NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जयपुर : सिलिकोसिस से पीड़ित मज़दूरों ने किया विरोध प्रदर्शन, दिखाए अपने 'मृत्यु प्रमाण पत्र'
"यह मज़दूर जो हमारे देश का निर्माण कर रहे हैं, जो हमारी बिल्डिंगें बनाते हैं और जिनसे देश का विकास होता है। उन्हें इस विकास की यह सज़ा मिली है, कि उनके हाथ में उन्ही की मौत का प्रमाण पत्र है।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Aug 2018
silikosis

कल राजस्थान के विभिन्न इलाकों से आये सिलिकोसिस के पीड़ित मज़दूरों ने जयपुर के शहीद स्मारक पर एक जनसुनवाई की। इस प्रदर्शन में करीब 1000 मज़दूर मौजूद थे और वह मुआवज़ा समय पर न मिलने के खिलाफ यह प्रदर्शन कर रहे थे। यहाँ पहुँचे मज़दूरों ने सिलिकोसिस होने का प्रमाण पत्र दिखाया और बताया कि यह उनकी मौत का प्रमाण पत्र है। उनका कहना था कि सिलिकोसिस होने का प्रमाण पत्र तो अधिकारीयों से मिल जाता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद मुआवज़ा या तो मिलता ही नहीं या फिर बहुत समय लग जाता है। इस जनसुनवाई का आयोजन मज़दूर किसान शक्ति संगठन, सूचना एवं रोज़गार का अधिकार अभियान और अन्य जन संगठनों ने किया। 

दरअसल सिलिकोसिस एक फेफड़े की बीमारी है जो खदानों, पत्थर तोड़ने की फैक्टरियों, सीमेंट फैक्ट्री के मज़दूरों और मूर्तियाँ बनाने वाले मज़दूरों को बड़े पैमाने पर होती है। इसकी वजह है कि इन सब कामों से निकलने वाली धूल साँस के ज़रिये उनके फेफड़ों में चली जाती है। एक बार हो जाने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है और इससे मौत हो जाती है। देश के सबसे गरीब मज़दूरों में यह बीमारी सबसे ज़्यादा होती है। पहले इस बीमारी को टीबी ही माना जाता था क्योंकि दोनों के लक्षण एक जैसे होते हैं। बीमारी का असर बढ़ने पर साँस लेने में तकलीफ होती है और फिर मरीज़ की मौत हो जाती है। 

मज़दूर किसान शक्ति संगठन के निखिल डे के अनुसार राजस्थान भर में 20000 से 25000 मज़दूर हैं जिनके पास सिलिकोसिस से ग्रसित होने का प्रमाण पत्र है। उन्होंने बताया कि इसके ज़्यादातर मामले राजस्थान के भीलवाड़ा, जोधपुर ,करौली और नागौर ज़िलों से आते हैं। उन्होंने कहा "यह मज़दूर जो हमारे देश का निर्माण कर रहे हैं, जो हमारी बिल्डिंगें बनाते हैं और जिनसे देश का विकास होता है। उन्हें इस विकास की यह सज़ा मिली है, कि उनके हाथ में उन्ही की मौत का प्रमाण पत्र है। "

पहला मुद्दा यह है कि इस बीमारी से बचाव के तरीकों को लागू नहीं किया जा रहा। इससे पहले न्यूज़क्लिक से बात करते हुए जन स्वास्थ्य अभियान के अमूल्या निधि ने कहा था कि बीमारी से बचने के लिए मास्क जैसी बुनियादी सुविधा ज़रूरी है और खनन और पत्थर तोड़ने की जगहों पर पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए , जिससे धूल कम उड़े। लेकिन यह दोनों बनियानी सुविधाएं भी मज़दूरों को नहीं दी जाती हैं। जनसुनवाई में बोलते हुए मज़दूर किसान शक्ति संगठन की अरुणा रॉय ने इस मुद्दे विशेष नीति बनाने की माँग की। 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दोनों ने इन मज़दूरों को मुआवज़ा देने के लिए प्रावधान किया है। लेकिन इसके वावजूद मुआवज़ा पाने की प्रक्रिया ही इतनी लम्बी है कि उन्हें महीनों और सालों तक मुआवज़ा नहीं मिलता। कई बार तो इस प्रक्रिया के बीच में ही लोगों की मौत हो जाती है। 

जन संगठन का प्रतिनिधि मंडल जन सुनवाई के बाद मुख्य सचिव और खनन सचिव से मिला और अपनी माँगे रखी। उन्होंने अगस्त के आखिर में इस मसले में एक बैठक कराई जाएगी। संगठनों की मुख्य मांगे हैं कि सबसे पहले बीमारी से बचाव के लिए बुनियादी सुविधाएँ दी जाएँ , हर पीड़ित मज़दूर को 2 से 3 लाख मुआवज़ा मिले ,प्रमाण पत्र मिलने के 30 दिन के भीतर मुआवज़ा मिले ,मृतकों के परिवार वालों को मुआवज़ा  दिया जाए ,पीड़ितों को हरियाणा की तर्ज़  पर पेंशन मिले। इसके अलावा संगठन यह भी माँग कर रहे हैं कि सिलिकोसिस पर एक विशेष नीति बनाई जाए। 

silicosis
silicosis workers
Rajasthan
MKSS

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...

इतिहास कहता है- ‘’चिंतन शिविर’’ भी नहीं बदल सका कांग्रेस की किस्मत

कांग्रेस चिंता शिविर में सोनिया गांधी ने कहा : गांधीजी के हत्यारों का महिमामंडन हो रहा है!

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

जोधपुर में कर्फ्यू जारी, उपद्रव के आरोप में 97 गिरफ़्तार

राजस्थान में मस्जिद पर भगवा, सांप्रदायिक तनाव की साज़िश!

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

करौली हिंसा पर फैक्ट फाइंडिंग:  संघ-भाजपा पर सुनियोजित ढंग से हिंसा भड़काने का आरोप

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं


बाकी खबरें

  • NEP
    न्यूज़क्लिक टीम
    नई शिक्षा नीति भारत को मध्य युग में ले जाएगी : मनोज झा
    23 Apr 2022
    राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश को उस प्राचीन युग में वापस ले जाएगी जब केवल एक विशेष वर्ग वर्चस्व वाले समाज में एकलव्य को दूर में ही खड़ा होकर…
  • राज वाल्मीकि
    फ़ासीवादी व्यवस्था से टक्कर लेतीं  अजय सिंह की कविताएं
    23 Apr 2022
    अजय सिंह हमारे समय के एक बेबाक और बेख़ौफ़ कवि हैं। शायद यही वजह है कि उनकी कविताएं इतनी सीधे सीधे और साफ़ साफ़ बोलती हैं। इन्हीं कविताओं का नया संग्रह आया है—“यह स्मृति को बचाने का वक़्त है”, जिसका…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    राजनीति की बर्बरता, मेवाणी 'अंदर', फ़ैज़ कविता बाहर
    23 Apr 2022
    देश के अलग-थलग हिस्सो मे अचानक बर्बरता का नंगा नाच क्यो होने लगा ? धर्म और राजनीति का ये कैसा चैहरा है ? इसके अलावा #HafteKiBaat मे मेवाणी की गिरफ्तारी और फ़ैज़ अहमद फैज की कविता को पाठ्यक्रम से…
  • जोए एलेक्जेंड्रा
    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एकता और उम्मीद की राह दिखाते ALBA मूवमेंट्स 
    23 Apr 2022
    सामाजिक आंदोलनों का यह महाद्वीपीय मंच मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करने और अगले दौर को लेकर रणनीतियों को तय करने के लिए अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में अपनी तीसरी महाद्वीपीय सभा का आयोजन करने जा रहा है।
  • रूबी सरकार
    अमित शाह का शाही दौरा और आदिवासी मुद्दे
    23 Apr 2022
    भोपाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बुलाकर मेगा इवेंट किया गया। भोपाल एयरपोर्ट से लेकर भाजपा कार्यालय और जम्बूरी मैदान तक सुरक्षा, सजावट और स्वागत पर करीब 15 करोड़ खर्च किए गए। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License