NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
किस तरह झरिया में कोयला खनन पहुँचा रहा है पर्यावरण और इंसानों को नुक्सान
झरिया जल्द ही इतिहास की किताबों में जगह बनाएगा I इसकी किस्मत में मौत है I
तारिक़ अनवर
04 Jan 2018
coal mines

भारत के  सबसे बड़े कोयला मैदान झरिया में  भूमि के नीचे आग की लपटें सतह पर दिखाई पड़ने लगी हैं I यहाँ उच्चतम गुणवत्ता का कोयला मिलता है I  ऐसा पिछले दशकों  से  होना शुरू हुआ है क्योंकि यहाँ ओपन-कास्ट खनन (सतह पर होने वाला खनन) की शुरुआत हुई I इसकी वजह से  यहाँ की जनता के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हुआ I

हजारों लोगों ज़हरीली गैस से जूझ रहे हैं और बस्तियों की बस्तियाँ बर्बाद हो गयीं I आखिर इस मानव और  पर्यावरण त्रासदी के पीछे क्या वजह है?

झरिया कोलफील्ड बचाओ समिति के सचिव अशोक अगरवाल ने बताया कि ओपन-कास्ट खनन  इसीलिए किया जा रहा है कि खनन के समय और लागत कम हो सके I उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि “यहाँ पहले से ही भूमिगत खनन किया जा रहा था I बहुत-सीअनुत्पादक  खानों को ढंग से बंद किये बिना छोड़ दिया गया I वहाँ बहुत सारी सुरंगे थीं जो पहले खनन करने वालों ने कोयला निकालने के लिए बनायी थीं I इन सुरंगों में काफी  कोयला बचा हुआ था I जब इनजगहों पर ओपन-कास्ट खनन  शुरू हुआ  तो उन सुरंगों के मुँह खोल दिये गये जहाँ पहले खनन हुआ करता था I इसके परिणामस्वरुप  ऑक्सीज़न के संपर्क में आने से  कम इग्नीशन तापमान की वजह से और आग लगने के दूसरे कारणों की वजह से बचे हुए कोयले में आग लग गयी I अक्सर ये ज़मीन के काफी नीचे होता था इसीलिए इस आग को  दबाना मुश्किल होता था और  आशा की जाती थी कि बचा हुआ कोयला खुद ही जलकर ख़तम हो जाये” I

झरिया भारत में एकलौती खदान है जहाँ अत्यंत ज्वलंतशील खाना पकाने में प्रयुक्त होने वाला कोयला पाया जाता है I यहाँ हर तरफ कोयला है I इस इलाके में रहने वाले एक खनन इंजिनियर ने कहा “ पेशेवर तरीके से खनन करने के लिए सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है और सुरक्षा नियमों का पालन होता है I पर गैर-कानूनी तरीके से खनन करने वाले लोग ज्वलंतशील गैसों से भरी खदानों में मोमबत्ती  या लालटेन लेकर चले जाते हैं जिससे स्तिथि और ख़राब हो जाती है I”

इसके नतीजे भयावह होते हैं I आग की वजह से पर्यावरण और स्वास्थ दोनों के लिए समस्याएँ खड़ी होती हैं I इसने पानी, हवा और ज़मीन तीनों को दूषित कर दिया है I यहाँ की ज़्यादातर जगहों के पेड़ और वनस्पतियाँ मरते जा रहे हैं I

एक स्थानीय अस्पताल के डॉक्टर मंसूर आलम  ने न्यूज़क्लिक को बताया “कार्बन मोनोऑक्साइड,आरसेनिक और सल्फर डाईऑक्साइड जैसी ज़हरिली गैसों के ज़मीन से निकलने की वजह से झरिया के आस-पास टीबी , अस्बेस्टोसिस ( फेफड़ों की एक बीमारी जो धूलभरी हवा में साँस लेने की वजह से होती है, आमतौर पर यह बीमारी काम की जगह के ख़राब पर्यावरण से जुड़ी होती है) और व्हीज़िंग ( साँस लेते समय सीटी की आवाज़े आना  ) के यहाँ काफी सारे मामले  पाए जाते हैं I हमारे पास चिकत्ते और त्वचा रोग की शिकायत करने वाले भी काफी रोगी आते हैंI”

ओपन-कास्ट खनन  के दौरान ज़मीन में डायनामाइट और गनपाउडर से विस्फ़ोट कर   गड्ढा  कर  कोयला निकाला जाता है I उन्होंने कहा “इसकी वजह से धूल और विषैले पदार्थ भारी मात्रा में फ़ैल जाते हैं I इससे लोगों की सेहत पर काफी ख़राब प्रभाव पड़ता है I सेहत पर खतरनाक प्रभाव पड़ने के बावजूद  सरकार के लिए कोयले से आय पैदा करने वालों  के बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी है I उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए कोई ख़ास कदम  उठाये जाने चाहिए I

झरिया कोयला खदान 450 स्क्वेयर किलोमीटर में फैली हुई है और इस इलाके से 5 लाख लोगों की ज़िंदगियाँ जुड़ी हुई हैं I 67 विभिन्न इलाकों में ज़मीन के नीचे अब भी आग जल रही है I काफी जगहों पर तो ज़मीन के कुछ मीटर नीचे कोयला 700 डिग्री के तापमान पर लगातार जल रहा है, गहराई की वजह से कई  इंसानी कोशिशों बावजूद उसे बुझाया नहीं जा सका है I

अग्रवाल का कहना है “आग लगातार फैलाती जा रही है I हमें उसके विस्तार का पता नहीं है I झरिया जल्द ही इतिहास की किताबों में जगह बनाएगा I इसकी किस्मत में मौत है I जिस तरह से BBCL आगे बढ़ रहा है ,उन्हें 2020 तक उत्पाद को दोगुना करना है I ज़ाहिर है कि यहाँ  ज़्यादा-से-ज़्यादा खनन किया जायेगा और इससे और भी ज़्यादा गाँववालों को यहाँ से हटाना होगा I जिससे एक दिन  यह जगह गायब हो जाएगी I  इसमें अब ज़्यादा समय नहीं बचाI”

jhariya coal mine
environment degradation
BCCL

Related Stories

तमिलनाडु: नागापट्टिनम में पेट्रोकेमिकल संयंत्र की मंजूरी का किसानों ने किया विरोध

उत्तराखंड: विकास के नाम पर 16 घरों पर चला दिया बुलडोजर, ग्रामीणों ने कहा- नहीं चाहिए ऐसा ‘विकास’

पर्यावरणीय पहलुओं को अनदेखा कर, विकास के विनाश के बोझ तले दबती पहाड़ों की रानी मसूरी

अगर पेड़ों पर जीवन टिका है तो एक पेड़ की कीमत ₹75 हज़ार से ज़्यादा तय होने पर खलबली क्यों नहीं?

कोयला खदानों की नीलामी और मज़दूर विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ तीन दिन की हड़ताल का व्यापक असर

पृथ्वी दिवस: वैज्ञानिकों ने चिंता जताई

उत्तराखंड: गुप्ता परिवार की शादियों से पर्यावरण को हुए नुकसान पर हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगी

जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं!

भौंरा गोलीकांड : निजी कोलियरी के दौर की दबंगई की वापसी

कोयलांचल में बढ़ रहा पर्यावरणीय संकट


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License