NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यह देश बुज़ुर्गों के लिए नहीं है - दिल्ली में बुज़ुर्गों ने पेंशन के हक़ के लिए किया प्रदर्शन
देश में 5 करोड़ 80 लाख बुज़ुर्गों को पेंशन का लाभ नहीं मिलता, बहुतों को सिर्फ 200 रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है।



सुमेधा पाल
01 Oct 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
Pension parishad

एक हाथ में अपने मरे हुए बेटे की फोटो लिए और दूसरे हाथ से अपनी आँखों के आँसू पोंछते हुए 71साल की सकुबाई एक अकेली बूढ़ी महिला होने की तकलीफ बयान करती हैं। वह कहतीं हैं "कोई भी मेरी देखभाल करने के लिए नहीं है, न मेरे पास पैसे हैं और न ही कोई आसरा, मैं यहाँ एक उम्मीद के साथ आयी हूँ।" 60 से 80 साल की उम्र के हज़ारों महिलायें और पुरुष रविवार को अपने मुद्दे लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतरे और संसद मार्ग पर प्रदर्शन किया। 

अपने ज़ख्म दिखाते हुए सत्यपाल ने कहा "बुढ़ापे की अपनी तकलीफें होती हैं , लेकिन मैंने नहीं सोचा था कि मुझे अपने हक़ के लिए भीख माँगनी पड़ेगी।" इनकी अभी हाल ही में हार्ट सर्जरी हुई है, उसके ज़ख्म अभी भी देखे जा सकते हैं, लेकिन क्योंकि उन्हें पेंशन नहीं मिली इसीलिए उनके पास दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। 

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कई लोगों ने कहा कि "हम अपने अधिकार माँग रहे हैं, राज्य से भीख नहीं माँग रहे।" यही जज़्बा वहाँ मौजूद सभी बुज़ुर्गों ने दिखाया। बताया गया कि अब भी 5.8 करोड़ भारतीय बुज़ुर्गों को पेंशन नहीं मिलती। स्टेट ऑफ़ पेंशन रिपोर्ट 2018 की शुरुआत में हेल्प ऐज इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव मैथ्यु चेरियन ने कहा है "जिन 8 करोड़ बुज़ुर्गों को हर महीना 200 रुपये की पेंशन मिलनी चाहिए थी, इनमें से यह बेहद कम रकम भी केवल एनएसएपी के मुताबिक केवल 2 करोड़ 3लाख लोगों को पहुँची। इस वजह से करीब 5 करोड़ 80 लाख लोगों को कोई सुविधा नहीं मिली।" उन्होंने अपनी बात में जोड़ा कि इसका अर्थ है कि देश में केवल एक तिहाई बुज़ुर्ग पेंशन स्कीम के अंतर्गत आते हैं और सिर्फ 8% बुज़र्ग हैं जो औपचारिक क्षेत्र में हैं और जिन्हें पेंशन मिलेगी।  यानी देश की जीडीपी में अपना योगदान देने वाला 93 % लोगों का एक बड़ा तबका जो अनौपचारिक क्षेत्र में आता है पेंशन से पूरी तरह वंचित है। 

बिहार के देवेंद्र प्रसाद मंडल ने समझाया "हमें बहुत कम पैसा मिलता है, क्या कोई सिर्फ 200 रुपये में गुज़ारा कर सकता है? कई बार ये पैसा मिलने में भी देरी हो जाती है ऐसा कितनी बार हुआ है कि हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं होता।" यह कमाल की बात है कि केंद्र सरकार नेशनल सोशल अस्सिटेंस प्रोग्राम (एनएसएपी) के अंतर्गत सिर्फ 200 रुपये प्रतिमाह देती है। कई बार राज्य भी अपनी तरफ से इसमें कुछ राशि जोड़कर दे देते हैं। फिलहाल पेंशन पाने वाले बुज़ुर्गों को राज्य के हिसाब से 200 रुपये से 2000 रुपये के बीच में राज्यों के अनुसार राशियाँ मिलती है। सबसे ताज्जुब की बात यह है कि ये200 रुपये की यह राशि 2006-07 से अब तक सिर्फ 200 रुपये प्रति माह ही रही है। तबसे अब तक महंगाई बहुत ज़्यादा बढ़ गयी है, लेकिन इसका फायदा बुज़ुर्गों को नहीं मिल रहा। इस पेंशन को भी कई बार 6 महीने से 2 साल तक की देरी से मिलती है, जैसा कि पिछले साल बिहार में देखा गया। राजस्थान में कई लोगों को आधार द्वारा लिंक नहीं कराये जाने की वजह से पेंशन और कई लोगों को तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से मृत घोषित कर दिया गया। 

राजस्थान से आये पेंशन परिषद् के सदस्य शंकर सिंह ने ऐसी ही घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के देवगढ़ में एक 80 वर्षीय महिला को पेंशन नहीं मिली और इसी वजह से वह भुखमरी के कारण मर गयी। उन्होंने कहा कि "शर्मनाक बात यह है कि अपनी ज़िम्मेदारी से बचने के लिए सरकार ने यह साबित करने का प्रयास किया कि उनके घर में खाना मौजूद था।"

आंदोलन से जुड़ी प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा "यह सरकार टॉयलेट बनाने की बात करती है लेकिन अगर उनके पास कुछ खाने को नहीं होगा तो टॉयलेट की क्या ज़रुरत है।" इस मुद्दे पर बात करते हुए अर्थशात्री प्रोफेसर प्रभात पटनायक ने कहा "यह बहुत ही शर्मनाक बात है, न सिर्फ इसलिए कि इतनी कम पेंशन की रकम पर हंसी आती है, बल्कि इसीलिए भी कि पेंशन की सूची को भी कम कर दिया गया है और मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं मिल रहीं।" बुज़ुर्गों के लिए पेंशन  की ज़रुरत के बारे में प्रभात ने सरकार को याद दिलाया कि पेंशन सबके लिए होनी चाहिए और वह अंशदायी नहीं होनी चाहिए, जिसमें व्यक्ति को खुद कुछ राशि देनी पड़े। इस मामले में सबसे खराब हालत असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों की है, देश में 93 % मज़दूर इसी क्षेत्र से आते हैं। यह मज़दूर देश की जीडीपी में बड़ी मात्रा में योगदान करते हैं लेकिन इनमें से ज़्यादातर पेंशन के दायरे से बाहर हैं। असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को पेंशन के लिए आवेदन भरना पड़ता है और अपनी योग्यता भी साबित करनी होती है। आज डिजिटाइज़ेशन और तकनीकी विकास के तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन देखा गया है कि राज्य और उसकी नौकरशाही अपनी सहूलियत से इसका इस्तेमाल करती है। 

यह बताते हुए कि पेंशन एक अर्थिक हक़ है, बुज़ुर्गों ने यह माँग की कि मासिक पेंशन न्यूनतम वेतन का आधा होना चाहिए। फिलहाल यह हर महीने के हिसाब से 2500 रुपये है। माँग है कि इसे महँगाई के हिसाब से दुगना किया जाना चाहिए। प्रोफेसर प्रभात पटनायक ने कहा "इस मुद्दे का एक सीधा सा उपाय है, अगर भारत अपनी जीडीपी का सिर्फ 2% भी खर्च करता है तो इस समस्या को सुलझाया जा सकता है। सवाल सिर्फ प्राथमिकताओं का है और इस बात का है कि हमारा समाज सामाजिक सुरक्षा को किस तरह देखता है।"

ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि पेंशन को काम के मुआवज़े की तरह देखा जाना चाहिए न कि खैरात की तरह। न्यूज़क्लिक को भूतपूर्व आईएस ललित माथुर ने बताया कि "इस देश में बुज़ुर्गों की लड़ाई आगे नहीं बढ़ी है सरकार इस मुद्दे को नज़रअंदाज़ करती रही है और इसे सरकार को अपनी ज़िम्मेदारी की तरह समझना चाहिए न कि राज्य की आर्थिक जरूरत की तरह। छोटी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भी नेपाल पेंशन को बुनियादी हक़ मानता है। इस आन्दोलन से जुड़ी सईदा हमीद ने कहा "हम सब बुज़ुर्गी की राह पर हैं यह मसला सबका मसला है।" वहाँ मौजूद लोगों ने नारा लगाया "अम्बानी ने मौज मनाई मोदी तेरे राज में, कंपनियों ने खूब कमाई मोदी तेरे राज में।" सभी को यह बात साफ़ है कि यह सरकार सिर्फ बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिए काम कर रही है, देश के बुज़ुर्गों के लिए नहीं। 

 

Pensioners
pension
old aged
people's protest

Related Stories

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अटेवा का लखनऊ में प्रदर्शन, निजीकरण का भी विरोध 

केरल की वाम सरकार ने महामारी के दौरान ग़रीबों के हित में सही फ़ैसला लिया

झारखंड: शासन की उपेक्षा के शिकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हक़दारों ने उठाई आवाज़!

कोरोना आपदा में बुजुर्गों को लेकर सरकार और समाज का रवैया कैसा है?

शर्म : पश्चिम बंगाल में 100 साल की वृद्धा से दुष्कर्म

राजस्थान चुनावों से पहले जनता ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

यह अपने बुजुर्गों के साथ खड़े होने का समय है

पेंशनभोगियों ने की अपने की बुनियादी अधिकारों की माँग


बाकी खबरें

  • बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी
    18 May 2022
    ज़िला अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए स्वीकृत पद 1872 हैं, जिनमें 1204 डॉक्टर ही पदस्थापित हैं, जबकि 668 पद खाली हैं। अनुमंडल अस्पतालों में 1595 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 547 ही पदस्थापित हैं, जबकि 1048…
  • heat
    मोहम्मद इमरान खान
    लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार
    18 May 2022
    उत्तर भारत के कई-कई शहरों में 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पारा चढ़ने के दो दिन बाद, विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के चलते पड़ रही प्रचंड गर्मी की मार से आम लोगों के बचाव के लिए सरकार पर जोर दे रहे हैं।
  • hardik
    रवि शंकर दुबे
    हार्दिक पटेल का अगला राजनीतिक ठिकाना... भाजपा या AAP?
    18 May 2022
    गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले हार्दिक पटेल ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। हार्दिक पटेल ने पार्टी पर तमाम आरोप मढ़ते हुए इस्तीफा दे दिया है।
  • masjid
    अजय कुमार
    समझिये पूजा स्थल अधिनियम 1991 से जुड़ी सारी बारीकियां
    18 May 2022
    पूजा स्थल अधिनयम 1991 से जुड़ी सारी बारीकियां तब खुलकर सामने आती हैं जब इसके ख़िलाफ़ दायर की गयी याचिका से जुड़े सवालों का भी इस क़ानून के आधार पर जवाब दिया जाता है।  
  • PROTEST
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा
    18 May 2022
    पंजाब के किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी में प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन राज्य की राजधानी जाने से रोके जाने के बाद वे मंगलवार से ही चंडीगढ़-मोहाली सीमा के पास धरने पर बैठ गए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License