NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
कोई मोदी लहर नहीं, लेकिन क्या वापसी होगी?
जबकि 2014 की तरह मोदी के भाषण उतने प्रभावी नहीं हैं, लेकिन विपक्ष ने भी कोई ठोस विकल्प पेश नहीं किया है। इसलिए, अंतिम फैसले के बाद नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
निखिल वाग्ले
16 Apr 2019
Translated by महेश कुमार
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: Hindustan

बेहराम कॉन्ट्रैक्टर, उर्फ बिजीबी, एक पथ प्रदर्शक (ट्रेंडसेटर) एडिटर और बॉम्बे के लोकप्रिय स्तंभकार (मुम्बई नहीं), हर सप्ताह के अंत में अपने बिना सोचे समझे विचारों और टिप्पणियों (अपने स्वयं के काम!) को व्यक्त करते थे। इस सप्ताह मैं उनका अनुकरण करने की कोशिश करूंगा और मैं चुनाव से पहले के अपने कुछ विचारों, टिप्पणियों और गणनाओं लिखुंगा। मेरे अपना काम!

2019 चुनाव के बारे में मेरे ये 19 विचार हैं:

  1. इस चुनाव में 2014, 1989, 1977 या भारत में किसी भी 'लोकप्रिय' चुनाव की तुलना में उत्साह का काफी अभाव है। मीडिया कवरेज पर मत जाओ। पत्रकारों को अपनी पत्रकारिता, वित्तीय और राजनीतिक हितों को धयान में रखने के कारण एक निश्चित तरीके से रिपोर्ट करना होता है। पार्टी कार्यकर्ता या मतदाता 2014 की तरह उत्साहित नहीं हैं। संभवत: ऐसा इसलिए है क्योंकि विपक्ष ने सरकार के सामने कोई ठोस विकल्प पेश नहीं किया है या मतदाताओं ने पहले ही अपने मत का फैसला कर लिया है। चुनाव प्रचार उनके लिए सिर्फ एक रस्म है। मेरे आकलन में, 2014 की तुलना में मतदान कम रहेगा।
  2. मैंने इस चुनाव में किसी भी तरह की ‘लहर’ का अनुभव नहीं किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं का दावा है कि शांत नरेंद्र मोदी लहर है, लेकिन यह उनके प्रचार का हिस्सा है। मोदी अभी भी लोकप्रिय हैं, लेकिन 2014 के मुकाबले कम हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की छवि में काफी सुधार हुआ है, लेकिन मोदी को पछाड़ने की स्थिति अभी नहीं है।
  3. चुनाव प्रचार के मामले में मोदी हर नेता से आगे निकल जाते हैं। उनकी ऊर्जा अद्वितीय है। वह हर दिन दो से तीन बैठकें संबोधित करते हैं। लेकिन 2014 की तरह उनके भाषण उतने प्रभावी नहीं हैं। दोहराते ज्यादा हैं। उनके भाषण पहले की तुलना में उकताने वाले हैं, भीड़ को प्रेरित करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ रही है।
  4. अगर आप दक्षिण भारत का दौरा करेंगे तो पाएंगे कि कर्नाटक को छोड़कर, लोगों को मोदी या भाजपा में कोई दिलचस्पी नहीं है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को उनकी या उनकी पार्टी की ज़रूरत नहीं है। इस क्षेत्र में 124 सीटें हैं। पिछली बार, बीजेपी ने कर्नाटक में 28 में से 17 सीटें जीती थीं, लेकिन आज उसे कांग्रेस-जनता दल-सेक्युलर गठबंधन से एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारत के इस हिस्से में बीजेपी का रुझान कम हो सकता है।
  5. पूर्वी भारत में, मोदी की भाजपा ने पिछले पाँच वर्षों में इन क्षेत्रों में घुसपैठ की है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के अपने गढ़ को संभाले हुए हैं और बीजू जनता दल के नवीन पटनायक 29 साल की सत्ता के बाद भी हालत संभालने के लिए ठीक स्थिति में हैं। असम में, बीजेपी को नागरिक विधेयक का खामियाजा भुगतना पड सकता है और एक बैकलैश का सामना कर सकती है। इस क्षेत्र से 77 लोकसभा सीटें आती हैं।
  6. बीजेपी ने पूर्वोत्तर में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को तोड़ने की पुरजोर कोशिश की थी। लेकिन नागरिक विधेयक के खिलाफ जनता के आंदोलन ने भाजपा को परेशानी में डाल दिया है। यहां भी कोई मोदी लहर नहीं है।
  7. जम्मू-कश्मीर मोदी की पार्टी की रातों की नींद हराम कर रहा है। जम्मू भाजपा का गढ़ है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में, वे लोगों की नाराजगी को दूर करने में विफल रहे हैं। कश्मीरियों के लिए यह सबसे बुरा समय है। उनके लिए मोदी ने अपना वादा तोड़ा है। जम्मू-कश्मीर से छह सीटें हैं।
  8. मोदी और भाजपा का सबसे बड़ा गढ़ उत्तर भारत है। 2014 में, भाजपा को मिले ऐतिहासिक बहुमत (282) की ज्यादातर सीटें इस बेल्ट से आईं थी। इस गाय बेल्ट में 222 सीटें आती हैं, जिनमें से भाजपा को 176 सीटें मिली थीं। पार्टी भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में हार का सामना कर सकती है। समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी-राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन ने मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। बीजेपी ने यहा 2014 में 80 में से 71 सीटों पर कब्जा जमाया था। राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि इस बार बीजेपी की गिनती 35-40 तक नीचे आ  सकती हैं। इस राज्य में मोदी की लोकप्रियता बरकरार है। लेकिन विपक्षी एकता ने मोदी लहर का मुकाबला किया है।
  9. कांग्रेस ने दिसंबर 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में निर्णायक जीत हासिल की थी। क्या वह लोकसभा चुनाव में अपनी सफलता दोहरा सकती है या नहीं। 2014 के लोकसभा चुनावों में, भाजपा ने इन तीन राज्यों में 65 में से 62 सीटें जीती थीं। चुनावविदों ने अनुमान लगाया है कि अगर विधानसभा की तरह ही मत पड़े तो उन आंकड़ों के अनुसार लोकसभा चुनाव में भाजपा यहां 40 सीट नीचे आ सकती है। लेकिन सर्वेक्षण कांग्रेस के लिए एक निराशाजनक तस्वीर दिखाते हैं। बेशक, मोदी लहर का कोई निशान नहीं है। पंजाब में स्थिति, कांग्रेस पार्टी के अमरिंदर सिंह के पूरी तरह से नियंत्रण में हैं।
  10. पिछली बार मोदी के साथ पश्चिमी भारत मज़बूती से खड़ा था। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा में 76 सीटें हैं, जिनमें से भाजपा ने 2014 में 69 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। इस तथ्य के बावजूद कि उनकी सीटें नीचे जानी हैं, भाजपा 60 प्रतिशत सीटों की रक्षा कर सकती है क्योंकि स्थानीय कांग्रेस मशीनरी और नेताओं में उत्साह की कमी है। दरअसल, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मोदी सरकार के खिलाफ गुस्सा अपने चरम पर है। यह वह क्षेत्र है जहां पिछले पांच वर्षों में अधिकांश किसान आत्महत्याएं हुईं। लोग मोदी से नाराज़ हैं क्योंकि मोदी ने उनके साथ धोखा किया जब 2014 में किसानों के साथ ‘चाय पे चर्चा’करते हुए उन्हे स्वर्ग का वादा किया था। लेकिन विपक्ष की सफलता उनकी एकता और अभियान पर निर्भर करती है।
  11. दिल्ली में, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच वोटों के विभाजन के कारण भाजपा सभी सात सीटें जीत सकती है।
  12. प्रणय रॉय की नई किताब 'द वर्डिक्ट' के अनुसार, महिला मतदाता इस चुनाव में पुरुषों से आगे निकल जाएंगी। 1962 में, पुरुषों और महिलाओं के बीच 20 प्रतिशत का अंतर था, लेकिन हाल के विधानसभा चुनावों में, महिलाओं ने पुरुषों के 70 प्रतिशत के मुकाबले 71 प्रतिशत मतदान किया था। कोई भी राजनीतिक दल अब महिलाओं की अनदेखी नहीं कर सकता है।
  13. अंतिम विश्लेषण में, भाजपा अपना बहुमत खो सकती है और 220-225 सीटों पर सिमट सकती है। मोदी को इस स्थिति में सहयोगियों और क्षेत्रीय दलों से समर्थन की आवश्यकता होगी, जो उन्हें कमजोर बना देगा।
  14. 23 मई को चुनाव के अंतिम फैसले के बाद नए राजनीतिक समीकरण उभरेंगे। क्षेत्रीय नेता सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों में एक प्रमुख भूमिका निभाएंगे। यह भारत के संघीय ढांचे के लिए बेहतर होगा यदि इसे अच्छी तरह से संतुलित किया जाता है।
  15. चुनाव आयोग ने इस चुनाव में एक चौंकाने वाली भूमिका निभाई है। आदर्श आचार संहिता को ठीक से लागू नहीं किया गया। मोदी और उनकी पार्टी ने इसका फायदा उठाया और अवैध या अनैतिक नमो टीवी को आगे बढ़ाया। मोदी ने अपने अभियान में पुलवामा-बालाकोट का खुलकर इस्तेमाल किया और लोगों से सेना के बलिदान के लिए वोट करने की अपील की। देश के इतिहास में कोई भी प्रधानमंत्री इस स्तर तक नहीं गया है। लेकिन चुनाव आयोग इसे नियंत्रित करने में विफल रहा। 1952 के बाद चुनाव आयोग की विश्वसनीयता में यह सबसे बड़ी सेंध है।
  16. इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्रिंट की तुलना में इस सीजन में शक्तिशाली बने हुए हैं। जहां तक नवाचार और प्रौद्योगिकी का संबंध है, हम 2014 के चुनाव से एक कदम आगे बढ़ गए हैं।
  17. यदि भारत 2004 की तरह वोट करता है तो ये भविष्यवाणियां और गणना पूरी तरह से गलत हो सकती हैं। हर सर्वेक्षण ने अटल बिहारी वाजपेयी और उनके ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान के लिए एक शानदार जीत की भविष्यवाणी की थी, लेकिन तब सबसे शक्तिशाली मतदाताओं ने तालिकाओं को उल्टा कर दिया।
  18. मुझे ऐसे परिणाम की आशा है, जो भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने की रक्षा करेगा। क्योंकि अहंकारी, उन्मादी और तानाशाह को दूसरा मौका नहीं मिलना चाहिए।
  19. आइए हम पूरी स्थिति पर पैनी नज़र रखें और भारतीय लोकतंत्र के लिए प्रार्थना करें।
2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha Polls
nikhil wagle
Narendra modi
No Modi Wave
observations

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल मॉडल ऑफ़ गवर्नेंस से लेकर पंजाब के नए राजनीतिक युग तक

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!


बाकी खबरें

  • corona
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,778 नए मामले, 62 मरीज़ों की मौत
    23 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.05 फ़ीसदी यानी 23 हज़ार 87 हो गयी है।
  • moon
    संदीपन तालुकदार
    चीनी मिशन में इकट्ठा किये गये चंद्रमा के चट्टानों से शोध और नये निष्कर्षों को मिल रही रफ़्तार
    23 Mar 2022
    इस परिष्कृत चीनी चंद्र मिशन ने चीन और उसके बाहर दोनों ही जगहों पर पृथ्वी या उसके वायुमंडल से बाहर के चट्टानों पर शोध किया है। जानकार उम्मीद जता रहे हैं कि इससे हमें सौर मंडल के बारे में नयी-नयी…
  • bhagat singh
    हर्षवर्धन
    जाति के सवाल पर भगत सिंह के विचार
    23 Mar 2022
    भगत सिंह के जाति व्यवस्था के आलोचना के केंद्र में पुनर्जन्म और कर्म का सिद्धांत है। उनके अनुसार इन दोनों सिद्धांतों का काम जाति व्यवस्था से हो रहे भीषण अत्याचार के कारण उत्पन्न होने वाले आक्रोश और…
  • bhagat singh
    लाल बहादुर सिंह
    भगत सिंह की फ़ोटो नहीं, उनके विचार और जीवन-मूल्यों पर ज़ोर देना ज़रूरी
    23 Mar 2022
    शहादत दिवस पर विशेष: भगत सिंह चाहते थे कि आज़ाद भारत में सत्ता किसानों-मजदूरों के हाथ में हो, पर आज देश को कम्पनियां चला रही हैं, यह बात समाज में सबसे पिछड़े माने जाने वाले किसान भी अपने आन्दोलन के…
  • भाषा
    साल 2021 में दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी थी : रिपोर्ट
    22 Mar 2022
    साल 2021 में वैश्विक स्तर पर वायु गुणवत्ता की स्थिति बयां करने वाली यह रिपोर्ट 117 देशों के 6,475 शहरों की आबोहवा में पीएम-2.5 सूक्ष्म कणों की मौजूदगी से जुड़े डेटा पर आधारित है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License