NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जेईजेएए NDA सरकार के ख़िलाफ 16 मई से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगा
23 मई को 24 से अधिक राज्य की राजधानियों की रैली में एनडीए सरकार के ख़िलाफ़ लाखों लोग 'हल्ला बोल' के लिए इकट्ठा होंगे।
पृथ्वीराज रूपावत
09 May 2018
जन एकता
Image for Representational Purpose Only

क़रीब 100 से ज़्यादा प्रगतिशील संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे जन एकता जन अधिकार आंदोलन (जेईजेएए) ने सप्ताह भर चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान का आह्वान किया है। इस अभियान के लिए जेईजेएए "एनडीए सरकार की चार साल, पोल खोल, हल्ला बोल" का नारा दिया है। ये अभियान 16 मई से 22 मई तक चलेगा।

 

एक बयान में जेईजेएए ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य देश के हर एक नागरिक तक पहुंचना है और "नीतियां बदलो या लोग सरकार बदल देंगे" के नारे के साथ एनडीए सरकार के सांप्रदायिक और लोक-विरोधी एजेंडे का पर्दाफाश करना है।

 

जेईजेएए ने कहा कि 23 मई को 24 से अधिक राज्य की राजधानियों में इस सरकार के ख़िलाफ़ लाखों लोग 'हल्ला बोल' के लिए रैली में इकट्ठा होंगे। "यह न सिर्फ एनडीए सरकार के अंत की शुरुआत है बल्कि लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, समतावादी और आधुनिक भारत के निर्माण के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रव्यापी लोगों के आंदोलन का भी शुभारंभ है।"

 

इस अभियान में जेईजेएए भाजपा/एनडीए सरकार द्वारा पूरे न किए गए वादे के साथ-साथ नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार की नीतियों और सांप्रदायिक विभाजनकारी एजेंडे को उजागर करेगा। इस अभियान में निम्नलिखित मुद्दे उठाए जाएंगे।

 

नव-उदार नीतियां

एनडीए सरकार "अच्छे दिन" और "सबका विकास" का वादा करके सत्ता हासिल की थी लेकिन इसके शासन "विकास" केवल कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट कंपनियों और उनके बिचौलियों का हुआ। आज आबादी का केवल एक प्रतिशत हिस्सा देश की 53 प्रतिशत संपत्तियों पर क़ब्जा कर चुका है।

 

बेरोजगारी

इस एनडीए ने हर साल दो करोड़ रोज़गार का वादा किया था लेकिन युवाओं को रोज़गार देने में बुरी तरह असफल रहा। यहां तक कि प्रति वर्ष दो लाख भी नहीं पहुंचा। श्रम ब्यूरो के अनुसार साल 2014 और 2015 के बीच स्नातक युवाओं (18 से 29 वर्ष) के बीच बेरोज़गारी दर 28 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा नोटबंदी के परिणामस्वरूप अक्टूबर 2016 और अक्टूबर 2017 के बीच नौ मिलियन नौकरियों का नुकसान हुआ।

क़ीमत वृद्धि

वर्तमान एनडीए शासन में आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतें आसमान छू रही है और फंड की कमी के चलते पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) की स्थिति ख़राब हो चुकी है। आधार लिंक करने को अनिवार्य करने और लाभार्थियों के छंटनी करने के परिणामस्वरूप भूख से मौत के कई मामले सामने आए हैं।

निजीकरण

ये एनडीए सरकार सार्वजनिक क्षेत्र को विनिवेश, प्रत्यक्ष और रणनीतिक बिक्री के माध्यम से देश की संपत्ति के निजीकरण को लेकर बड़ा अभियान चलाए हुए है।

ये सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, इस प्रकार बजट आवंटन को नज़रअंदाज़ कर सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के व्यावसायीकरण की इजाज़त दे रही है।

किसानों की पीड़ा

एनडीए सरकार ने सभी फसलों के उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक एमएसपी और व्यापक ऋण छूट किसानों को देने का वादा पूरा नहीं किया। एनडीए सरकार में वर्ष 2014-2015 में किसानों की आत्महत्या में 42% की वृद्धि हुई है और अभी भी किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

इसने कृषि में 100% एफडीआई की अनुमति भी दी है और अनुबंध खेती की घोषणा की है जो बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर कृषिगत अधिग्रहण की सुविधा प्रदान करेगी,इस प्रकार यह किसानों को अपनी ही ज़मीन का अनुबंधित कृषक बनाता है। खुदरा क्षेत्र में 100% एफडीआई देश भर में असंख्य छोटे व्यापारियों और छोटे उत्पादकों के अस्तित्व को खतरे में डाल देगा।

सांप्रदायिक हिंसा

जाति और सांप्रदायिक घृणा और हिंसा को बढ़ावा देकर बीजेपी और आरएसएस भय का माहौल बनाते रहे हैं। आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा लोकतांत्रिक और शैक्षणिक संस्थानों पर क़ब्ज़ा किया जा रहा है और देश भर में लोकतांत्रिक स्थानों पर व्यवस्थित तरीक़े से हमला किया जा रहा है।

उपर्युक्त मुद्दों के अलावा, ये अभियान एनडीए शासन के ख़िलाफ़ देश भर में आदिवासियों, दलितों, किसानों, छात्रों, महिलाओं और श्रमिकों के नेतृत्व में विभिन्न आंदोलनों को भी उठाएगा। ये अभियान न्यायपालिका संकट और एनडीए सरकार द्वारा श्रम अधिकारों को कमजोर करने के मामले को भी उठाएगा।

भाजपा
JEJAA
Nationwide Campaign
हल्ला बोल
आरएसएस
FDI
NDA Government

Related Stories

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

जारी रहेगी पारंपरिक खुदरा की कीमत पर ई-कॉमर्स की विस्फोटक वृद्धि

एमएसएमई नीति के नए मसौदे में कुछ भी नया या महत्वपूर्ण नहीं!

क्या सच में अबकी बार बंपर FDI आया है?

सरकारी तेल शोधन कारखानों का पूरा स्वामित्व निजी हाथों में सौंपने की सुगबुगाहट पर ट्रेड यूनियनों ने चिंता जताई

सीटू ने 13 सूत्री मांगपत्र जारी कर देशभर में मनाया 'मांग दिवस'

“इलेक्शन होगा, तो पढ़ाई भी होगा” सासाराम में भड़के छात्रों का नारा

प्रिया रमानी जजमेंट #MeToo आंदोलन को सही ठहराता है!

बदलाव: किसान आंदोलन जनतंत्र के सभी आंदोलनों की मां है!

किसान आंदोलन ने मोदी-राज के लोकतंत्र-विरोधी चेहरे को तार-तार कर दिया है!


बाकी खबरें

  • लव पुरी
    क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?
    04 Apr 2022
    कश्मीर के संदर्भ से जुडी हुई कई बारीकियों को समझना पिछले तीस वर्षों की उथल-पुथल को समझने का सही तरीका है।
  • लाल बहादुर सिंह
    मुद्दा: क्या विपक्ष सत्तारूढ़ दल का वैचारिक-राजनीतिक पर्दाफ़ाश करते हुए काउंटर नैरेटिव खड़ा कर पाएगा
    04 Apr 2022
    आज यक्ष-प्रश्न यही है कि विधानसभा चुनाव में उभरी अपनी कमजोरियों से उबरते हुए क्या विपक्ष जनता की बेहतरी और बदलाव की आकांक्षा को स्वर दे पाएगा और अगले राउंड में बाजी पलट पायेगा?
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध
    04 Apr 2022
    भाकपा माले विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराये जाने तथा राज्य में गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में 3 अप्रैल को माले ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाया
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक हज़ार से भी कम नए मामले, 13 मरीज़ों की मौत
    04 Apr 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 597 हो गयी है।
  • भाषा
    श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
    04 Apr 2022
    राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘‘गलत तरीके से निपटे जाने’’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License