NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
झारखंड: ज़मीन किसानों की, सहयोग सरकार का और मुनाफ़ा कंपनी का!
झारखंड में अडानी की कंपनी को 'सेज़–सत्ता' सौंप दी गई है। बेदख़ल किए गए आदिवासी-किसानों का आज भी कहना है कि, "हमने ज़मीन दी ही नहीं, फिर कैसे हमारी ज़मीनों का अधिग्रहण कर लिया गया! हमें हमारी ज़मीन चाहिए, मुआवजा नहीं !"
अनिल अंशुमन
11 Mar 2019
adani power plant

"विकास" का नारा वर्तमान सरकार का किस तरह से सिर्फ़ निजी कॉरपोरेट कंपनियों के फ़ायदे के लिए इस्तेमाल कर आम लोगों को महज़ जुमला सुना दिया जा रहा है, झारखंड प्रदेश इसकी सफ़ल प्रयोगभूमि है। जिसका ताज़ा उदाहरण है गोड्डा अडानी कंपनी को पूरे राजकीय सहयोग के साथ 'सेज़' का विशेषाधिकार दिया जाना। तेज़ विकास के नारे के साथ प्रदेश की सरकार अपना पूरा लाव लश्कर लेकर अडानी कंपनी के पावर प्रोजेक्ट को जमाने–टिकाने में जुटी हुई है। मज़े की बात है कि विकास के इस प्रोजेक्ट से निकलने वाली सारी बिजली सीधे बांग्लादेश भेजी जाएगी। जिसका एक भी पैसा न तो इस प्रदेश को और ना ही देश को मिलेगा बल्कि पूरी आमदनी अडानी जी की तिजोरी की शोभा बढ़ाएगी। जबकि इस प्रदेश में बिजली संकट की बदहाल हालत को देखकर कोई नयी इंडस्ट्री यहाँ आना ही नहीं चाहती है। बिजली के टैरिफ़ में सरकार द्वारा आए दिन की जा रही बढ़ोत्तरी से आम जन के तंग तबाह होने के साथ-साथ कई पुरानी कंपनियाँ या तो बंद हो चुकी हैं अथवा बंदी के कगार पर हैं। तब भी सरकार की मेहरबानी से राज्य में बनने वाली इस विद्युत परियोजना का कोई लाभ इस प्रदेश को नहीं मिलने वाला।  
बहरहाल, विकास के नाम पर 3 मार्च को झारखंड सरकार ने 'बोर्ड ऑफ़ अप्रूवल' कमेटी से गोड्डा स्थित अडानी कंपनी के पावर प्रोजेक्ट को 'सेज़'  का विशेषाधिकार देने के लिए राज्य की विशेष ऊर्जा नीति तक को बदल दिया। जिसके तहत यह नियम था कि प्रदेश में बननेवाली किसी भी विद्युत परियोजना से 25% बिजली राज्य को देनी होगी। साथ ही राज्य सरकार के सभी तरह के टैक्सों से पूरी छूट तथा सिंगल विंडो क्लियरेंस समेत कई विशेष सुविधाएं दी गई हैं। इस परियोजना से प्रदेश को प्रतिवर्ष होने वाली 294 करोड़ की राजस्व हानि को लेकर झारखंड महालेखाकार द्वारा उठाए गए सवाल को पूरी तरह से दबा दिया गया। प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक सैकड़ों हेक्टेयर बहुफ़सली ज़मीनें यहाँ के रैयत किसानों-आदिवासियों से कंपनी कारिंदों और पुलिस के बल के ज़रिये छीनी जा चुकी हैं। अपनी ज़मीनें जबरन अधिग्रहण किए जाने का विरोध करने वाले आदिवासीयों को 'विकास-विरोधी' क़रार देकर संगीन फ़र्जी मुक़दमे थोप दिये गए हैं। स्थिति तो ऐसी बना दी गयी है कि हर जगह फैले कंपनी के लठैतों व पुलिस के डर से आज किसी भी मनमानी के ख़िलाफ़ बोलने की कोई हिम्मत भी नहीं जुटा पाता है। सरकार का दावा है कि इस विकास और राष्ट्रहित वाले प्रोजेक्ट से इस क्षेत्र के लोगों के लिए रोज़गार की असीम संभावनाओं के द्वार खुल जाएँगे। 

uqinltcwgd-1528772252.jpeg

चर्चा यह भी है कि जब देश की सत्ता संभालने के तुरंत बाद माननीय प्रधानमंत्री जी सकल विश्व परिक्रमा कर रहे थे तो उसी दौरे में बांग्लादेश जाकर इस प्रोजेक्ट को लगवाने की पहल की थी। बाद में उनके बुलावे पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के भारत आगमन पर इस प्रोजेक्ट को फ़ाइनल रूप दिया गया। अभी हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी झारखंड आगमन हुआ था। जिसमें उन्होंने पूर्व निर्धारित योजना के तहत सीधे गोड्डा पहुँचकर तथाकथित शक्तिकेंद्र कार्यकर्त्ता सम्मेलन के संबोधन में इस प्रोजेक्ट की तारीफ़ करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने संताल के विकास पर फ़ोकस किया है। उधर चर्चा ये है कि यह दौरा कार्यकत्ताओं को 2019 के चुनावी टिप्स देने के लिए था। असली मक़सद इस पावर प्रोजेक्ट के निर्माण व प्रगति तथा अन्य सभी ज़रूरतों की व्यवस्था सुनिश्चित करना था। 
देश के प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों के संबोधनों में 'प्रदूषण रहित सस्ती ऊर्जा' की बात हमेशा दोहराई जाती है। बावजूद इसके उनकी ही सरकार द्वारा ऐसे प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देकर इससे होने वाले भयावह प्रदूषण को सुनिश्चित कर दिया गया है। यही नहीं, दुनिया में ऊर्जा से संबन्धित बड़ी परियोजनाओं के आर्थिक-सामाजिक मापदण्डों का अध्ययन करने वाली इंस्टीच्यूट फ़ोर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फ़ाइनेंशियल एनालिसिस ( IEEAFA) के सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस पावर प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए ख़तरनाक बताये जाने को भी कोई महत्व नहीं दिया गया। उस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह प्रोजेक्ट काफ़ी महंगा होगा क्योंकि इसके लिए कोयला आस्ट्रेलिया स्थित अडानी की बदहाल हो चुकी कोयला कंपनी से मंगाकर उसकी स्थिति सुधारी जाएगी। जिसका ख़ामियाज़ा झारखंड प्रदेश के राजस्व को भी उठाना पड़ेगा और फ़ायदा सिर्फ़ अडानी कंपनी को ही होगा। ऐसे सारे तर्कों-तथ्यों और ग्रामीण ग़रीबों की फ़रियाद को धता बताकर आज सरकार ख़ुद कंपनी मालिक के लठैत की भूमिका में खड़ी हो गयी है। कंपनी को ज़मीन उपलब्ध कराने के लिए प्रोजेक्ट प्रस्तावित क्षेत्र के मोतियो, माली और गायघाट समेत कई गावों के आदिवासी व किसान परिवारों को लाठी-बंदूक के बल पर बेदख़ल कर दिया। मीडिया से यह झूठा प्रचार भी कराया गया कि सबकी सहमति से ही ज़मीनें ली गयी हैं और उसका पूरा मुआवज़ा भी दे दिया गया है। बेदख़ल किए गए आदिवासी-किसानों का आज भी कहना है कि, "हमने ज़मीन दी ही नहीं, फिर कैसे हमारी ज़मीनों का अधिग्रहण कर लिया गया! हमें हमारी ज़मीन चाहिए, मुआवजा नहीं !" 

प्रदेश के बहुसंख्यक लोगों में आज यह सवाल हर तरफ़ से उठ रहा है- "यह विकास किसके लिए हो रहा है? ज़मीन हमारी, लेकिन यहाँ बनने वाले मंगल डैम का पानी दूसरे राज्य को? पावर प्रोजेक्ट यहाँ, और इसकी बिजली दूसरे देश को!" निस्संदेह ये सारे सवाल वास्तविक जवाब के हक़दार हैं जिसे अनदेखा किया जाना जनता के वास्तविक विकास से विश्वासघात ही कहा जाएगा। 
 

Jharkhand power plant
Jharkhand Adani Project
Adani Power
jharkhand tribals
jharkhand farmers
India
Bangladesh

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध

वर्ष 2030 तक हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होगी

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

वित्त मंत्री जी आप बिल्कुल गलत हैं! महंगाई की मार ग़रीबों पर पड़ती है, अमीरों पर नहीं

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ

प्रेस फ्रीडम सूचकांक में भारत 150वे स्थान पर क्यों पहुंचा

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान


बाकी खबरें

  • election
    लाल बहादुर सिंह
    पक्ष-प्रतिपक्ष: चुनाव नतीजे निराशाजनक ज़रूर हैं, पर निराशावाद का कोई कारण नहीं है
    16 Mar 2022
    UP के चुनाव का ज़ोरदार झटका शायद उन सभी विपक्षी राजनीतिक ताकतों को जो अपना अस्तित्व बचाना और भाजपा को हराना चाहती हैं, उन्हें 24 की लड़ाई को अधिक गम्भीरता से जीवन-मरण का संग्राम बनाकर लड़ने के लिए…
  • bhagwant mann
    भाषा
    भगवंत मान ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की
    16 Mar 2022
    पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने राज्य के शहीद भगत सिंह (एसबीएस) नगर जिले में महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मान को पद एवं गोपनीयता की…
  • रौनक छाबड़ा
    दिल्ली: संसद सत्र के बीच स्कीम वर्कर्स का प्रदर्शन, नियमितीकरण और बजट आवंटन में वृद्धि की मांग
    16 Mar 2022
    इस प्रदर्शन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, मध्याह्न भोजन (मिड डे मिल) कार्यकर्ता और आशाकर्मी  शामिल थीं। इन सभी ने कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में इन सभी योजनाओ के लिए "बजट आवंटन में…
  • protest
    मंजीत सिंह पटेल
    क्या हैं पुरानी पेंशन बहाली के रास्ते में अड़चनें?
    16 Mar 2022
    समस्या यह है कि नई पेंशन योजना सेवा के वर्षों से कोई इत्तेफाक नहीं रखती है बल्कि यह कार्पस बेस्ड है यानी जितना फंड NPS अकाउंट में होगा उसी हिसाब से पेंशन।
  • ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंटों ने तिरुवनंतपुरम में शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    अभिवाद
    ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंटों ने तिरुवनंतपुरम में शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    16 Mar 2022
    डिलीवरी एजेंटों ने ज़ोमैटो फ़ूड एग्रीगेटर के प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि बिना किसी अतिरिक्त लाभ के उन्हें फ़ुल टाइम काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License