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डॉ कफ़ील जैसे मामलों में राज्य पर जुर्माने की ज़रूरत क्यों?
बेकसूर लोगों को सिर्फ पूर्वाग्रह या प्रतिशोध वश जेल में डालने पर अंकुश लगाने के लिए नये कानूनी प्रावधानों की ज़रूरत का सवाल उठा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश:
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
02 Sep 2020

हाल ही में दो उच्च न्यायालयों से दो ऐसे ऐतिहासिक फैसले आये, जिन्होंने कानून और न्याय के सिस्टम से निराश हो रहे लोगों में आशा जगाईI पहला फैसला इलाहाबाद और दूसरा दिल्ली हाईकोर्ट सेI एक ने डॉ कफ़ील को NSA जैसे काले कानून की घेराबंदी से मुक्त कराया और दूसरे ने UAPA के तहत जेल में बंद JNU की शोधछात्रा देवांगना को बेकसूर साबित कियाI ऐसे और भी अनेक मामले देश भर से आते रहते हैं और आते रहेंगे! बेकसूर लोगों को सिर्फ पूर्वाग्रह या प्रतिशोध वश जेल में डालने पर अंकुश लगाने के लिए नये कानूनी प्रावधानों की ज़रूरत का सवाल उठा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश:

Dr Kafeel Khan
Allahabad High Court
BJP
Adityanath
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Devangana kalita
UAPA
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