NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कला
रंगमंच
समाज
साहित्य-संस्कृति
इतवार की कविता : "मैंने रिहर्सल की है ख़ुद को दुनियादार बनाने की..."
इतवार की कविता में आज पढ़िये इमरान बदायूंनी की बेहद नए ज़ावियों पर लिखी यह ग़ज़ल...
न्यूज़क्लिक डेस्क
19 Dec 2021
इमरान बदायूंनी
तस्वीर सौजन्य : रेख़्ता

इतवार की कविता में आज पढ़िये इमरान बदायूंनी की बेहद नए ज़ावियों पर लिखी यह ग़ज़ल...

 

वक़्त पे आँखें नम करने की, वक़्त पे हँसने गाने की

मैंने रिहर्सल की है ख़ुद को दुनियादार बनाने की

 

होटल, कैफ़े, माॅल, सिनेमा, रौशन सड़कें, हँसते लोग

शहरों-शहरों देख रहा हूँ मैं सूरत वीराने की

 

भागते लम्हें, ट्रेन का सिग्नल, गहरी ख़ामोशी, बहते अश्क 

यूँ लगता है जैसे हो ये बात किसी अफ़साने की

 

टीवी देखी, छत पर टहला, इनको-उनको फ़ोन किया

कितनी मुश्किल साअत थी वो तुझ बिन रात बिताने की

 

दुनिया एक बड़ा सा परदा, उस परदे पर मेरा अक्स 

आवाज़ों की भीड़ में जैसे आह किसी दीवाने की

 

देर से लौटा, सिगरट भी पी, लंच भी अक्सर छोड़ दिया

कौन था, तेरे बाद कि जिसने कोशिश की समझाने की

 

गर्मी का दिन, तेज़ दुपहरी, बरसों बाद किसी का फ़ोन 

अनजाने में खोल दे कोई, ज्यूँ कुण्डी तहख़ाने  की

 

सब कामों में टालमटोली, रात को लेकिन सोना रोज़

नींद कोई गाड़ी हो जैसे शहर तिरे ले जाने की

 

कुर्सी, मेज़, कलम, बिस्तर सब, ऐसे कैलेंडर तकते हैं

जैसे इन्हें तारीख़ पता हो तेरे लौट के आने की

 

मैं जंगल की आग पे अपनी थीसिस पढ़ने वाला था 

और परिंदे ज़िद कर बैठे मुझसे नज़्म सुनाने की

 

इमरान बदायूँनी

Imran badayuni
itwaar ki kavita
modern urdu ghazal
Urdu poetry

Related Stories

इतवार की कविता : एरिन हेंसन की कविता 'नॉट' का तर्जुमा

इतवार की कविता : 'कल शब मौसम की पहली बारिश थी...'

इतवार की कविता : माँओं के नाम कविताएं

इतवार की कविता : आग़ा हश्र कश्मीरी की दो ग़ज़लें

इतवार की कविता : 'ऐ शरीफ़ इंसानो, जंग टलती रहे तो बेहतर है...'

इतवार की कविता : पहले कितने ख़त आते थे...


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    सरकार का दो तरफ़ा खेल... ‘’कोयले की कमी भी नहीं विदेशों से आयात भी करना है’’
    19 Apr 2022
    उत्तर प्रदेश में बिजली संकट को लेकर विदेशों से कोयला खरीदने का का मामला नियामक आयोग पहुंच गया है। आरोप है कि कुछ निजी घरानों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
  • रूबी सरकार
    आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार
    19 Apr 2022
    किसान नेता महेश दत्त पाराशर कहते हैं कि 50 वर्षों के लम्बे अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि यह शक्कर कारखाना सौ फ़ीसदी सफलतापूर्वक चलेगा। किसान इसे जीत की पहली कड़ी मान रहे हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः गर्मी बढ़ने के साथ गहराने लगा जल संकट, ग्राउंड वाटर लेवल में तेज़ी से गिरावट
    19 Apr 2022
    राज्य के कई ज़िलों से शिकायत सामने आई है कि ट्यूबवेल का पानी छोड़ने लगा है। आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के साथ पानी के स्तर को लेकर समस्या और बढ़ सकती है।
  • अनीस ज़रगर
    कश्मीर यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर को 2011 में लिखे लेख के लिए ग़िरफ़्तार किया गया
    19 Apr 2022
    केंद्र शासित प्रदेश की नवगठित जांच एजेंसी ने बताया कि ‘द कश्मीर वाला’ में प्रकाशित अब्दुल आला फाजिली का लेख "उत्तेजक, देशद्रोही और जम्मू-कश्मीर में खलल पैदा करने के इरादे" से लिखा गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जहांगीरपुरी हिंसा : अब 'आप' ने मुख्य आरोपी अंसार को 'बीजेपी' का बताया
    19 Apr 2022
    दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा के मामले में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने एक ट्वीट कर कुछ बड़ी बातें सामने रखी हैं। ग्रेटर कैलाश विधायक और आप की नेता आतिशी ने मंगलवार शाम 5 बजे 1 ट्वीट करके जहांग
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License