बढ़ती बेरोज़गारी, घटती वेकैंसी, कम वेकैंसी की भर्ती में भी चयन आयोगों का गैरज़िम्मेदाराना रवैय्या, सालों-साल का विलंब और ऐसे ही अन्य तमाम मुद्दों पर छात्रों ने ट्विटर के माध्यम से अपना आक्रोश दर्ज कराया।
प्रदर्शन में लोगों ने पेट्रोल-डीज़ल-रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के साथ ही बढ़ती मंहगाई, बढ़ती बेरोज़गारी, किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों तथा मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड लागू करने के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद की।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘ दाहिने और बाए पांव में सूजन है। दाहिने पांव की दूसरी और तीसरी उंगली में नाखून के पास चोट है और त्वचा लाल हो गई है। बाएं पांव का अंगूठा भी जख्मी है। बाएं हाथ का अंगूठा और तर्जनी…
अनाज और दूध की प्रकृति बिल्कुल अलग है। इनके बाजार की प्रकृति अलग-अलग है। कीमत तय करने से जुड़ी परिस्थितियां अलग- अलग हैं। इसलिए अनाज और दूध की तुलना दिन और रात की तुलना करने की तरह है।
ट्रेड यूनियन के नेता कहते हैं कि वे आम आदमी पार्टी की सरकार की इस पहल का स्वागत करते हैं, लेकिन केवल पहल ही काफी नहीं है क्योंकि पंजीकरण प्रक्रिया में ‘संजीदा कोशिश’ की कमी दिखती है।