NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अंतरराष्ट्रीय
क्यूबा में नाकाबंदी ख़त्म करने की मांग को लेकर उत्तरी अमेरिका के 100 युवाओं का मार्च
अमेरिकी नाकाबंदी को खत्म करने और द्वीप के साथ एकता-सद्भाव के संबंधों को मज़बूत करने की मांग करते हुए युवा नेता क्यूबा के प्रतिष्ठित मई दिवस मार्च में शामिल हुए।
पीपल्स डिस्पैच
04 May 2022
Cuba

"भविष्य निर्माण करो, नाकाबंदी खत्म करो!"

यह नारे लगाते और इसके बैनर के साथ क्यूबा के लोग कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से पहली बार 1 मई को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर बड़ी संख्या में हवाना की सड़कों पर उतरे। अनुमान है कि इस मौके पर 600,000 क्यूबाई नागरिक देश की राजधानी हवाना में लामबंद हुए। उनके साथ 60 अन्य देशों के 1,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता भी जुटे थे।

क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने ट्विटर पर लिखा, "[ यह] एक कामकाजी लोगों का प्रदर्शन है, जो हार नहीं मानेंगे और एक अवसरवादी तथा आपराधिक नाकाबंदी की जोर-जबरदस्ती के सामने रचनात्मक रूप से लड़ेंगे। साम्राज्यवाद का मंसूबा क्यूबा के लोगों की अपनी क्रांति की रक्षा करने के मजबूत चट्टानी इरादों के सामने फेल हो जाएगा।”

मई दिवस पर मार्च करने वाले द्वीप पर मौजूद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों में उत्तरी अमेरिका के विभिन्न सामाजिक आंदोलनों और संगठनों से जुड़े 100 युवा लोगों के समूह शामिल हैं। इंटरनेशनल पीपल्स असेंबली द्वारा लाए गए प्रतिनिधिमंडल ने परेड में एक बैनर टांगा जिस पर लिखा था- "भविष्य का निर्माण करो, नाकाबंदी खत्म करो!” उस प्रतिनिधिमंडल में पीपल्स फोरम, ब्लैक यूथ प्रोजेक्ट 100, डिसेंटर्स, ऑंसर कोएलिशन, फिलिस्तीनी यूथ मूवमेंट, कोडपिंक समूह और अन्य के नेता शामिल हैं।

मई दिवस परेड में उनकी भागीदारी के अलावा, ये प्रतिनिधिमंडल वैज्ञानिकों, कलाकारों, श्रम, एलजीबीटीक्यू, समुदाय और नस्लवाद विरोधी कार्यकर्ताओं जैसे क्यूबा समाज के विभिन्न वर्गों के साथ बैठक करेगा। क्यूबा के मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल सेंटर द्वारा आयोजित इस संवाद का मकसद छह दशकों की अमेरिकी नाकाबंदी के क्यूबाई लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को विविध आयाम देना और उन पर बहस करना है।

प्रतिनिधिमंडल को व्यवस्थित करने में मदद करने वाले पीपल्स फोरम के सह-कार्यकारी निदेशक मनोलो डी लॉस सैंटोस ने कहा, "यह ऐतिहासिक यात्रा 1960 के दशक में क्यूबा और उत्तरी अमेरिकी युवाओं के बीच मौजूद दोस्ती और एकजुटता के विशेष संबंधों की पुष्टि करेगी। उन्होंने कहा, "हमारा दौरा बाइडेन द्वारा क्यूबा के विरुद्ध 243 प्रतिबंधों के जारी रखने के पूर्ण विरोध में है, जो क्यूबा के लोगों को चोट पहुंचाते हैं और उन पर प्रतिकूल असर डालते हैं।”

नाकाबंदी जारी है।

पहले, डोनाल्ड ट्रम्प (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति) के शासनकाल के तहत और अब जो बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिकी सरकार ने वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट (कोविड-19) के दौरान भी क्यूबा के प्रति अपनी नाकेबंदी में ढील देने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी नाकाबंदी के चलते क्यूबा को छह दशकों में 130 अरब डॉलर से अधिक की कीमत चुकानी पड़ी है, और इसके स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र को 2.9 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है और घाटे का सामना करना पड़ा है।

कोरोना महामारी ने क्यूबा को विशेष रूप से दुष्प्रभावित किया है क्योंकि इसने द्वीप पर वायरस संक्रमण को रोकने के लिए डेढ़ साल से अधिक समय तक अपनी सभी पर्यटन गतिविधियों को स्थगित कर दिया है। महामारी की शुरुआत से पहले, क्यूबा के पर्यटन क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 10 फीसदी होता था। जीडीपी में तेज गिरावट ने क्यूबा की जनसंख्या के लिए अन्य महत्त्वपूर्ण रूप से भोजन जुटाने एवं दवा के साथ अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात करने की उसकी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इसने क्यूबा की बहुसंख्यक आबादी के जीवन स्तर को काफी प्रभावित किया है।

इन भारी चुनौतियों के बावजूद, क्यूबा कोविड-19 के खिलाफ पांच टीकों का उत्पादन करने में सक्षम था, जिनमें से दो, Soberana II और Abdala ऐसा है, जो वैश्विक स्तर पर अन्य टीकों के बीच सबसे असरकारी हैं।

क्यूबा के खिलाफ बढ़ते दबाव के संदर्भ में, दुनिया भर में एकजुटता आंदोलनों और संगठनों ने क्यूबा के लिए भौतिक समर्थन और एकजुटता जुटाई है। चल रहे युवा ब्रिगेड में आयोजन और भाग लेने के अलावा, पीपल्स फोरम ने द्वीप पर सिरिंज, पाउडर दूध और अन्य खाद्य उत्पादों को लाने के लिए कई धन उगाहने वाले अभियानों का आयोजन किया है, और प्रमुख कलाकारों, बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र सार्वजनिक किया है, जो मांग करता है कि जो बाइडेन क्यूबा के खिलाफ डोनाल्ड ट्रम्प के शासनकाल में जबरदस्ती लगाए गए एकतरफा नाकेबंदी को हटाएं।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

https://peoplesdispatch.org/2022/05/03/100-north-american-youth-march-in-cuba-to-demand-an-end-to-the-blockade/

cuba
Cuba blockade
Mayday
USA

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

क्यों USA द्वारा क्यूबा पर लगाए हुए प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं अमेरिकी नौजवान

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

युवा श्रमिक स्टारबक्स को कैसे लामबंद कर रहे हैं

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

ब्रुकलिन में हुई गोलीबारी से जुड़ी वैन मिली : सूत्र

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    सपा प्रतिनिधिमंडल को न, दूसरे दलों को हां... आख़िर आज़म का प्लान क्या है?
    25 Apr 2022
    सीतापुर की जेल में बंद आज़म ख़ान से पहले शिवपाल यादव फिर कांग्रेस के आचार्य प्रमोद कृष्णम की मुलाकात नए सियासी समीकरण के संकेत दे रही है।
  • tiranga yatra
    न्यूज़क्लिक टीम
    जहांगीरपुरी की तिरंगा यात्रा! कायम की मिसाल, मीडिया कब सुधरेगा ?
    25 Apr 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं जहांगीरपुरी में हुई तिरंगा यात्रा की जिसने आपसी भाईचारे और शांति की एक मिसाल पेश की है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर
    25 Apr 2022
    देश के 129 शहरों की सूची में पटना सबसे ज्यादा प्रदूषित है जिसका सूचकांक 365 पाया गया है। वहीं दूसरे स्थान पर बिहार का ही मुंगेर शहर है जिसका सूचकांक 358 पाया गया है।
  • परमजीत सिंह जज
    लाल क़िले पर गुरु परब मनाने की मोदी नीति के पीछे की राजनीति क्या है? 
    25 Apr 2022
    प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से सिखों के नौवें गुरु तेगबहादुर जी के जन्मदिवस पर भाषण दिया। इस भाषण के कई गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।
  • ऋचा चिंतन
    WHO की कोविड-19 मृत्यु दर पर भारत की आपत्तियां, कितनी तार्किक हैं? 
    25 Apr 2022
    भारत ने डब्ल्यूएचओ के द्वारा अधिक मौतों का अनुमान लगाने पर आपत्ति जताई है, जिसके चलते इसके प्रकाशन में विलंब हो रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License