NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध हड़ताल सफल
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Sep 2015

भारत 15 करोड़ से ज्यादा मजदूरों ने 2 सितम्बर 2015 को हुयी अखिल भारतीय आम हड़ताल में सीधे रूप से हिस्सा लिया, और साथ ही अन्य नागरिकों की भी अप्रत्यक्ष रूपसे हड़ताल में हिस्सेदारी रही. इस हड़ताल का आह्वाहन देश की 10 मुख्य केन्द्रीय यूनियनों के मंच ने किया था. यह रेखांकित करना होगा कि मोदी सरकार की पूंजीपतियों उन्मुख नीतियों से नाराज़ वह तबका जो वामपंथी युनियनों के दायरे में नहीं आता है, ने भी इस हड़ताल का जमकर समर्थन किया. ट्रेड यूनियनों ने जो मुद्दे इस हड़ताल के द्वारा उठाये हैं वे केवल मजदूरों को ही नहीं बल्कि आम जनता के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहे हैं: जिसमे खाद्य सामग्री के दामों में बढ़ोतरी का होना शामिल है, यानी जो लोग अनाज का उत्पादन करते हैं उन्हें दो वक्त रोटी मयस्सर नहीं है.

भूमि अधिग्रहण कानून को वापस लेने की मांग के साथ ट्रेड यूनियनों ने 12 सूत्री मांग पात्र जारी किया था. मजदूरों ने जो मुख्य मुद्दे उठाये हैं उनमे: बढ़ती महंगाई पर तुरंत रोक लगाने, श्रम कानूनों के साथ खिलवाड़ बंद करने, 15,000 रुपए न्यूनतम मजदूरी करने, विनिवेश पर रोक लगाने, स्थायी बारहमासी काम में ठेकेदारी का खात्मा करने आदि की मांग शामिल है.

देश के बड़ी हिस्से इस हड़ताल की वजह से जैसे थम गए. रेलवे को छोड़कर ज्यादतर सेवाएँ जैसे बैंक, परिवहन, सीमेंट, टेक्सटाइल, बीमा, डाक, नागरिक उड्डयन और गैस-तेल सप्लाई पूरी तरह से हड़ताल से प्रभावित रहे. सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों व आधे से ज्यादा निजी बैंकों के स्टाफ सरकार द्वारा श्रम कानूनों में ढील बरतने के खिलाफ पूरी तरह से हड़ताल पर गए. संगठित और गैर-संगठित क्षेत्र के मजदूर हड़ताल की अगुवाई कर रहे थे. हड़ताल के लिए इतना अभूतपूर्व समर्थन न केवल मजदूरों बल्कि समाज के अन्य तबकों से भी मिला. यह समर्थन इस बात का खुलासा करता है कि देश में आर्थिक तरक्की का रास्ता बदलने की जरूरत है ताकि गरीब पर मजदूर को इस तरक्की का सहभागी बनाया जा सके. यह अखिल भारतीय हड़ताल सरकार के लिए एक इशारा है कि अब पहले के मुकाबले अपने संघर्षों के लिए ज्यादा ताकत के साथ लामबंद हो रहा है. यह यह भी साबित करता है कि मौजूदा सरकार की नीतियाँ मजदूरों के हक में नहीं हैं. अगर सरकार कॉर्पोरेट के समर्थन वाली इन नीतियों को जारी रखती है और श्रम कानूनों को कमज़ोर बनाना और मजदूरों के अधिकारों को कम करना जारी रखती  है तो भविष्य में और ज्यादा मजदूर इसमें शामिल होंगे.

भोपाल जोकि मध्यप्रदेश की राजधानी है, में सार्वजनिक क्षेत्र की बसें सड़कों पर नहीं उतरी. बैंक और बाज़ार दोनों हो बंद रहे. हड़ताल मुख्य शहरों खासकर जबलपुर, इंदौर व उज्जैन में काफी सफल रही. हड़ताल को गुजरात में भी भारी समर्थन मिला और अहमदबाद, राजकोट, सूरत, वडोदरा आदि अन्य शहरों में बीमा, बैंक और अन्य संस्थान पूरी तरह बंद रहे. हिमाचल प्रदेश में करीब 2000 रोडवेज की बसें सड़कों पर नहीं उतरी. जम्मू व कश्मीर की 20 से ज्यादा ट्रेड यूनियनों ने 24 घंटे का बंद रखा. केन्द्रीय सरकार के उपकर्मों में हड़ताल 100 प्रतिशत रही.मुंबई के बंदरगाह पर काम पूरी तरह ठप्प हो गया था लेकिन कार्गो और परिवहन पर असर आशिक रहा. पश्चिम बंगाल में हड़ताल के दौरान कुछ हिंसक झड़पों की ख़बरें आती रही. उत्तर प्रदेश में भी बस सेवा प्रभावित रही. असम और उड़ीसा में हड़ताल से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. दिल्ली में दफ्तर जाने वाले लोगो को भी बंद का असर झेलना पड़ा क्योंकि ऑटो व टेक्सी हड़ताल पर थे.

 

भारत बंद
हड़ताल
2 सितम्बर
नवउदारवाद
भाजपा
अदानी
नरेन्द्र मोदी
अम्बानी
सीटू

Related Stories

भारत बंद की बंगाल में ज़ोरदार तैयारी, क्या बदलेगा ममता का रवैया?

बिहार के ग्रामीण खेत मज़दूरों का ऐलान : 8 जनवरी 2020 को भारत बंद सफल करेंगे!

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

5 सितम्बर : देश के लोकतांत्रिक आंदोलन के इतिहास में नया अध्याय

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

कोयला आयात घोटाला : अदानी समूह ने राहत पाने के लिए बॉम्बे हाइ कोर्ट का रुख किया

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध


बाकी खबरें

  • kafeel khan
    असद रिज़वी
    बीआरडी अस्पताल मामले में डॉ. कफ़ील खान को योगी सरकार ने किया बर्खास्त
    11 Nov 2021
    “मुझे योगी सरकार से शुरू से ही उम्मीद नहीं थी। मैंने हमेशा से न्यायालय पर भरोसा किया।जब मेरा कोई दोष नहीं है, तो इंसाफ़ आज नहीं तो कल मिलेगा ही मिलेगा।”
  • Kamala Nehru Hospital,
    न्यूज़क्लिक टीम
    कमला नेहरू अस्पताल, भोपाल: हादसे की रात क्या हुआ?
    11 Nov 2021
    भोपाल के सरकारी हमीदिया अस्पताल परिसर के कमला नेहरू अस्पताल में सोमवार को भीषण आग लगने के बाद से अब तक करीब 12 बच्चों की मौत हो गयी हैI
  • covid
    काशिफ़ काकवी
    मप्र : 90,000 से अधिक आशाकर्मियों को नहीं मिला वेतन
    11 Nov 2021
    स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम द्वारा टीकाकरण के लिए आउटसोर्स किये गए सैकड़ों एएनएम कर्मियों और पैरामेडिकल टीकाप्रदाताओं को प्रतिदिन के हिसाब से 500 रूपये का भुगतान किया जाना था। लेकिन वास्तविकता यह है कि…
  • sun
    डेनियल रॉस
    क्या इंसानों को सूर्य से आने वाले प्रकाश की मात्रा में बदलाव करना चाहिए?
    11 Nov 2021
    सूर्य विकरण को तकनीक के ज़रिए प्रबंधित करना संभव है। लेकिन यहां नैतिक और राजनीतिक चिंताएं हैं।
  • Mafia makes poison by mixing pesticides in alcohol
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    शराब में कीटनाशक मिलाकर ज़हरीला बनाते हैं माफ़िया!
    11 Nov 2021
    मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के सकरा इलाके में हुई छापेमारी के दौरान मौके से अधिकारियों को कीटनाशक मिला है जिससे लगता है कि शराब बनाने में इन कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License