चलते आए इस अभूतपूर्व आर्थिक संकट ने देश में लाखों घर- परिवारों को अपने इलाज तथा गुजर-बसर के लिए सोने को गिरवी रखकर कर्ज लेने पर मजबूर कर दिया है।

विशेषज्ञ कहते हैंं कि देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में लिया जाने वाला गोल्ड लोन दरअसल एक संकटकालीन कर्ज है। अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरी करने के लिए यह कर्ज ज्यादातर वे लोग ले रहे हैं, जो इस वैश्विक महामारी के चलते बेरोजगार हो गए हैं या जिनकी आमदनी बहुत ही कम है। 

अखिल भारतीय बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन (एआइबीओसी) के पूर्व महासचिव थॉमस फ्रैंको ने कहा कि गोल्ड लोन की राशि बढ़ने का साफ मतलब है कि कम आमदनी वाले समूहों में संकट बढ़ रहा है।

फ्रैंको कहते हैं, “बहुत सारे लोगों तथा छोटे कारोबारियों के लिए सोने के अपने आभूषणों को बंधक रख कर बैंक से कर्ज लेना सबसे आसान और उपलब्ध विकल्प है। देश में एक तो पहले से ही व्यापक पैमाने पर बेरोजगारी थी, तिस पर इस महामारी के चलते बार-बार लगी तालाबंदी ने लाखों परिवारों के काम-धंधे को चौपट कर उनमें रुपये-पैसे की भारी किल्लत कर दी है। इस विकट स्थिति ने उन्हेंं कर्ज की तरफ धकेल दिया है।’’ 

बैंककर्मी फ्रैंको ने कहा, “चूंकि बैंक अब नया कृषि कर्ज नहीं दे रहे हैं, ऐसे में बहुत किसान भी खेती के लिए सोने को गिरवी रखकर कर्ज ले रहे हैं।”

इसी बीच, द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 की इस दूसरी लहर से उत्पन्न अनिश्चितता को देखते हुए गोल्ड लोन की भारी मांग को आगे भी जारी रहने और उसमें बढ़ोतरी होने का अनुमान है। 

मुथूट फिनकॉर्प लिमिटेड के चेयरमैन जॉन मुथूट कहते हैं, “आम तौर पर गोल्ड लोन की भारी मांग तब होती है, जब असुरक्षित कहे जाने वाले कर्ज (जैसे कि पर्सनल या ग्रुप लोन) लोगों को नहीं मिलते हैं। ऐसी अनिश्चित परिस्थिति के दौरान असुरक्षित कर्ज उपलब्ध नहीं हैं।” मुथूट फिनकॉर्प लिमिटेड गोल्ड लोन देने वाली देश की एक अग्रणी एनबीएफसी है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना और कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में गोल्ड लोन की डिमांड काफी बढ़ी है। चूंकि लोग सोना के बदले लिए गए कर्ज का सधान नहीं कर पाते हैं,  इसलिए बैंक और एनबीएफसी अपने यहां गिरवी रखे गए उन आभूषणों की नीलामी कर देते हैं और इस तरह अपना पैसा वापस ले लेते हैं।

पिछले साल अगस्त में आरबीआई ने  गोल्ड लोन पर एलटीवी (लोन टू वैल्यू)  को  मार्च 2021 तक 75 फ़ीसदी से बढ़ाकर 90 फ़ीसदी कर दिया है। इसने  आम लोगों और लघु कारोबारियों को गोल्ड लोन लेने के लिए उत्साहित किया है परंतु अब सोने के दामों में गिरावट के बाद बैंक और एनबीएफसी अपनी दी कर्ज कर्ज राशि का भुगतान न होने की स्थिति में गिरवी रखे गए उन आभूषणों की नीलामी कर अपनी राशि की भरपाई कर लेते हैं। 

पिछले साल अगस्त में सोने का रिकॉर्ड दाम 56,000 रुपये (प्रति 10 ग्राम) था, वहीं यह 31 मार्च 2021 में घट कर लगभग 45,000 रुपये हो गया था। अभी पिछले मंगलवार को 50,005 रुपये के साथ इसमें तेजी आई है। 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूबीसी) के पिछले साल नवंबर 2020 में ‘गोल्ड लोन हेल्प इंडिया वेदर द कोविड-19 स्टार्म’ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की गई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि “संगठित बकाया गोल्ड लोन को वित्तीय वर्ष 2019-20 क 3,44,800 करोड़ रुपये की तुलना में वित्तीय वर्ष 2020-21 में  4,05,100 करोड़ होने का अनुमान है।”

अनेक रिपोर्टों में कहा गया है कि निम्न आय वाले परिवार कोरोना के इलाज के खर्चें के लिए भी गोल्ड लोन लेने पर मजबूर हुए हैं। इनमें निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिल का भरना एक बड़ी वजह है।

यह भी कहा जा रहा है कि तेलंगाना में 3.8 लाख से अधिक स्कूली बच्चों के माता-पिताओं ने पिछले अकादमिक सत्र की फीस भरने के लिए गोल्ड लोन लिया है। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/high-demand-gold-loans-indicate-distress-low-income-families

gold trade
economic crises
poverty
COVID-19

Related Stories

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

फादर स्टेन की मौत के मामले में कोर्ट की भूमिका का स्वतंत्र परीक्षण जरूरी

कोविड-19 महामारी से उबरने के लिए हताश भारतीयों ने लिया क़र्ज़ और बचत का सहारा

कोविड-19: दूसरी लहर के दौरान भी बढ़ी प्रवासी कामगारों की दुर्दशा

यूपी: उन्नाव सब्ज़ी विक्रेता के परिवार ने इकलौता कमाने वाला गंवाया; दो पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी

भाजपा शासित एमपी सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए व्यापम आरोपियों के निजी अस्पतालों को अनुबंधित किया

उत्तर प्रदेश : योगी का दावा 20 दिन में संक्रमण पर पाया काबू , आंकड़े बयां कर रहे तबाही का मंज़र

महामारी प्रभावित भारत के लिए बर्ट्रेंड रसेल आख़िर प्रासंगिक क्यों हैं

कार्टून क्लिक: सरकार की आलोचना ज़रूरी लेकिन...


बाकी खबरें

  • सरकार के खिलाफ शिकायत करने पर 'बाहर' नहीं कर सकते: गुजरात HC ने CAA-NRC प्रदर्शनकारी का बचाव किया
    सबरंग इंडिया
    सरकार के खिलाफ शिकायत करने पर 'बाहर' नहीं कर सकते: गुजरात HC ने CAA-NRC प्रदर्शनकारी का बचाव किया
    28 Aug 2021
    उच्च न्यायालय ने विरोध प्रदर्शन से संबंधित कुछ प्राथमिकी में आरोपी मोहम्मद कलीम सिद्दीकी के खिलाफ बाहर किये जाने के आदेश को रद्द कर दिया है।
  • साइगॉन की यादों से वाबस्ता क्वाड
    एम. के. भद्रकुमार
    साइगॉन की यादों से वाबस्ता क्वाड
    28 Aug 2021
    किसी महाशक्ति की विश्वसनीयता अपने सहयोगियों के छोड़ देने से घट जाती है, शायद यही वजह है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर चीन के ख़िलाफ़ कमला हैरिस की टिप्पणी में सख़्त आक्रामकता नहीं थी।
  • Mohammed Yousuf Tarigami
    भाषा
    माकपा नेता तारिगामी ने अनुच्छेद 370 से संबंधित याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए अर्जी दी
    28 Aug 2021
    माकपा नेता ने कहा कि यदि मामलों की तत्काल सुनवाई नहीं की गई तो ‘‘आवेदक के साथ गंभीर अन्याय होगा।’’
  • 'प्रेस की स्वतंत्रता पर कोई बंधन नहीं' : अदालत ने पत्रकार आसिफ़ नाइक के ख़िलाफ़ एफ़आईआर को लताड़ा
    अनीस ज़रगर
    'प्रेस की स्वतंत्रता पर कोई बंधन नहीं' : अदालत ने पत्रकार आसिफ़ नाइक के ख़िलाफ़ एफ़आईआर पर लताड़ा
    28 Aug 2021
    कोर्ट ने कहा, 'इसमें कोई दो राय नहीं है कि याचिकाकर्ता पेशे से पत्रकार है और उसका काम जानकारी इकट्ठा करना और उसे समाचार पत्र या किसी अन्य मीडिया में प्रकाशित करना है।'
  • विधानसभा कूच करती आंगनबाड़ी कार्यकर्तीयां; फोटो-सत्यम कुमार
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: आंगनबाड़ी कार्यकर्ती एवं सेविका कर्मचारी यूनियन का विधानसभा कूच 
    28 Aug 2021
    “उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती को 7,500 रुपये, आंगनबाड़ी सहायिका को 3,750 रुपये और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ती को 4,500 रुपये प्रति माह मानदेय सरकार की ओर से मिलता है जो मंहगाई के इस दौर में बहुत ही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License