NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
पाकिस्तान
पाकिस्तान के राजनीतिक संकट का ख़म्याज़ा समय से पहले चुनाव कराये जाने से कहीं बड़ा होगा
जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किये जाने का पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर असर पड़ सकता है।
हारून जंजुआ (इस्लामाबाद)
06 Apr 2022
pakistan

क्या इमरान ख़ान अपने राजनीतिक करियर की इस सबसे बड़ी चुनौती से निकल पायेंगे?

संसद के डिप्टी स्पीकर की ओर से प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को "विदेशी साज़िश" क़रार देकर उसे ख़ारिज किये जाने के बाद पाकिस्तान एक संवैधानिक संकट में पड़ गया है।

रविवार को नेशनल असेंबली (संसद के निचले सदन) के सांसद प्रधानमंत्री ख़ान के ख़िलाफ़ मतदान के लिए तैयार थे, लेकिन विवादास्पद क़ानूनी आधारों पर सरकार की ओर से अपने इस क़दम को नाकाम होते पाया।

विपक्षी सांसदों ने अलेंबली के भीतर विरोध प्रदर्शन किया और फिर अपने ख़ुद का सत्र बुलाया, जिसमें 197 सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

हालांकि,उस समय तक राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने ख़ान की सलाह पर संसद को पहले ही भंग कर दिया था।

8 मार्च को नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले विपक्षी गठबंधन ने देश के सुप्रीम कोर्ट में डिप्टी स्पीकर के इस फ़ैसले को चुनौती दी है।

विदेशी साज़िश के दावे

अविश्वास प्रस्ताव को नामंज़ूर किये जाने और संसद के भंग किये जाने जैसे क़दम ने पाकिस्तान के पूरे संविधान को ही सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया है। समय से पहले चुनाव कराने की मांग की गयी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अब भी राष्ट्रपति के इस आदेश को ख़ारिज कर पहले की स्थिति बहाल कर सकता है।

इस संकट के मूल में वह कथित दस्तावेज़ है, जिसमें दावा किया गया है कि दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने पाकिस्तान के दूत असद मजीद को चेतावनी दी थी कि अगर ख़ान सत्ता में बने रहे, तो पाकिस्तान के लिए "गंभीर परिणाम" हो सकते हैं।

ख़ान ने एक स्थानीय समाचार चैनल से कहा, "अब यह साफ़ हो गया है कि यह साज़िश विदेश से रची गयी है। हर किसी को पता है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने अमेरिकी दूतावास को यह कहते हुए उन्हें उनकी कूटनीतिक सीमा बता दी है कि आपने (अविश्वास मत) में दखल दी है।"

अमेरिका ने साफ़ तौर पर पाकिस्तान के घरेलू मामलों में दखल दिये जाने से इनकार किया है, विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि "इन आरोपों में कोई सचाई नहीं है।"

विश्लेषकों का कहना है कि ख़ान पश्चिम पर आरोप लगाकर जनता को विपक्ष के ख़िलाफ़ करने की कोशिश कर रहे हैं।

पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक मुशर्रफ़ ज़ैदी कहते हैं, "प्रधानमंत्री ने साफ़ तौर पर अगले चुनाव के लिए पश्चिम विरोधी मोर्चे का रास्ता अख़्यितार कर लिया है।"

ख़ान ने पिछले महीने मास्को का दौरा किया था और उसी दिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक की थी, जिस दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। तब से ख़ान अपने समर्थकों के सामने ख़ुद को "पश्चिम विरोधी" एक ऐसे नेता के तौर पर पेश करते रहे हैं, जिसमें "साम्राज्यवादियों" के ख़िलाफ़ खड़े होने की हिम्मत है।

लोकतंत्र के लिहाज़ से अहमियत

विपक्षी पाकिस्तानी मुस्लिम लीग पार्टी के शहबाज शरीफ़ ने संसद भंग किये जाने को "बड़े स्तर का राजद्रोह" क़रार दिया है।

उन्होंने पाकिस्तानी प्रेस को बताया, "ख़ान ने देश को अराजकता की ओर धकेल दिया है, और संविधान के इस खुलेआम उल्लंघन के नतीजे भुगतने होंगे।"

राजनीतिक और क़ानूनी जानकारों का मानना है कि विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को ख़ारिज किये जाने से पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर असर पड़ेगा।

वाशिंगटन स्थित वुडरो विल्सन सेंटर फ़ॉर स्कॉलर्स के दक्षिण एशिया के जानकार माइकल कुगेलमैन ने डीडब्ल्यू को बताया, "पाकिस्तान की इन घटनाओं को एक पाकिस्तानी नेता के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बिगाड़ पैदा करने के लिहाज़ से एक और कोशिश की तरह देखा जायेगा। इमरान ख़ान ने विदेशी साज़िश का हवाला देकर अपने क़दम को उचित ठहराते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव से ख़ुद को बचा तो लिया है,लेकिन संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रणाली को त्याग दिया है,जबकि उस कथित साज़िश में सबूतों का अभाव है।"

जानकारों का यह भी कहना है कि संविधान के मुताबिक़ नेशनल असेंबली के पीठासीन अधिकारी (स्पीकर और उनके प्रतिनिधि) को तटस्थ रहने की ज़रूरत है।

इस्लामाबाद स्थित क़ानूनी जानकार ओसामा मलिक ने डीडब्ल्यू को बताया, "यह एक निर्वाचित सरकार की ओर से लोकतंत्र और संविधान पर किया जाने वाला एक अभूतपूर्व हमला था। अगर कार्यवाहक स्पीकर के इन कार्यों को क़ानूनी क़रार दिया जाता है, तो आने वाले दिनों में हर सरकार को अविश्वास मत को रोकने के लिए एक काल्पनिक साज़िश का इस्तेमाल करने की इजाज़त मिल जायेगी।"

द ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान मामलों की जानकार मदीहा अफ़ज़ल ने कहा कि सरकार ने "असंवैधानिक तरीकों से एक राजनीतिक संकट को एक संवैधानिक संकट में बदल दिया है।"

उन्होंने कहा, "इन्होंने देश में क़ानून के शासन को ख़त्म कर दिया है। यह पाकिस्तान के लोकतंत्र के लिए एक झटका है।"

जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री ख़ान ने अगले चुनाव के लिए एक पश्चिम विरोधी मंच अख़्तियार कर लिया है

क्या सेना दख़ल देगी?

पाकिस्तानी सेना इस मामले में अब तक तटस्थ रही है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक संकट देश की सुरक्षा को ख़तरे में डाल सकता है।

यह साफ़ नहीं है कि ताक़तवर सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा कब तक इस संकट के प्रति तटस्थ रह पायेंगे। जहां तक अमेरिकी साज़िश का सवाल है,तो सेना प्रमुख ने शनिवार को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी।

इस्लामाबाद में एक अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा वार्ता को संबोधित करते हुए जनरल बाजवा ने रूस के यूक्रेन पर किये जा रहे हमले की आलोचना करते हुए इसे "बहुत बड़ी त्रासदी" बताया था और वाशिंगटन के साथ अपने देश के अच्छे रिश्ते पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान चीन और अमेरिका दोनों के क़रीब रहना चाहता है।

साफ़ है कि जनरल की यह टिप्पणी ख़ान के अमेरिका विरोधी रुख़ से अलग थी।

कुगेलमैन ने इस पर रौशनी डालते हुए कहा, "सेना की भूमिका का पता तो नहीं है। लेकिन,इसने साफ़ कर दिया है कि यह इमरान ख़ान के इस फ़ैसले में शामिल नहीं था। हम यह भी जानते हैं कि सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री के बीच मतभेद रहे हैं। इससे पता चलता है कि कम से कम यह तो मानकर चला ही जाना चाहिए कि ख़ान ने जो कुछ भी किया है,उसे अगर अदालतें चुनौती देने का फ़ैसला कर लेती हैं, तो सेना अपनी तरफ़ से ख़ान की मदद करने की कोशिश नहीं करेगी।"

उन्होंने आगे कहा, "वह संभावित चुनाव के जल्दी से जल्दी कराये जाने को लेकर सेना की तरफ़ से किसी भी तरह के समर्थन दिये जाने को लेकर भरोसा नहीं करते।"

क्या ख़ान विजेता बनकर उभरेंगे?

हालांकि,ठीक है कि उनके अमेरिका विरोधी रुख़ ने उनकी लोकप्रियता को फिर से क़ायम कर दिया है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इसका मतलब यह भी नहीं है कि ख़ान मध्यावधि चुनाव जीत जायें।

अफ़ज़ल ने कहा, "यह बिल्कुल भी साफ़ नहीं है कि ख़ान की पार्टी अगले चुनाव में संसद में ख़ासकर सेना के समर्थन के बिना पर्याप्त सीटें जीत सकती हैं।"

विश्लेषक कुगेलमैन का मानना है कि ख़ान ने हाल के दिनों में अपने जनाधार में फिर से ऊर्जा भर दिया है, लेकिन उन्हें "दक्षिण एशिया में सबसे ज़्यादा मुद्रास्फीति सहित आर्थिक मंदी को कम करने की कोशिश में अपने ख़राब प्रदर्शन के कारण मतदाताओं के बड़े तबक़े के भीतर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।"

विपक्षी दल ख़ान को आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक विरोधियों और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं पर किये जाने वाले सख़्त कार्रवाइयों के लिए दोषी ठहराते हैं। जब से ख़ान ने 2018 से देश की बागडोर संभाली है, तब से महंगाई और बेरोज़गारी कई गुनी बढ़ गयी है।

क़ानून के जानकार मलिक मानते हैं कि उनकी अमेरिका विरोधी बयानबाज़ी तो एक लोकलुभावन नारा है और यह नारा पाकिस्तान की सियासत में ख़ूब चलता है, लेकिन ख़ान को विपक्षी दलों,खासकर देश के सबसे ज़्यादा आबादी वाले सूबे पंजाब में पूर्व प्रधानंमत्री नवाज़ शरीफ़ की मुस्लिम लीग से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, ख़ान के सहयोगी और समर्थक इस बात को लेकर पुरउम्मीद हैं कि उनके नेता न सिर्फ़ मौजूदा संवैधानिक संकट से उबर जायेंगे, बल्कि अगली संसद में भी बहुमत हासिल कर लेंगे।

संपादन: शमिल शम्स

साभार: डीडब्ल्यू

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/why-pakistan-political-crisis-goes-beyond-early-elections

Pakistan
Imran Khan
Elections in Pakistan

Related Stories

जम्मू-कश्मीर के भीतर आरक्षित सीटों का एक संक्षिप्त इतिहास

पाकिस्तान में बलूच छात्रों पर बढ़ता उत्पीड़न, बार-बार जबरिया अपहरण के विरोध में हुआ प्रदर्शन

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

शहबाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री निर्वाचित

कार्टून क्लिक: इमरान को हिन्दुस्तान पसंद है...

इमरान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए पाक संसद का सत्र शुरू

पकिस्तान: उच्चतम न्यायालय से झटके के बाद इमरान ने बुलाई कैबिनेट की मीटिंग

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?

पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के पीछे क्या कारण हैं?

इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    भारतीय रंगमंच का इतिहास वर्ग संघर्षों का ही नहीं, वर्ण संघर्षों का भी है : राजेश कुमार
    10 Apr 2022
    आज विपक्ष की तरह रंगमंच भी कमजोर हो गया है। शहरी रंगमंच इतना महंगा हो गया है कि सरकारी ग्रांट या अनुदान लेना उसकी मजबूरी हो गयी है। जो प्रतिरोध की धारा से जुड़ कर नाटक कर रहे हैं, उन पर सत्ता का दमन…
  • bhasha
    न्यूज़क्लिक टीम
    “नंगा करने का दुख है लेकिन सच्ची पत्रकारिता करने का फ़ख़्र”: कनिष्क तिवारी
    09 Apr 2022
    ख़ास बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने मध्यप्रदेश के सीधी ज़िले के पत्रकार कनिष्क तिवारी से बातचीत की और उनकी पीड़ा को जाना। कनिष्क तिवारी वही पत्रकार हैं, जिन्हें एक अन्य पत्रकार और कई…
  • sdmc
    न्यूज़क्लिक टीम
    CR Park: SDMC मेयर के बयान के बाद मछली विक्रेताओं पर रोज़ी रोटी का संकट?
    09 Apr 2022
    दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मेयर के बयान के बाद दशकों से मछली बेच रहे विक्रेताओं के लिए रोज़ी रोटी का संकट पैदा हो गया है. विक्रेता आरोप लगा रहे है कि वे SDMC और DDA की बेरुख़ी का शिकार हो रहे है जबकि…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पत्रकार-पत्रकारिता से नाराज़ सरकार और राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार
    09 Apr 2022
    भारत प्रेस फ्रीडम की रिपोर्ट में उन देशों में शामिल है जहाँ पर पत्रकारों की हालत बहुत खराब मानी जाती है। हाल ही के दिनों में हुई कुछ घटनाएं इस रिपोर्ट को सही साबित करती हैं. पिछले कुछ दिनों में…
  • सोनिया यादव
    यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं
    09 Apr 2022
    पुलिस की मौजूदगी में मुस्लिम महिलाओं को सरेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत बजरंग मुनि दास अभी भी पुलिस की गिरफ़्त से बाहर है। वहीं उसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्र और नागरिक समाज के लोग दिल्ली…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License