हमारे प्यारे कवि मंगलेश डबराल इसी 9 दिसंबर को हमें छोड़कर चले गए। अब उनका नंबर भी मिलाने पर भी यही आवाज़ आएगी- दिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्ट, यह नंबर मौजूद नहीं है। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं उनकी यही…
गीतकार शैलेंद्र की पुण्यतिथि 14 दिसंबर पर विशेष: ग्लोबलाइजेशन भले ही आज का दौर का जुमला हो लेकिन 50-60 साल पहले जब भारत के सॉफ्ट पावर की रोशनी पूरी दुनिया में फैली तो उसकी चमक के एक हिस्से पर…
मुझे तो मोदी जी पर तरस आता है। पहले तो जनता के भले के लिए काम करो फिर जनता को समझाओ कि इस काम में तुम्हारा भला क्यों है, कैसे है और कितना है। इतने समझदार प्रधानमंत्री को ऐसी नासमझ जनता मिली है, लानत…
'हफ़्ते की बात' के इस एपिसोड में सप्ताह की चार प्रमुख समाचार कथाओं की चर्चा: किसानों के विरुद्ध सत्ताधारियो का दुष्प्रचार अभियान, बंगाल का टीएमसी-भाजपा विवाद, संसदीय लोकतंत्र की दुर्गति के बीच संसद…