NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारतीय रेल ने नए पदों को फ्रीज़ करने का लिया फ़ैसला
भारतीय रेल के दिशा निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, कई ज़ोनल दफ़्तरों ने चपरासी, खाता क्लर्क, स्टेनो, हेल्पर्स, शिक्षक, अस्पताल क्लीनर, रसोइया, राजमिस्त्री जैसे पदों को फ्रीज़ करने के लिए उनकी पहचान करना शुरू कर दिया है।
अरुण कुमार दास
07 Jul 2020
Translated by महेश कुमार
भारतीय रेल

जब अर्थव्यवस्था नीचे की तरफ़ जा रही है, तो ऐसे में भारतीय रेलवे ने सभी ज़ोनल रेलवे दफ्तरों को सुरक्षा श्रेणी के पदों को छोड़कर, नए पदों को फ्रीज करने का निर्देश दिया है, जो महामारी के समय में संकट को ओर तीव्र करने वाला कदम है।

भारतीय रेल के दिशानिर्देशों की ताल में ताल मिलाते हुए, कई ज़ोनल दफ्तरों ने चपरासी, अकाउंट क्लर्क, स्टेनो, हेल्पर्स, टीचर, हॉस्पिटल अटेंडेंट, हॉस्पिटल क्लीनर, कुक, पेंटर, फिटर, मेसन, चॉकीदार, लैब असिस्टेंट जैसे पदों को फ्रीज़ करने के लिए पहचान करने की रस्साकसी शुरू कर दी है जो कई रोजगार चाहने वालों को प्रभावित करेगा।

सभी ज़ोनल दफ्तरों और उत्पादन इकाइयों को व्यय के आर्थिक पैमाने और खर्च के युक्तिकरण के नवीनतम रेलवे एक्शन प्लान भेजा गया है जिसमें कहा गया है कि अगले आदेश तक “सुरक्षा श्रेणी के पदों को छोड़कर नए पदों को फ्रीज़" करने की एक विस्तृत योजना पर काम किया जाना है।

निर्देश में आगे कहा गया है कि, "पिछले दो वर्षों में पैदा हुए पदों की समीक्षा की जाएगी यदि इन पदों के पर अभी तक भर्ती नहीं हुई है, तो सुरक्षा श्रेणी को छोडकर अन्य मौजूदा रिक्तियों को समाप्त किया जाएगा और  सुरक्षा श्रेणी के 50 प्रतिशत पदों का भी समर्पण कर दिया जाएगा।"

जबकि रेलवे में गैर-सुरक्षा पदों की संख्या हजारों में है, दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) ने गैर-सुरक्षा श्रेणी में 3,681 पदों की पहचान की है जिनके प्रभावित होने की संभावना है। दक्षिण पूर्वी रेलवे ज़ोन ने सभी मंडल रेल प्रबंधकों और विभाग प्रमुखों को लिखे अपने पत्र में, इसे लागू करने की रिपोर्ट 10 जुलाई तक देने को कहा है।

क्षेत्र के संबंधित सभी ज़ोन को लिखे एसईआर पत्र में कहा गया है कि "आदेश/निर्देश के अनुपालन को सुनिश्चित करें और मौजूदा रिक्तियों के 50 प्रतिशत को तत्काल समर्पण कर दें और बिना किसी देरी के इस आशय के समर्पण ज्ञापन जारी करें।

न्यूज़क्लिक को पता चला है कि रेलवे बोर्ड के फैसले को लागू करने के लिए अन्य ज़िलों में भी इसी तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, रेलवे का कहना है कि वह अपने कार्यबल को फिर से पूरा कुशल बनाने और अकुशल नौकरियों से पीछा छुड़ाने की तरफ बढ़ रहा है। रेलवे ने इस  बात पर भी जोर दिया है कि ये कदम "शुद्ध नौकरी में कमी" के परिणाम नहीं बदलेगी क्योंकि गैर कार्यात्मक, गैर-सुरक्षा रिक्त पदों के आत्मसमर्पण के बाद रेलवे को अपनी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा पद पैदा होंगे और तकनीकी हस्तक्षेप बढ़ाने के कारण अन्य नौकरियों संख्या में बढ़ोतरी होगी।

“हमने नौकरियों में कटौती नहीं करेंगे। नौकरी प्रोफाइल बदल सकते है, लेकिन नौकरी में कटौती नहीं होगी,” उक्त बातें आनंद एस खाती, महानिदेशक, मानव संसाधन रेलवे बोर्ड ने कही।

अभी तक भारतीय रेलवे में 2.90 लाख पदों का बैकलॉग रिक्त पड़ा है, जिसमें से लगभग 1.46 लाख पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 2018 से शुरू हो गई थी। अधिसूचित रिक्तियों में से 72,274 पद सुरक्षा श्रेणी के लिए हैं, और 68,366 गैर-सुरक्षा पद हैं।

भर्ती के बारे में थोड़ा हवा को साफ करते हुए, खाती ने कहा, "विभिन्न श्रेणियों के पदों के लिए चल रहे भर्ती अभियान हमेशा की तरह ही जारी रहेंगे।" उन्होंने आगे कहा कि पदों में कमी  नहीं हो रही है बल्कि कार्यबल को सही किया जा रहा है क्योंकि यह कदम भारतीय रेलवे द्वारा पिछले साल शुरू की गई कवायद का हिस्सा है।

आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रेलवे का पिछले साल का खर्च 1.5 लाख करोड़ था जबकि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इस खर्च को 1.61 लाख करोड़ रुपये आँका गया है।

"जब आधुनिकीकरण और स्वचालन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा तो इसका कार्यबल की संख्या पर भी कुछ असर पड़ सकता है," खाती ने कहा।

रेलवे में वर्तमान में 12,18,335 कर्मचारी हैं और रेलवे अपनी आय का 65 प्रतिशत वेतन और पेंशन पर खर्च करती हैं।

"राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर यानि रेलवे में तकनीकी हस्तक्षेप बढ़ाने के कारण, कुछ जॉब प्रोफाइल बदल सकते हैं, जिसमें कर्मियों को फिर से कुशल बनाया जाएगा, लेकिन नौकरी में कोई कमी नहीं होगी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय रेलवे देश में सबसे बड़ा नियोक्ता रहेगा। हम अकुशल नौकरियों से अधिक कुशल नौकरियों की ओर बढ़ेंगे।

रेलवे यह भी बताता है कि आधुनिक तकनीक लाने से कई नए क्षेत्रों में आवश्यकताओं को जन्म मिलेगा, जिससे संसाधनों की पुनर्संरचना और पुनरावृत्ति एक अनिवार्य कदम बन जाएगी। इसके अलावा, इसने ज़ोनल दफ्तरों को अनुबंधों की समीक्षा करने, ऊर्जा की खपत को कम करने और प्रशासनिक और अन्य क्षेत्रों में लागत में कटौती करने के लिए भी कहा है।

यात्री व्यवसाय में भारी नुकसान के बाद, हाल ही में भारतीय रेलवे ने राजनीतिक दलों और यूनियनों के विरोध के बावजूद 109 रेलवे मार्गों पर 151 आधुनिक ट्रेनों को चलाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं।

इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Indian Railways to Freeze New Posts Barring Safety Category

indian railways
Job Loss Indian Railways
Downsizing Indian Railways
Privatisation
Privatisation of Railways
South Eastern Railways
Modernisation of Indian Railways
job loss

Related Stories

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली छूट बहाल करें रेल मंत्री: भाकपा नेता विश्वम

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

केंद्र का विदेशी कोयला खरीद अभियान यानी जनता पर पड़ेगा महंगी बिजली का भार

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

कोयले की किल्लत और बिजली कटौती : संकट की असल वजह क्या है?

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

भारत की राष्ट्रीय संपत्तियों का अधिग्रहण कौन कर रहा है?

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर


बाकी खबरें

  • china
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    चीन ने अमेरिका से ही सीखा अमेरिकी पूंजीवाद को मात देना
    22 Nov 2021
    चीन में औसत वास्तविक मजदूरी भी हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जो देश की अपनी आर्थिक प्रणाली की एक और सफलता का संकेतक है। इसके विपरीत, अमेरिकी वास्तविक मजदूरी हाल ही में स्थिर हुई है। संयुक्त…
  • kisan andolan
    असद रिज़वी
    लखनऊ में किसान महापंचायत: किसानों को पीएम की बातों पर भरोसा नहीं, एमएसपी की गारंटी की मांग
    22 Nov 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुई “किसान महापंचयत” में जमा किसानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा पर विश्वास की कमी दिखी। किसानों का कहना…
  • farmers movement
    सुबोध वर्मा
    यूपी: कृषि कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंक देने से यह मामला शांत नहीं होगा 
    22 Nov 2021
    ऐसी एक नहीं, बल्कि ढेर सारी वजहें हैं जिसके चलते लोग, खासकर किसान, योगी-मोदी की ‘डबल इंजन’ वाली सरकार से ख़फ़ा हैं।
  • Abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज़ी न्यूज़ के संपादक को UAE ने अपने देश में आने से रोका
    22 Nov 2021
    बोल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा, देश के मेनस्ट्रीम मीडिया और सरकार का अमूमन बचाव करने वाले जी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी' की चर्चा कर रहे हैंI ज़ी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी'…
  • modi
    अनिल जैन
    प्रधानमंत्री ने अपनी किस 'तपस्या’ में कमी रह जाने की बात कही?
    22 Nov 2021
    प्रधानमंत्री कहते हैं कि यह समय किसी को भी दोष देने का नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि यह समय नहीं है दोष देने का तो फिर सरकार के दोषों पर कब चर्चा होनी चाहिए और क्यों नहीं होनी चाहिए?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License