21वीं सदी के पहले दो दशकों की घटनाएँ काफी हद तक दो-ध्रुवीय रही हैंI एक तरफ जहाँ वर्चस्ववादी पॉपुलिस्ट और बहुसंख्यकवादी ताकतों ने अपने लिए समर्थन जुटाया है, वहीं दूसरी ओर जन-प्रतिरोध भी फले-फूले हैंI…
कई बार शास्त्रीय कलायें नियमों और सिद्धांतों के पालन से यंत्रवत या मंद गति हो जाती हैं। ऐसे में कलाकार अपने भावाभिव्यक्ति के लिए नये रूप आकार की तलाश करने लगता है।
आज भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन है। वे एक शानदार कवि भी थीं। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं उनकी कुछ कविताओं के अंश-
पूरे विश्व में बीता साल कोरोना के साल के रूप में ही जाना जायेगा पर भारत में 'अवसर' के रूप में याद किया जायेगा। पूरे विश्व में सिर्फ़ हमारा देश ही ऐसा रहा जिसने 'आपदा को अवसर' मान कर भुनाया।