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शिक्षा
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सीबीएसई  : एससी-एसटी छात्रों के परीक्षा शुल्क में 24 गुना वृद्धि से छात्र और अभिभावक नाराज़ 
सीबीएसई  ने एससी और एसटी छात्रों के लिए 10 वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा शुल्क में 24 गुना वृद्धि की है। अब इस वर्ग के छात्रों को 50 रुपये के बजाय 1200 रुपये का शुल्क देना होगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Aug 2019
CBSE
Image courtesy: The Hindu

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अनुसूचित जाति (एसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों के लिए 10वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा शुल्क में 24 गुना वृद्धि की है। अब इस वर्ग के छात्रों को 50 रुपये के बजाय 1200 रुपये का शुल्क देना होगा। सामान्य वर्ग के छात्रों के शुल्क में भी दो गुनी वृद्धि की गई है और अब उन्हें 750 रुपये के स्थान पर 1500 रुपये देने होंगे। 

 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए छात्रों को नवीं कक्षा में और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए 11वीं कक्षा में पंजीकरण करना होता है। सीबीएसई ने पिछले हफ्ते फीस वृद्धि की अधिसूचना जारी की और जिन स्कूलों ने पुरानी व्यवस्था के तहत पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है उन्हें छात्रों से फीस का अंतर वसूलने को कहा। 

अधिकारी ने बताया कि 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अतिरिक्त विषय के लिए एससी/एसटी छात्रों को 300 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। पहले अतिरिक्त विषय के लिए इन वर्गों के छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। सामान्य वर्ग के छात्रों को भी अतिरिक्त विषय के लिए 150 रुपये के बजाय अब 300 रुपये का शुल्क देना होगा। 

अधिकारी ने कहा, ‘‘ शत प्रतिशत दृष्टि बाधित छात्रों को सीबीएसई परीक्षा शुल्क से छूट दी गई है। हालांकि, जो छात्र अंतिम तारीख से पहले नई दर के अनुसार शुल्क जमा नहीं करेंगे उनका पंजीकरण नहीं होगा और उन्हें 2019-20 की परीक्षा में बैठने की इजाजत नहीं होगी।’’

स्थानांतरण शुल्क (माइग्रेशन फीस) भी 150 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये कर दिया गया है। विदेश स्थित सीबीएसई के स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को अब पांच विषयों के बोर्ड परीक्षा शुल्क के रूप में 10 हजार रुपये देने होंगे। पहले यह राशि पांच हजार रुपये थी। 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अतिरिक्त विषय के लिए इस श्रेणी के छात्रों को अब 1000 रुपये के बजाय 2000 रुपये का शुल्क देना होगा। 

ऑल इण्डिया पैरंट्स एसोशिएसन ने सीबीएसई द्वारा परीक्षा फीस में वृद्धि का विरोध करते हुए , इसे आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। इसके राष्ट्रिय अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील अशोक अग्रवाल ने इसे असंवैधानिक और छात्रों की शिक्षा के अधिकार के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि सीबीएसई का यह कदम गरीब जनता के शिक्षा पर प्रतिकूल असर डालेगा। 

कई छात्र संगठनों ने भी इसका विरोध किया और इसे आर्थिक और सामजिक रूप से पिछड़े समुदाय के छात्रों पर गंभीर हमला बताया। छात्र संगठन एसएफआई के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित कटारिया ने इसे एससी/एसटी छात्रों के खिलाफ एक साज़िश बताया और कहा कि एससी/एसटी तबके के बच्चे अब कुछ हद तक स्कूली शिक्षा ले रहे है लेकिन सरकार नहीं चाहती कि ये तबके पढ़े,ये इन्हें दबाए रखना चाहती है। केंद्र सरकार ने पहले तो एससी /एसटी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृति का फंड कट किया और अब उनके फीस में लगातर वृद्धि कर रही है। 

भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI)दिल्ली की राज्य कमेटी ने भी इसका विरोध किया और इसे गरीब जनता को शिक्षा से दूर करने वाल कदम बताया। इसके दिल्ली संयुक्त सचिव अमन सैनी ने कहा कि देश के बच्चों को लूटना और शिक्षा पर खर्च को कम करना  मोदी सरकार की शिक्षा नीति है और इन्हें  करने के लिए पहले भावनात्मक मुद्दों लाए जाते हैं ताकि गरीब जनता इस में बह जाए और उसकी आड़ में यह काम किया जाता है। आगे उन्होंने कहा कि  अगर सरकार इस बढ़ी हुई फीस को वापस नहीं लेगी तो अन्य संगठनों के साथ व्यापक साझेदारी कर स्कूली छात्रों को लेकर सरकार के खिलाफ अंदोलन करेंगे। 
                     (समाचार एजेंसी इनपुट के साथ )

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