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राजनीति
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यूके ने अफ़ग़ानिस्तान के नए खेल में बढ़ाया पहला क़दम
यह एक कड़ी चेतावनी है कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध 19वीं सदी के एक खेल में बदल गया है।
एम. के. भद्रकुमार
12 Oct 2021
Translated by महेश कुमार
Afghanistan
अफ़ग़ानिस्तान पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि सर साइमन गैस, तालिबान के विदेश मंत्री मुल्ला अमीर खान मुत्ताकी से काबुल में 5 अक्टूबर, 2021 को बात करते हुए, वे बाएं से दूसरे स्थान पर बैठे हैं।

हालांकि, भारत के विदेश मंत्री एस॰ जयशंकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से काबुल में तालिबान सरकार के साथ किसी भी किस्म के रचनात्मक जुड़ाव में देरी करने के लिए बाइडेन प्रशासन की परियोजना के प्रति समर्थन जुटाने के लिए उत्कृष्ट प्रचार करने में लगे हैं, जब तक कि वाशिंगटन अपने काम सही ट्रैक पर नहीं ले आता है, जबकि एंग्लो-अमेरिकी धुरी तालिबान को फिर से बातचीत में संलगन करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम कर रही है।

इस संबंध में, ब्रिटेन के सशस्त्र बलों के मंत्री, जेम्स हेप्पी ने 21-22 सितंबर को उज्बेकिस्तान की  यात्रा के दौरान वास्तव में तालिबान सरकार के साथ एक स्थायी जुड़ाव के लिए अपनी ओर से रसद पहुंचाने के लिए एक कामकाज़ी यात्रा की है। अमेरिकी उप-विदेश मंत्री वेंडी शेरमेन ने भी इस सप्ताह ताशकंद में इसका तेजी से पालन किया है।

हेप्पी ने टर्मेज़ में 'फ़ील्ड ट्रिप' किया, जहां सोवियत युग का एक विशाल हवाई अड्डा है (जहाँ से 1980 में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत आक्रमण किया गया था।) ऐसा लगता है कि इसका उद्देश्य 'मानवतावादी रसद पहुंचाने के लिए टर्मेज़ के संभावित इस्तेमाल का आकलन करना था जो गलियारा' अफगानिस्तान की ओर जाता है।

हाल के हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बार-बार विश्व समुदाय के सामने इस बात को उज़ागर किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में इस समय में एक मानवीय आपदा सामने आ रही है जो इस हलचल का बड़ा आधार है। बाइडेन प्रशासन, जो काबुल हवाई अड्डे से अपने अनाड़ीपन से भरी वापसी के चलते बड़ी आलोचना का शिकार हुआ है, इस आसन्न मानवीय संकट के चलते उसकी प्रतिष्ठा को और अधिक नुकसान पहुंचाने की संभावना है जो स्थिति आगे चलकर काफी विस्फोटक हो सकती है। 

यह कहना पर्याप्त होगा कि अमेरिका और ब्रिटेन एक मानवीय सहायता कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं ताकि राजनीतिक दृष्टि से भी तालिबान सरकार के साथ उनके जुड़ाव का मार्ग अनिवार्य रूप से खुल जाए। इस विचार के जरिए तालिबान के साथ काम के स्तर पर संबंधों को 'सामान्य' करना और आपसी विश्वास को उस बिंदु तक ले जाना है जहां से काबुल में सरकार की औपचारिक राजनयिक मान्यता एक तार्किक का कदम देरी के बजाय जल्द लिओया जा सके। 

दिलचस्प बात यह है कि इस बात के पहले से ही कुछ संकेत मिल रहे हैं कि बाइडेन प्रशासन ने वाशिंगटन में पिछले अफ़गान राजदूत एडेला रज़ से खुद को दूर कर लिया है, जिसे अशरफ गनी सरकार ने नियुक्त किया था।

मूल रूप से, वाशिंगटन और लंदन ने तय कर लिया है कि तालिबान सरकार के साथ व्यापार करना संभव है। इसके मूल में उनका रणनीतिक आकलन यह है कि तालिबान और आईएसआईएस आपसी दुश्मन हैं, इस तथ्य को देखते हुए तालिबान सरकार को चुनने से आईएसआईएस और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अन्य आतंकवादी समूहों से उत्पन्न सुरक्षा खतरे को दूर करने का कोई बेहतर तरीका नहीं है।

इस सप्ताह के अंत में, तालिबान ने काबुल के उत्तर में चरिकर शहर में आईएसआईएस के एक बड़े ठिकाने को नष्ट कर दिया है। दूसरा, अफ़ग़ानिस्तान की धरती पर अमेरिका या ब्रिटेन द्वारा किसी भी स्वतंत्र आतंकवाद विरोधी अभियान का तालिबान अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमले के रूप में कड़ा विरोध करेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि, अमेरिका और ब्रिटेन तालिबान के साथ टकराव में उलझने का जोखिम नहीं उठाएंगे, जो न केवल निरर्थक है, बल्कि प्रतिकूल भी हो सकता है क्योंकि यह अफ़ग़ानिस्तान को अस्थिर कर सकता है और आईएसआईएस के लिए अनुकूल जमीन तैयार कर सकता है।

तीसरा, तथ्य यह है कि तालिबान पिछले कई वर्षों में पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के लिए एक जानी-मानी इकाई है, और कोरी बयानबाजी के अलावा, पश्चिमी देशों में तालिबान के व्यावहारिक दृष्टिकोण और पश्चिमी दुनिया में एकीकृत होने की उनकी उत्सुकता के बारे में सकारात्मक प्रभाव है। .

बेशक, पश्चिमी विशेषज्ञ, तालिबान पर भारतीय प्रशासन के एकतरफा दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं, जिसे वह प्रचारित करता है, अर्थात्, वह कहता है कि उनकी खुद की कोई अफ़गान पहचान नहीं है और वे मात्र पाकिस्तानी प्रॉक्सी हैं या उनके समर्थक हैं।

चौथा, पश्चिमी आकलन यह भी है कि तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान के आसपास के क्षेत्रीय देशों - रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान - पर नई शीत युद्ध के हालत में बड़ी प्रतिद्वंद्विता के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल में पूरी तरह से निर्भर होने देना नासमझी है।

पांचवां, जबकि 'अफगान प्रतिरोध' का गूढ़ रहस्य बेखबर दिमाग में के नशे की तरह से है, जानकार हलकों में ठंडा और पेशेवर आकलन यह है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन एक सम्मोहक वास्तविकता है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और शासन उस देश में खुद को मजबूत हो रहा है। ताजिकिस्तान में स्वतंत्र नेतृत्व को धन्यवाद, जो कहते हैं कि ऐसा कोई नहीं सोचता कि तालिबान सरकार को उखाड़ फेंकने का कोई खतरा है।

वास्तविक रूप से कहने का तात्पर्य यह है कि, तालिबान सरकार के साथ व्यापार किए बिना कोई विकल्प नहीं है, और जितनी जल्दी इस दिशा में संपर्क शुरू किया जाएगा, वह दोनों पक्षों के लिए उतना ही अधिक उत्पादक होगा। अफ़ग़ानिस्तान से शरणार्थियों के पलायन करने का भूत वास्तव में पश्चिमी दुनिया को सता रहा है।

इन सभी विविध विचारों ने अफ़ग़ानिस्तान पर नियुक्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के विशेष प्रतिनिधि सर साइमन गैस (समवर्ती रूप से यूके संयुक्त खुफिया समिति के अध्यक्ष और पूर्व में ईरान में ब्रिटिश राजदूत) द्वारा तालिबान सरकार के साथ पहला सीधा संपर्क साधने के लिए काबुल की यात्रा को प्रेरित किया है। 

सर साइमन के साथ काबुल में ब्रिटिश दूतावास में सीडीए मार्टिन लॉन्गडेन भी थे (जो अब दोहा में स्थानांतरित हो गए हैं)। दो ब्रिटिश राजनयिकों का तालिबान के विदेश मंत्री खान अमीर खान मुत्ताकी ने स्वागत किया।

ब्रिटिश सराकर की तरफ से बाद में ट्वीट किया गया कि सर साइमन ने "मुत्ताकी के साथ गंभीर और पर्याप्त चर्चा की है। चर्चा में मानवीय संकट, आतंकवाद, यूके और अफ़गान नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग का महत्व और महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों सहित कई मुद्दों को कवर किया है गया। बाद में ब्रिटेन की विज्ञप्ति में कहा गया कि ब्रिटिश राजदूतों ने तालिबान सरकार के दो उप-प्रधानमंत्रियों मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अखुंद और मावलवी अब्दुल-सलाम हनफ़ी से भी मुलाकात की है।

इसमें कहा गया है, "सर साइमन और डॉ लॉन्गडेन ने चर्चा की कि ब्रिटेन मानवीय संकट से निपटने के लिए अफ़ग़ानिस्तान की मदद कैसे कर सकता है, देश को आतंकवाद की जननी  बनने से रोकने का महत्व क्या है, और जो लोग देश छोड़ना चाहते हैं उनके लिए निरंतर सुरक्षित मार्ग की जरूरत है। उन्होंने अल्पसंख्यकों के इलाज और महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को भी उठाया। सरकार उन लोगों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करना जारी रखेगी जो वहां से जाना चाहते हैं और साथ ही अफ़ग़ानिस्तान के लोगों का समर्थन करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। संभवतः, निकट भविष्य में यूके दूतावास को फिर से खोलने - या काबुल में ब्रिटिश उपस्थिति के किसी रूप को इंकार नहीं किया जा सकता है।

मित्र राष्ट्रों की मूर्तिकला: फ्रैंकलिन रूजवेल्ट और विंस्टन चर्चिल की आदमकद कांस्य प्रतिमाएं न्यू बॉन्ड स्ट्रीट, लंदन में एक बेंच पर मौजूद हैं, जो दुनिया को दो महान शक्तियों के साझा इतिहास की याद दिलाती हैं।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आधुनिक इतिहास में अमेरिका और ब्रिटेन अक्सर एक साथ आगे बढ़े हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आते-जाते रहते हैं लेकिन 'विशेष संबंध' जीवित और संपन्न होते हैं।

निस्संदेह, सर साइमन के मिशन को बाइडेन प्रशासन का पूरा समर्थन प्राप्त था। सर साइमन के काबुल में उड़ान भरने के साथ, नए महान खेल में ब्रिटेन का पहला कदम अफ़ग़ानिस्तान में तथाकथित 'रणनीतिक प्रतियोगिता' में एक टेम्पलेट की शुरुवात है – बाइडेन प्रशासन से मंजूरी लेते हुए - अमेरिका, रूस और चीन को शामिल किया गया है। 

अफ़ग़ान तालिबान के डीएनए पर गैर-महत्वपूर्ण व्यंग्यात्मक बयानबाजी के विपरीत दुस्साहसी ब्रिटिश कदम ने मॉस्को और बीजिंग को आश्चर्यचकित कर दिया होगा। आखिर तालिबान सरकार को मान्यता देने से कौन डरता है?

यह एक कड़ी चेतावनी है कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध 19वीं सदी के महान खेल के एक नए रूप में बदल गया है। कल ही क्रेमलिन मीडिया में अफवाह उड़ी थी कि चीनी विमान बगराम हवाई अड्डे पर उतरे हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

UK Fires the First Shot in the New Great Game

Afghanistan
Afghanistan Crisis
TALIBAN
UK
USA

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