सिद्धू को ईमानदार माना जाता है और पंजाबियों को उन पर गर्व है, लेकिन उन्होंने मतदाताओं को यह समझाने के लिए कड़ी मेहनत नहीं की है कि वे अपने दम पर व्यवस्था को बदल सकते हैं।
लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों का अपहरण हर बार बाकायदा घोषित करके ही किया जाए, यह ज़रूरी नहीं। यह काम लोकतांत्रिक आवरण और कायदे-कानूनों की आड़ में भी हो सकता है, जो कि पिछले सात साल से लगातार…
गुजरे सप्ताह आई बैंक ऋणों के "समझौतों" की खबरों में दर्ज आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इन कर्ज माफी ने बैंकों को (मतलब जनता और सरकार को) 2 लाख 79 हजार 971 करोड़ रुपयों का चूना लगा दिया है।