NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंडः स्कूलों के विलय नीति के विरोध में 5 सितंबर को शिक्षक करेंगे महाधरना
ग्रामीण स्कूलों के विलय, लंबित वेतन और काम करने की ख़राब स्थिति इस विरोध प्रदर्शन के मूल मुद्दे हैं।


सुमेधा पॉल
04 Sep 2018
jharkhand

झारखंड सरकार की स्कूल विलय नीति से राज्य के शिक्षक बेहद नाराज़ हैं। इस नीति के तहत राज्य के क़रीब 5000 स्कूलों को बंद किया जा रहा है। इन्हीं स्कूलों के शिक्षकों में से एक शिक्षक संजय कुमार दुबे ने कहा, "मैं 15 वर्षों से ज़्यादा समय से विरोध कर रहा हूं, मुझे अपना वेतन पाने के लिए कब तक ऐसा करना चाहिए? विद्यालयों के विलय की नीति मामलों को और ख़राब करेगी, जब मुझे भुगतान नहीं किया जा रहा है तो मैं पढ़ाने के लिए कितना सफर करूंगा।"

शिक्षकों ने अब एक रिपोर्ट में शिक्षक की मांग का जवाब देने के लिए राज्य सरकार को अल्टीमेटम दिया है। अगर 5 सितंबर तक जवाब प्राप्त नहीं होते हैं तो इन शिक्षकों ने राज्यव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। संजय कुमार जो कि राज्य के शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी हैं उन्होंने कहा, "वर्तमान नीतियां राज्य में शिक्षा प्रणाली को बर्बाद करने वाली है।" शिक्षकों की कई चिंताएं हैं, इस सूची में सबसे ऊपर आरटीई के तहत उनकी भर्ती को लेकर विसंगतियां हैं।

जमशेदपुर के शिक्षक मित्र शंकर गुप्ता ने बताया, "मुझे वेतन प्राप्त किए हुए अब चार महीने से ज्यादा हो गया है। सरकार की भर्ती नीति में विसंगतियां हैं,वह प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित शिक्षकों को एक ही श्रेणी में रख रही है। जो कुछ भी हम मांग कर रहे हैं वह हमारी न्यूनतम मज़दूरी है, सही मायने में हम जिसके लायक हैं।"

राज्य में शिक्षकों के संगठन 27 अगस्त को किए गए उनके दावों के नए प्रयास में राज्य सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। सरकार की उदासीनता से निराश शिक्षक सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। योजना के मुताबिक़ वे राजभवन के बाहर अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में एक प्रदर्शन करेंगे। ये महाधरना सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक किया जाएगा। शिक्षकों द्वारा किए गए विरोधों को उस वक़त और गति मिल गई जब शिक्षकों ने अगस्त महीने में शिक्षक दिवस समारोहों के बहिष्कार करने का फैसला किया था।

वेतन के मुद्दों के अलावा ये शिक्षक बड़े अंतर्निहित मुद्दों जैसे राज्य में स्कूलों के पुनर्गठन या विलय को लेकर चिंतित हैं। सरकार ने वर्तमान में राज्य में क़रीब 6,000 से अधिक स्कूलों को विलय कर लिया है। विलय के लिए बताया गया कारण इन स्कूलों में नामांकन की संख्या कम रही है, जो अक्सर राज्य के दूरस्थ ज़िलों में स्थित है। वे स्कूल जिन्हें अब बंद किया जा रहा है वे 2000 के दशक के बाद से राज्य में यूनिवर्सल शिक्षा देने के दृष्टिकोण का हिस्सा था। विलय का नया समूह जो 2018-19 के बीच होने को तैयार है उसे लेकर शिक्षकों और छात्रों में समान रूप से चिंताओं को जन्म दे रहा है। दुबे ने आगे कहा, "इन स्कूलों को विशेष क्षेत्र में 20 छात्रों को शिक्षा देने के लिए स्थापित किया गया था, अब सरकार जिसमें 60 से अधिक छात्र हैं उस स्कूल को बंद कर रही है और इस मामले में शिक्षकों को कोई न्याय नहीं दिया जा रहा है। मुझे बस अपने जॉब का लोकेशन बदलने या खोने का विकल्प दिया जा रहा है।"

शिक्षकों के लिए एक प्रमुख चिंता की सच्चाई यह भी है कि विलय के दूसरे चरण में वंचित समूहों के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। विशेष रूप से दुर्गम इलाके के आसपास कोई स्कूल नहीं होने के चलते छात्रों को अपने नए स्कूलों से वंचित रहने की संभावना है।

जुलाई 2017 में शुरू हुई ये नीति दिशानिर्देश ने " कार्य कुशलता के लिए राज्य भर के छोटे स्कूलों के तर्कसंगतकरण की ओर इशारा किया।" यद्यपि वर्तमान में बीजेपी के सांसदों द्वारा इस नीति का विरोध किया जा रहा है, हालांकि उनकी निर्देश और कार्यवाही की योजनाएं अभी तक क़ायम नहीं हुई हैं। राजस्थान में पहले इस कार्यक्रम की स्पष्ट सफलता के बाद इस नीति को झारखंड सरकार ने राज्य में लागू किया था। सरकार ने तर्क दिया है कि ये नीति संसाधनों विशेष रूप से शिक्षकों के अधिक कुशल उपयोग करने की अनुमति देगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, शंकर गुप्ता ने कहा, "कुशल उपयोग का कोई सवाल नहीं है, अगर मैं केवल 8,000 रुपए महीने ही कमा रहा हूं और सफर के लिए बड़ी रक़म ख़र्च करने पड़ेंगे तो मैं कुशलतापूर्वक योगदान कैसे करूंगा।" उन्होंने यह भी कहा कि इन दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन से किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होगी बल्कि शिक्षकों और छात्रों दोनों को ही दूर कर दिया जाएगा।

इस नीति के तहत, ओडिशा, मध्य प्रदेश और झारखंड पहले तीन राज्य थे जिन्हें 30 महीने के कार्यक्रम के लिए चयन किया गया था, जिसके तहत नीति आयोग ने इन सुधारों को लागू करने के लिए दो निजी संगठनों- प्रबंधन परामर्शदाता बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और पिरामल ग्रुप के गैर-लाभकारी संगठन पिरामल फाउंडेशन फॉर एजुकेशन लीडरशिप को शामिल किया।

इस मॉडल ने शिक्षकों के बीच डर पैदा कर दिया है कि यह राज्य में शैक्षणिक संस्थानों को निजीकृत और कमज़ोर करने का एकमात्र प्रयास है। यही शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन के मुख्य कारणों में से एक है।

प्राथमिक विद्यालयों का पुनर्गठन राज्य में शिक्षा प्रणाली के कायापलट का कारण बन गया है, और झारखंड में शिक्षकों की आजीविका के नुकसान की चिंताओं के साथ छात्रों के बाहर करने को लेकर सिविल सोसाइटी संगठनें और शिक्षकों के संघ फरवरी से इस विलय के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर भविष्य में इस आंदोलन के तीव्र होने की संभावना है।

Jharkhand
school teachers
Right to education

Related Stories

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

ओडिशा: अयोग्य शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित होंगे शिक्षक

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला


बाकी खबरें

  • MGNREGA
    सरोजिनी बिष्ट
    ग्राउंड रिपोर्ट: जल के अभाव में खुद प्यासे दिखे- ‘आदर्श तालाब’
    27 Apr 2022
    मनरेगा में बनाये गए तलाबों की स्थिति का जायजा लेने के लिए जब हम लखनऊ से सटे कुछ गाँवों में पहुँचे तो ‘आदर्श’ के नाम पर तालाबों की स्थिति कुछ और ही बयाँ कर रही थी।
  • kashmir
    सुहैल भट्ट
    कश्मीर में ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ता सुरक्षा और मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं
    27 Apr 2022
    सरपंचों का आरोप है कि उग्रवादी हमलों ने पंचायती सिस्टम को अपंग कर दिया है क्योंकि वे ग्राम सभाएं करने में लाचार हो गए हैं, जो कि जमीनी स्तर पर लोगों की लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए…
  • THUMBNAIL
    विजय विनीत
    बीएचयू: अंबेडकर जयंती मनाने वाले छात्रों पर लगातार हमले, लेकिन पुलिस और कुलपति ख़ामोश!
    27 Apr 2022
    "जाति-पात तोड़ने का नारा दे रहे जनवादी प्रगतिशील छात्रों पर मनुवादियों का हमला इस बात की पुष्टि कर रहा है कि समाज को विशेष ध्यान देने और मज़बूती के साथ लामबंद होने की ज़रूरत है।"
  • सातवें साल भी लगातार बढ़ा वैश्विक सैन्य ख़र्च: SIPRI रिपोर्ट
    पीपल्स डिस्पैच
    सातवें साल भी लगातार बढ़ा वैश्विक सैन्य ख़र्च: SIPRI रिपोर्ट
    27 Apr 2022
    रक्षा पर सबसे ज़्यादा ख़र्च करने वाले 10 देशों में से 4 नाटो के सदस्य हैं। 2021 में उन्होंने कुल वैश्विक खर्च का लगभग आधा हिस्सा खर्च किया।
  • picture
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अर्जेंटीना ने लिया 45 अरब डॉलर का कर्ज
    27 Apr 2022
    अर्जेंटीना की सरकार ने अपने देश की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के साथ 45 अरब डॉलर की डील पर समझौता किया। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License