NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मोदी सरकार के बचाव के लिए आरबीआई- क्योंकि ये चुनाव का समय है!
इस साल केंद्र सरकार को आर.बी.आई. ने रिकॉर्ड 66,000 करोड़ रुपये दिए हैं, मोदी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय बैंक से दिमाग चकरा देने वाली राशि यानी 9 लाख करोड़ रुपये चूसे हैं।
सुबोध वर्मा
20 Feb 2019
Translated by महेश कुमार
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: NDTV

18 फरवरी को, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को “अंतरिम लाभांश” के रूप में 28,000 करोड़ रुपये देने का फैसला किया। 2018-19 में यह अपने कुल हस्तांतरण का रिकॉर्ड 68,000 करोड़ है। RBI ने अगस्त 2018 में 2017-18 के लिए लाभांश के रूप में 40,000 करोड़ रुपये पहले ही हस्तांतरित कर दिए थे। इसने पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है, वह भी वर्तमान सरकार के तहत, 2015-16 में किए गए 65,896 करोड़ रुपये के मुकाबले में। अंतरिम लाभांश अतिरिक्त एक प्रकार का स्थानांतरण है - इसे अगले वित्तीय वर्ष के आरबीआई के खातों में दिखाया जाएगा। आरबीआई का वित्तीय वर्ष जुलाई से जून है जबकि सरकार का वित्तीय वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है।

इसके साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार ने RBI से धन हासिल करने के लिए कई तरह के रिकॉर्ड बनाए हैं। इसके पांच साल के शासनकाल में, सरकार को RBI से 2.93 लाख करोड़ का बतौर इनाम मिला है। पिछले पांच वर्षों (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन -2 के तहत) जो महज 1.08 लाख करोड़ रुपये का हस्तांतरण देखा गया था। (18 फरवरी को RBI वार्षिक रिपोर्ट और RBI बोर्ड की घोषणा के आधार पर नीचे दिया गया चार्ट देखें)

RBI 1_0.jpg

भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 47 के अनुसार, आरबीआई केंद्र सरकार को अपना लाभ हस्तांतरित करने के लिए कानून के तहत बाध्य है, जो कहता है कि: “बुरे और संदिग्ध ऋणों का प्रावधान करने के बाद, परिसंपत्तियों के अवमूल्यन, कर्मचारियों और योगदान और सेवा-निवृत्ति लाभ और ऐसे सभी मामलों के लिए धन, जिनके लिए प्रावधान इस अधिनियम के तहत या जो आमतौर पर बैंकरों द्वारा प्रदान किए जाते हैं, के लिए किया माना गया है, इसके मुनाफे का बकाया केंद्र सरकार को भुगतान किया जाएगा। "

केंद्रीय बैंक की मुख्य आय सरकारी प्रतिभूतियों और बांडों से अर्जित ब्याज से प्राप्त होती है। जैसा कि धारा 47 में लिखा गया है, यह अतिरिक्त को पीछे छोड़ते हुए अपनी शुद्ध आय से विभिन्न प्रावधानों के लिए आवश्यक राशि को स्थानांतरित करता है।

पहले की सरकारें इस मुनाफे को पाने के लिए उत्सुक नहीं थीं। पिछले वर्षों की RBI की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि हस्तांतरित राशि उन वर्षों में लाभ का लगभग आधा थी। लेकिन मोदी सरकार जोर देकर कह रही है कि लगभग पूरी राशि जो आरबीआई के पास अतिरिक्त मूल्य के रूप में है, उसे हस्तांतरित कर दिया जाए। कानूनी तौर पर, ऐसा करना उसके अधिकार के भीतर है। लेकिन इसकी एक पीछे की कहानी भी है।

अगर मौजूदा वित्त वर्ष का ही मामला लें, जो मार्च 2019 में समाप्त हो जाएगा। इस महीने की शुरुआत में पेश किए गए 2019-20 के अंतरिम बजट ने भविष्यवाणी की थी कि सेवा एवं वस्तु कर (GST) से राजस्व में 1 लाख करोड़ रुपये की कमी होगी। कॉरपोरेट टैक्स में 50,000 करोड़ रुपये की रियायतों के कारण टैक्स द्वारा अर्जित खजाने को भी लुटा दिया जाएगा। दूसरी तरफ, सरकार ने किसानों को आय में समर्थन देने के कार्यक्रम के खाते में 2018-19 के लिए संशोधित अनुमानों में 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च को पहले ही शामिल कर लिया है। इस राशि को बजट में शामिल नहीं किया गया था, और मानदंडों के एक विचित्र तरीके से, सरकार ने बजट में इसकी तस्करी की थी तब जबकि वित्तीय वर्ष के सिर्फ दो ही महीने बचे हैं।

इन सब हरकतों के परिणामस्वरूप, और ऐसी अन्य, अवसरवादी नीतियां - या सर्वथा विनाशकारी नीतियों की वजह से- सरकार बड़े राजस्व घाटे में फंस गयी है, अर्थात, इसका खर्च इसकी आय से बहुत अधिक है। अपने आप में, इसमें कुछ भी गलत नहीं है जब तक कि इसका इस्तेमाल लोगों के लाभ के लिए खर्च किया जाता है। लेकिन मोदी सरकार के मामले में, राजस्व में कमी इसलिए है क्योंकि यह कॉरपोरेट्स को रियायतें दे रही है और खर्च में बढ़ोतरी इसलिए है क्योंकि कुछ ही महीनों पहले लुभावनी योजनाओं को लाया जा रहा है, जो एक आम चुनावी वादे से ज्यादा कुछ नहीं है।

इसीलिए आरबीआई को खाली किया जा रहा है। वास्तव में, 1 फरवरी को पेश किए गए अंतरिम बजट पर करीबी नज़र डालने से पता चलता है कि सरकार ने पहले ही RBI से बढ़े हुए लाभांश के तथ्य को ध्यान में रख ऐसा किया था कि 2018-19 के लिए संशोधित अनुमान में, इसने RBI के लाभांश और अतिरिक्त 74,140 करोड़ रुपये का बजट रखा था, जिसमें राष्ट्रीयकृत बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल हैं, हालांकि मूल बजट अनुमान 54,817 करोड़ रुपये का था।

इस सबसे ऐसा लगता होता है कि मोदी सरकार की लापरवाही के लिए कम से कम आंशिक रूप से ही सही लेकिन आरबीआई द्वारा उसे सब्सिडी दी जा रही है। दुर्भाग्य से, यह लापरवाही देश के लोगों की मदद नहीं कर रही है। बल्कि यह कॉरपोरेट जगत की मदद कर रही है, वह भी चुनाव से पहले आम लोगों को कुछ लुभावनी योजनाओं के साथ।

RBI
Interim Budget
Modi Govt
RBI Annual Report
GST Revenue
RBI Interim Dividend
elections 2019

Related Stories

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

मोदी सरकार 'पंचतीर्थ' के बहाने अंबेडकर की विचारधारा पर हमला कर रही है

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा

ज्ञानवापी, ताज, क़ुतुब पर बहस? महंगाई-बेरोज़गारी से क्यों भटकाया जा रहा ?

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!


बाकी खबरें

  • Colombia
    पीपल्स डिस्पैच
    कोलंबिया में साल 2021 का 91वां नरसंहार दर्ज
    16 Dec 2021
    इंस्टीट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट एंड पीस स्टडीज (INDEPAZ) ने आगाह किया है कि 2021 में हुए नरसंहारों की संख्या 2020 में हुए नरसंहारों की कुल संख्या को पार कर सकती है। फ़िलहाल, दोनों ही आंकड़े बराबर हैं। 
  • bank strike
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी : निजीकरण के ख़िलाफ़ 900 बैंकों के 10,000 से ज़्यादा कर्मचारी 16 दिसम्बर से दो दिन की हड़ताल पर
    16 Dec 2021
    बैंक कर्मचारियों की यूनियन का दावा है कि कॉरपोरेट घरानों की नज़र जनता द्वारा बड़ी मेहनत से कमाए गए 157 लाख करोड़ रुपयों पर है, जो सरकारी बैंकों में जमा है।
  • Advocate Manavi of ALF, YJ Rajendra of PUCL and Pastor Lucas present the report.
    निखिल करिअप्पा
    नई रिपोर्ट ने कर्नाटक में ईसाई प्रार्थना सभाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को दर्ज किया
    16 Dec 2021
    पीयूसीएल की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ज़्यादातर मामलों में पुलिस पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है, यहां तक कि उन मामलों में भी पुलिस सुरक्षा नहीं दे पाई जहां उन्हें खुफ़िया…
  • modi
    सबरंग इंडिया
    काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन: मंदिर और राज्य के विकास में अंतर क्यों नहीं?
    16 Dec 2021
    क्या पीएम को औरंगजेब का जिक्र ऐसे चुनावी राज्य में लाना था जहां अयोध्या फैसले के बाद से मंदिर की राजनीति गर्म हो रही है?
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 7,974 नए मामले, 343 मरीज़ों की मौत
    16 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 87 हज़ार 245 हो गयी है।वही कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामलों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License