NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : गोडसेवादी ‘दीकुओं’ का जवाब, पत्थलगड़ी से देंगे आदिवासी!
संघ परिवार के संगठन ‘गिरिराज सेना’ ने एक चौक का नामकरण ‘गोडसे चौक’ कर दिया है। इस घटना ने आदिवासी समाज को काफी क्षुब्ध और आक्रोशित कर दिया है। वे इस घटना को पूरे झारखंड प्रदेश और विशेषकर आदिवासी समाज के लिए बहुत बड़ा ‘कलंक’ मान रहे हैं।

अनिल अंशुमन
22 May 2019
NATURAM GAUDESE

‘दीकू’ का सम्बोधन झारखंड के आदिवासी समाज के लोग अक्सर वैसे गैर आदिवासी समाज (बाहरी) के कतिपय तत्वों के लिए करते हैं जो अपनी क्षुद्र हरकतों से जबरन अपनी दबंगता का रौब गांठते हैं। आदिवासियों के लिए दीकू का मतलब होता है – दु:ख – तकलीफ़ देने वाला या दिक (दिक्कत) पैदा करने वाला।

ऐतिहासिक संताल–हूल के समय संताल और स्थानीय ग्रामीण समाज के लोग दीकू का सम्बोधन स्थानीय सूदखोर, महाजन, अंग्रेज़परस्त जमींदार और उनके कारिंदों के लिए करते थे। मान्यता है कि तभी से दीकू सम्बोधन हर उस कतिपय गैर आदिवासी समाज के व्यक्ति के लिए स्थायी बन गया जो आदिवासियों को परेशान और तंग तबाह करता था। ऐसा नहीं है कि गैर आदिवासी समाज के हर व्यक्ति को वे अपना दुश्मन मानते हैं, क्योंकि आदिवासी समाज को उसकी सादगी, सरलता और शांतिप्रियता के लिए ही सर्वत्र जाना जाता है। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि जब भी किसी दीकू समाज के लोगों ने उनकी शांत ज़िंदगी में कोई व्यवधान पैदा किया है तो यह समाज अपना आपा खो बैठता है। जिसके लिए इन्हें ... असभ्य, जंगली और हिंसक–बर्बर कहकर हमेशा दुष्प्रचारित किया गया है। 

गोडसे चौक 2.jpg

19 मई को झारखंड के हो आदिवासी बाहुल्य इलाका कहे जानेवाले कोल्हान (वर्तमान का सिंहभूम ज़िला) क्षेत्र के चक्रधरपुर में कतिपय कट्टर हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा पहली बार ‘गोडसे जयंती’ मनाई गयी। साथ ही संघ परिवार के संगठन ‘गिरिराज सेना’ द्वारा वेद–मंत्रोच्चारण के साथ शहर के संतोषी मंदिर स्थित पापड़हाता के पास के एक चौक का नामकरण ‘गोडसे चौक’ कर दिया गया। इस परिघटना ने इस क्षेत्र समेत राज्य के पूरे आदिवासी समाज को काफी क्षुब्ध और आक्रोशित कर दिया है। वे इस घटना को पूरे झारखंड प्रदेश और विशेषकर आदिवासी समाज के लिए बहुत बड़ा ‘कलंक’ मान रहे हैं।

सनद हो कि झारखंड के आदिवासी समाज के लोग गांधी जी को दिल से बहुत मानते हैं और उनके अहिंसा के सिद्धांतों से गहरे प्रभावित रहे हैं। गांधी जी के अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम की पुकार पर पुरानी रांची प्रमंडल के काई इलाकों में आदिवासियों द्वारा चलाया गया “जतरा टानाभगत आंदोलन” का जबर्दस्त अभियान आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। जिसने उस दौर में आदिवासी समाज पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि ‘टाना भगत पंथ’ की स्थापना हो गयी। गांधी जी अहिंसा के सिद्धांतों का पूरे मनोयोग से पालन करना,चरखा चलाकर सूत कातना और खुद के बुने सफ़ेद खादी वस्त्रों को धारण करने का रिवाज सा चल पड़ा था। टाना भगतों के स्वतन्त्रता आंदोलनों पर अंग्रेजों ने भीषण दमन ढाये लेकिन इन्होंने उसका जवाब अहिंसक होकर ही दिया था। आज भी झारखंड के विभिन्न इलाकों में टाना भगतों को विशेष सम्मान दिया जाता है। अपने समय में बिरसा मुंडा द्वारा आदिवासी समाज सुधार के लिए वृहत पैमाने पर चलाया गया ‘बिरसाइत’ अभियान का भी स्वरूप इससे काफी मिलता जुलता रहा है।

गोडसे चौक 1.PNG

चक्रधरपुर में गोडसे जयंती मनाने और चौक का नामकरण किए जाने को कोल्हान क्षेत्र समेत प्रदेश के आदिवासी समाज और उनके संगठन के लोग आदिवासियों के सामाजिक व सामुदायिक समरसता पर कतिपय ‘दीकू संस्कृति’ का खुला हमला मान रहे हैं। हाल के वर्षों में वर्तमान केंद्र व प्रदेश के भाजपा सरकारों के खिलाफ सबसे अधिक मुखर प्रतिवाद करने वाले राज्य के आदिवासी ही रहे हैं। इस घटना पर सोशल साइट में आ रहीं सभी प्रतिक्रियाओं में काफी तीखेपन के साथ कहा जा रहा है कि - यह आदिवासियों की धरती है, यहाँ नाथूरम जैसे हत्यारों के लिए कोई जगह नहीं है... विल्किसन रूल और कस्टमरी लॉ के तहत ग्रामसभा इस पर कड़ी कार्रवाई करे... राज्यपाल/मुख्यमंत्री अगर धारा 244 के तहत फौरन कार्रवाई नहीं करेंगे तो आदिवासी समाज यहाँ ‘पत्थलगड़ी’ कर गोडसे पंथियों को सबक सिखाएगा और क्षेत्र से बाहर निकालेगा इत्यादी! गौरतलब है कि भाजपा शासन द्वारा थोपे जा रहे तथाकथित हिन्दू राष्ट्र सिद्धान्त का बहुसंख्या आदिवासी प्रबल विरोधी हैं। इसी क्रम में पिछले दिनों खूंटी इलाके में आदिवासी स्वाययत्तता की स्थापना के लिए चलाये गए पत्थलगड़ी अभियान से सबसे अधिक तथाकथित हिंदुत्ववादी दीकू शक्तियाँ ही घबराई हुई थीं। जिसपर काबू पाने के लिए भाजपा सरकार को भारी संख्या में अर्धसैन्य बल तैनात कर कई गाँवों पर देशद्रोह का मुकदमा दायर कर भीषण राज्य–दमन चलाना पड़ा था। आदिवासियों का स्पष्ट कहना है वर्तमान भाजपा शासन के तथाकथित हिंदुत्ववादी उग्र धार्मिक उन्माद अभियान का असली मकसद है, आदिवासी अस्तित्व– अस्मिता और उनके जल-जंगल-ज़मीन व प्रकृतिक संसाधनों पर कब्ज़ा करना। जिसे वे किसी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे।

वर्तमान लोकसभा के चुनावी परिणामों के संदर्भ में अधिकांश अनुमान यही लगाया जा रहा है कि इस आदिवासी इलाके में भाजपा नहीं जीतेगी। उसपर से गोडसे पूजन और चौक नामकरण की इस ताज़ा घटना ने भाजपा व उसकी हिंदुत्ववादी चौकड़ी के खिलाफ एक नए संवेदनशील विवाद को पैदा कर दिया है। जो किसी न किसी सामाजिक विस्फोट के रूप में ही सतह पर आयेगा। याद रहे कि इसी कोल्हान क्षेत्र में पिछले दिनों जब भाजपा मुख्यमंत्री खरसाँवाँ शहादत दिवस में गए थे तो पहली बार उन्हें सार्वजनिक तौर से काले झंडे दिखाए गए और उनपर जूते चले थे। मोदी जी कि भक्त मंडली के गोडसेवादी भक्त देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी संरक्षण से चाहे जितनी मनमानी करके गोडसे–पूजन और गांधी निंदा कर लें लेकिन आदिवासियों के इलाके में उनका यह कुकृत्य लोग नहीं सहन करेंगे। क्योंकि इसी देश का इतिहास बतलाता है कि अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ सबसे पहला सशत्र प्रतिरोध इसी क्षेत्र के हो आदिवासियों ने संगठित होकर किया था। जिसे आज भी कोल विद्रोह के नाम से जाना जाता है। उस समय अंग्रेज़ी हुकूमत को भी यहाँ के आदिवासियों की स्वायत्तता बहाल रखने के किए ‘विल्कीलसन रूल’ का विशेष करार बनाने व लागू करने को बाध्य होना पड़ा था, इसलिए यह विवाद अब थमनेवाला नहीं है!

 

    

Nathuram Godse
RSS
BJP
Jharkhand

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • 21-year-old Muslim youth hanged himself from one and a half feet high tap
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डेढ़ फ़ीट ऊंचे नल से फांसी लगाई 21 साल के मुस्लिम युवक ने : उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा
    11 Nov 2021
    उत्तर प्रदेश के कासगंज में पुलिस हिरासत में 21 साल के अल्ताफ़ की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि अल्ताफ़ ने शौचालय के नल से लटक कर फांसी लगा ली। मृतक के पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे की हत्या हुई है…
  • UAPA
    अजय कुमार
    UAPA: भारत में कानून के राज को तोड़ने का सबसे धारदार हथियार
    11 Nov 2021
    अगर सरकार चाहें तो UAPA कानून के ज़रिये महज़ आरोप लगाकर लोगों को सालों साल जेल में रख सकती है, जानिए कैसे? 
  • ASHA Workers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी
    11 Nov 2021
    पुलिस के बयान के उलट आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे उस रैली की ओर मार्च कर रही थीं, जहां मुख्यमंत्री सभा को सम्बोधित कर रहे थे और मुख्यमंत्री के दौरे के पूरा…
  • कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    न्यूज़क्लिक टीम
    कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    10 Nov 2021
    फिल्म निर्देशक टी जे ज्ञानवेल और सूर्या-ज्योतिका द्वारा निर्मित तमिल फिल्म 'जय भीम' की प्रोफेशनल और आर्थिक कामयाबी पर किसी को संदेह नहीं। यह फिल्म लोकप्रियता के रिकार्ड बना रही है. तमिल से लेकर…
  • पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    10 Nov 2021
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ फाइजर की एंटीवायरल दवा पेक्सलोविड के बारे में चर्चा करेंगे, यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि कैसे यह Covid-19 ख़िलाफ़ एक सार्थक विकल्प हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License