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झारखंड: मॉब लिंचिंग के आरोपियों को हिरासत से छुड़ाने के लिए भीड़ ने किया थाने का घेराव
झारखंड के खूंटी जिले में भीड़ ने गोकशी के संदेह में शारीरिक रूप से अक्षम एक व्यक्ति की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी जबकि दो अन्य को बुरी तरह से घायल कर दिया।
सोनिया यादव
23 Sep 2019
mob lynching
Image courtesy:Caravan Daily

झारखंड में एक बार फिर हिंसक भीड़ द्वारा एक व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डालने की खबर सुर्खियों में है। ताजा मामला गत रविवार को खूंटी जिले से सामने आया है। यहां हिंसक भीड़ ने गोकशी के संदेह में एक शारीरिक रूप से अक्षम आदिवासी व्यक्ति की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी जबकि दो अन्य को बुरी तरह से घायल कर दिया है।

पुलिस द्वारा आरोपियों को हिरासत में लिए जाने के बाद एक हैरान कर देने वाली बात देखने को मिली। ग्रामीणों ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग को लेकर कार्रा पुलिस थाने का घेराव किया। जिसके बाद उप संभागीय पुलिस अधिकारी रुषभ ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि निर्दोष पाए जाने पर उन लोगों को छोड़ दिया जाएगा, तब जाकर कहीं थाने का घेराव खत्म हुआ।

जलतांगा गांव की इस घटना में मारे गए शख्स की पहचान कालांतस बारला के रूप में की गई है। इस वारदात की पुष्टि करते हुए डीआईजी अमोल वेनुकट होमकर ने पीटीआई भाषा को बताया कि इस संबंध में पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है और शुरुआती जांच में घटना में उनकी लिप्तता सामने आई है। पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है।

वेनुकट के अनुसार घटनास्थल की जांच में पुलिस को वहां से मृत गाय नहीं मिली लेकिन भीड़ द्वारा लोगों को पीटने के सबूत जरूर मिले हैं। उन्होंने आगे बताया कि अब तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।

एक स्थानीय निवासी ने न्यूज़क्लिक को बताया, 'गांव के सुवारी नाला के पास रविवार सुबह ज़िले के कुछ लोगों ने इन तीन लोगों को कथित तौर पर प्रतिबंधित मांस बेचते देखा। जिसके बाद कई गांवों के लोग इकट्ठे होकर इन्हें मारने लगे। बाद में शायद किसी ने पुलिस को इसकी सूचना दी। फिर मौक़े पर पहुंची पुलिस ने उन्हें भीड़ से छुड़ाया और अस्पताल ले गए।'

न्यूज़क्लिक को एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि पुलिस द्वारा तीनों घायलों को पहले कर्रा अस्पताल लाया गया था। जिसके बाद डॉक्टरों ने तीनों को रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज़ (रिम्स) रेफ़र कर दिया। रिम्स ले जाने के कुछ ही देर बाद इन में से एक की मौत हो गई।

कुछ स्थानीय लोगों के मुताबिक मृतक बालरा गोपालपुर गांव के निवासी थे। वे अपनी बहन के गांव सुवारी आए थे। बाकी के दोनों घायल कर्रा थाना इलाके के ही रहने वाले हैं।

जलातंगा के निवासी जगदीश सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया है, 'अभी गांव में शांति का माहौल है, हालांकि रविवार को स्थिति तनावपूर्ण थी।' उन्होनें बताया कि पुलिस लोगों से पूछताछ कर रही है।

खबरों के अनुसार ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि भीड़ द्वारा पीटे गए तीनों लोग प्रतिबंधित मांस बेच रहे थे और इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

इस घटना में घायल फागु कच्छप ने मीडिया को बताया कि उन लोगों पर लगे गोहत्या के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने जानवर को बांधने जा रहे थे, तभी लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और पीटने लगे।

फागु ने आगे कहा कि इस घटना के मृतक और दूसरे साथी भी सुवारी नाले में नहाने गए थे, मांस बेचने या ख़रीदने नहीं।

गौरतलब है कि सितंबर महीने में ही झारखंड के अलग-अलग इलाकों में भीड़ द्वारा पीटे जाने से संबंधित तीन घटनाओं की पुलिस रिपोर्ट दर्ज करायी गई है।

वहीं, बीते तीन सालों के आंकड़ें देखें तो प्रदेश में गौहत्या और बच्चा चोरी के शक में 21 लोगों की मौत हिंसक भीड़ के हाथों हुई है। वहीं, कालाजादू और डायन बयासी के संदेह में 90 लोग भीड़ का शिकार बने हैं।

ये बिडंबना ही है कि एक ओर जहां झारखंड पुलिस इन दिनों मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ लोगों को जागरूक करने के कार्यक्रम चला रही है वहीं, तरह की घटना निश्चित ही प्रदेश की भाजपा सरकार के प्रशासन को सवालों के कठघरे में खड़ा करती है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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