NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
तिरछी नज़र : CAA, NRC और मंदी
यह सरकार बढ़त की सरकार है। इसीलिए यह सरकार किसी भी चीज़ को, चाहे वह मंदी हो, महंगाई हो, बेरोजगारी हो या फिर असंतोष और आंदोलन, घटाने में विश्वास नहीं करती है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
22 Dec 2019
protest

देश में मंदी छाई हुई है। यह सरकार के सिवाय सबको दिख रहा है और सब मान भी रहे हैं। यह मंदी सरकार को दिख भी रही हो तो भी वह इससे इनकार कर रही है। जो बात सब लोग मानते हों, सरकार उससे आमतौर पर इनकार ही करती है। अब हाल में ही संसद द्वारा पास किये गये, नागरिकता संशोधन बिल (CAB) जो राष्ट्रपति जी के हस्ताक्षर के बाद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) बन गया है, का पूरे देश में विरोध हो रहा है। सभी धर्मों और सभी वर्गों के लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

logo tirchhi nazar_10.PNG

सभी लोग मान रहे हैं कि यह एक्ट खराब है पर सरकार फिर भी इससे इनकार कर रही है। सरकार का यह कहना है कि लोग इसका समर्थन कर रहे हैं पर यह समर्थन बस सरकार को ही दिख रहा है। बाक़ी हम सब को तो विरोध ही विरोध दिखाई दे रहा है।

पर बात तो हम मंदी की कर रहे थे। लग तो यह रहा है कि यह जो नया एक्ट बना है, नागरिकता संशोधन पर, यह एक्ट बढ़ती जा रही मंदी को और बढ़ायेगा ही, उसे घटाने का काम तो हरगिज ही नहीं करेगा। वैसे भी सरकार की रूचि किसी भी बढ़ती हुई चीज को कम करने में नहीं है। सरकार जानती है कि यह बात अच्छी नहीं है कि किसी भी बढ़ती चीज को आप रोकें। आखिर बढ़त ही तो उन्नति है। सरकार चाहती है कि जो कुछ बढ़ रहा है, बढ़ता ही जाये। जैसे मंदी बढ़ रही है तो और अधिक बढ़े। जैसे महंगाई बढ़ रही है तो और अधिक बढ़े। जैसे प्याज के दाम अगर घटने लगें तो आलू के दाम उससे पहले ही बढ़ने शुरू हो जायें।

बेरोजगारी बढ़ रही है तो और अधिक तेजी से बढे़। छात्रों में जितना असंतोष पहले से है, उससे कहीं ज्यादा बढ़े। छात्र असंतोष पहले बढ़ती फीस के कारण बढ़ रहा था तो अब यह छात्र असंतोष नागरिकता संशोधन एक्ट और एनआरसी के कारण बढ़े। सरकार को किसी भी चीज को घटाना गवारा नहीं है। इसीलिए यह सरकार किसी भी चीज़ को, चाहे वह मंदी हो, महंगाई हो, बेरोजगारी हो या फिर असंतोष और आंदोलन, घटाने में विश्वास नहीं करती है।

यह सरकार बढ़त की सरकार है। जहां कहीं पीछे रह जाने की बात हो, वहां भी बढ़त हासिल कर लेने की कला मोदी जी और अमित शाह को आती है। अब इस नये एक्ट की ही बात करें, लगने को तो यह पीछे ले जाने वाला एक्ट लगता है। जिस 'टू नेशन थ्योरी' को अस्वीकार कर हम आगे बढ़ चुके थे, यह एक्ट उस पर वापस लौटने वाला रास्ता है। पर मोदी-शाह को यही 'टू नेशन थ्योरी' पसंद है और वे इसी को सही मानते हैं। उन्हें दुख है कि इस 'टू नेशन थ्योरी' को, जिसे सावरकर ने सबसे पहले रखा, उसे जिन्ना की पैदाइश मान लिया गया। थ्योरी सावरकर की और बाज़ी मार ले गये जिन्ना। मोदी जी और अमित शाह को, सावरकर को जिन्ना से आगे निकालना है।

मोदी जी का मानना है जीवन है चलने का नाम। चलो, चाहे उल्टे कदम ही चलो। चाहे सावरकर की राह ही चलो। चाहे सत्तर साल पहले कूड़ेदान में फेंक दिये गए 'टू नेशन थ्योरी' को वापस लाओ, पर है तो वह चलना ही। मोदी जी असम उल्टा में चले, वह आज तक सुलग रहा है। कश्मीर में उल्टा चले और खूब चले पर वहां के लोग खड़े के खड़े रह गये, और अभी तक खड़े हैं। अब मोदी जी इस सीएए और एनआरसी के जरिये पूरे देश में उल्टा चल रहे हैं और पूरा देश जल रहा है।

पर बात तो मंदी की चल रही थी। मंदी पर तो बात होती रहेगी। मंदी तो लम्बी चलने वाली चीज है। सरकार ने भी अब दबे पांव मंदी को मान लिया है और सरकार मंदी को कम करने के लिए बहुत सारे कदम उठा रही है। यह जो नागरिकता संशोधन बिल (CAB) सरकार ने काफी मेहनत से बनाया और पास करवाया है। और अब यह एक्ट और नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजन (NRC) मिलकर ही हमारे देश को इस मंदी से पार दिलावाएंगे।

आप सोचेंगे कि मैं यह क्या उलटा राग अलाप रहा हूं। पर आप देखेंगे और सोचेंगे तो पायेंगे कि यह एक्ट मंदी के साथ लड़ने का एक कारगर हथियार है। यह मोदी जी भी मानते हैं और मैं भी मानता हूं। बस इस नागरिकता संशोधन एक्ट को समग्रता से नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन के साथ मिलाकर देखने की जरूरत है। असम में एनआरसी लागू हुआ। असम में वर्षों के अथक परिश्रम और अरबों-खरबों रूपये खर्च करने के बाद पता चला कि इससे हम गरीबों से भी छुटकारा पा सकते हैं। हम गरीबों को डिटेंशन कैम्प में भर सकते हैं। असम में जो करीब उन्नीस लाख लोग एनआरसी से बाहर रह गये, अमूमन गरीब ही थे।

देश में गलत फहमी फैलाई जा रही है कि यह जो सीएए है, एनआरसी है, यह मुसलमानों के खिलाफ है। अरे भाई, ये किसी के भी खिलाफ नहीं है। यह तो अपने देश को अमीरों का देश बनाने के लिए एक तरकीब है। यह एक्ट तो गरीबों को देश से भगाने के लिए लाया है। यह सीएए और एनआरसी तो देश की उन्नति के लिए, मंदी दूर करने के लिए, भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए मोदी फार्मूला है। और गरीब लोगों को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्हें बंगलादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान लें या न लें, मोदी जी के प्रभाव से अमरीका, चीन और जापान अपने यहां ले लेंगे। आखिर मोदी जी ने पिछले पांच साल में इतना तो कमाया ही है।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
CAA
NRC
Economic Recession
unemployment
Protest against NRC
Protest against CAA
Narendra modi
modi sarkar
Amit Shah

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें


बाकी खबरें

  • jammu and kashmir
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लाशों की गिनती जारी है
    13 Jan 2022
    वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में सेना ने, अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर 197 मुठभेड़ अभियानों को अंजाम दिया। इनमें 400 से ज्यादा कश्मीरी नौजवान मारे गये।
  • Tilka Majhi
    जीतेंद्र मीना
    आज़ादी का पहला नायक आदिविद्रोही– तिलका मांझी
    13 Jan 2022
    ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के बाद प्रथम प्रतिरोध के रूप में पहाड़िया आदिवासियों का यह उलगुलान राजमहल की पहाड़ियों और संथाल परगना में 1771 से लेकर 1791 तक ब्रिटिश हुकूमत, महाजन, जमींदार, जोतदार और…
  • marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्या अब ख़त्म होगा महिलाओं का संघर्ष?
    13 Jan 2022
    गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि मैरिटल रेप के लिए भी सज़ा मिलनी चाहिए। विवाहिता हो या नहीं, हर महिला को असहमति से बनाए जाने वाले यौन संबंध को न कहने का हक़…
  • muslim women
    अनिल सिन्हा
    मुस्लिम महिलाओं की नीलामीः सिर्फ क़ानून से नहीं निकलेगा हल, बडे़ राजनीतिक संघर्ष की ज़रूरत हैं
    13 Jan 2022
    बुल्ली और सुल्ली डील का निशाना बनी औरतों की जितनी गहरी जानकारी इन अपराधियों के पास है, उससे यह साफ हो जाता है कि यह किसी अकेले व्यक्ति या छोटे समूह का काम नहीं है। कुछ लोगों को लगता है कि सख्त कानूनी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव 2022: बीजेपी में भगदड़ ,3 दिन में हुए सात इस्तीफ़े
    13 Jan 2022
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि रोजाना राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार के एक-दो मंत्री इस्तीफा देंगे और 20 जनवरी तक यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License