NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
ब्रह्मांड के स्त्रोत का पता लगाने के लिए पृथ्वी से निकला जेम्स वेब टेलिस्कोप
यह मिशन नासा, ईएसए (यूरोपियन स्पेस एजेंसी) और कनाडा की स्पेस एजेंसी का संयुक्त मिशन है। इसमें सौर मंडलों और सूर्य के अलावा दूसरे तारों के चक्कर लगाने वाले ग्रहों की खोज कर, शुरुआती ब्रह्मांड की पहली आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश की खोज करने का लक्ष्य है।
संदीपन तालुकदार
28 Dec 2021
James Webb Telescope
Image: James Webb Telescope, Source NASA website

एस्ट्रोफिजिक्स की दुनिया में जिस पल का लंबे वक़्त से इंतज़ार किया जा रहा था, क्रिसमस के दिन वह हकीक़त बन गया। नई पीढ़ी के टेलिस्कोप "जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप" को 25 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर दक्षिण अमेरिका में फ्रेंच गुयाना स्थित यूरोप के स्पेसपोर्ट से लॉन्च किया गया। नासा द्वारा जारी वक्तव्य के मुताबिक़, इस टेलिस्कोप को एरियान-5 रॉकेट से लॉन्च किया गया था।

यह मिशन नासा, ईएसए (यूरोपियन स्पेस एजेंसी) और कनेडियन स्पेस एजेंसी का साझा उपक्रम है। इसमें सौर मंडलों और सूर्य के अलावा दूसरे तारों के चक्कर लगाने वाले ग्रहों की खोज कर, शुरुआती ब्रह्मांड की पहली आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश की खोज करने का लक्ष्य है।

कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए नासा के प्रशासक बिल नेलसन ने कहा, "जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप नासा और साझेदारों की उन महत्वकांक्षाओं को प्रदर्शित करता है, जहां वे हमें भविष्य में ले जाना चाहते हैं। द वेब से अपेक्षा की जाती है कि यह ब्रह्मांड के बारे में अब तक समझ ना आने वाली या अब तक ना पहचानी गई चीजों को खोजेगा। यह क्या खोजेगा, इसे लेकर मैं बहुत उत्सुक हूं।”

परीक्षणशाला (टेलिस्कोप) को 870 मील या 1400 किलोमीटर ऊपर रॉकेट से अलग किया गया। लॉन्च के पांच मिनट बाद, ज़मीन पर मौजूद टीमों को वेब से डेटा मिलने लगा। एरियान रॉकेट उड़ान भरने के 27 मिनट बाद परीक्षणशाला से अलग हुआ था। फिर लॉन्च के 30 मिनट बाद वेब ने अपना “सोलर एर्रे (सौर संयंत्र)” खोल लिया। ज़मीन पर मौजूद टीमों ने पुष्टि करते हुए कहा कि सोलर एर्रे, टेलिस्कोप को बिजली उपलब्ध करवा रहा है। अपने पथ पर आधे घंटे चक्कर लगाने के बाद केन्या में मालिंदी ग्राउंड स्टेशन में स्थित परीक्षणशाला में संकेत पहुंचने की पुष्टि की गई। इस टेलिस्कोप को पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर एक ऑब्जर्विंग स्टेशन पर रखा जा रहा है।

अब तक की सबसे जटिल और बड़ी अंतरिक्ष परीक्षणशाला 6 महीने तक अपना काम करेगी। इसके बाद वेब टेलिस्कोप अपनी पहली तस्वीर भेजेगा। वेब टेलिस्कोप में चार उपकरण हैं, जो अब तक के सबसे उन्नत उपकरणों में से हैं, साथ ही, इंफ्रारेड सिग्नल के लिए इसमें संवेदनशील डिटेक्टर्स भी लगाए गए हैं, जिनमें अभूतपूर्व स्तर की गुणवत्ता मिल सकेगी। टेलिस्कोप खगोलीय संचरनाओं से आने वाले इंफ्रारेड प्रकाश का अध्ययन करेगा। यह अहम वैज्ञानिक मिशन नासा के हबल टेलिस्कोप और स्पाइट्जर स्पेस टेलिस्कोप का उत्तराधिकारी है। इन मिशन में जो खोजें हासिल की गई हैं, वेब उनकी उन्नति में भी अपना योगदान देने का लक्ष्य रखता है।

द वेब अपने पूर्ववर्ती हबल जैसे टेलिस्कोप से कई मायनों में अलग है। पहला इसमें 6.5 मीटर चौड़ा सुनहरा शीशा (परावर्तक) लगा है, जिससे इसकी ऑब्ज़र्वेटरी (परीक्षणशाला) की कार्यकुशलता बहुत ज़्यादा मजबूत हो जाती है। यह शीशा, हबल में लगे प्रथामिक परावर्तक से तीन गुना ज़्यादा चौड़ा है। द वेब का बड़ा परावर्तक जब इसके संवेदनशील उपकरणों के साथ काम करेगा, तो इससे अंतरिक्षविज्ञानियों को अंतरिक्ष में ज़्यादा गहराई से देखने का मौका मिलेगा। इस बड़े परावर्तक शीशे में 18 हिस्से हैं, हर किसी में पीछे एक छोटी मोटर लगी है। इन परावर्तकों को इस तरह से केंद्रित करना होगा, जिससे ब्रह्मांड के शुरुआती तारों से आने वाली इंफ्रारेड किरणों को पकड़ा जा सके। 

इसे बनाने में 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं, अनुमानित तौर पर इसकी उम्र 10 साल होगी। द वेब का वज़न 6200 किलोग्राम है।

परीक्षणशाला का एक प्राथमिक लक्ष्य वह युग (इपोच) होंगे, जब तारों का बनना शुरू ही हुआ था। इन तारों के बारे में कहा जाता है “बिग-बैंग” के बाद ब्रह्मांड में जो अंधेरा छाया था, वह इन तारों के प्रकाश से खत्म हुआ था। बता दें बिग-बैंग की यह घटना 13 अरब साल पहले हुई मानी जाती थी। इन खगोलीय वस्तुओं में हुई परमाणु क्रिया से कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फॉस्फोरस और सल्फर जैसे भारी अणुओं का जन्म हुआ, जो जीवन के लिए जरूरी हैं। द वेब का एक दूसरा लक्ष्य, दूसरे ग्रहों के वातावरण का अध्ययन करना है, जिससे शोधार्थियों को यह जानने में मदद मिलेगी कि हमारे सौर मंडल के बाहर भी कोई रहने लायक ग्रह है या नहीं। 

मिशन में वैज्ञानिक हेइडी हम्मेल ने टिप्पणी में कहा, “हम एस्ट्रोफिजिक्स की एक नई दुनिया में प्रवेश करने वाले हैं, जहां एक नया मोर्चा होगा; हममें से कई लोगों को यही चीज जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को लेकर उत्सुक बनाती है।”

नासा के मुताबिक, जेम्स वेब टेलिस्कोप बहुत कम तापमान पर रहेगा। इसे ठंडा रखने की वजह यह है कि इसे बहुत दूर से आने वाले इंफ्रारेड सिग्नल का परीक्षण करना होगा, इसलिए उन कमज़ोर गर्म किरणों को खोजने के लिए उपकरण को बहुत ठंडा रहने की जरूरत है। द वेब में कई सारे सुरक्षा तंत्र हैं, जो इसे ठंडा रखते हैं और इसे बाहरी चीजों की गर्मी से बचाते हैं। एक “सनशील्ड” इस टेलिस्कोप की सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी से आने वाली गर्मी से रक्षा करते हैं। यह शील्ड टेलिस्कोप को -223 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रखेगी। बेव के दूसरे उपकरणों में भी ठंडे करने के उपकरण लगे होंगे। “नियर-इंफ्रारेड” उपकरण -234 डिग्री सेल्सियम पर काम करेंगे, जब मिड-इंफ्रारेड उपकरण -266 डिग्री सेल्सियस पर काम करेंगे।

ईएसए के वरिष्ठ विज्ञान सलाहकरा मार्क मैककाघरेन ने बताया कि क्यों इन उपकरणों को इतने ठंडे तापमान पर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “अहम चीज यह है कि इस पूरे उपकरण को बहुत ठंडा रहना है। दरअसल यह टेलिस्कोप -233 डिग्री सेल्सियस पर काम करेगा। केवल तभी यह इंफ्रारेड वेवलेंथ (तरंगदैध्रर्य) पर चमकना बंद करेगा। वहीं हम इससे काम करवाना चाहते हैं। केवल तभी यह दूर के ब्रह्मांड (जहां पहली आकाशगंगाओं की खोज हुई) में स्थित चीजों और दूसरे तारों के आसपास चक्कर लगाने वाले ग्रहों की फोटो ले पाएगा। तो अभी बहुत काम होना बाकी है।”

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

James Webb Telescope Leaves From Earth to Look Into the Origin of the Universe

James Webb Telescope
NASA
ESA
Hubble Telescope
Spitzer Telescope
Origin of Universe
Malindi Station
Spaceport at French Guiana

Related Stories

चीन द्वारा चाँद से धरती पर लाए पत्थरों से सामने आया सौर मंडल का नया इतिहास

जीवन की तलाश में मंगल पर उतरा नासा का रोवर

नासा को मिला चंद्रयान-2 का मलबा, तस्वीर की साझा

विक्रम लैंडर की हुई थी हार्ड लैंडिंग: नासा ने तस्वीरें जारी करके बताया

“राम सेतु” के किनारे आ पहुँची फिर भाजपा की नैया


बाकी खबरें

  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    मेटा: क्या यह सिर्फ फेसबुक की दागदार छवि बदलने का प्रयास है?
    07 Nov 2021
    फेसबुक की छवि को व्हिसिलब्लोअर फ्रांसिस हाउजेन और सोफी झांग के रहस्योद्घाटनों से काफी चोट लगी है। क्या यह उसकी अपने दागदार अतीत तथा वर्तमान से भी पीछा छुड़ाकर एक वैकल्पिक जगत में, फेसबुक द्वारा रचे…
  • world temperature rises
    अजय कुमार
    दुनिया के तापमान में 3 सेंटीग्रेड की बढ़ोतरी हो जाए तो क्या होगा?
    07 Nov 2021
    जिस तरह से दुनिया अपना विकास कर रही है, उस तरह से जलवायु सम्मेलन में घोषित किए जाने वाले लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो पाएंगे। जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया का तापमान साल 2030 के भीतर ही 1.5…
  • Tripura issue
    डॉ. राजू पाण्डेय
    त्रिपुरा: सांप्रदायिक हिंसा पर हमारा मौन घातक
    07 Nov 2021
    साम्प्रदायिक वैमनस्य का कोई इतिहास न होते हुए भी त्रिपुरा अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलसता रहा।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    भाजपा जीतने के लिए और कांग्रेस हारने के लिए कुछ भी कर सकती है!
    06 Nov 2021
    इस बार #HafteKiBaat के नये एपिसोड में चार खास खबरों की चर्चा और विश्लेषण. दिवाली के मौके पर पीएम मोदी के सैनिकों के बीच नौशेरा जाने का क्या मतलब है? पंजाब में कांग्रेस क्या सेल्फ़ गोल करेगी?
  • Michael Vaughan
    भाषा
    नस्लवाद के आरोपों के बाद वॉन बीबीसी के शो से बाहर
    06 Nov 2021
    वॉन बीबीसी फाइव लाइव्स के शो ‘ द टफर्स एंड वॉन क्रिकेट शो ’ पर पिछले 12 साल से विशेषज्ञ के तौर पर काम कर रहे थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License