NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
अंतरराष्ट्रीय
सऊदी अरब में 1,20,000 वर्ष पुराने इंसानी पदचिन्हों का पाया जाना प्रारंभिक मानव की उपस्थिति की ओर इशारा करते हैं      
एक हालिया अध्ययन ने अरब में झील की सतह पर खोजकर्ताओं द्वारा मानवीय पद-चिन्हों की मौजूदगी का पता लगा लेने से प्रारंभिक इंसानों की उपस्थिति पर और अधिक रोशनी डालने का काम किया है।
संदीपन तालुकदार
24 Sep 2020
g
चित्र सौजन्य: एससीआईन्यूज़। छायाचित्र मात्र प्रतिनिधित्व हेतु।


अफ्रीका से बाहर निकलने के पश्चात आधुनिक इंसान ने उस कौन से मार्ग को अपनाया होगा जो उसे यूरेशिया और मध्य पूर्व तक ले गया होगा? वर्षों से अरब प्रायद्वीप के बारे में यह स्पष्ट धारणा बनी हुई है कि इसके जरिये ही हमारे अफ्रीकी पूर्वजों ने यूरेशिया एवं मध्य पूर्व तक पहुंचने के मार्ग को अपनाया होगा।

अरब प्रायद्वीप में पाए गए पत्थरों से बने विभिन्न औजारों से भी यह पता चलता है कि प्रारंभिक मनुष्यों ने इतिहास में कई बार इस क्षेत्र को खंगालने का काम किया था। अतीत को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि उस जमाने में अरबी इलाका आज की तरह का रेगिस्तानी इलाका नहीं हुआ करता था।

वास्तव में वहां पर तब स्थायी ताजे पीने वाले पानी की झील के साथ-साथ हरे-भरे घास के मैदान हुआ करते थे। लेकिन अभी तक जो भी इस बारे में ठोस सबूत के तौर पर सामने आया है, वह असल में एकमात्र इंसानी उंगली की हड्डी ही प्राप्त हो सकी थी, जो कि आज से करीब 88,000 साल पहले की है।

लेकिन हाल ही में साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक अध्ययन ने अरब के इलाके में प्रारंभिक मनुष्यों की उपस्थिति पर और अधिक रौशनी डालने का काम किया है। इस बाबत खोजकर्ताओं ने सूचित किया है कि उन्हें झील की सतह पर इंसानी पद-चिन्हों का पता चला है। इन पैरों के निशानों के बारे में अनुमान है कि ये लगभग 120,000 वर्ष पुराने हैं। इंसानी पद-चिन्हों के निशानों के अलावा उन्हें अन्य जानवरों जैसे कि गधे, ऊंट, विशालकाय भैंसों एवं हाथी के पैरों के निशान भी मिले हैं।

अरब प्रायद्वीप में एक दशक के लंबे अनुसन्धान में सेटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए शोधकर्ताओं की टीम द्वारा हजारों ताजे पानी की झीलों की सतह का पता चल सका है। ये किसी जमाने में ये प्रचुर मात्रा में ‘हरे-भरे’ रहे अरबी जल निकायों के गवाह के तौर पर हैं। जिस झील के किनारे उन्हें प्राचीन मनुष्यों के पदचिन्ह मिले, उन्हें 'अलथर' कहा जाता है, जिसका अर्थ अरबी भाषा में 'चिन्ह' होता है।

यहां पर एक झील की सतह पर उन्हें सैकड़ों पैरों के निशान देखने को मिले हैं, जो बुरी तरह से रौंदे जा चुके थे। झील की सतह शायद हाल ही में उसके उपर जमा तलछट के कटाव के चलते उजागर हो सकी थी। कई साल पहले जानवरों द्वारा छोड़े गए पैरों के निशानों में से शोधकर्ताओं द्वारा लगभग 400 पदचिन्हों को ट्रैक किया जा सका है, जिनमें से सिर्फ सात को इंसानी पैरों के निशानों के तौर पर पहचाना जा सका और इसकी पुष्टि की जा सकती है।

इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि पैरों के ये निशान मनुष्यों के थे और पैरों के छाप की साइज़ और आकार की तुलना करने के बाद यह तय पाया गया कि ये निशान निएंडरथल के नहीं हो सकते थे। उनके अनुसार उस पथ पर जो पैरों के निशान देखने को मिले हैं वे आकार में लंबे और ऊँचे प्राणियों के हो सकते थे जिनका वजन कम था, जोकि कुल मिलाकर मनुष्यों की निशानी बयां करते हैं। जबकि निएंडरथल के पैरों के निशान एवं बाकी आकार अलग होते हैं।

इन प्रारंभिक इंसानों ने हजारों किलोमीटर के अपने प्रवासन के दौरान कुछ समय के लिए इस क्षेत्र में ताजे पानी की झील में अपनी प्यास बुझाने के लिए रुकने का इरादा किया होगा, और इस यात्रा में उनके साथ उनके जानवर भी रहे होंगे। जैसे ही वे लोग यहाँ से आगे गुजरे होंगे, ये पदचिन्ह जल्द ही सूख गए होंगे और अंततः जीवाश्म में तब्दील हो गए होंगे।

शोधकर्ताओं ने समय का अंदाजा लगाने के लिए जिस प्रकार से पदचिन्हों को तैयार किया उस तकनीक को ऑप्टिकल तौर पर उत्तेजित ल्यूमिनेंस कहा जाता है। इस तकनीक के जरिये इलेक्ट्रॉनों को मापने के जरिये अंदाजा लगाया जाता है, जब अंतिम बार तलछट की परतें प्रकाश के संपर्क में आई होंगी। इसके जरिये टीम ने अंदाजा लगाया है कि इन पदचिन्हों के ऊपर और नीचे की तलछट अब से तकरीबन 121,000  से लेकर 112,000 वर्षों पहले की होनी चाहिए।

इस अध्ययन के सह-लेखक और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिकल इकोलॉजी के मैथ्यू स्टीवर्ट के अनुसार इस दौर में निएंडरथल मध्य पूर्व में नहीं पाए जाते थे और इसने शोधकर्ताओं को यह सटीक अनुमान लगाने के योग्य बनाया कि इन पदचिन्हों का सम्बंध मनुष्यों के साथ ही था।

इसी तरह इस अध्ययन के सह-प्रमुख लेखक और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ़ ह्यूमन हिस्ट्री के माइकल पेट्रागलिया का इस बारे में कहना था कि "खुले घास के मैदानों एवं विशाल जल संसाधनों के साथ-साथ हाथियों और हिप्पो जैसे बड़े जानवरों की उपस्थिति ने उत्तरी अरब क्षेत्र को अफ्रीका और यूरेशिया के बीच विचरण करने वाले मनुष्यों के लिए विशेष तौर पर आकर्षक स्थान बना दिया रहा होगा”।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

 

https://www.newsclick.in/120%2C000-Years-Old-Human-Footprint-Saudi-Arabia-Points-Early-Human-Presence

 

 

Image removed.

ReplyForward

 

human history
arabian penisula
alathar
early humans

Related Stories


बाकी खबरें

  • student in ukraine
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे पीछे: यूक्रेन में फँसे छात्रों से लेकर, तमिलनाडु में हुए विपक्ष के जमावड़े तक..
    06 Mar 2022
    हर हफ़्ते की कुछ चुनिंदा ख़बरों को जो रोचक भी हैं और ज़रूरी भी, लेकर आए हैं अनिल जैन..
  • George Orwell
    समीना खान
    “1984” 2022 में भी प्रासंगिक
    06 Mar 2022
    हाल ही में राजकमल प्रकाशन के लिए अभिषेक श्रीवास्तव ने बीसवीं सदी के सबसे प्रसिद्ध और प्रासंगिक उपन्यास ‘1984’ का अनुवाद किया, जो अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में…
  • Jai Prakash Chouksey
    मृगेंद्र सिंह
    स्मृति शेष : चौकसे साहब के निधन से एक धारदार और आकर्षक लेखनी पर पर्दा गिर गया
    06 Mar 2022
    जय प्रकाश चौकसे की याद में एक प्रशंसक पाठक का संस्मरण।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पूर्वांचल: मुकाबला किसानों-युवाओं की नाराज़गी और सत्ताधारियों के चुनावी प्रबंधन में
    05 Mar 2022
    सात चरणों में विभाजित यूपी के विधानसभाई चुनाव के आखिरी चरण में 7 मार्च को 54 सीटों पर मतदान होगा. किसान और नौजवान सत्ताधारियो से बेहद नाराज़ है. इसके जवाब में सत्ताधारियो का चुनाव प्रबंधन भी बेजोड़…
  • Padtal Duniya Bhar Ki
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यूक्रेन के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र जापोरिजया पर रूसी, आख़िर इरादा क्या है
    05 Mar 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने रूस के यूक्रेन पर हमले के 10वें दिन, यूक्रेन के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र पर कब्जे किये जाने के पीछे, रूसी इरादों के बारे में न्यूज़क्लिक के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License