NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
फिर राम मन्दिर राग
भाजपा ने चौदहवीं बार अपने घोषणापत्र में राम मन्दिर का मुद्दा उछाल कर बची खुची भावनाओं को भुनाने का प्रयास किया है।
वीरेन्द्र जैन
13 Feb 2017
फिर राम मन्दिर राग
अब तक यह बात बहुत साधारणजन को भी समझ में आ चुकी है कि अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण से वोटों की राजनीति का क्या और कैसा सम्बन्ध है, फिर भी भाजपा ने चौदहवीं बार अपने घोषणापत्र में राम मन्दिर का मुद्दा उछाल कर बची खुची भावनाओं को भुनाने का प्रयास किया है।
 
भाजपा सांसद और केन्द्र सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर से वह जुमला उछाला है कि राम मन्दिर अगर अयोध्या में नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा। यह सूत न कपास, जुलाहों में लठम लठा जैसा है। अयोध्या में राम के अनगिनित मन्दिर होंगे और नये मन्दिर के निर्माण पर भी कोई प्रतिबन्ध नहीं है। वहाँ मस्ज़िदें भी हैं व जैन और बौद्ध मन्दिर भी हैं। जो विवाद था वह ‘राम जन्मभूमि मन्दिर’ से सम्बन्धित था /है, न कि राम मन्दिर निर्माण से सम्बन्धित है जैसा गिरिराज सिंह और अन्य नेता चुनावों के समय उठाने लगते हैं। उनके बयानों से अति साधारण धर्मभीरु व्यक्ति को सचमुच लग सकता है कि हिन्दू बहुल देश के एक पौराणिक तीर्थ में उसके आराध्य का मन्दिर न बनने देना तो बड़ा अत्याचार है। धर्म की राजनीति से लाभ उठाने वालों ने बहुत सफाई से जानबूझ कर रामजन्मभूमि मन्दिर के न्यायालय में लम्बित मामले को अयोध्या में किसी राम मन्दिर का निर्माण न होने देने में बदल दिया है, और उसकी जिम्मेवारी अपने विपक्षियों पर डालते रहते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि वे जनता के बीच में अपने पक्ष को ले जाने में खुद को कमजोर मानते हैं इसलिए असत्य/अर्धसत्य का सहारा लेते हैं।
 
रामजन्मभूमि मन्दिर अभियान के शिखर पुरुष लालकृष्ण अडवाणी थे, जो बहुत चतुर राजनेता हैं। वे शब्दों का ऐसा सतर्क प्रयोग करते हैं कि उन पर कभी अनर्गल बोलने का आरोप सिद्ध नहीं हुआ। इस अभियान के दौरान जब विभिन्न विद्वानों ने ठीक उसी स्थान पर राम के जन्म होने से सम्बन्धित प्रमाण मांगने शुरू किये तो उन्होंने कहा था कि मैं नहीं कहता कि राम का जन्म उसी स्थान पर हुआ था किंतु मेरा कहना है कि लोगों का ऐसा विश्वास है कि राम का जन्म उसी स्थान पर हुआ था इसलिए उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इससे पूर्व मुम्बई के एक वास्तुशास्त्री ने कहा था कि वह ऐसा नक्शा बना सकता है कि बाबरी मस्ज़िद उसी स्थल पर रहेगी और उसके ऊपर राम जन्मभूमि मन्दिर बन जायेगा, या बिना मस्ज़िद गिराये उसके नीचे भी भव्य मन्दिर का निर्माण हो सकता है। इसके उत्तर में मन्दिर अभियान से जुड़े लोगों का कहना था कि उन्हें ठीक उसी स्थान पर राम जन्मभूमि मन्दिर चाहिए जहाँ अभी बाबरी मस्ज़िद का ढांचा खड़ा हुआ है। स्पष्ट था कि उनका मतलब वोटों की राजनीति के लिए ध्रुवीकरण करना रहा था।
 
उल्लेखनीय है कि 1984-85 के लोकसभा चुनावों में कुल दो सदस्यों की संख्या तक सिमिट गई भाजपा को देश की राजनीति में स्थान बनाने के लिए कोई सहारा चाहिए था जो यह अभियान बना। वे अचानक ही दो से 180 और फिर दो सौ की संख्या तक पहुँच गये। इस अभियान के अलावा उनकी राजनीति ने ऐसा कुछ भी ठोस नहीं किया था जिससे वे लोकसभा में अपनी संख्या इस हद तक बढा पाते। भाजपा के इतिहास में यही वह मोड़ था जब उन्होंने विचारों और संघर्षों की जगह हथकण्डों, और षड़यंत्रों को अपनी राजनीति का जरूरी हिस्सा बना लिया। स्मरणीय है सर्वाधिक दलबदलुओं को टिकिट देने के सौदों के साथ सम्मलित करने का रिकार्ड इसी पार्टी के पास है और उसका यह खेल अभी भी जारी है। इस पार्टी से जुड़े बुद्धिजीवी और पत्रकार लगातार दलबदल कानून की कमियों के बहाने इसको समाप्त करने के लिए तर्क देते रहते हैं।   
 
कौन नहीं जानता कि भाजपा संघ परिवार का ही एक संगठन है व उसके चौंसठ विभिन्न संगठनों की परस्पर निर्भरता है, किंतु समय समय पर वे कहने लगते हैं कि राम मन्दिर अभियान उनका एजेंडा नहीं विश्व हिन्दू परिषद का एजेंडा है और वे तो उनकी मांग का समर्थन करते हैं। बाबरी मस्ज़िद ध्वंस की जाँच के लिए बैठा लिब्राहन आयोग तो जैसे बैठने के लिए ही बना था। न तो भाजपा चाह्ती थी कि वह कोई रिपोर्ट दे और न ही तत्कालीन सरकारों में यह क्षमता थी कि रिपोर्ट आ जाने पर वह दोषियों को दण्डित करा सके, इसलिए उसके बैठे रहने पर ही सहमति रही। आरोपियों में से एक उमा भारती ने अपने बयान में एक बार कहा कि वे भूल गयी हैं कि 6 दिसम्बर 1992 को क्या हुआ था। दूसरी बार के बयान में उन्होंने कहा कि मस्ज़िद तो भगवान ने तोड़ी। गत 25 सालों से ऐसे ही मखौल के वातावरण में जाँच चली व उस दौर के किसी व्यक्ति के जीवन काल में कोई फैसला सम्भव नहीं दीखता।
 
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के घोषणा पत्र में भाजपा ने कहा है कि वह कानून के अन्दर जल्दी मन्दिर निर्माण के लिए प्रयास करेगी तो इसके उलट इसी अभियान से जुड़े उनके बड़े नेता विनय कटियार कह रहे हैं कि जैसे बाबरी मस्ज़िद तोड़ी वैसे ही मन्दिर भी बना देंगे। यह परोक्ष में बाबरी मस्ज़िद तोड़ने का इकबालिया बयान भी है।
 
सत्ता प्राप्ति के इस अभियान में कितना आर्थिक सामाजिक भावनात्मक नुकसान हुआ उसका हिसाब लगाना मुश्किल है, दूसरी ओर यह भी इतना ही सच है कि यह कोई भावनात्मक उफान नहीं था अपितु सोचे समझे तरीके से इतिहास को तोड़ने मरोरड़ने और अपने राजनीतिक हित में स्तेमाल करने का गन्दा खेल है। यह सहज ढंग से फूटा साम्प्रदायिक विस्फोट नहीं था अपितु उसे योजनाबद्ध ढंग से झूठ और दुष्प्रचार के सहारे विकसित किया गया था।
 
वे जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं। हमको जानना चाहिए कि वे देश के लिए ठीक नहीं कर रहे हैं।
राम मंदिर
उत्तर प्रदेश चुनाव
भाजपा

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?

बिहार: सामूहिक बलत्कार के मामले में पुलिस के रैवये पर गंभीर सवाल उठे!


बाकी खबरें

  • modi
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: खांटी बनारसियों को ही नहीं पसंद आया मोदी का ‘इवेंट’, पुजारी और भक्त भी ख़ुश होने की जगह आहत
    15 Dec 2021
    "मोदी ने नई परंपरा यह गढ़ी है कि बाबा के दरबार में अब जूता पहनकर गर्भगृह तक आसानी से जाया जा सकता है। कांवड़ के बजाय लक्जरी वाहन में बैठकर चांदी के लोटे में गंगाजल ढोया जा सकता है और बाबा गर्भगृह के…
  • एम.के. भद्रकुमार
    बाइडेन-पुतिन की बैठक के एक हफ़्ते बाद संकट गहरा रहा है
    15 Dec 2021
    रूस अपनी उन 'लाल रेखाओं' को फिर से दोहरा रहा है
  • hindutva
    अजय कुमार
    हिंदुत्व की बहस के बीच बेरोज़गारी और महंगाई की मार झेलती ग़रीब जनता
    15 Dec 2021
    बनारस में प्रधानमंत्री मोदी की मज़दूरों के साथ बैठकर खाना खाने की फोटो बहुत अधिक वायरल हो रही है। लेकिन वहीं एक ख़बर शहरी बेरोज़गारी को लेकर आई है। जिस पर कोई चर्चा नहीं है। जिसकी सबसे अधिक मार उसी…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,984 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 57 लोग संक्रमित
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,984 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 57 लोग संक्रमित
    15 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.25 फ़ीसदी यानी 87 हज़ार 562 हो गयी है। इस बीच महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के 8 और दिल्ली व राजस्थान में 4-4 नए मामले सामने आए हैं।
  • GDP
    प्रभात पटनायक
    भारत की महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी अस्थिर है
    15 Dec 2021
    2021-22 की दूसरी तिमाही में जीडीपी की 2019-20 की दूसरी तिमाही के स्तर पर बहाली होने के पीछे उपभोग की बहाली नहीं, बल्कि निवेश में बढ़ोतरी कारण है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License