NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजा महेंद्र प्रताप की प्रगतिशीलता बनाम भाजपा की कट्टरता
भाजपा अपने अति उत्साह में राजा महेंद्र प्रताप को अपने हिंदुत्व के भगवा रंग में रंगना चाहती है।
मुकुंद झा
15 May 2018
एएमयू

भाजपा अपने अति उत्साह में राजा महेंद्र प्रताप को अपने हिंदुत्व के भगवा रंग में रंगना चाहती है।  बीते दिनों एएमयू विवाद हुआ जिसमें जिन्ना की तस्वीर को लेकर भाजपा और उससे जुड़े दक्षिणपंथी हिन्दुत्ववादी संघठन ने भरी हंगामा किया था। अब इस कड़ी में हरियाणा की सरकार में भाजपा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने एक कदम आगे बढ़कर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय का नाम बदलकर राजा महेंद्र प्रताप के नाम करने की मांग कर दी है | इसके पीछे उनका तर्क है की राजा ने विश्वविद्यालय के लिए जमीन दी है और उनका उस विश्वविद्यालय में कोई प्रतीक चिन्ह नही है ।

भाजपा और उससे जुड़े हिन्दुत्ववादी संगठन राजा महेंद्र प्रताप के नाम का प्रयोग अपने हिन्दुत्ववादी सांप्रदायिक प्रचार के लिए कर रहे है।जैसे वो राजा महेंद्र को हिन्दुत्ववादी सांप्रदायिक रंग से पोतने की कोशिश कर रहे है। यहाँ ऐसा लगता है की भाजपा का इतिहास का ज्ञान कमज़ोर है| क्योंकि  अगर उन्हें राजा जी के बारे पता होता तो ऐसी उलजुलूल बाते न करते।

एक नज़र में  राजा महेंद्र प्रताप सिंह  का जीवन 
राजा महेंद्र प्रताप सिंह (1 दिसंबर 1886 - 29 अप्रैल 1979) एक स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक, और भारत के मार्क्सवादी क्रांतिकारी सामाजिक सुधारवादी और भारत की पहली अंतरिम सरकार के अध्यक्ष थे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1 9 40 में जापान में भारत के कार्यकारी बोर्ड का गठन किया। उन्होंने एमएओ कॉलेज के अपने साथी छात्रों के साथ वर्ष 1911 में बाल्कन युद्ध में भी भाग लिया। उनकी सेवाओं की मान्यता में, भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किए।

1895 में प्रताप को अलीगढ़ में सरकारी हाईस्कूल में भर्ती कराया गया था, लेकिन जल्द ही वह मुहम्मद एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेजिएट स्कूल में चले गए जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया| यहाँ उन्होंने मुहम्मद से ब्रिटिश हेडमास्टर्स और मुस्लिम शिक्षकों के अधीन अपनी शिक्षा प्राप्त की सर सईद अहमद खान द्वारा स्थापित एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज अलीगढ़। वह 1905 में स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके और एमएओ छोड़ दिया।1977 में, उप-कुलपति प्रोफेसर ए एम खुसरो के तहत एएमयू ने एमएओ के शताब्दी समारोह में महेंद्र प्रताप को सम्मानित किया। इस पृष्ठभूमि के साथ वह धर्मनिरपेक्ष समाज के एक सच्चे प्रतिनिधि के रूप में उनको आकार दिया। भारत को यूरोपीय देशों के बराबर लाने के लिए लगतार कार्य किया । 

भाजपा की सम्प्रदायिकता और रजा महेंद्र प्रताप 
अपने अति उत्साह में, बीजेपी भारत के निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड की जाँच भूल गई है। अगर ऐसा किया  होता तो, यह पता होता कि महेंद्र प्रताप ने अटल बिहारी वाजपेयी को हराया, जो मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से 1957 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का सबसे स्थायी प्रतीक बना हुआ है। स्वतंत्र के रूप में प्रतियोगिता, राजा महेंद्र ने 96,202 वोटों का चुनाव जीता, अटल विहारी के खिलाफ जीत हासिल की  थी। वास्तव में, भाजपा नेता चौथे स्थान पर रहे थे।


फिर, यह राजा महेंद्र नहीं थे जिसने एएमयू को दान में दिया था। वास्तव में, उनके पिता, घनश्याम सिंह, मुर्सन के राजा, अलीगढ़, जिन्होंने 250 रुपये का उपहार दिया, जिसका उपयोग एएमयू भवन के निर्माण के लिए किया गया था। संयोग से, हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने तीन साल की उम्र में महेंद्र को अपनाया, और उन्होंने अपना समय मुर्सन और वृंदावन के बीच अपना जीवन व्यतीत किया।


1929 में, राजा महेंद्र ने एएमयू को 90 साल की 3.04 एकड़ जमीन पर 2 रुपये प्रति वर्ष की पट्टे पर दे दिया था, लेकिन बड़ी संख्या में भूमि या 74 एकड़ जमीन ब्रिटिश सरकार से खरीदी गई थी, जिसके बाद  अलीगढ़ छावनी बंद करने का फैसला लिया था क्योंकि ये जमीन उसी  की थी।

उन्होंने कभी भी भाजपा की मुस्लिम के प्रति गुस्से और घृणा की राजनीती के समर्थक नही थे बल्कि , राजा इन जाति व्यवस्था को खत्म करना चाहते थे और उनका  धार्मिक सहनसीलता का प्रदर्शन उस समय के लिए प्रभावशाली था।  काफी स्पष्ट रूप से, उन्होंने मुसलमानों के प्रति भाजपा के शत्रुता को साझा नहीं किया। जब राजा महेंद्र ने 1 दिसंबर, 1 9 15 को काबुल में भारत की पहली अस्थायी सरकार की स्थापना की, तो उनके प्रधान मंत्री मौलाना बरकातुल्लाह थे, उनके गृह मंत्री मौलाना उबायदुल्ला सिंधी थे, और उनके विदेश मंत्री चेम्पाकरमन पिल्लई थे। इस समूह ने अंग्रेजों को भारत से हटाने के लिए विदेशों में कई संदेश  भेजे, और भारतीय नेताओं को गुप्त संचार भी भेजा।

उनके क्रांतिकारी उत्साह ने उन्हें लेनिन समेत दुनिया भर के कई लोगों का दिल जीते, जिन्होंने उन्हें एक बैठक के लिए रूस में आमंत्रित किया। यह राजा महेंद्र को मार्क्सवादी के रूप में वर्णित करने के लिए प्र्होत्साहित करता है , लेकिन धर्म और जाति के बंधनों को तोड़ने के लिए वह एक प्रगतिशील नेता थे । वह स्वतंत्र विचार के थे । अपने बाद के वर्षों में, वह जापान चले गए, लेकिन उन्होंने भारत पर हमला करने और ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए जापानी सहायता को बंद कर दिया। उनका कारण: उनका मानना ​​था कि जापान का रवैया ब्रिटिशों से उल्लेखनीय रूप से अलग नहीं हो सकता था।


 

राजा महेंद्र प्रताप सिंह
भाजपा
सम्प्रदायिकता
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविध्यालय
दक्षिणपंथी
हिंदुत्व
AMU
Raja Mahendra Pratap Singh
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • 21-year-old Muslim youth hanged himself from one and a half feet high tap
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डेढ़ फ़ीट ऊंचे नल से फांसी लगाई 21 साल के मुस्लिम युवक ने : उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा
    11 Nov 2021
    उत्तर प्रदेश के कासगंज में पुलिस हिरासत में 21 साल के अल्ताफ़ की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि अल्ताफ़ ने शौचालय के नल से लटक कर फांसी लगा ली। मृतक के पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे की हत्या हुई है…
  • UAPA
    अजय कुमार
    UAPA: भारत में कानून के राज को तोड़ने का सबसे धारदार हथियार
    11 Nov 2021
    अगर सरकार चाहें तो UAPA कानून के ज़रिये महज़ आरोप लगाकर लोगों को सालों साल जेल में रख सकती है, जानिए कैसे? 
  • ASHA Workers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी
    11 Nov 2021
    पुलिस के बयान के उलट आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे उस रैली की ओर मार्च कर रही थीं, जहां मुख्यमंत्री सभा को सम्बोधित कर रहे थे और मुख्यमंत्री के दौरे के पूरा…
  • कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    न्यूज़क्लिक टीम
    कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    10 Nov 2021
    फिल्म निर्देशक टी जे ज्ञानवेल और सूर्या-ज्योतिका द्वारा निर्मित तमिल फिल्म 'जय भीम' की प्रोफेशनल और आर्थिक कामयाबी पर किसी को संदेह नहीं। यह फिल्म लोकप्रियता के रिकार्ड बना रही है. तमिल से लेकर…
  • पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    10 Nov 2021
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ फाइजर की एंटीवायरल दवा पेक्सलोविड के बारे में चर्चा करेंगे, यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि कैसे यह Covid-19 ख़िलाफ़ एक सार्थक विकल्प हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License