NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
किसान लॉन्ग मार्च 2.0 : "हर बुरी ज़िद का इलाज है एक अच्छी ज़िद ”
जब किसानों ने यह मार्च करने का ठाना तो सरकार ने सभी हथकंडे अपनाकर इस मार्च को रोकने का प्रयास किया लेकिन किसनों ने भी जिद्द ठानी थी कि वो सरकार की वादाखिलाफी को उजागर करने और सरकार के धोखे के खिलाफ मार्च करेंगे | अंत में सरकार को पीछे हटना पड़ा और कल रात को किसान नासिक में एकत्र हुए और आज सुबह मुंबई के लिए मार्च किया |
मुकुंद झा
21 Feb 2019
Kisan Long March 2.0

 63 वर्षीय, सिंधी राम पवार, अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के लाल  झंडे के साथ इस मार्च में चल रही है । वह शांत है लेकिन गुस्से में है।वह कहती हैं  "हम पिछले साल  सरकार के आश्वाशन के बाद चले गए थे लेकिन सरकार ने हमें धोखा दिया। इस साल, हम तब तक नहीं जाएँगे जब तक सरकार हमारे भूमि आवंटन के कागजात पर हस्ताक्षर नहीं करती है," सिंधी  मालेगाँव तहसील, नासिक के अस्तेन गाँव से हैं, और यहाँ किसान लांग मार्च 2.0 में भाग लेने के लिए आई  हैं। वह कहती हैं "हमारे पास खेतों में काम करने का कोई विकल्प नहीं है। मेरे दोनों बेटे सतारा, पुणे (पश्चिमी महाराष्ट्र) में गन्ना काटने वाले श्रमिक के रूप में काम करने जाते हैं। मैं, मेरे साथ हमारे गाँव की बूढ़ी महिलाओं के साथ, इस लॉन्ग मार्च में बहुत सारे लोग पहुँचे हैं।

AIKS 1.JPG

नवसु देवजी थापद (68) जेवर तहसील, पालघर के झाप गांव से  इस मार्च में आए हैं। वह पहली बार किसान लांग मार्च में शामिल हुए हैं। नवसु ने  कहा कि "पिछले साल वो मार्च के समय ठीक नहीं थे। लेकिन इस साल, हम अपनी जमीन के लिए इस लड़ाई को जीतेंगे,"। जब हम उनसे बात कर रहे थे  तो हम साफतौर पर उनकी उम्मीदें उनकी आँखों में भी देख रहे थे। 

हालांकि, नवसु के नजदीकी  तहसील मोखदा की एक और महिला, 62 वर्षीय- जानकी दिवा नंगारे, जिन्होंने पिछले साल मार्च में भाग लिया था, वह सरकार के रैवये से नाराज़ थीं। वह कुरजे गांव से है। उसने पूछा, "पिछले साल हम एक सप्ताह पैदल  चले थे। इस सरकार ने हम से वादा किया था कि वे हमें हमारी जमीन के कागजात देंगे। लेकिन उन्होंने हमें धोखा दिया है। हम क्या करेंगे? हम अपनी जमीन से चावल कब खाएंगे?"

Capture_5.JPGजब न्यूज़क्लिक ने नासिक  से मुंबई किसान लॉन्ग मार्च में शमिल  होने आए  किसानों  से बात कि तो ये कुछ प्रतिक्रियाएं हैं जो किसानों  ने हमसे बताई ।जितने भी किसान इस मार्च में आये थे सभी ने सरकार को सबक सीखना का मन बनाया है| उनका कहना था कि , "इस बार, हम वन अधिकारियों द्वारा अपने जमीन के कागज़ पर हस्ताक्षर किए बिना इस विरोध को बंद नहीं करेंगे।"

यह प्रतिक्रिया स्वाभविक है क्योंकी इन किसानों की भूमि एकमात्र आजीविका विकल्प है और वह भी कागज पर उनका नहीं है। ये किसान दशकों से जमीन पर अलग-अलग फसलें उगाते रहे हैं, लेकिन ये जमीन पार्सल वन विभाग या स्थानीय मंदिर ट्रस्टों की है या गायों की (चरागाह) भूमि है। अपने  नाम पर आवंटित भूमि को प्राप्त करने के लिए, इन किसानों ने पिछले साल 6 मार्च से 12 मार्च 2018 तक 180 किमी तक नंगे पैर यात्रा की थी जिसने, देश की अंतर-आत्मा  को हिला दिया। अंत में सरकार को झुकाना पड़ा था लेकिन सरकार ने उन्हें एक बार फिर धोखा दिया |

Despite @Dev_Fadnavis efforts to derail the @KisanSabha KisanLongMarch2.0 by stopping 1000's, sending @girishdmahajan to negotiate their broken promises, the farmers March starts. #KisansMarchAgain #KisanLongMarch pic.twitter.com/OKS2h3w0CA

— Newsclick (@newsclickin) February 21, 2019

"हर बुरी जिद का इलाज है एक अच्छी जिद। जिद करो और तो दुनिया बदलेगी।" यह कहावत इस मार्च के सन्दर्भ में बिल्कुल सटीक है। किसी भी गलत बात या विचार को मिटाने का सही तरीका है कि सही राह पकड़ने की जिद कर लो, कामयाबी निश्चित ही मिलेगी। ऐसा ही हुआ जब किसानों ने इस मार्च करने का ठाना  तो सरकार ने सभी हथकंडे अपनाकर इस मार्च को रोकने का प्रयास किया लेकिन किसानो ने भी जिद्द ठानी थी कि वो सरकार के वादाखिलाफी को उजागर करने और सरकार के धोखे के खिलाफ मार्च करेंगे | अंत में सरकार को पीछे हटाना पड़ा और कल रात को किसान नासिक में एकत्र हुए और आज सुबह मुंबई के लिए मार्च किया |

लेकिन सरकार अभी उनके मार्च को रोकने का प्रयास करेगी , हमारे एक सतही ने बताया कि विल्लोली गाँव नासिक मुंबई हाईवे पर पुलिस ने किसानो को रोकने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल वाटर टेंकर के साथ ही सैकड़ो बैरिकेट के साथ तैयार है , लेकिन लागत नहीं  किसानो को इसका कोई भय है | सरकार भी इन किसानों  को रोक पाएगी ऐसा संभव नही दिख रहा है |

#Farmers gathered for @KisanSabha LongMarch2.0 pay homage to the jawans who lost their lives in Pulvama.
These jawans who die, are the sons of these farmers. @ameytirodkar @t_d_h_nair @vijayprashad @abhisar_sharma @MajChowdhury @waglenikhil#KisanMarchesAgain #KisanLongMarch pic.twitter.com/snzhvAZkQO

— Newsclick (@newsclickin) February 20, 2019

 

किसान जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं।

स मार्च को रोकने के लिए सरकार पहले से ही अपने घुटनों पर दिख रही है। देवेन्द्र फडणवीस की सरकार ने किसानों के मार्च को रोकने के  अपना पूरा प्रशासनिक ताम-झाम झोंक दिया। बुधवार को नासिक जाने के रास्ते में हज़ारों की संख्या में किसानो को रोककर, अजीत नवाले और अन्य अखिल भारतीय किसान सभा नेताओं को गिरफ्तार करने की कोशिश करने के बावजूद भी यह लॉन्ग मार्च 2.0 नासिक से मुंबई की ओर बढ़ रहा है. अखिल भारतीय किसान सभा के नेताओं का साफतौर पर कहना है , पिछली बार की तरह धोखा नहीं समाधान चाहिए।  

Kisan Long March
nasik
Maharashtra Farmers
marathwada
Nasik Farmers
Devendra Fadnavis Government
Devendra Fadnavis
Kisan Long March 2.0

Related Stories

महाराष्ट्र: फडणवीस के खिलाफ याचिकाएं दाखिल करने वाले वकील के आवास पर ईडी का छापा

महाराष्ट्र में अचानक भड़की सांप्रदायिक हिंसा चुनावी साज़िश है या ठाकरे सरकार की नाकामी

किसानों ने बनारसियों से पूछा- तुमने कैसा सांसद चुना है?

महाराष्ट्र : किसानों के बढ़े बिजली बिलों से आती 'घोटाले' की बू

महाराष्ट्र : दूध की गिरती क़ीमतों के ख़िलाफ़ प्रदेश भर में प्रदर्शन करेंगे किसान

कोविड-19: पहुँच से बाहर रेमडेसिवीर और महाराष्ट्र में होती दुर्गति

महाराष्ट्र रेमडेसिवीर मामला : भाजपा पर उठे गंभीर सवाल?

उत्तर महाराष्ट्र के प्याज़ वाले इलाकों में ओले पड़े, 500 करोड़ के भारी नुकसान का अनुमान

आज़ाद मैदान की चेतावनी : मांगें पूरी न हुईं तो और तीखा किया जाएगा आंदोलन

भीमा कोरेगांव : भुला दी गई दलित युवा की मौत


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License