NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कैंटोनमेंट की सड़कों को आम जनता के लिए खोले जाने के पीछे क्या अचल संपत्ति मुख्य कारण है ?
मेजर प्रियदर्शी ने ये आरोप लगाया कि रक्षा मंत्रालय का ये निर्णय कि कैंटोनमेंट के इलाकों में आम सड़क को बनाया जाए सिर्फ ज़मीन माफिया और Director General of Defence Estates (DGDE) में कुछ लोगों को फायदा पहुँचाएगा I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Jun 2018
army

मेजर प्रियदर्शी के एक के बाद एक किये गए ट्वीटस ने सेना की ज़मीन पर कई सवाल खड़े किये हैं I उन्होंने ये आरोप लगाया कि रक्षा मंत्रालय का ये निर्णय कि कैंटोनमेंट के इलाकों में आम सड़क को बनाया जाए सिर्फ ज़मीन माफिया और Director General of Defence Estates (DGDE) में कुछ लोगों को फायदा पहुँचाएगा I 28 मई को दिए गए आधिकारिक प्रेस स्टेटमेंट में आम लोगों की आर्मी स्कूल तक पहुँच का हवाला दिया गया I

लेकिन एक अफवाह के अनुसार जो कि रक्षा से जुड़े लोगों में प्रचलित है, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन और उनके पति का कैंटोनमेंट के सेकुन्दर्बाद इलाके में घर है I आरोप ये भी है कि वह इस इलाके में स्कूल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाते हैं I यही वजह है कि वह चाहते हैं कि कैंटोनमेंट के दरवाज़े आम लोगों के लिए खुल जाएँ I आरोप है कि जो घर और बाकि संपत्ति है वह सीताराम और उनके पति के नाम पर नहीं है I

रक्षा की ज़मीन का दूसरी चीज़ों के लिए इस्तेमाल करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों और CAG की रिपोर्टों में लिखा गया है I 2010 में Comptroller General of Defence Accounts (CGDA) ने Directorate General of Defence Estates को ख़तम करने की सलाह दी थी I DGDE कैंटोनमेंट के इलाकों में ज़मीन और संपत्ति पर नज़र रखता है और MOD को अपनी रिपोर्टें भेजता है I ये बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि कैंटोनमेंट के इलाके में साड़ी ज़मीन सिर्फ सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों की होती है I ये कई सारी वजहों से हो सकता है जैसे किसी पूर्व अफसर द्वारा अपने बच्चों के लिए अपनी संपत्ति को दे दिया जाना I लेकिन 2013 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इस तरह की संपत्ति पर रोक लगा दी थी I

2013 में सर्वोच्च न्यायलय के द्वारा दिया गया निर्णय पूने के एक घर से सम्बंधित था I ये घर सुरक्षा बलों से जुड़े एक व्यक्ति के वंशज द्वारा बनाया गया था, उस ज़मीन पर जो सेना ने उनके पिता को दी थी I ये ज़मीन उन्हें अनुदान में मिली थी यानि वह इस पर घर बनाकर रह सकते थे I लेकिन सरकार का इस संपत्ति पूरा अधिकार बना रहा I सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जो लोग यहाँ किसी घर में रह रहे हैं वह उसके ढाँचे का और विस्तार कर सकते हैं I लेकिन सरकार उन्हें इस संपत्ति का मुआवज़ा देकर कभी भी ले सकती है I

2013 में CAG ने सुरक्षा बलों की ज़मीन के ख़राब प्रबंधन पर बात रखी थी I CAG ने ये पाया था कि लीस के नवीनीकरण में देरी के चलते 829.71 करोड़ रुपयों की आय नहीं आयी है  I पहले की रिपोर्टों में CAG ने इस बात पर भी गौर किया था कि सुरक्षा बालों की ज़मीन पर दूसरे विभागों के लोगों ने सरकार की इजाज़त के बिना कब्ज़ा जमाया हुआ है और इससे 8.63 करोड़ रुपये बकाया हैं I पूने में  Willingdon Club को मिले भूमि अनुदान पर क्लब ने DEO को वापस नहीं लौटाया , जिसके बाद ये क्लब बंद हो गए I इसी तरह स्तानीय सेना प्राधिकारियों ने एक मामले में लड़कियों का हॉस्टल और शौपिंग मौल भी बनवाया था I

2014 में भी CAG ने सेना की ज़मीन के गलत इस्तेमाल की शिकायत की थी I इस मामले में , मुंबई में United Services Club ने सेना की ज़मीन पर कब्ज़ा जमा लिया था जिससे हर साल Rs. 5.74 करोड़ का नुक्सान हुआ था I जिस ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया उसकी कीमत Rs. 114.85 करोड़ थी और उसपर क्लब 36000 रुपये हर साल किराये के तौर पर देता था I इससे ये लगता है कि लगातार सेना की ज़मीन का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है I

2014 में लोक सभा सांसद पूनम महाजन का जवाब देते हुए उस समय के रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने ये माना था कि सेना की 11,455 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया है I उत्तर प्रदेश में ये सबसे ज़्यादा होता है जहाँ सेना की 3,142 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया है I उत्तर प्रदेश के बाद ये महाराष्ट्र और हरियाणा में हुआ है जहाँ 1,512 और 1,002 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया है I

2014 में Common Cause जो कि दिल्ली का एक NGO है ने Centre for Public Interest Litigation (CPIL), के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिक दायर की जिसमें सेना की ज़मीन पर कब्ज़े के मुद्दे को उठाया गया I इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि सेना की ज़मीन पर ऐसा होना अनियमितताओं , अवैधता और भ्रष्टाचार की वजह से है I इस याचिका में CAG रिपोर्ट का कई बार हवाला दिया गया है ,ये मामला अब भी कोर्ट में चल रहा है I इस मामले में पिछला फैसला 25 अगस्त 2017 को आया था I 2013 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के और CAG द्वारा बार बार इस मामले को उठाये जाने के बावजूद ऐसा लगता है कि MoD और सेना के अधिकारी अपनी मनमानी पर अड़े रहेंगे I

भारतीय सेना
अचल संपत्ति
कैंटोनमेंट
सड़कें

Related Stories

उत्तराखंड: बारिश से भारी संख्या में सड़कों और पुलों का बहना किसका संकेत?

शिलांग हिंसा के पीछे क्या जातीय तनाव है?

मेजर गोगोई मामला : PUDR ने कहा ताक़त का गलत इस्तेमाल किया गया है

जारी रक्षा "सुधार" भारतीय सेना के गोलाबारूद की कमी की समस्या का हल नहीं कर सकते हैं


बाकी खबरें

  • gauhati
    सबरंग इंडिया
    गुवाहाटी HC ने असम में बेदखली का सामना कर रहे 244 परिवारों को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की
    20 Dec 2021
    इन परिवारों को 15 नवंबर को बेदखली का नोटिस दिया गया था; उनका कहना है कि उनके भूमिहीन पूर्वजों को राज्य सरकार द्वारा सेटलमेंट के लिए जमीन दी गई थी
  • inflation
    सुबोध वर्मा
    महंगे ईंधन से थोक की क़ीमतें बढ़ीं, कम मांग से कम हुई खुदरा क़ीमतें
    20 Dec 2021
    बाज़ार में इन दो प्रकार की क़ीमतों में यह विचित्र अंतर अर्थव्यवस्था की जर्जर स्थिति और लोगों की परेशानी को दर्शाता है।
  • Chunav Chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: यूपी चुनाव में छोटे दलों की भूमिका पर विशेष
    19 Dec 2021
    बड़ी पार्टियों की हर समय बात होती है, लेकिन छोटी पार्टियां...! इनका क्या? जबकि ये भी हर चुनाव में बड़ी भूमिका निभाती हैं। उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी इनकी अहम भूमिका रहने वाली है। सामाजिक और…
  •  What was the history of Aurangzeb
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या था औरंगज़ेब का इतिहास?
    19 Dec 2021
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस भाग में नीलांजन औरंगज़ेब के बारे में बात करते हैं इतिहासकार तनूजा से
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : "मैंने रिहर्सल की है ख़ुद को दुनियादार बनाने की..."
    19 Dec 2021
    इतवार की कविता में आज पढ़िये इमरान बदायूंनी की बेहद नए ज़ावियों पर लिखी यह ग़ज़ल...   वक़्त पे आँखें नम करने की, वक़्त पे हँसने गाने की
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License