NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
रिपब्लिकन ट्रांसजेंडरों पर क्यों साध रहे हैं निशाना?
अप्रवासी, अश्वेत मतदाता और गर्भपात की मांग करने वाले लोगों की तरह ट्रांसजेंडर भी ऐसे बलि के बकरे हैं, जिनको निशाने पर रखकर पुरानी रिपब्लिकन पार्टी अपने जनाधार के बीच धर्मांधता को हवा दे रही है।
सोनाली कोल्हटकर
12 Apr 2021
रिपब्लिकन ट्रांसजेंडरों पर क्यों साध रहे हैं निशाना?

पुरानी रिपब्लिकन पार्टी का नवीनतम सांस्कृतिक युद्ध देश के ट्रांसजेंडर समुदाय, ख़ास तौर पर नौजवान ट्रांसजेंडरों पर केंद्रित है। हालांकि, यह कोई नया युद्ध तो नहीं है, बस उस पुराने युद्ध का एक ऐसा नया मोर्चा है, जिसकी जड़ की तलाश कुछ ही सालों पहले उस मशहूर "बाथरूम बिल" में की जा सकती है, जिसकी आग देखते ही देखते दर्जनों राज्यों में फैल गयी थी। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई वाली संघीय सरकार की तरफ़ से इन विधेयकों को ट्रांसजेंडरों पर निशाना साधने लिए पेश किया गया था, जिनमें ट्रांसजेंडरों की सुरक्षा वाले भेदभाव-विरोधी क़ानूनों को पलटना और इसी तरह अमेरिकी सेना में ट्रांसजेंडरों के शामिल होने पर प्रतिबंध लगाना शामिल था।

अब ट्रम्प के अपमानजनक चुनावी हार के मद्देनज़र रिपब्लिकन ने राज्य स्तर के हमलों को एक ग़ैर-मामूली स्तर पर तेज़ कर दिया है। 2021 के पहले तीन महीनों में रिपब्लिकन पार्टी की अगुवाई वाली राज्य विधानसभाओं ने ट्रांसजेंडरों, ख़ासकर नौजवान ट्रांसजेंडरों पर निशान साधते हुए पिछले साल के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा बड़ी संख्या में बिल पेश कर दिये हैं। इसी साल अबतक 80 से ज़्यादा ऐसे बिल पेश किये गये हैं, जिनके बारे में मानवाधिकार अभियान के अध्यक्ष, अल्फ़ोंसो डेविड का कहना है, “ये बिल किसी ज़मीनी समस्या का हल नहीं हैं, और जिनकी मांग निर्वाचकों की तरफ़ से भी नहीं की जा रही है। बल्कि, इस प्रयास को देश के उन धुर-दक्षिणपंथी संगठनों की तरफ़ से संचालित किया जा रहा है, जो भय और नफ़रत का बीज बोते हुए राजनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।”

मैंने हाल ही में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में एक एसोसिएट प्रोफ़ेसर और पुरस्कृत किताब, हिस्टरी ऑफ़ ट्रांसजेंडर चाइल्ड की लेखक, जूल्स गिल-पीटरसन के साथ बात की है, और उनका यह दावा है कि “बहुत सारे सत्तावादी राजनीतिक आंदोलन ट्रांसजेंडरों का इस्तेमाल अपने बलि का बकरा के रूप में कर रहे हैं।” उन्होंने इस ट्रांसजेंडर विरोधी क़ानून की नवीनतम लहर को "बिलों की तादाद और स्वास्थ्य सेवा को लेकर बुनियादी पहुंच के अपराधीकरण और शिक्षा तक उनकी इसी तरह की पहुंच के सिलसिले में एक अभूतपूर्व हमला" बताया है।

वह बताती हैं कि " असल में शायद अपनी सामान्य राजनीतिक अक्षमता के चलते बहुत सारे (ट्रांसजेंडरों पर ट्रम्प के हमले) जैसे तौर तरीक़े अमल में नहीं जा सके।" हालांकि, "जैसा कि अक्सर होता है, रिपब्लिकन राज्य स्तर पर अपने विरोधी स्तर के एजेंडे को आगे बढ़ाने में कहीं ज़्यादा कामयाब होते हैं, जैसी कामयाबी उनकी कभी संघीय स्तर पर होती रही है।” गिल-पीटरसन इसे उन प्रयासों की पराकाष्ठा के तौर पर देखती हैं, जिसकी जड़ें उत्तरी कैरोलिना के 2016 के उस पारित होने वाले बिल तक जाती हैं, जो ट्रांसजेंडरों को उनकी लिंगगत पहचान को लेकर मिलने वाली सुविधाओं के इस्तेमाल से रोकता है।

"युवा स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम" नामक एक बिल पेश करके उत्तरी कैरोलिना के रिपब्लिकनों ने पांच अप्रैल को वही किया, जो उन्होंने पांच साल पहले शुरू किया था।यह बिल ट्रांसजेंडर नाबालिगों को उन स्वास्थ्य सेवा तक उनकी पहुंच से रोकता है, जिनके बारे में फ़ैसला लेने की ज़रूरत संक्रमण के सिलसिले में होती है। जिस तरह रिपब्लिकन पार्टी ने अक्सर उनकी रक्षा करने की आड़ में इन समुदायों पर अपने हमले तेज़ कर दिये हैं ("भ्रूण की शख़्सियत बन जाने वाले बिल" के रूप में प्रस्तुत गर्भपात विरोधी क़ानून के बारे में सोचें), यह बिल कई अन्य राज्यों की तरह अरकंसास जैसे राज्यों में नौजवानों की सुरक्षा के मक़सद से लाया गया है।

रिपब्लिकनों का यह भी दावा है कि वे ट्रांसजेंडर बच्चों पर उनके खेले जाने पर प्रतिबंध लगाकर टेनेसी के गवर्नर-बिल ली के शब्दों में "निष्पक्ष प्रतियोगिता" की रक्षा करना चाहते हैं। ली ने अरकंसास और मिसिसिपी के गवर्नरों के साथ इस साल ट्रांस युवाओं के स्कूल में खेल खेलने पर प्रतिबंधित लगाने वाले इस बिल पर हस्ताक्षर करके इसे क़ानून बना दिया। ट्रांसजेंडरों से नफ़रत पर आधारित यह बिल ट्रांसजेंडर बच्चों, ख़ासकर लड़कियों को ग़ैर-ट्रांसजेंडर लड़कियों के मुक़ाबले एक अनुचित जैविक लाभ वाले सिद्धांत पर आधारित है।

जिस तरह मतदाता के सिलसिले में असली युद्ध को छिपाने की ख़ातिर मतदाता सम्बन्धी धोखाधड़ी को लेकर रिपबल्कि पार्टी की कथित लड़ाई राष्ट्र के लोकतंत्र पर एक कल्पनापूर्ण हमले पर आधारित है, उसी तरह इस रूढ़िवादी पार्टी की तरफ़ से ट्रांसजेंडर बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल या खेल में उनकी भागीदारी के कथित आधार को भी तलाश रही है। गिल-पीटरसन बताती हैं, "इनमें से ज़्यादतर क़ानून बनाने वाले इस बात को स्वीकार करेंगे कि उन्होंने अपने-अपने राज्य में खेल में ट्रांसजेंडर की भागीदारी वाले किसी भी मुद्दे के सिलसिले में कभी नहीं सुना है, और उन्होंने अपने-अपने राज्य में ट्रांसजेंडरों की स्वास्थ्य देखभाल के आसपास भी किसी मुद्दे को लेकर कभी नहीं सुना है, और हक़ीक़त तो यह है कि वे किसी ट्रांसजेंडर बच्चों को भी नहीं जानते।”

ट्रांसजेंडर पर चल रही खींचतान मतदान को लेकर रिपब्लिकन पार्टी की रार की तरह ही एक और रार को सामने लाती है। अगर रिपब्लिकन पार्टी सही मायने में लोकतंत्र की परवाह करती, तो वे मतदान को कठिन नहीं, बल्कि आसान बना देंते। इसी तरह, अगर पार्टी वास्तव में लड़कियों की सुरक्षा में दिलचस्पी रखती, तो पार्टी ख़ास तौर पर उन ट्रांसजेंडर लड़कियों की सुरक्षा करने वाले बिलों की पेशकश करती, जो बहुत वास्तविक ख़तरों का सामना करती हैं। गिल-पीटरसन का कहना है, "नौजवान ट्रांसजेंडर लड़कियां और ट्रांसजेंडर महिलायें यौन उत्पीड़न और हिंसा को लेकर बेहद असुरक्षित होतीं हैं, क्योंकि इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता है।” ऐसे में स्वास्थ्य देखभाल और खेल तक उनकी पहुंच पर प्रतिबंध लगाने वाले इस तरह के बिल तो उनके ख़िलाफ़ ज्यादा से ज़्यादा हिंसा को ही बढ़ावा देंगे। हर साल दर्जनों ट्रांसजेंडर महिलाओं को मार दिया जाता है, और पिछले साल के मुक़ाबले 2020 के पहले सात महीनों में अमेरिका में कहीं ज़्यादा ट्रांसजेंडरों को मार दिया गया था। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि इस तरह की हिंसा को दिया जाने वाला बढ़ावा इस समुदाय को अमानवीय रूप में पेश किये जाने के इन विधायी प्रयासों के अनुरूप ही है।

मतदाता विरोधी और गर्भपात विरोधी बिलों की तरह ट्रांसजेंडरों से नफ़रत पर आधारित इस क़ानून को आगे बढ़ाने की रिपबल्कनों की रणनीति में विधायी समय और पैसे, दोनों की बर्बादी है, जो कि साफ़ तौर पर असंवैधानिक है, इस तरह के बिलों को क़ानूनी रूप से चुनौती दी जाती है और ये वर्षों तक अदालतों में लटके रहते हैं और आख़िराकर सुप्रीम कोर्ट में जाकर दम तोड़ देते हैं। पिछली गर्मियों में ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्यस्थल पर होने वाले भेदभाव को वैध बनाने की कोशिश के ख़िलाफ़ न्यायधीशों ने फ़ैसला सुनाया था और फिर सर्दियों में उन्होंने कहा कि था अपनी पसंद के बाथरूम का इस्तेमाल करने के लिए ट्रांसजेंडर छात्रों को पब्लिक स्कूल मना नहीं कर सकते हैं।

रिपब्लिकन पार्टी इस मुद्दे पर देश की सर्वोच्च अदालत में जीते या हारे, इससे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, क्योंकि पार्टी का मक़सद इस हक़ीक़त से अपने चिंतित जनाधार का ध्यान भटकाना है कि उनके नेता असमानता और बहुत कम पारीश्रमिक, बाज़ार में रोज़गार में आये ठहराव और जीवन की बढ़ती लागत को लेकर व्याप्त समस्याओं को लेकर कुछ नहीं करते।

इसके अलावा, रिपब्लिकन पार्टी के ट्रांसजेंडर विरोधी ये बिल सरकार की तरफ़ से मुहैया कराये जाने वाली स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा जैसी सेवाओं को हमेशा के लिए अपवाद बना दिये जाने, सभी के लिए उपलब्ध संसाधनों को लेकर राज्य की ज़िम्मेदारी और सार्वभौमिक रूप से सम्मानित होने के अधिकारों को धीरे धीरे ख़त्म कर दिये जाने वाले एक बड़े रूढ़िवादी एजेंडे का हिस्सा हैं। अगर आप्रवासियों के लिए हार्मोन उपचार, गर्भपात और चिकित्सा उपचार सरकार की तरफ़ से मुहैया कराये जाने वाली स्वास्थ्य देखभाल के अपवाद हैं; अगर सार्वजनिक शिक्षा ट्रांसजेंडरों को छोड़कर सभी के लिए है; तो फिर उन बातों को कमज़ोर कर दिया जाता है, जिसमें उदारवादी कल्पनाओं वाली सेवाओं के तहत इस पर विचार किया जाता है कि आख़िर किसी समाज को किस तरह कार्य करना चाहिए।

ऐसे में सवाल पैदा होता है कि इस क्रूरता और अमानवीयता का मुक़ाबला आख़िर कैसे किया जाये ? गिल-पीटरसन बताती हैं, "जो लोग इस बहस के पक्ष में हैं, जिस तरह की बहस पब्लिकन विधायकों में से चरमपंथी समूहों का एक व्यापक दल करता है, उनमें शामिल हैं-श्वेत राष्ट्रवादी समूह, वैक्सीन विरोधी समूह, मास्क लगाने का विरोध करने वाले समूह।” इस ख़तरे से निपटने के लिए ट्रांसजेंडरों पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ खड़े होने वाले प्रगतिशील लोगों को इसी तरह एक व्यापक गठबंधन बनाने की ज़रूरत होगी।

दक्षिण डकोटा राज्य ट्रांसजेंडरों के अधिकारों के लिहाज़ से राज्य-स्तरीय क़ानून का एक परीक्षण स्थल रहा है। इस राज्य में बिल-दर-बिल नाकाम होता गया है, ऐसा उस गठबंधन के बदौलत ही हो पाया है, जो उनके विरोध को लेकर हर मोड़ पर मज़बूती से खड़ा रहा है। ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं के साथ ट्रांसजेंडरों के माता-पिता, शिक्षक, और डॉक्टर के साथ-साथ अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन(ACLU) और नेशनल सेंटर फ़ॉर ट्रांसजेंडर इक्वलिटी जैसे राष्ट्रीय संगठन भी खड़े हैं। ट्रम्प ने जिस तरह उन्हें हिंसा का निशाना बनाया था, उसके ठीक उलट जो बाइडेन जैसी शख़्सियत का राष्ट्रपति का होना भी एक बड़ा ही मददगार घटक है, क्योंकि जो बाइडेन ट्रांसजेंडरों की मानवता और उनकी गरिमा की तस्दीक करते हैं। गिल-पीटरसन का कहना है, "हमें इस देश में इन ट्रांसजेडरों के अधिकारों को लोकतंत्र, न्याय और जनता के लिए व्यापक अधिकारों के अटूट हिस्सा तौर पर देखना होगा।"

सोनाली कोल्हटकर “राइज़िंग अप विद सोनाली” नामक उस टेलीविज़न और रेडियो शो की संस्थापक, प्रस्तोता और कार्यकारी निर्माता हैं, जो फ़्री स्पीच टीवी और पैसिफ़िक स्टेशनों पर प्रसारित होता है। वह इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्युट में इकोनॉमी फ़ॉर ऑल परियोजना की राइटिंग फ़ेलो हैं।

इस लेख को इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टिट्युट की परियोजना, ‘इकोनॉमी फ़ॉर ऑल’ की तरफ़ से प्रस्तुत किया गया है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Why Republicans Are Betting the Farm on Attacking Transgender People

Biden
Election Regulation
Democrats
Republicans
USA

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

गर्भपात प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए ड्राफ़्ट से अमेरिका में आया भूचाल

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

यूक्रेन युद्ध में पूंजीवाद की भूमिका


बाकी खबरें

  • channi or kejri
    शिव इंदर सिंह
    चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव नतीजों का पंजाब विधानसभा चुनाव पर कितना असर?
    03 Jan 2022
    पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी भले ही स्पष्ट बहुमत नहीं ले पाई, पर सब से अधिक सीटें जीतने के कारण वह अति उत्साहित है। आप के नेता इन नतीजों को पंजाब विधान सभा चुनाव की पहली…
  • ulfa
    भाषा
    उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने शांति वार्ता को लेकर केन्द्र सरकार की ‘‘ईमानदारी’’ पर उठाया सवाल
    03 Jan 2022
    वार्ताकार समर्थक वरिष्ठ उल्फा नेता मृणाल हजारिका ने कहा, ‘‘ सरकार में ईमानदारी की कमी नजर आ रही है। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में वार्ता लगभग पूरी हो चुकी थी और अंतिम चरण में पहुंच गई थी, लेकिन नरेंद्र…
  • haryana
    मुकुंद झा
    हरियाणा का डाडम पहाड़ी हादसाः"मुनाफे की हवस में गई मज़दूरों की जान"
    03 Jan 2022
    एक जनवरी की सुबह भिवानी जिले के तोशाम इलाक़े में डाडम पहाड़ी में खनन के दौरान हुए हादसे में 5 मज़दूरों की जान चली गयी वहीं कुछ और लोगों के फंसे होने की संभावना है। रेस्क्यू आज तीसरे दिन भी जारी है।
  • Siliguri
    संदीप चक्रवर्ती
    सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव : सीपीआईएम अपना रिकॉर्ड बरक़रार रखने को तैयार
    03 Jan 2022
    पश्चिम बंगाल में एसएमसी एकमात्र शहरी निकाय है जिस पर माकपा का शासन है।
  • books
    आईसीएफ़
    2021 : महिलाओं ने की लेखन, कविता, फ़्री स्पीच और राजनीति पर बात
    03 Jan 2022
    स्वतंत्र शोधकर्ता, लेखिका और महिला अधिकार कार्यकर्ता सहबा हुसैन के साथ इस बातचीत में ग़ज़ाला वहाब अपनी नई किताब और एक मुस्लिम के तौर पर जन्म लेने के बारे में बात कर रही हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License