मीडिया यह सुनिचित कर रहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए आतंक का माहौल बना रहे और मीडिया के साधन नफरत फैलानें के काम में लगें रहें।
भाषा सिंह कश्मीर से आने वाली खबरों के प्रति न्यूज चैनलों की बेखबरी और किस तरह एक संस्थान जमीन पर मौजूद हुए बिना, केवल पेपर पर लिख देने मात्र से इंस्टिट्यूट ऑफ़ एमिनेंस की उपाधि हासिल कर सकता है जैसे मुद्दों पर जरूरी सवाल उठा रही हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया यह सुनिचित कर रहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए आतंक का माहौल बना रहे और मीडिया के साधन नफरत फैलानें के काम में लगें रहें। न्यूज़ चैनलों द्वारा बुरारी आत्महत्या काण्ड की सनक भरी कवरेज यह बताती है कि न्यूज़रुम में सच्चे और जरुरी खबरों के लिए कोई जगह नहीं है। सत्ता और पैसे की ऐसी सांठ गांठ इससे पहले कभी नहीं देखी गयी थी और इससे पहले मीडिया का मुँह इस तरह से कभी नहीं बंद किया गया था।
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