NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखण्ड: गरीबों के लिये नहीं है “आयुष्मान”
लोगों की बीमारी का इलाज़ किसी बीमा कम्पनी से नहीं बल्कि सहज उपलब्ध चिकित्सक और चिकित्सा–व्यवस्था के जरिये होनी चाहिएI
अनिल अंशुमन
15 Oct 2018
ayushman bharat
Image Courtesy: NDTV

“मेरी मां बहुत बीमार रहती है और मेरे पास आयुष्मान भारत योजना कार्ड भी हैI इसे लेकर मैं राजधानी रांची स्थित एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में सांस–दमा और ह्रदय रोग से पीड़ित मां को दिखाने ले गयीI लेकिन वहाँ फीस के पूरे पैसे लेकर कहा गया कि अभी बेड नहीं हैI प्रधानमन्त्री योजना का कार्ड दिखाने के बावजूद काफी गंभीर स्थिति झेल रही मेरी मां को यह कह कर बेड नहीं दिया गया कि – प्रधानमंत्री की योजना है तो हम क्या करें, हमलोग यहाँ बिजनेस करने आये हैं और अभी जनरल बेड खाली नहीं है…” ये दर्द है राजधानी रांची से सटे तमाड़ प्रखंड से अपनी बीमार मां के इलाज के लिए रांची के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में आयी एनिमा मल्लिक काI जिनकी मां को आक्सीजन देने की सख्त ज़रूरत हैI कानून के पेशे से जुड़ी निम्न आय परिवार वाली अनिमा का कहना है कि “आयुष्मान भारत” योजना प्रचार में जितनी भी चकाचौंध दिखायी जाये ज़मीन पर वह फेल हैI जब हम जैसों के साथ ऐसा व्यवहार है तो सुदूर गांवों से आने वाले गरीब–गुरबों की क्या दुर्दशा होगी यह आसानी से समझा जा सकता हैI  

23 सितम्बर को झारखण्ड की राजधानी रांची स्थित प्रभात तारा मैदान में करोड़ों–करोड़ खर्चे से आयोजित सरकारी समारोह में मोदी जी ने दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी जन हितकारी आरोग्य योजना बताकर “आयुष्मान भारत” जन स्वास्थ्य योजना की शुरुआत कीI बड़े-से-बड़े अस्पतालों में हर आम गरीब व्यक्ति को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दिए जाने की गारंटी की घोषणा करते हुए कहा कि ‘इससे बिहार और झारखण्ड राज्य का भविष्य ‘स्वस्थ’ होगा’I मंच से इस योजना से लाखों परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा दिए जाने की भी घोषणा की गयी थीI लेकिन दूसरे ही दिन अखबारों में प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू की गयी इस योजना की बड़े–बड़े समाचार पत्रों में यह भी खबर छपी कि ‘मोदी जी, कैसे आयुष्मान होगा मुन्ना मुंडा?’ क्योंकि जिस समय आयुष्मान भारत योजना का उद्घाटन हो रहा था उसी समय में राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स की इमरजेंसी में सुबह से ही भर्ती हुए गरीब आदिवासी मज़दूर मुन्ना मुंडा जो नाक से लगातार खून आने के कारण तड़प रहा था, तीन घंटे तक उसे बेड ही नहीं मिलाI काफी दौड़ धूप के बाद जब बेड मिला तो सही इलाज़ नहीं हो सकाI डाक्टरों–कर्मचारियों का रवैया देखकर मरने से पहले ही मुन्ना ने अपनी पत्नी व बेटे से कह दिया कि – यहाँ वो ज़िंदा नहीं बचेगाI हुआ भी यही, उधर प्रधानमंत्री जी ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना शुरू करने की घोषणा की और इधर समय पर उचित इलाज के अभाव में मुन्ना मुंडा चल बसाI

आयुष्मान योजना वास्तव में किसके फायदे के लिए लायी गयी है, इसकी असलीयत तब और उभरकर कर आयी जब राज्य की प्रधान स्वास्थ्य सचिव को मीडिया से ये कहना पड़ गया कि निःशुल्क इलाज के लिए सूचीबद्ध चिकित्सा संस्थानों में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद डाक्टर और दलालतन्त्र द्वारा मरीजों को इलाज़ के लिए भारी रकम देने के लिये मजबूर किया जा रहा हैI लेकिन तब भी सरकार व मंत्री–नेता हर दिन यही ढोल पीट रहे हैं कि आयुष्मान लाकर उनके प्रधान मंत्री जी ने गरीबों का स्वास्थ्य संकट दूर कर दिया हैI जबकि ज़मीनी हकीक़त ये सामने आ रही है कि कई जगहों पर यह योजना तो कुछ ही दिन पहले आई है और ‘इस कार्ड में तो बैलेंस ही नहीं है’ जैसी बातें कहकर मरीजों व उनके परिजनों से भारी रक़म वसूलकर खुलेआम उन्हें तंग और तबाह किया जा रहा हैI वहीं विपक्ष का कहना है कि इसमें कुछ भी नया नहीं है क्योंकि गरीबों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए जो “राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना” पहले ही से श्रम विभाग के तहत संचालित हो रही थी, उसे ही नाम बदलकर अब स्वास्थ्य विभाग के जरिये चलाया जा रहा हैI 

स्थितियाँ बता रहीं हैं कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा घोषित अन्य सभी योजनाओं की भांति आयुष्मान योजना का भी अंततोगत्वा वही हश्र होना है कि प्रचार जनहित का और लाभ कहीं और जाएगाI बातें उठ रही हैं कि लोगों कि बीमारी का इलाज़ किसी बीमा कम्पनी से नहीं बल्कि सहज उपलब्ध चिकित्सक और चिकित्सा–व्यवस्था के जरिये होनी चाहिएI

ayushman bharat
Ayushman Bharat Health Insurance
health sector in India
Public Health Care
Modi Govt

Related Stories

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

मोदी सरकार 'पंचतीर्थ' के बहाने अंबेडकर की विचारधारा पर हमला कर रही है

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा

ज्ञानवापी, ताज, क़ुतुब पर बहस? महंगाई-बेरोज़गारी से क्यों भटकाया जा रहा ?

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन का एक साल: जश्न के साथ नई चुनौतियों के लिए तैयार
    26 Nov 2021
    दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन को आज एक साल पूरा हो गया। 26 नवंबर 2020 को शुरू हुआ यह आंदोलन आज अहम मोड़ पर है। पहली जीत के तौर पर यह आंदोलन तीनों कृषि क़ानूनों को वापस करा चुका है और अब दूसरी बड़ी…
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों ने Mr. PM को पढ़ाया संविधान का पाठ
    26 Nov 2021
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने दिल्ली की सरहद टिकरी बॉर्डर पर बैठीं किसान औरतों और मर्दों के साथ-साथ नेताओं से बात करके यह जानने की कोशिश की कि आखिर मोदी की घोषणा पर उन्हें क्यो नहीं…
  • sex ratio
    अजय कुमार
    1000 मर्दों पर 1020 औरतों से जुड़ी ख़ुशी की ख़बरें सच की पूंछ पकड़कर झूठ का प्रसार करने जैसी हैं!
    26 Nov 2021
    औरतों की संख्या मर्दों से ज़्यादा है - यह बात NFHS से नहीं बल्कि जनगणना से पता चलेगी।
  • up police
    विजय विनीत
    जंगलराज: प्रयागराज के गोहरी गांव में दलित परिवार के चार लोगों की नृशंस हत्या
    26 Nov 2021
    दलित उत्पीड़न में यूपी, देश में अव्वल होता जा रहा है और इस सरकार में दलितों व कमजोरों को न्याय मिलना दूर की कौड़ी हो गया है। यदि प्रयागराज पुलिस ने दलित परिवार की शिकायत पर कार्रवाई की होती और सवर्ण…
  • kisan andolan
    मुकुंद झा
    किसान आंदोलन के एक साल बाद भी नहीं थके किसान, वही ऊर्जा और हौसले बरक़रार 
    26 Nov 2021
    26 नवंबर 2020 को दिल्ली की सीमाओं से शुरू हुए किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर टिकरी, सिंघू और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर हज़ारों की संख्या में किसान पहुंचे और आंदोलन को अन्य मांगों के साथ जारी रखने का अहम…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License