किसानों और सरकार के बीच पांचवे दौर की बातचीत एक बार फिर किसी नतीजे के बिना ख़त्म हो गई। अब 9 दिसंबर को फिर बातचीत होगी। इस बीच किसान 8 दिसंबर के अपने भारत बंद पर क़ायम हैं। इतिहास के पन्ने के इस…
हम सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन किसानों के इस अभूतपूर्व आन्दोलन के प्रति अपनी एकजुटता प्रगट करते हैं। हम जनता तथा जनता के संगठनों, पार्टियों से अपील करते हैं कि वे इस आन्दोलन के साथ जुड़ें और 8 दिसम्बर के…
किसी लड़की पर अपना एकछत्र अधिकार समझना "तुम मेरी ना हो सकीं तो किसी और की भी नहीं हो सकती" या फिर "तू मेरी है सिर्फ़ मेरी" यह मानसिकता हमारे पितृसत्तात्मक समाज की सोच का प्रभाव है।
"अब पटना में लगने वाली कला प्रदर्शनियों को ही ले लीजिए, उनमें कलाकारों की तो उपस्थिति रहती है, लेकिन कला प्रेमी समाज कहां रहता है? जब कला प्रेमी ही नहीं है तो कला के खरीदार कहां से आयेंगे? "
इसे ‘डैड लॉक’ इसलिए नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह रास्ता तब अख़्तियार किए जाने की बात कही जा रही है जब सरकार अपनी मंज़िल पर पहुँच चुकी है। संवाद के तमाम जरिये और मौके खुद सरकार ने बंद किए हैं।