NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन: केंद्र ने किसानों को भेजा प्रस्ताव, मोर्चे ने मांगा स्पष्टीकरण, सिंघु बॉर्डर पर अहम बैठक
एसकेएम ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से एक लिखित मसौदा प्रस्ताव प्राप्त होने की पुष्टि की है। सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को इसी मुद्दे पर मोर्चा की बैठक हुई और बुधवार को भी इसी पर बैठक हो रही है, जिसमें आंदोलन के भविष्य पर अहम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Dec 2021
किसान आंदोलन: केंद्र ने किसानों को भेजा प्रस्ताव, मोर्चे ने मांगा स्पष्टीकरण, सिंघु बॉर्डर पर अहम बैठक

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से एक लिखित मसौदा प्रस्ताव प्राप्त होने की पुष्टि की है। सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को हुई संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक भी इसी मुद्दे पर हुई। लेकिन अभी भी कई मसलों पर पेच फंसा है। सबसे बड़ा पेच न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी और केस वापसी को लेकर है।

सरकार का कहना है कि आंदोलन खत्म करने के बाद केस वापसी का ऐलान करेंगे। दूसरी ओर, किसान चाहते हैं कि सरकार अभी इस पर ठोस आश्वासन दे।

एसकेएम ने कहा कि वो सरकार के प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं पर और स्पष्टीकरण मांगेगा, और आगे की चर्चा के लिए बुधवार, 8 दिसंबर को फिर से बैठक करेगा।

मोर्चा को सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद है। हालांकि आंदोलन का नेतृत्व बुधवार को इस आंदोलन को लेकर कोई अहम निर्णय कर सकते है।

एकबार देखते हैं सरकार का क्या प्रस्ताव है और किसानों को क्या संदेह है। सरकार ने पांच बिन्दुओं का प्रस्ताव भेजा है।

1) सबसे पहले सरकार ने MSP को लेकर कहा कि इसपर पर प्रधानमंत्री जी ने स्‍वयं और बाद में कृषि मंत्री जी ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है, जिस कमेटी में केन्‍द्र सरकार, राज्‍य सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक सम्मिलत होंगे। हम इसमें स्‍प्‍ष्‍टता करना चाहते हैं कि किसान प्रतिनिधि में SKM के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

सरकार के इस प्रस्ताव पर किसान नेता बलबीर राजेवाल ने कहा कि सरकार ने MSP को लेकर कमेटी की बात की है। जिसमें दूसरे संस्थानों, राज्य और अफसरों के साथ किसानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हमें इस पर ऐतराज है। ऐसे लोग कमेटी में नहीं होने चाहिए, जो सरकार के साथ कानून बनाने में शामिल रहे।

अशोक धावले ने कहा कि MSP कमेटी में किसान संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। एक साल से हमने आंदोलन लड़ा। जो किसान संगठन कृषि कानून के हक में थे, उन्हें कैसे कमेटी में रखा जा सकता है।

2) सरकार ने आंदोलन के दौरान हुए केसों पर कहा कि जहां तक किसानों को आंदोलन के वक्‍त के केसों का सवाल है यूपी सरकार और हरियाणा सरकार ने इसके लिए पूर्णतया सहमति दी है कि आंदोलन वापस खींचने के बाद तत्‍काल ही केस वापस लिए जाएंगे। किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार के संबंधित विभाग और संघ प्रदेश क्षेत्र के आंदोलन के केस पर भी आंदोलन वापस लेने के बाद केस वापस लेने की सहमति बनी है।

किसान मोर्चा की तरफ से अशोक धावले ने कहा कि केस वापस होने को लेकर किसानों में संदेह है। हमारा कहना है कि यह विश्वास की बात है। अकेले हरियाणा में 48 हजार किसानों पर केस दर्ज हैं। यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान और मध्यप्रदेश में केस दर्ज हैं। देश भर में रेलवे ने भी सैकड़ों केस दर्ज किए हैं। इसके लिए कोई समय-सीमा होनी चाहिए। इसके लिए सरकार तुरंत शुरुआत करे।

किसान नेताओं ने सरकार पर संदेह किया कि कहीं वो बाद में अपने वादे से मुकर न जाएं। क्योंकि हरियणा के किसानों ने कहा कि जाट आंदोलन के केस वो आजतक भुगत रहे हैं।

3) आंदोलन में मृत किसानों के परिवारों को मुआवजे पर सरकार ने कहा कि मुआवजे का जहां तक सवाल है, इसके लिए भी हरियाणा और यूपी सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। जबकि इसके संबंध में पंजाब सरकार ने भी सार्वजनिक घोषणा कर दी है।

इसपर किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने केवल सैद्धांतिक मंजूरी दी है, लेकिन हमारी मांग है कि केंद्र सरकार पंजाब मॉडल की तरह मुआवजे की मांग को माने, जिसमें 5 लाख का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी का जिक्र है। ये ही उचित न्याय होगा।

4) बिजली बिल विधयेक पर सरकार ने कहा कि जहां तक इलेक्‍ट्रिसिटी बिल का सवाल है, संसद में पेश करने से पहले सभी स्‍टेकहोल्‍डर्स के अभिप्राय लिए जाएंगे।

अशोक धावले ने कहा कि यह बिल संसद में न लाया जाए। इससे किसानों की मुश्किल बढ़ेगी और उन्हें ज्यादा बिल देना पड़ेगा। इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा ये किसानों के साथ ही देश की आम जनता के भी खिलाफ है।

5) वहीं पराली के सवाल पर सरकार ने कहा कि जहां तक पराली के मुद्दे का सवाल है, भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा 14 एवं 15 में क्रिमिनल लाइबिलिटी से किसान को मुक्ति दी है ।

इस पर किसान संगठनों ने कहा, सरकार ने कुछ राहत दी है लेकिन उसमें एक सेक्शन डालने से फिर से किसानों को दिक्कत हो सकती है। किसान नेताओं ने इस सेक्शन को भी हटाने की मांग की है।

अंत में सरकार ने कहा कि इस तरह से पांचों मांगों का उचित समाधान हो चुका है। अब किसान आंदोलन को जारी रखने का कोई औचित्‍य नहीं रहता है ।

इसके जबाब में किसान नेताओं ने कहा कि बुधवार को होने वाली बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मोर्चा ने मंगलवार को कहा कि उसने आंदोलन को समाप्त करने का अनुरोध करने वाले सरकार के प्रस्ताव का जवाब दिया है, जिसमें कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

संगठन ने कहा कि उसने किसानों पर दर्ज 'फर्जी’’ मामले वापस लेने के लिये आंदोलन समाप्त करने की सरकार की पूर्व शर्त पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।  

इसके अलावा एक मामला गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी का भी है। लखीमपुर खीरी मामले में उनके खिलाफ एक्शन पर सरकार की ओर से अभी कुछ नहीं कहा गया है और वह अभी तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने हुए हैं।

SKM
Farmer protests
Centre’s Draft
MSP guarantee
SKM Meeting
farmer deaths

Related Stories

क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी: सावित्री बाई फुले को याद करना, मतलब बुल्ली बाई की विकृत सोच पर हमला बोलना
    03 Jan 2022
    सवाल यह है कि जिन लोगों ने, सावित्री बाई फुले के ऊपर कीचड़ डाला था, उनके ख़िलाफ गंदी-अश्लील टिप्पणी की थी, वे 2022 में कहां हैं। वे पहले से अधिक खूंखार हो गये हैं, पहले से ज्यादा बड़े अपराधी—जिन्हें…
  • stop
    सोनिया यादव
    ‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा
    03 Jan 2022
    मुस्लिम महिलाओं को ‘ट्रोल’ करने की कोशिश के बीच विपक्ष के साथ-साथ महिला संगठनों और आम लोगों ने सोशल मीडिया पर इस मामले में सरकार और पुलिस की सक्रियता और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः एनएमसीएच के 84 डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव, मरीज़ों में कोरोना चेन बनने का ख़तरा
    03 Jan 2022
    एनएमसीएच में डॉक्टरों समेत 194 लोगों का सैंपल लिया गया था। 84 डॉक्टरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आशंका बढ़ गई है कि अस्पताल के कई मेडिकल स्टॉफ भी चपेट में आ सकते हैं।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : जारी है एचईसी मज़दूरों की हड़ताल, साथ आए सभी विपक्षी दल
    03 Jan 2022
    एचईसी के मज़दूरों के टूल डाउन और हड़ताल को एक महीना हो गया है और अभी भी वो जारी है, ऐसा एचईसी के इतिहास में पहली बार हुआ है।
  • covid
    ऋचा चिंतन
    नहीं पूरा हुआ वयस्कों के पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य, केवल 63% को लगा कोरोना टीका
    03 Jan 2022
    पहले केंद्र ने दिसंबर 2021 के अंत तक भारत में सभी वयस्क आबादी के पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लेने का लक्ष्य घोषित किया था। जबकि हकीकत यह है कि करीब 9.73 करोड़ वयस्कों को अभी भी दोनों खुराक दी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License